15/12/2011

भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले हाथ बंधे

आनन्द राय
लखनऊ, 11 दिसंबर : भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अन्ना हजारे के आंदोलन को लेकर पूरा देश उद्वेलित है, लेकिन सूबे की सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले हाथ बांध दिए हैं। भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) ने एलडीए, केडीए और स्वास्थ्य समेत विभिन्न विभागों के भ्रष्टाचार की 35 फाइलें सरकार के पास भेजकर खुली जांच की अनुमति मांगी है पर सरकार इनको दबाए बैठी है।

एसीओ, सीबीसीआइडी व विजिलेंस को खुली जांच की अनुमति सरकार देती है। सूत्रों के मुताबिक एसीओ ने विभिन्न विभागों की शिकायतों, अभिसूचना संकलन और सर्वेक्षण के आधार पर खुली जांच के लिए इस वर्ष 35 फाइलें तैयार कीं। साल बीतने को है मगर सरकार की ओर से केवल 12 मामलों की खुली जांच की अनुमति मिल सकी है। बताते हैं कि एसीओ व सरकार के बीच सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। बीते दिनों उच्चाधिकारियों की एक बैठक हुई जिसमें एसीओ के महानिदेशक अतुल भी शामिल हुए। इस बैठक में एसीओ की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हुए और एक शीर्ष अधिकारी ने दायरे में रहने तक की नसीहत दे डाली। एसीओ के बारे में बैठक में कहा गया कि वह सरकार के संज्ञान में मामला डाले बिना अपनी रिपोर्ट भेजते हैं, जबकि विजिलेंस और सीबीसीआइडी के लोग सभी सूचनाएं मुहैया कराते हैं। एसीओकी ओर से कहा गया कि जब किसी मामले में मुकदमा दर्ज हो जाता तो पूरा मामला एसीओ व कोर्ट के बीच हो जाता है। सूत्रों के अनुसार एसीओ के महानिदेशक के अधिकार क्षेत्र को लेकर सरकारी तंत्र विचार-विमर्श कर रहा है और खबर यह भी है कि विजिलेंस एक्ट की तरह इस संगठन में भी कुछ बदलाव की भूमिका बन रही है। नजर डालें तो वर्ष 2010 में करीब 300 मामलों की जांच, विवेचना और सूचनाओं का सत्यापन एसीयू ने किया है। इस साल एसीओ अभी तक 230 मामलों की ही जांच, विवेचना और सूचनाओं का सत्यापन कर सका है। अभी इनके पास 160 मामले लंबित हैं, जिसमें शासन की ओर से दी गई 12 जांचें भी शामिल हैं। बताते हैं कि 1977 के एक शासनादेश के तहत यह व्यवस्था दी गई कि किसी विभाग का प्रमुख सचिव और यहां तक कि जिलाधिकारी भी एसीओ को जांच दे सकता है, लेकिन मौजूदा समय में सब कुछ पहरे में है!

छद्म नामों से संपत्ति बनाई बाबू ने!

लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : आप भले ही पूर्व मंत्री व एमएलसी बाबू सिंह कुशवाहा को बस इसी नाम से जानते हों, लेकिन उनका एक नाम राम चरन कुशवाहा भी है। इतना ही नहीं उनकी पत्नी का नाम सुकन्या के साथ ही शिवकन्या देवी भी है। लोकायुक्त ने कुशवाहा के मंत्री पद का दुरुपयोग कर इन नामों से खरीदी गई अकूत संपत्ति संबंधी दो और शिकायतों को पंजीकृत कर जांच कराने का फैसला किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को सूचना भेजने के साथ ही कुशवाहा से 26 दिसंबर तक जवाब तलब किया गया है।
झांसी के अरविंद कुमार सोनी की बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ की गई शिकायत पर अभी जांच चल ही रही थी कि शिव पूजन सिंह कछवाह, अरुण देव द्विवेदी तथा कुलदीप सिंह ने भी पूर्व मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया कि शिव पूजन व अरुण देव द्विवेदी की शिकायत में पहले के आरोप तो हैं ही, कई नए आरोप भी हैं। आरोपों के संबंध में करीब एक हजार पेज के दस्तावेज भी दिए गए हैं। कहा गया है कि बाबू सिंह व राम चरन कुशवाहा एक ही व्यक्ति है। उनकी पत्नी सुकन्या व शिव कन्या देवी भी एक ही महिला। निर्वाचन पर्चे में तो बाबू सिंह कुशवाहा नाम लिखा गया है लेकिन पिता स्व. भागवत प्रसाद के अभिलेखों में एक मात्र राम चरन कुशवाहा को ही पुत्र बताया गया है। हाई स्कूल की अंक तालिका में भी राम चरन नाम है। मतदाता सूची में भी यही नाम लिखा है। यह भी कहा गया है कि बाबू सिंह की बीए की डिग्री भी फर्जी है। बीते माह अरविंद सोनी ने कुशवाहा पर मंत्री पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। कहा गया था कि मंत्री बनने से पहले उनके पास मात्र कुछ बीघा जमीन थी, लेकिन अब उनके सगे-संबंधियों के नाम से करोड़ों की संपत्ति है। कुशवाहा ने खनिकर्म मंत्री रहते बांदा-महोबा, चित्रकूट-हमीरपुर जिले में जमीन के खनन पट्टे परिवारिक सदस्यों के साथ ही कुछ खास लोगों को आवंटित किया है। बांदा में मेसर्स श्रीनाथ प्रापर्टीज, पिता के नाम भागवत प्रसाद एजुकेशनल वेलफेयर ट्रस्ट व पत्नी सुकन्या कुशवाहा के नाम तथागत शिक्षास्थली बनाकर उसमें करोड़ों रुपये का कालाधन लगाया गया है।

आरोपों के संबंध में कैबिनेट सचिव, विधान परिषद सचिव व भारत निर्वाचन आयोग से जानकारी हासिल करने की भी बात कही गई है। लोकायुक्त ने बताया कि दोनों नई शिकायतों को भी पंजीकृत कर उनमें दिए गए तथ्यों की भी अब जांच कराने का निर्णय किया है।

(अब करीबी अफसरों पर नजर- पेज 9)

एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ के निशाने पर पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के कई करीबी अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें पैकफेड के अभियंता से लेकर आइएएस अधिकारी तक शामिल हैं। सीबीआइ बहुत जल्द इनकी भी पड़ताल शुरू करेगी।


सूबे में वर्ष 2005 से 2011 तक के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने जांच में उनका भी ब्योरा हासिल किया है, जिनकी इस घोटाले में भूमिका रही। अब तक दर्जन भर ठेकेदारों व आपूर्तिकर्ताओं से हुई पूछताछ में इनका नाम सामने आया है। सीबीआइ ने ठेकदारों से जब उनको काम मिलने के साथ ही अन्य पहलुओं तथा पेमेंट की बाबत पूछताछ की तो तो माननीयों के साथ आइएएस अधिकारी और अभियंताओं का नाम सामने आया। सीबीआइ ने अभिसूचना संकलन में भी खास लोगों की भूमिका की जानकारी हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने तो कमीशन खाने में रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बताते हैं उन्होंने छोटे-छोटे ठेकेदारों को काम दिया, लेकिन इतना भारी कमीशन लिया कि उन्हें कुछ बचा ही नहीं। यह एक दूसरे पूर्व मंत्री के कृपा पात्र थ!

नजर अब कुशवाहा के करीबी अफसरों पर

लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ के निशाने पर पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के कई करीबी अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें पैकफेड के अभियंता से लेकर आइएएस अधिकारी तक शामिल हैं। सीबीआइ बहुत जल्द इनकी भी पड़ताल शुरू करेगी।
सूबे में वर्ष 2005 से 2011 तक के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने जांच में उनका भी ब्योरा हासिल किया है, जिनकी इस घोटाले में भूमिका रही। अब तक दर्जन भर ठेकेदारों व आपूर्तिकर्ताओं से हुई पूछताछ में इनका नाम सामने आया है। सीबीआइ ने ठेकदारों से जब उनको काम मिलने के साथ ही अन्य पहलुओं तथा पेमेंट की बाबत पूछताछ की तो तो माननीयों के साथ आइएएस अधिकारी और अभियंताओं का नाम सामने आया। सीबीआइ ने अभिसूचना संकलन में भी खास लोगों की भूमिका की जानकारी हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने तो कमीशन खाने में रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बताते हैं उन्होंने छोटे-छोटे ठेकेदारों को काम दिया, लेकिन इतना भारी कमीशन लिया कि उन्हें कुछ बचा ही नहीं। यह एक दूसरे पूर्व मंत्री के कृपा पात्र थे।

छद्म नामों से संपत्ति बनाई बाबू ने
लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : आप भले ही पूर्व मंत्री व एमएलसी बाबू सिंह कुशवाहा को बस इसी नाम से जानते हों, लेकिन उनका एक नाम राम चरन कुशवाहा भी है। इतना ही नहीं उनकी पत्नी का नाम सुकन्या के साथ ही शिवकन्या देवी भी है। लोकायुक्त ने कुशवाहा के मंत्री पद का दुरुपयोग कर इन नामों से खरीदी गई अकूत संपत्ति संबंधी दो और शिकायतों को पंजीकृत कर जांच कराने का फैसला किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को सूचना भेजने के साथ ही कुशवाहा से 26 दिसंबर तक जवाब तलब किया गया है।

झांसी के अरविंद कुमार सोनी की बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ की गई शिकायत पर अभी जांच चल ही रही थी कि शिव पूजन सिंह कछवाह, अरुण देव द्विवेदी तथा कुलदीप सिंह ने भी पूर्व मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया कि शिव पूजन व अरुण देव द्विवेदी की शिकायत में पहले के आरोप तो हैं ही, कई नए आरोप भी हैं। आरोपों के संबंध में करीब एक हजार पेज के दस्तावेज भी दिए गए हैं। कहा गया है कि बाबू सिंह व राम चरन कुशवाहा एक ही व्यक्ति है। उनकी पत्नी सुकन्या व शिव कन्या देवी भी एक ही महिला। निर्वाचन पर्चे में तो बाबू सिंह कुशवाहा नाम लिखा गया है लेकिन पिता स्व. भागवत प्रसाद के अभिलेखों में एक मात्र राम चरन कुशवाहा को ही पुत्र बताया गया है। हाई स्कूल की अंक तालिका में भी राम चरन नाम है। मतदाता सूची में भी यही नाम लिखा है। यह भी कहा गया है कि बाबू सिंह की बीए की डिग्री भी फर्जी है। बीते माह अरविंद सोनी ने कुशवाहा पर मंत्री पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। कहा गया था कि मंत्री बनने से पहले उनके पास मात्र कुछ बीघा जमीन थी, लेकिन अब उनके सगे-संबंधियों के नाम से करोड़ों की संपत्ति है। कुशवाहा ने खनिकर्म मंत्री रहते बांदा-महोबा, चित्रकूट-हमीरपुर जिले में जमीन के खनन पट्टे परिवारिक सदस्यों के साथ ही कुछ खास लोगों को आवंटित किया है। बांदा में मेसर्स श्रीनाथ प्रापर्टीज, पिता के नाम भागवत प्रसाद एजुकेशनल वेलफेयर ट्रस्ट व पत्नी सुकन्या कुशवाहा के नाम तथागत शिक्षास्थली बनाकर उसमें करोड़ों रुपये का कालाधन लगाया गया है।

आरोपों के संबंध में कैबिनेट सचिव, विधान परिषद सचिव व भारत निर्वाचन आयोग से जानकारी हासिल करने की भी बात कही गई है। लोकायुक्त ने बताया कि दोनों नई शिकायतों को भी पंजीकृत कर उनमें दिए गए तथ्यों की भी अब जांच कराने का निर्णय किया है।

















सीबीआइ के सर्विलांस पर माननीय और नौकरशाह

आनन्द राय
लखनऊ, 13 दिसंबर : यूपी में एनआरएचएम घोटाला और डबल सीएमओ मर्डर की जांच में जुटी सीबीआइ तह तक पहंुचने की हर मुमकिन कोशिश में जुटी है। उसके सर्विलांस पर सूबे के 40 प्रमुख लोग हैं। इनमें जनप्रतिनिधि, अफसर और सरकार के कुछ खास दिग्गज शामिल हैं। सीबीआइ को इससे कई अहम सूचनाएं हासिल हो रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में सीबीआइ की एक स्पेशल यूनिट पिछले चार महीने से प्रदेश सरकार के चार मंत्रियों, दो पूर्व मंत्रियों, दर्जन भर विधायक, सांसद, कई आइएएस और स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों का फोन हर दिन रिकार्ड कर रही है। बताते हैं कि सीबीआइ की यह कार्यशैली कुछ लोगों को पता चल गयी है। इससे वे सावधान हो गये हैं, लेकिन शुरुआती दौर में कई अहम चीजें सीबीआइ को फोन टेप के जरिए ही पता चली हैं। इनमें सरकार के एक चर्चित नौकरशाह की बातें भी हैं, जिसमें एक पूर्व मंत्री द्वारा सीएमओ की पोस्टिंग में भारी पैसा खाने की बात है। शुरुआती दौर में सचान के सुसाइड नोट के बारे में भी सीबीआइ को ऐसे ही जानकारी मिली थी। सीबीआइ के पास कई महत्वपूर्ण सूचनाएं हैं, जिन्हें सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

इस संवाददाता से बातचीत में एक सांसद ने बताया कि उनको चार माह से पता है कि सीबीआइ उनका फोन टेप कर रही है। किसी शिकायत की बजाय वह अपने फोन पर सारी बातचीत कर रहे हैं और चाह रहे हैं कि सीबीआइ उनकी बात सुने और सच जाने। सीबीआइ 40 नहीं, 200 लोगों का फोन टेप कर रही है। इस दहशत में कई लोगों ने अपना फोन इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। जांच के दायरे में आये एक विधायक काफी समय से अपने साथ मोबाइल फोन नहीं रखते। वे बातचीत करने के लिए दूसरों का फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। सीबीआइ चिह्नित लोगों का लोकेशन जानने से लेकर उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखे है।

(नपेंगे खरीद और निर्माण की हेराफेरी करने वाले- पेज 9)

लखनऊ, 13 दिसंबर (जाब्यू) : राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के घोटाले की जांच में सीबीआइ खरीद और निर्माण की हेराफेरी करने वालों पर केंद्रित हो गई है। महराजगंज जिले में स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद स्टेशनरी की दुकान से किए जाने का मामला सामने आने के बाद सीबीआइ को अंदेशा है कि जिलों में कुछ हेरफेर के साथ एक ही तरह का गोरखधंधा किया गया है। टीम बनाकर खरीददार और विक्रेता का भौतिक सत्यापन शुरू हो गया है। निर्माण एजेंसियों की गड़बड़ी भी सीबीआइ जांच में सामने आ रही है। इन सभी के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर कार्रवाई की तैयारी हो रही है। मदद करने वालों को सरकारी गवाह बनाने पर भी सीबीआइ विचार कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ मुख्यालय से आए अतिरिक्त निदेशक सलीम अली ने मंगलवार को समीक्षा के दौरान यह हिदायत दी कि अभिलेखों की पड़ताल के दौरान क्रय करने वाली फर्म और विक्रेता की जांच अवश्य करें और प्रमाणिक सबूत मिलने के साथ ही विधिक कार्रवाई शुरू करें। अधिकारियों ने कहा कि टीम इसी दिशा में काम कर रही है, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से जांच कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने इस घोटाले में शामिल बड़े लोगों, अधिकारियों और ठेकेदारों को चिन्हित कर उनसे प्रारंभिक पूछताछ का भी निर्देश दिया। पहले चरण की बैठक के बाद शाम को सलीम अली दिल्ली चले गए।

सूत्रों के मुताबिक दूसरे चरण की बैठक में सीबीआइ मुख्यालय से आए डीआइजी सतीश गोलचा, नीरजा गोत्रू, एसपी एमसी साहनी, देहरादून एसीबी के एसपी नीलाभ किशोर और लखनऊ एससीबी के एसपी एसके खरे समेत कई अधिकारियों ने एनआरएचएम घोटाला, डबल सीएमओ मर्डर और जिला कारागार में डिप्टी सीएमओ डॉ.वाइएस सचान की रहस्यमयी मौत की जांच की समीक्षा की और सभी घटनाओं की आपस में जुड़ रही कडि़यों पर फोकस किया। अधिकारियों ने समय से जांच पूरा करने और अब तक मिले सबूतों का एक बार फिर सत्यापन करने की भी नसीहत दी। जांच टीमों ने अपनी दिक्कतें भी बताई।

चुनाव में मुसीबत बनेंगे अवैध असलहे

आनन्द राय
लखनऊ, 12 दिसंबर : सूबे में बड़े पैमाने पर अवैध असलहों की खेप उतारी जा रही है। इसमें बिहार के देशी तथा इटली और यूएसए के बने असलहे भी शामिल हैं। खबर है कि 2012 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे दबंग किस्म के लोग ये असलहे खरीद रहे हैं। अभिसूचना संकलन में बराबर इसकी आमद की खबर मिल रही है, लेकिन असली संचालकों तक पुलिस के हाथ नहीं पहंुच रहे हैं। इससे सरकार की नींद उड़ी है, क्योंकि चुनाव आयोग ने असलहा रखने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। इन दिनों असलहों की बरामदगी पर पुलिस का जोर है।

अभी तक बिहार के मुंगेर जैसे इलाकों में बने कंट्री मेड असलहों की आपूर्ति हो रही थी, लेकिन बीते कुछ दिनों में अत्याधुनिक अवैध असलहों की बरामदगी ने नए नेटवर्क का राजफाश किया है। अब नेपाल और इंदौर से भी अवैध असलहे लाए जा रहे हैं। इस महीने मेरठ पुलिस ने छह असलहा तस्करों को गिरफ्तार कर इटली और यूएसए की बनी 32 बोर की छह पिस्टल बरामद कीं। मुजफ्फरनगर में भी इटली की छह और यूएसए निर्मित चार पिस्टल के साथ एक अभियुक्त गिरफ्तार किया गया। उसने बताया कि नेपाल से लाकर वह मुजफ्फरनगर, बागपत और मेरठ में असलहे बेचता है। मथुरा पुलिस ने मध्यप्रदेश के इंदौर से असलहा लाकर बेचने वाले गिरोह के चार सदस्यों को असलहों के साथ पकड़ा।

खरीदारों तक नहीं पहंुच रहे हाथ : आए दिन किसी न किसी जिले की पुलिस तस्करी में लगे कैरियरों को पकड़ती है और उनका चालान कर देती है। छूटने के बाद वे फिर धंधे में लग जाते हैं, लेकिन पुलिस न असली संचालक और न ही असली खरीदार तक पहंुच पाती है। चुनाव के दौरान होने वाली हिंसक घटनाओं पर गौर करें तो ज्यादातर मामलों में अवैध असलहों का ही प्रयोग होता है। इस बात से पुलिस महकमा भली भांति परिचित है।

कैसे मिलते हैं कारतूस : सबसे बड़ा सवाल असलहों के लिए मिलने वाले कारतूस का है। अवैध असलहे तो कहीं बन सकते हैं, लेकिन कारतूस तो वैध फैक्टि्रयों में ही बनते हैं। पिछली घटनाओं पर नजर डालें तो पुलिसकर्मियों और शस्त्र विक्रेताओं ने ही अवैध तरीके से कारतूस मुहैया कराया है।

गौर करें 2004 में मिर्जापुर के पीएसी शस्त्रागार के हेड कांस्टेबल ने 99589 कारतूस गायब किए थे। 2008 में गोरखपुर, रामपुर, बस्ती और बलिया समेत कई जिलों में शस्त्रागारों से कारतूस गायब होने का खेल उजागर हुआ और कई आरमोरर पकड़े गए। पिछले साल एसटीएफ ने लखनऊ के मोहनलालगंज से हिमाचल प्रदेश के लाइसेंसी शस्त्र विक्रेता मनवीर कैथू और रामप्रताप भदौरिया को गिरफ्तार किया तो पता चला कि कारोबार की जड़ पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश और हिमाचल तक जुड़ी है।
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अब पुलिस भी रखेगी चुनावी खर्च का ब्योरा


लखनऊ, 12 दिसंबर (जाब्यू) : इस बार के चुनाव में पुलिस पर कानून व्यवस्था पर नियंत्रण के साथ ही प्रत्याशियों के चुनावी खर्च पर भी नजर रखने की जिम्मेदारी होगी। अधिक से अधिक सूचनाएं हासिल करने के लिए चुनाव आयोग इनकी मदद लेगा। आयोग ने प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में जरूरी निर्देश दे दिए हैं। वे जिलों में तैनात अधिकारियों को इस नई भूमिका के बारे में 14 दिसंबर को बैठक बुलाकर समझाएंगे। 23 दिसंबर को लखनऊ में कार्यशाला का आयोजन भी होगा ताकि सभी विभागों में समन्वय बना रहे।

आयोग का मानना है कि पुलिस को स्थानीय समझ अधिक होती है, इसलिए वे कहां कौन प्रत्याशी किसे प्रलोभन दे रहा है, इस बारे में सहजता से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग उनकी इसी क्षमता का लाभ उठाना चाहता है। शासन के सूत्रों के अनुसार मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने पिछले दिनों पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें इस बाबत जानकारी दे दी है। कहा है कि हर विधानसभा क्षेत्र में पुलिस के बड़े अफसरों से लेकर सिपाही तक की मदद ली जाए। पुलिसकर्मियों को यह पता करना होगा कि प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में कितनी गाडि़यां लगी हैं, कितने कार्यकर्ता किस प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं, प्रतिदिन किस प्रत्याशी और उसके समर्थकों ने कहां-कहां पर चुनावी सभाएं की, जनसम्पर्क के दौरान प्रत्याशी एवं उसके समर्थक कहां-कहां और किन किन वाहनों से गए, किस प्रत्याशी ने क्षेत्र में कहां-कहां कुल कितने पोस्टर-बैनर आदि लगवाए, किस प्रत्याशी ने मोटरसाइकिल या कार रैली निकाल कर प्रचार किया और किस प्रत्याशी ने अपने क्षेत्र में कंबल, साड़ी, अनाज आदि बांटा। पुलिस यह सूचनाएं निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक को देगी।

14 दिसंबर को जिलों में तैनात एएसपी को आयोग की अपेक्षा से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद सभी पुलिस कप्तानों तथा रेंज आइजी एवं डीआइजी को इसकी जानकारी दी जायेगी। पुलिसकर्मियों को अवैध शराब एवं शस्त्र आदि की धरपकड़ के लिए क्षेत्र में अभियान चलाने के भी निर्देश दिए जाएंगे।

जांच को लेकर मुश्किल में सीबीआइ


आनन्द राय

लखनऊ, 8 दिसंबर : डिप्टी सीएमओ डाक्टर वाइएस सचान की रहस्यमय मौत की जांच कर रही सीबीआइ की मुश्किलें अब तक मिले सबूतों और साक्ष्यों ने बढ़ा दी हैं। सचान के सुसाइड नोट की छाया प्रति सीबीआइ को आत्महत्या की बात सोचने पर मजबूर कर रही है, वहीं परिस्थितियां और घटनास्थल के साक्ष्य हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। इस दुविधा में सीबीआइ दोराहे पर आकर खड़ी हो गई है और उसे जांच को गति देने के लिए कोई नया सिरा नहीं मिल रहा है। फिर भी सीबीआइ को भरोसा है कि वह तय समय में इसका राजफाश कर देगी।

राजधानी के डबल सीएमओ मर्डर और एनआरएचएम घोटाले के आरोपी डाक्टर सचान की लाश 22 जून को लखनऊ जिला कारागार के शौचालय में पाई गई। तब जेल प्रशासन और पुलिस ने कहा कि सचान ने आत्महत्या की है। उनके पास से सुसाइड नोट भी मिला, लेकिन जब रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर हंगामा शुरू हुआ तो सुसाइड नोट गायब हो गया। जेल विभाग के एक उच्चाधिकारी के जरिए होकर यह सुसाइड नोट कहां गया, इस सवाल का जवाब सीबीआइ को भी नहीं मिल सका है। सूत्रों के मुताबिक सुसाइड नोट की तलाश में काफी समय से जुटी सीबीआइ को गत दिनों छाया प्रति मिली। यह सुसाइड नोट सचान की ही लिखावट में है। सीबीआइ इस विषय पर अनुसंधान कर रही है कि क्या वाकई सचान ने सुसाइड नोट लिखा है, या उनका टार्चर करके लिखवाया गया है। असल में उनके शरीर पर जिस तरह जख्मों के निशान मिले, वह उनके उत्पीड़न की ही दास्तां बयां करते हैं, इसीलिए सीबीआइ वह मूल प्रति हासिल करने के लिए शीर्ष अधिकारी से लेकर कई महत्वपूर्ण लोगों से पूछताछ कर चुकी है।

जेल प्रशासन की कहानी पर विश्र्वास नहीं : उधर, घटनास्थल के साक्ष्यों ने सीबीआइ को हत्या पर भी सोचने को मजबूर कर दिया है। चूंकि जिस तरह सर्जिकल ब्लेड से उनके शरीर पर कटे के 8 निशान और शौचालय में बेल्ट से फंदा डालकर आत्महत्या करने की कहानी जेल प्रशासन ने सुनाई, वह अभी भी सीबीआइ के गले के नीचे नहीं उतर रही है। शौचालय में मिले खून और बिना पुलिस को सूचित किए लाश को बरामदे में रख देना भी सीबीआइ को तफ्तीश की एक और दिशा देने पर मजबूर कर रहा है।

सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़ भी एक वजह : संशय की एक और वजह यह भी है कि सीबीआइ को घटना के दिन का मिला सीसीटीवी फुटेज अस्पष्ट है। अंदेशा है कि सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ हुई है, क्योंकि घटना के दिन जेल परिसर में 23 घंटा विद्युत आपूर्ति हुई है।

पालीग्राफी टेस्ट से बंदी के इंकार पर भी शक बढ़ा : जेलर समेत सात जेलकर्मियों और दो कैदियों के पालीग्राफी टेस्ट के लिए सीबीआइ ने अदालत में अर्जी डाली थी। बिचाराधीन बंदी सोनू दारा सिंह द्वारा टेस्ट कराने से इंकार करने से सीबीआइ का शक बढ़ गया है। चूंकि घटना के दिन सोनू दारा सिंह जेल अस्पताल में मंडरा रहा था, इसलिए वह शक के दायरे में है।

कॉल डिटेल भी बनेगी फांस


लखनऊ, 7 दिसंबर (जाब्यू) : राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ को अहम सुबूत मिल रहे हैं। सीबीआइ ने जिलों में काम करने वाली फर्मो के ठेकेदारों व माननीयों की कॉल डिटेल पर भी नजर टिका दी है। यही कॉल डिटेल उनके गले की फांस बनेगी।

एनआरएचएम घोटाले का मामला प्रकाश में आने के बाद इस्तीफा देने वाले मंत्री सीबीआइ के निशाने पर हैं। सीबीआइ पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व अनंत मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा के करीबी अधिकारी, सांसद, विधायकों और ठेकेदारों की सूची बना चुकी है। माननीयों, ठेकेदारों व अधिकारियों का मोबाइल नंबर लेकर उसके कॉल डिटेल निकाले जा चुके हैं। कई लोगों के कॉल डिटेल निकालने की प्रक्रिया जारी है। दवा की आपूर्ति करने और निर्माण कार्य में लगे उन दबंग ठेकेदारों का भी ब्योरा तैयार हो रहा है, जिनकी पहंुच सांसद या विधायक के जरिए विभागीय मंत्रियों तक रही है। जौनपुर समेत पूर्वाचल के विभिन्न जिलों में काम करने वाले गुडडू खान और मलिक समेत कई अन्य आपूर्तिकर्ताओं के संबंधों की खास पड़ताल की जा रही है। सीबीआइ वैसे तो सभी जिलों की जांच में जुटी है, लेकिन अभिसूचना संकलन के दौरान पूर्व मंत्री के करीबियों के जो नाम सामने आए हैं, उनकी फर्मो से लेकर आर्थिक साम्राज्य की विशेष जांच हो रही है। सुबूत जुटाने में लगी सीबीआइ निर्माण कार्य और दवा खरीद की गड़बडि़यों के तह तक जाने में लगी है। इस बीच यह भी खबर मिली है कि कई जिलों में दबंगों और प्रभावी लोगों के इशारे पर दस्तावेज भी गायब किए जा रहे हैं। दस्तावेज गायब होने पर गोरखपुर जिले में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराने का मामला प्रकाश में आया है। सीबीआइ का शिकंजा कसता देख कुछ लोग अपने बचाव की पेशबंदी में भी जुट गए हैं।

बाबू सिंह पर सीबीआइ का शिकंजा

आनन्द राय
लखनऊ, 5 दिसंबर : एनआरएचएम घोटाले में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पर सीबीआइ का शिकंजा कसता जा रहा है। उनके करीबी रहे सांसद, विधायक व ठेकेदारों की भी जांच-पड़ताल चल रही है। सीबीआइ जिलों और विभिन्न इकाइयों से मिले दस्तावेजों की पड़ताल कर यह ब्योरा तैयार कर रही है कि किन-किन सांसद-विधायक के करीबी ठेकेदारों ने एनआरएचएम के तहत निर्माण, आपूर्ति व दवा खरीद का कार्य किया है और अवैध कमाई कहां पहुंचाई गई है।

बाबू सिंह कुशवाहा के बेहद करीबी रहे पीसीएफ चेयरमैन, एमएलसी रामचंद्र प्रधान की पत्नी के नाम पर बने फर्म पर ठेकेदारी का मामला प्रकाश में आने के बाद सीबीआइ ने जिलों की ओर रुख कर दिया है। सीबीआइ को खबर है कि बाबू सिंह कुशवाहा के प्रभाव में करोड़ों के कार्य चहेतों में बांटे गए हैं। हफ्ते भर में पचास से अधिक जिलों के दस्तावेज सीबीआइ के पास आये हैं। सीबीआइ ने पैक्सफेड के जरिए काम करने वालों का भी ब्यौरा हासिल किया है।

सीबीआइ को अंदेशा है कि जिस तरह एनआरएचएम के पैसे का भुगतान नमित टंडन की फर्म के नाम पर हुआ और उसे एमएलसी तक पहंुचाया गया, उसी तरह का कार्य सूबे के कई जिलों में अलग-अलग फर्मो से हुआ है। इसी कारण सीबीआइ की ध्यान अब जनप्रतिनिधियों और बिचौलियों पर केन्दि्रत है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ एनआरएचएम के तहत कार्य करने वाले ठेकेदारों के विधायक रामप्रसाद जायसवाल व मुख्तार अंसारी, एमएलसी प्रदीप सिंह व रामू द्विवेदी तथा सांसद धनंजय सिंह के अलावा दो दर्जन से अधिक विधायकों व सांसदों से रिश्तों की पड़ताल कर रही है। रामप्रसाद जायसवाल का नाम सीबीआइ की खास सूची में हैं। जांच एजेंसी जानने में जुटी है कि क्या ठेकेदारों की लेनदेन का कोई सिरा जनप्रतिनिधियों से जुड़ा है।

प्रधान से होगी पूछताछ : सीबीआइ एमएलसी रामचंद्र प्रधान से भी पूछताछ करेगी। प्रधान ने अपने प्रभाव में किसको-किसको ठेका दिलवाया। नमित टण्डन से उनके क्या रिश्ते रहे हैं। ठेकेदार को अपनी फर्म देने का उनका उद्देश्य क्या रहा है। क्या नाम छिपाने के लिए उन्होंने नमित टण्डन पर वाकई दबाव डाला।

आगा रिजवान को हिरासत में लेने की तैयारी : सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ दूसरों के नाम पर ठेकेदारी करने वाले आगा रिजवान को हिरासत में लेने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा हफ्ते भीतर पूछताछ के लिए दो दर्जन से अधिक ठेकेदारों और पैक्सफेड के अभियंताओं समेत कई अन्य लोगों से पूछताछ करेगी।

(माननीयों की अकूत संपत्ति पर भी नजर- पेज 11)


लखनऊ, 5 दिसंबर (जाब्यू) : सीबीआइ के निशाने पर माननीयों की आय से अधिक संपत्ति भी है। सीबीआइ ने होमवर्क में एक दर्जन से अधिक जनप्रतिनिधियों की हैसियत आंकी है, जो एक दशक में कई गुना बढ़ गयी है। सीबीआइ की टीम कभी भी इनके यहां छापेमारी कर सकती है।

कौन हैं रामचंद्र प्रधान : लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के निवासी रामचंद्र प्रधान के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत लखनऊ विश्र्वविद्यालय की छात्र राजनीति से हुई। फिर उन्होंने बसपा की राजनीति शुरू की और लखनऊ का उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया। प्रधान ने न केवल एमएलसी बनने से लेकर पीसीएफ चेयरमैन तक का सफर किया, बल्कि अपने भाई को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में भी कामयाब रहे।

प्रधान की पत्नी भी एक सहकारी बैंक की अध्यक्ष हैं। बाबू सिंह कुशवाहा की जब सरकार में तूती बोलती थी, तब उनके हमकदम के रूप में प्रधान का भी जलवा कम नहीं था। अभी भी प्रधान को अपनी हैसियत का गुमान है और उनका आर्थिक साम्राज्य भी राजनीतिक रुतबे की तरह ही बढ़ा है।

ठेकेदारी में बड़े चेहरे उजागर


आनन्द राय

लखनऊ, 4 दिसंबर 2011 : एनआरएचएम घोटाले की जांच के घेरे में आए ठेकेदार नमित टंडन के आत्महत्या के प्रयास के बाद भले परिवारीजनों ने सीबीआइ पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हों, लेकिन एनआरएचएम की ठेकेदारी में शामिल बड़े लोगों का भी चेहरा उजागर कर दिया है। दरअसल नमित टंडन ठेके में मोहरा मात्र थे। असली ठेकेदारी पीसीएफ के चेयरमैन, एमएलसी रामचंद्र प्रधान की पत्नी की फर्म पर उनके खास सहयोगी आगा रिजवान कर रहे थे। नमित टंडन पर सीबीआइ का दबाव इन सबका नाम उजागर करने के लिए था, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ मुंह खोलने का खामियाजा टंडन को भी बखूबी मालूम है।

रमा इंटरप्राइजेज के जरिए नमित टंडन ने जननी सुरक्षा योजना के तहत 27 एएनएम केंद्र बनवाने का काम पैक्सफेड से लिया। इस कार्य में श्रेया इंटरप्राइजेज भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार काम दिलाने की भूमिका पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के सबसे करीबी पीसीएफ चेयरमैन और एमएलसी रामचंद्र प्रधान ने निभाई। प्रधान के करीबी आगा रिजवान इसमें माध्यम थे। सूत्रों के मुताबिक 22 फरवरी 2010 से दिसंबर 2010 तक रमा इंटरप्राइजेज के खाते में एक करोड़ रुपये आए और नमित टंडन ने 50 लाख रुपये नकद और 50 लाख रुपये कई लोगों के नाम के चेक के जरिए आगा रिजवान को ही दे दिए। सीबीआइ को खबर मिली है कि पैसे रामचंद्र प्रधान को दिए गए। मामले में नमित टंडन से 28 नवंबर व दो दिसंबर को सीबीआइ ने पूछताछ की तो सबसे बड़ा सवाल श्रेया इंटरप्राइजेज के बारे में उठा, जिसकी प्रोपराइटर प्रधान की पत्नी अनीता प्रधान हैं। चूंकि पैसों का लेन-देन फर्म के नाम पर भी है, इसलिए सीबीआइ इनकी घेरेबंदी के लिए नमित की गवाही चाहती थी, लेकिन नमित टंडन पर प्रधान की फर्म का नाम न लेने का दबाव था। सीबीआइ और सत्ता पक्ष के नेताओं के दबाव में नमित परेशान हो गए। फिलहाल वे ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं और होश में आने के बाद ही सच सामने आएगा। वैसे जो भी कार्य हुए उसे आगा ने कराया और वर्कआर्डर पर भी नमित टंडन के हस्ताक्षर नहीं हैं।








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