15/12/2011

छद्म नामों से संपत्ति बनाई बाबू ने!

लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : आप भले ही पूर्व मंत्री व एमएलसी बाबू सिंह कुशवाहा को बस इसी नाम से जानते हों, लेकिन उनका एक नाम राम चरन कुशवाहा भी है। इतना ही नहीं उनकी पत्नी का नाम सुकन्या के साथ ही शिवकन्या देवी भी है। लोकायुक्त ने कुशवाहा के मंत्री पद का दुरुपयोग कर इन नामों से खरीदी गई अकूत संपत्ति संबंधी दो और शिकायतों को पंजीकृत कर जांच कराने का फैसला किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को सूचना भेजने के साथ ही कुशवाहा से 26 दिसंबर तक जवाब तलब किया गया है।
झांसी के अरविंद कुमार सोनी की बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ की गई शिकायत पर अभी जांच चल ही रही थी कि शिव पूजन सिंह कछवाह, अरुण देव द्विवेदी तथा कुलदीप सिंह ने भी पूर्व मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया कि शिव पूजन व अरुण देव द्विवेदी की शिकायत में पहले के आरोप तो हैं ही, कई नए आरोप भी हैं। आरोपों के संबंध में करीब एक हजार पेज के दस्तावेज भी दिए गए हैं। कहा गया है कि बाबू सिंह व राम चरन कुशवाहा एक ही व्यक्ति है। उनकी पत्नी सुकन्या व शिव कन्या देवी भी एक ही महिला। निर्वाचन पर्चे में तो बाबू सिंह कुशवाहा नाम लिखा गया है लेकिन पिता स्व. भागवत प्रसाद के अभिलेखों में एक मात्र राम चरन कुशवाहा को ही पुत्र बताया गया है। हाई स्कूल की अंक तालिका में भी राम चरन नाम है। मतदाता सूची में भी यही नाम लिखा है। यह भी कहा गया है कि बाबू सिंह की बीए की डिग्री भी फर्जी है। बीते माह अरविंद सोनी ने कुशवाहा पर मंत्री पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। कहा गया था कि मंत्री बनने से पहले उनके पास मात्र कुछ बीघा जमीन थी, लेकिन अब उनके सगे-संबंधियों के नाम से करोड़ों की संपत्ति है। कुशवाहा ने खनिकर्म मंत्री रहते बांदा-महोबा, चित्रकूट-हमीरपुर जिले में जमीन के खनन पट्टे परिवारिक सदस्यों के साथ ही कुछ खास लोगों को आवंटित किया है। बांदा में मेसर्स श्रीनाथ प्रापर्टीज, पिता के नाम भागवत प्रसाद एजुकेशनल वेलफेयर ट्रस्ट व पत्नी सुकन्या कुशवाहा के नाम तथागत शिक्षास्थली बनाकर उसमें करोड़ों रुपये का कालाधन लगाया गया है।

आरोपों के संबंध में कैबिनेट सचिव, विधान परिषद सचिव व भारत निर्वाचन आयोग से जानकारी हासिल करने की भी बात कही गई है। लोकायुक्त ने बताया कि दोनों नई शिकायतों को भी पंजीकृत कर उनमें दिए गए तथ्यों की भी अब जांच कराने का निर्णय किया है।

(अब करीबी अफसरों पर नजर- पेज 9)

एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ के निशाने पर पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के कई करीबी अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें पैकफेड के अभियंता से लेकर आइएएस अधिकारी तक शामिल हैं। सीबीआइ बहुत जल्द इनकी भी पड़ताल शुरू करेगी।


सूबे में वर्ष 2005 से 2011 तक के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने जांच में उनका भी ब्योरा हासिल किया है, जिनकी इस घोटाले में भूमिका रही। अब तक दर्जन भर ठेकेदारों व आपूर्तिकर्ताओं से हुई पूछताछ में इनका नाम सामने आया है। सीबीआइ ने ठेकदारों से जब उनको काम मिलने के साथ ही अन्य पहलुओं तथा पेमेंट की बाबत पूछताछ की तो तो माननीयों के साथ आइएएस अधिकारी और अभियंताओं का नाम सामने आया। सीबीआइ ने अभिसूचना संकलन में भी खास लोगों की भूमिका की जानकारी हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने तो कमीशन खाने में रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बताते हैं उन्होंने छोटे-छोटे ठेकेदारों को काम दिया, लेकिन इतना भारी कमीशन लिया कि उन्हें कुछ बचा ही नहीं। यह एक दूसरे पूर्व मंत्री के कृपा पात्र थ!

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