15/05/2017

भाजपा सरकार में कैबिनेट के फैसले

  -- दूसरी कैबिनेट बैठक --
 गांव-किसान पर मेहरबान योगी सरकार
नोट: थोड़ी देर में अपडेट खबर जारी की जा रही है।
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- दूसरी कैबिनेट की बैठक में दर्जन भर से ज्यादा फैसले
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूसरी कैबिनेट की बैठक में भी सरकार ने गांव, किसान और आमजन को अहमियत दी। बिजली, पानी, फसल खरीद और घर-गृहस्थी ठीक करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले किए। इसके लिए मंगलवार को लोकभवन में हुई बैठक में मंत्रियों ने दर्जन भर से ज्यादा प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
  प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प है कि उप्र के हर खेत को पानी, हर घर को बिजली पहुंचे। शर्मा ने कहा कि योगी सरकार आने के बाद यह पहली गर्मी होगी जिसमें आम जनता को बिजली की किल्लत नहीं होगी। प्रवक्ताद्वय ने कहा कि भ्रष्टाचार पर मोदी और योगी की सरकार जीरो टालरेंस पर काम कर रही है।
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गांवों को 18 व तहसील मुख्यालय को 20 घंटे बिजली
कैबिनेट ने तय किया है कि अगले वर्ष अक्टूबर तक सभी को 24 घंटे बिजली मिलेगी। ग्रामीण अंचल को 18, तहसील मुख्यालय को 20 और बुंदेलखंड को 20 घंटे बिजली मिलेगी। इसके अलावा जिला मुख्यालयों को अब 24 घंटे बिजली मिलेगी। यह भी सख्त हिदायत है कि रात्रि में छात्रों के पढऩे के समय और दिन में स्कूल के समय बिजली जरूर रहेगी। ऊर्जा मंत्री ने इस फैसले की जानकारी देते हुए तंज किया कि पहले भी इस तरह के आदेश हुए लेकिन शक्ति भवन में कागजों तक ही सीमित रहे। कुछ वीआइपी क्षेत्रों को ही लाभ मिला, पर अब इस सरकार का वीआइपी गांव का गरीब है। इसके क्रियान्वयन में कहीं कोताही हुई तो सभी एमडी और संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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अब 48 घंटे में बदले जाएंगे जले ट्रांसफार्मर
अभी तक ट्रांसफार्मर जलने पर बदले जाने की प्रक्रिया 72 घंटे में पूरी होती थी लेकिन सरकार ने तय किया है कि 48 घंटे में जले ट्रांसफार्मर बदले जाएंगे। पहले किसान खुद ट्रैक्टर-ट्राली पर लादकर जला ट्रांसफार्मर ले जाते थे। यह हिदायत है कि बिजली विभाग के अधिकारी सूचना मिलते ही अपना साधन लेकर जाएंगे और निर्धारित अवधि में ट्रांसफार्मर बदलेंगे। 24 घंटे के भीतर शहरी क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर बदले जाने का प्रावधान होगा। लापरवाही मिली तो संबंधित अफसरों की खैर नहीं होगी। मुख्यमंत्री की यह सख्त हिदायत है कि ऊर्जा विभाग के लोग अब खेतों में भी दिखने चाहिए।
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 487 रुपये प्रति क्विंटल आलू खरीदेगी सरकार
 कैबिनेट ने एक लाख मीट्रिक टन आलू खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। किसानों के आलू खरीद के लिए 487 रुपये प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की गई है। भारत सरकार के नेफेड संस्था, उप्र सरकार की पीसीएफ, यूपी एग्रो तथा नाफेड को आलू खरीद के लिए अधिकृत किया गया है। सभी जिलाधिकारियों को जरूरत के हिसाब से क्रय केंद्र खोलने की जिम्मेदारी दी गई है। कैबिनेट ने यह फैसला मंत्री समूह की सिफारिशों के आधार पर किया है।
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14 दिन के भीतर होगा गन्ना मूल्य भुगतान
कैबिनेट ने तय किया है कि 14 दिन के भीतर वर्तमान पेराई सत्र और पहले का गन्ना मूल्य भुगतान 120 दिन के भीतर किया जाएगा। अगर इसमें कोई लापरवाही हुई तो संबंधित अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने गन्ना मूल्य भुगतान के प्रति ढिलाई बरतने वाली मिलों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की चेतावनी दी है। प्रवक्ता के मुताबिक वर्तमान सीजन में 81 फीसद गन्ना मूल्य भुगतान कर दिया गया है।
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बिजली बिल का सरचार्ज माफ
ऊर्जा विभाग में बिलों के भुगतान को लेकर सरकार को शिकायतें मिली थी। पिछले भुगतान की रकम भी बकाए में दिख रही है। सरकार ने आमजन को राहत देते हुए सरचार्ज माफ करने का फैसला किया है। ग्रामीण, शहरी, मध्यम, घरेलू और कामर्शियल के लिए योजना शुरू होगी। इसमें जो भी सरचार्ज होगा उसे माफ किया जाएगा। उपभोक्ता को सिर्फ मूलधन का भुगतान करना होगा। किसानों के हित में एक कदम आगे बढ़ते हुए सरकार ने तय किया है कि जिन किसानों को दस हजार रुपये से ज्यादा बकाया है उन्हें चार आसान किस्तों में भुगतान की सहूलियत मिलेगी। इस योजना से छोटे उद्यमियों को भी लाभ मिलेगा।
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केंद्र से बिजली खरीद को होगा करार
पॉवर ऑफ ऑल योजना के तहत केंद्र और राज्यों के बीच समझौते हो रहे हैं लेकिन, अभी तक उप्र सरकार के बीच करार नहीं हो सका है। कैबिनेट ने करार के लिए आए प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 14 अप्रैल को सायं साढ़े पांच बजे केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में यहां करार होगा। 2019 से पहले उप्र के हर गांव में रोशनी पहुंचे इसलिए यह व्यवस्था की जा रही है।
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सीएजी से प्राधिकरणों की आडिट को अनुमति
कैबिनेट ने विकास प्राधिकरणों की आडिट सीएजी से कराने की अनुमति दे दी है। सूबे में 29 प्राधिकरण हैं। इसके आडिट की प्रक्रिया राज्य सरकार की एजेंसी पूरी करती रही है। पिछली बार सीएजी ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण समेत कुछ प्राधिकरणों के आडिट की मांग की लेकिन राज्य सरकार ने मंजूरी नहीं दी। तब राज्यपाल ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया था। कैबिनेट ने फैसला किया है कि अगर सीएजी आडिट का प्रस्ताव रखेगी तो राज्य सरकार अनुमति देगी।
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नेपाल सीमा के जिलों का होगा विकास
बार्डर एरिया डेवलपमेंट के तहत नेपाल सीमा पर उत्तर प्रदेश के सात जिलों महराजगंज, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, खीरी और पीलीभीत के विकास के लिए कैबिनेट में नोट प्रस्तुत किया गया जिसे अनुमोदन मिला है।
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15 जून तक सड़कें होगी गड्ढामुक्त
कैबिनेट ने तय किया है कि 15 जून तक प्रदेश की सभी सड़कें गड्ढामुक्त हो जाएंगी। गड्ढे वाली 85943 किलोमीटर सड़क चिह्नित की गई हैं। चेतावनी दी गई है कि अगर बरसात से पहले सड़कों का सिर्फ रंगरोगन किया गया और फिर खराब स्थिति दिखी तो कार्रवाई की जाएगी। गांव और कस्बों का पानी सड़क पर आने से भी टूटती है इसलिए ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने की हिदायत दी गई है।
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दिमागी बुखार के मरीजों को राहत
सरकार ने जापानी इंसेफेलाइटिस के पीडि़तों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इस बीमारी के रोकथाम के लिए फागिंग की कार्रवाई किए जाने की हिदायत के साथ ही निगरानी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। जिला अस्पतालों में बीमारी को देखते हुए दस और बेड बढ़ाए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों के पीएचसी और सीएचसी के चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पीएचसी और सीएचसी में यह उपचार की व्यवस्था पहले उपलब्ध होगी। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह को ग्रामीण इलाकों में अधिकारियों के साथ प्रवास पर जाने को कहा गया है।
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ई टेंडङ्क्षरग के जरिये डीएम देंगे छह माह का खनन पट्टा
अवैध खनन पर अंकुश लगाने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए सख्त कदम के बाद बालू-मौरंग की किल्लत हो गई है। इससे निर्माण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कैबिनेट की पिछली बैठक में मंत्री समूह को कारगर योजना बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके तहत अल्पकालीन योजना और दीर्घकालीन योजना बनी है। अल्पकालीन योजना के तहत बाजार में तत्काल बालू-मौरंग की व्यवस्था सुनिश्चित हो, इसके लिए पड़ोसी राज्यों की परमिट प्राप्त गाडिय़ों को बालू-मौरंग लेकर आने की छूट मिलेगी। मतलब मध्य प्रदेश या उत्तराखंड के जिन वाहनों के पास वैध ट्रांजिट परमिट होगा, वह स्वीकार किया जाएगा। जिलाधिकारी के जरिये छह माह के लिए ई-टेंडङ्क्षरग के जरिए अधिकतम दस एकड़ में खनन के पट्टे दिए जाएंगे। डेढ़ माह में इसकी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। दीर्घकालिक योजना के तहत अगले पांच साल के लिए पट्टे किए जाने हैं। इसकी प्रक्रिया पूरी करने में आठ- दस माह लगेंगे।
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बुंदेलखंड में पेयजल योजना
कैबिनेट ने बुंदेलखंड की स्थिति देखते हुए पेयजल योजना समयबद्ध ढंग से पूरा करने का निर्णय किया है। मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह को बुंदेलखंड और नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को शहरी अंचलों में प्रवास कर प्रभावी कदम उठाने की जिम्मेदारी दी गई है। पेयजल संकट दूर करने के लिए नलकूप लगाने और रीबोङ्क्षरग से लेकर टैंकर की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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प्रतियोगी परीक्षार्थियों को मिलेगी राहत
संघ लोक सेवा आयोग ने सीसैट लागू किया था। उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने भी परीक्षा की व्यवस्था कर दी। उसके बाद दो पेपर होने लगे। इसको हटाने की मांग तेज हुई। संघ लोकसेवा आयोग ने 2014 में अपना आदेश वापस ले लिया लेकिन, उप्र सरकार ने दो अतिरिक्त अवसर की मांग खारिज करते हुए यह दलील दी कि 35 वर्ष से उम्र बढ़ाकर 40 वर्ष कर दी गई है इसलिए लाभ नहीं मिल सकता। सरकार के इस नए फैसले से प्रतियोगी परीक्षाओं को खासतौर से 2013 और 2014 में ओवरएज हो चुके प्रतियोगियों को लाभ मिलेगा।
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- तीसरी कैबिनेट-
- योगी सरकार के पांच फैसलों में से दो किसानों के लिए
- 21 दिन के भीतर किसानों को देना होगा बीमा भुगतान
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : चुनाव के दौरान भाजपा ने 'कृषि विकास का बने आधारÓ नारा दिया था। संकल्प पत्र में भी किसानों के हित में कई वायदे किए गए थे और अब भाजपा की सरकार उस दिशा में निरंतर कदम बढ़ा रही है। मंगलवार को योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में हुई तीसरी कैबिनेट की बैठक में पांच फैसले किए गए। इसमें दो प्रमुख फैसले किसानों के हित में हैं। इसके तहत 20 जिलों में कृषि विज्ञान केंद्र खोले जाएंगे और किसानों को फसल बीमा का 21 दिन में भुगतान न होने पर बीमा कंपनी को जुर्माना देना पड़ेगा।
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20 जिलों में खुलेंगे कृषि विज्ञान केंद्र
कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की योजना केंद्र सरकार की है लेकिन, पिछली सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाए। सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रदेश में 69 कृषि विज्ञान केंद्र हैं। 20 कृषि विज्ञान केंद्र खोलने के लिए भारत सरकार ने स्वीकृति दी है। कैबिनेट को प्रदेश में कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालयों के तहत 20 नए कृषि विज्ञान केन्द्र खोलने के बारे में अवगत कराया गया। यह केन्द्र लखीमपुर-खीरी, हरदोई, आजमगढ़, जौनपुर, बदायूं, सुलतानपुर, बहराइच, मुरादाबाद, गोण्डा, गाजीपुर, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, हापुड़, शामली, सम्भल, अमेठी, कासगंज, श्रावस्ती, अमरोहा एवं इलाहाबाद में स्थापित किये जा रहे हैं। हर कृषि विज्ञान केंद्र को 30 एकड़ जमीन चाहिए। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पूर्ण वित्त पोषित कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा नि:शुल्क भूमि उपलब्ध करायी जाती है। कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना के लिए 14 जिलों के डीएम द्वारा भूमि की उपलब्धता से अवगत कराया गया है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को दस दिन के भीतर जमीन खोजने की जिम्मेदारी दी है। सात नए जिले हैं जहां कृषि विज्ञान केंद्र नहीं थे। इस व्यवस्था से अब कुछ जिलों में दो-दो कृषि विज्ञान केंद्र खुल जाएंगे और सूबे के सभी जिलों में यह केंद्र होगा।
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दो वर्षों के लिए बीमा योजना लागू
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को दो वर्षों 2017-18 और 2018-19 के लिए लागू करने का निर्णय किया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उत्तर प्रदेश में किसानों को ठीक से नहीं मिल पा रहा था। बीमा कंपनी को 21 दिन के भीतर क्लेम देना जरूरी होता है। कैबिनेट ने तय किया है कि बीमा कंपनी ने अगर 21 दिन में निर्धारित भुगतान नहीं किया तो सात-सात दिन में पेनाल्टी बढ़ाई जाएगी। अगर इसके बाद भी भुगतान नहीं किया तो बीमा कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। कैबिनेट ने यह भी गाइड लाइन दी है कि हर कंपनी को एक ब्लाक में एक एजेंट बनाना होगा। प्रदेश में संचालित फसल बीमा योजना के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों को 12 समूहों में बांटा जाएगा तथा निविदा के माध्यम से बीमा कंपनियों का चयन करते हुए योजना को संचालित कराया जाएगा। योजना में खरीफ मौसम में धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उर्द, मूंग, मूंगफली, तिल, सोयाबीन व अरहर की फसल तथा रबी मौसम में गेहूं, चना, मटर, मसूर, लाही, सरसों व आलू फसल के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। योजना में फसल की बुवाई से कटाई की समयावधि में प्राकृतिक आपदा व रोगों, से फसल के नष्ट होने की स्थिति तथा फसल की कटाई के बाद अगले 14 दिनों में खेत में कटी हुई फसल की क्षति की स्थिति में किसानों को बीमा कवर के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसी तरह खाद्य फसलों, अनाज व दलहन, तिलहन के लिए भी गाइड लाइन तैयार की गई है। पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत कुशीनगर, गोरखपुर, बहराइच, बाराबंकी, कौशांबी व महराजगंज में केले की फसल तथा फतेहपुर, फीरोजाबाद, लखीमपुर-खीरी, बाराबंकी, मीरजापुर व बरेली में मिर्च की फसल को ब्लॉक में स्थापित मौसम केन्द्र स्तर पर बीमित किया जाएगा।
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'एक थी रानी ऐसी भीÓ फिल्म टैक्स फ्री
कैबिनेट ने 'एक थी रानी ऐसी भीÓ फिल्म को टैक्स फ्री करने का फैसला किया है। यह फिल्म गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा की लिखी पुस्तक पर बनी है। सिन्हा ने राजमाता विजयराजे सिंधिया के जीवन पर एक पुस्तक लिखी है जिस पर यह फिल्म बनी है। इस संदर्भ में आयुक्त मनोरंजन कर द्वारा अवगत कराया गया कि यह फिल्म राजमाता विजयाराजे सिंधिया का राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण के साथ-साथ देशवासियों को समाज सेवा एवं महिला सशक्तिकरण के लिए प्रेरित करती है।
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अब महायोगी गोरखनाथ सिविल टर्मिनल
कैबिनेट ने गोरखपुर और आगरा सिविल टर्मिनल का नाम बदलने का फैसला किया है। गोरखपुर में सिविल टर्मिनल का नाम बदलकर महायोगी गोरखनाथ टर्मिनल रखा जाएगा जबकि आगरा के टर्मिनल का नाम पं. दीनदयाल उपाध्याय टर्मिनल होगा। इस सिलसिले में विधानसभा में पारित किए जाने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने अनुमोदित किया है। यह प्रस्ताव विधानसभा में पारित कराकर केन्द्र सरकार को भेजा जाएगा। ध्यान रहे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के गोरक्षपीठ के महंत हैं।
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विकलांग कल्याण विभाग का नाम दिव्यांगजन सशक्तिकरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष ही विकलांग शब्द को नया नाम दिव्यांग दिया था और इससे जुड़े विभागों को भी विकलांग की जगह दिव्यांग कर दिया गया था। राज्य सरकार ने भी महत्वपूर्ण फैसले के तहत विकलांग कल्याण विभाग की जगह नाम बदलकर दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग कर दिया है। मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि इस निर्णय से विकलांगजन में हीनभावना कम होगी और वह स्वयं को सशक्त महसूस करेंगे।
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अब दफ्तर में कार्यकर्ता नहीं, सिर्फ षड्यंत्र : शर्मा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा से मुस्लिम पुलिसकर्मियों के हटाए जाने के सवाल पर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के तेवर तीखे हो गए। बोले, अफवाहों पर ध्यान मत दो। बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी की ओर इशारा करते हुए शर्मा ने कहा कि बौखलाहट में मोदी और योगी सरकार के खिलाफ कुछ लोग दिन भर षड्यंत्र में लगे हैं, क्योंकि अब उनके दफ्तर में कार्यकर्ता आते नहीं हैं। शर्मा ने कहा कि योगी सरकार प्रगति पथ पर है और हर तरफ खुशहाली है। एंटी रोमियो अभियान से महिलाएं सुरक्षित महसूस कर रही हैं।
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 चौथी कैबिनेट

अपडेट -महत्वपूर्ण लीड - कैबिनेट 2 - ब्यूरो : एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स को मंजूरी
नोट--अपडेट खबर में नए तथ्य जोड़ते हुए
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- चार स्तरीय होगी टास्क फोर्स, दो माह में चिह्नित होंगे कब्जेदार
- अवैध कब्जे की ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे शिकायत
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र में किये गए चुनावी वादे को निभाते हुए योगी सरकार ने सरकारी व निजी संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने व दोषियों को सजा दिलाने के लिए मंगलवार को चार स्तरीय एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स गठित करने का फैसला किया है। एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स तहसील, जिला, मंडल और राज्य स्तर पर गठित होगी।
कब्जे चिह्नित करने को दो महीने चलेगा अभियान : सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जों को चिह्नित करने के लिए दो महीने का अभियान चलाया जाएगा। जिलाधिकारी की अगुआई में जिला स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी। सभी सरकारी विभाग, स्थानीय निकाय, प्राधिकरण, निगम, सार्वजनिक उपक्रम, आदि अवैध कब्जे का शिकार अपनी जमीनों व परिसंपत्तियों की सूची जिला स्तरीय टास्क फोर्स को सौंपेंगे। वे यह जानकारी भी मुहैया कराएंगे कि परिसंपत्तियों पर किसने कब्जा किया है, कब्जा हटाने के लिए विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई है और कब्जा न हट पाने में क्या समस्या आड़े आ रही है। उप जिलाधिकारी (एसडीएम) तहसीलों के अंतर्गत ग्राम समाज की परिसंपत्तियों पर हुए अवैध कब्जे की पड़ताल तहसील स्तरीय टास्क फोर्स के जरिये कराएंगे। अवैध कब्जे चिह्नित किये जाने के बाद संबंधित विभाग अपने शासनादेशों के अनुसार उन्हें खाली कराने की कार्यवाही करेंगे। कब्जे में  सरकारी अधिकारी-कर्मचारी की मिलीभगत पाये जाने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाएगी। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी/निगम/प्राधिकरण/उपक्रम की जमीनों पर भविष्य में कोई अनधिकृत निर्माण न हो, इसके लिए संबंधित जिला व मंडल स्तरीय अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
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पेशेवर भू-माफिया को चिह्नित करेगी पुलिस : वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को पेशेवर भू-माफिया की श्रेणी में आने वाले लोगों को चिह्नित करने के निर्देश दिये जाएंगे। उन्हें ऐसे लोगों को चिह्नित करना होगा जिनके बारे में संपत्तियों पर अवैध कब्जे करने की शिकायतें अमूमन मिलती रहती हैं। यह वे लोग होंगे जो राजनीतिक संरक्षण में और सरकारी विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों की सांठगांठ से आये दिन सरकारी, निजी व धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों पर कब्जे करते रहते हैं। पुलिस ऐसे पेशेवर भू-माफिया की सूची जिला स्तरीय टास्क फोर्स को सौंपेगी। ऐसे लोगों पर गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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कब्जे की शिकायत में लापरवाही पर नपेंगे थाना प्रभारी : पुलिस को सख्त निर्देश दिये जाएंगे कि अपनी संपत्ति पर अवैध कब्जे की शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादियों की थानों पर उचित सुनवाई हो। यदि कब्जा हो रहा हो या होने की आशंका हो तो पुलिस फौरन हस्तक्षेप कर उसे रोकें। कब्जा करने वाले के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करें। कब्जे की शिकायतों में पुलिस की ओर से लापरवाही या ढिलाई बरते जाने पर थाना प्रभारी को सीधे जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही होगी।
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कानूनी पचड़े में फंसी संपत्तियों को मुक्त कराने की होगी पहल : जिला स्तरीय टास्क फोर्स देखेगी कि कौन सी संपत्तियां कानूनी विवाद के कारण कब्जे से मुक्त नहीं हो पा रही हैं। ऐसी संपत्तियों को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए अदालत में प्रभावी पैरोकारी की जाएगी।
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सार्वजनिक संपत्ति पर धार्मिक स्थलों के निर्माण पर होगी कार्रवाई : सार्वजनिक गलियों/मार्गों/पार्कों व अन्य स्थानों पर धार्मिक स्थल के निर्माण को लेकर हाईकोर्ट द्वारा 29 सितंबर 2009 को दिये गए आदेश के क्रम में गृह विभाग द्वारा 18 अक्टूबर 2009 को जारी शासनादेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक संपत्तियों पर हुए अवैध कब्जों के मामलों में पब्लिक प्रेमाइसेस एविक्शन एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों की स्थिति की नियमित समीक्षा की जाएगी।
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मुख्य सचिव होंगे राज्य स्तरीय टास्क फोर्स के अध्यक्ष : अवैध कब्जों को भू-माफिया के चंगुल से मुक्त कराने की कार्यवाही की राज्य स्तर पर समीक्षा करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी। प्रमुख सचिव राजस्व इसके सदस्य-सचिव होंगे। राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक हर दो महीने में होगी। जिला स्तरीय टास्क फोर्स के कामकाज की समीक्षा कर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित मंडल स्तरीय टास्क फोर्स हर महीने अपनी रिपोर्ट राज्य स्तरीय टास्क फोर्स को सौंपेगी। तहसील स्तरीय टास्क फोर्स शिकायतों पर 15 दिन में कार्यवाही कर उसे वेबपोर्टल पर दर्ज कराएगी।
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पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे शिकायतें : सरकारी व निजी संपत्तियों पर अवैध कब्जे की शिकायतें तहसील दिवस पर या सीधे किये जाने के अलावा ऑनलाइन भी दर्ज करायी जा सकेंगी। इसके लिए राजस्व परिषद स्तर पर ऑनलाइन पोर्टल तैयार कराया जाएगा। जब तक यह पोर्टल तैयार नहीं हो जाता, तब तक लोग शिकायतें राज्य सरकार द्वारा एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली के तहत संचालित जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज करायी जा सकेंगी। शिकायतकर्ता अपनी शिकायतों पर हुई कार्यवाही से एसएमएस के जरिये अवगत हो सकेंगे।
अपडेट महत्वपूर्ण : कैबिनेट1- ब्यूरो : महापुरुषों के नाम की 15 छुट्टियां रद
नोट : इन छुट्टियों की हो गई छुट्टी समेत कई इनसेट हैं।
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- योगी सरकार की चौथी कैबिनेट में कई अहम फैसले
- महापुरुषों के नाम पर स्कूल-कालेजों में होगी परिचर्चा
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : योगी सरकार की चौथी कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले किए गए। संकल्प पत्र के वादे के अनुरूप भू-माफिया पर नकेल कसने के लिए एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स गठित करने और सार्वजनिक स्थलों पर धर्म के नाम पर कब्जा रोकने की पहल के साथ ही महापुरुषों के नाम पर 15 छुट्टियां रद कर दी गई हैं। कैबिनेट ने 15 सार्वजनिक अवकाशों को निर्बंधित अवकाश की श्रेणी में सम्मिलित किए जाने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सरकार ने तय किया है कि जीएसटी बिल को पास कराने के लिए 15 मई से एक विशेष सत्र का आयोजन होगा।
 मंगलवार को लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में करीब दो घंटे चली कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पत्रकारों से जानकारी साझा की। शर्मा ने बताया कि सरकार के पास काम करने के दिन कम बचते हैं क्योंकि अवकाश बढ़ गए हैं। कैबिनेट ने सार्वजनिक छुट्टियों को समाप्त कर निर्बंधित अवकाश के रूप में कर दिया है। इसमें कोई भी कर्मचारी किन्हीं दो छुट्टियों को ले सकता है। यह फैसला कैलेंडर वर्ष 2017 के लिए लागू होगा। कैबिनेट ने फैसला किया है कि महापुरुषों के जन्मदिन और बलिदान दिवस के दिन महापुरुषों के बारे में स्कूल और कालेजों में एक घंटे के लिए परिचर्चा और निबंध प्रतियोगिता होगी। सरकार ने तय किया है कि स्वाधीनता संग्राम में जितने भी क्रांतिकारी रहे हैं उनके बलिदान दिवस पर सभी शिक्षण संस्थाओं में विशेष आयोजन होंगे। उन्हें स्मरण करते हुए उनके बारे में विद्यार्थियों को विशेष जानकारी दी जाएगी। सरकारी दफ्तरों में भी उस दिन अवकाश नहीं रहेगा। संस्थान अपने विवेक से इनके नाम पर कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित कर सकेंगे। महापुरुषों की जयंती एवं पुण्यतिथि के दिन रविवार या किसी अन्य कारण से अवकाश होने की स्थिति में उसके एक दिन पूर्व उनकी याद में सभा, गोष्ठी और सेमिनार का आयोजन होगा।
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अंबेडकर जयंती पर योगी ने किया था एलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर अंबेडकर महासभा परिसर में एक समारोह को संबोधित करने गए थे। तब उन्होंने महापुरुषों के नाम पर होने वाली छुट्टियों को समाप्त करने का एलान किया था। दरअसल, उनका कहना यह था कि छुट्टियां तो होती हैं लेकिन जिन महापुरुषों के नाम पर होती उनके बारे में बच्चे कुछ जान नहीं पाते हैं। एक वाकया भी बताए कि एक बार स्कूल न जाने पर बच्चे से वजह पूछी तो बताया कि आज इतवार है जबकि उस दिन मंगलवार था। उस दिन किसी महापुरुष की जयंती थी। इसीलिए महापुरुषों के बारे में बच्चों को जानकारी मुहैया कराने के लिए योगी ने अवकाश के दिन स्कूलों में परिचर्चा कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात रखी जिसे कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है।
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इन छुट्टियों की हो गई छुट्टी
महापुरुष - अवकाश की तारीख
1.कर्पूरी ठाकुर जयंती - 24 जनवरी
2. महर्षि कश्यप एवं महाराज गुहा - पांच अप्रैल
3. चेटी चंद - 29 मार्च
4. हजरत ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी का उर्स - 14 अप्रैल
5. चंद्रशेखर जयंती - 17 अप्रैल
6. परशुराम जयंती - 28 अप्रैल
7. महाराणा प्रताप जयंती - नौ मई
8. रमजान का अंतिम शुक्रवार - 23 जून
9. विश्वकर्मा पूजा - 17 सितंबर
10. अग्रसेन जयंती - 21 सितंबर
11. बाल्मिकी जयंती - पांच अक्टूबर
12. छठ पूजा पर्व - 26 अक्टूबर
13. बल्लभ भाई पटेल और नरेन्द्र देव जयंती - 31 अक्टूबर
14. ईद-उ-मिलादुन्नवी - दो दिसंबर
15. चौधरी चरण सिंह जयंती - 23 दिसंबर
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15 मई से विधानमंडल सत्र
योगी सरकार में विधानमंडल सत्र की शुरुआत 15 मई से होगी। सत्र एक सप्ताह तक चलेगा। यह सत्र विशेष रूप से जीएसटी बिल पास कराने के लिए बुलाया जा रहा है। सरकार की मंशा है कि एक देश-एक कानून का फार्मूला सब जगह रहे। अभी हाल में संसद से जीएसटी पारित हो गया है। जीएसटी के लिए सत्र बुलाने पर कैबिनेट ने संस्तुति दी है। इसके पहले मंगलवार को ही मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मिलकर सत्र चलाने के संदर्भ में विमर्श किया था।
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धर्म की आड़ में सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने गाइड लाइन दी थी कि धर्म के नाम पर सार्वजनिक स्थलों का अतिक्रमण हटाया जाए लेकिन, यह दिशा निर्देश प्रभावी नहीं हो सका। कैबिनेट ने फैसला किया है कि सार्वजनिक स्थलों पर यदि कोई कब्जा करता है तो उस पर कार्रवाई होगी। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि चाहे वह किसी धर्म का हो लेकिन, अगर गैर कानूनी ढंग से धर्म स्थल का निर्माण करेगा तो उसे हटाया जाएगा और कार्रवाई होगी।
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सुकमा में उप्र के दो शहीदों को 30-30 लाख
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ के सुकमा हमले में शहीद सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवारीजन के प्रति संवेदना प्रकट की है। कैबिनेट ने इस कायराना हमले की निंदा भी की है। कैबिनेट की बैठक में तय हुआ कि सुकमा में मारे गए जवानों में उप्र के दो जवानों के आश्रितों को 30-30 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसमें एटा के जवान केपी सिंह और मुजफ्फरनगर के मनोज कुमार के परिवारीजन को सांत्वना देने के लिए राज्य सरकार के मंत्री जाएंगे। एटा के लिए पशुधन मंत्री प्रोफेसर एसपी बघेल और खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री अतुल गर्ग तथा मुजफ्फरनगर जाने के लिए औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना और गन्ना विकास राज्य मंत्री सुरेश राणा को अधिकृत किया गया है। ये मंत्री शहीदों के परिवारों को सांत्वना देंगे।
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रेल परियोजना को ट्रांसफर होगी सिंचाई विभाग की जमीन
कैबिनेट ने डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर रेल परियोजना के लिए चंदौली जिले में स्थिति सिंचाई विभाग की कुल 0.1898 हेक्टेयर भूमि ट्रांसफर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए सिंचाई विभाग को 97 लाख 62 हजार 400 रुपये का भुगतान होगा। भुगतान के बाद ही जमीन ट्रांसफर होगी।
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गोरखपुर में प्रेक्षागृह निर्माण को नि:शुल्क हस्तांतरित होगी भूमि
कैबिनेट ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण की कारपोरेट पार्क परियोजना के मध्य स्थित 3.54 एकड़ क्षेत्र में सिंचाई विभाग के जीर्ण-शीर्ण निरीक्षण भवन व भूमि को प्रेक्षागृह के निर्माण के लिए संस्कृति विभाग को नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है। भवन व भूमि की उपयोगिता सिंचाई विभाग के लिए शून्य है। प्रेक्षागृह के निर्माण से सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन होगा, जिससे जनसामान्य लाभांवित होंगे।
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 पांचवीं कैबिनेट

अपडेट-महत्वपूर्ण-कैबिनेट-ब्यूरो : एक जिले में तीन वर्ष से ज्यादा नहीं रह सकेंगे अफसर
नोट : सभी फैसलों को विस्तार दिया गया है। फैसलों को अलग-अलग भी प्रकाशित किया जा सकता है।
नोट : पहले पेज पर प्रमुखता से लगाएं।
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- पांचवीं कैबिनेट बैठक में योगी सरकार के छह बड़े फैसले
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : योगी सरकार ने मंगलवार को छह बड़े फैसले किए। लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में पांचवीं कैबिनेट बैठक में नई तबादला नीति को मंजूरी दी गई। इसके तहत अब एक जिले में तीन वर्ष से ज्यादा अफसर नहीं रह सकेंगे। सरकारी विभागों में ठेके-पट्टे के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ई-टेंडरिंग, प्रतिवर्ष 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस मनाने, गोरखपुर के फर्टिलाइजर कारखाने के लैंड ट्रांसफर में लगने वाले 210 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी में छूट का फैसला लिया गया। जिला खनिज फाउंडेशन न्यास के गठन को भी मंजूरी मिली है।
एनेक्सी के मीडिया सेंटर में सरकार के प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकारों को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए सरकार की मंशा जाहिर की। ई-टेंडरिंग को खास पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि सपा सरकार में 'क्रोनी कैप्टलिज्मÓ चला था, जिसका अब अंत हो गया है। इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि पालिटीशियन, ब्यूरोक्रेट और बिजनेस हाउस का गठजोड़ समाप्त हो गया है।
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नई तबादला नीति को मंजूरी
नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की तबादला नीति 2017-18 को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत व्यवस्था दी गई है कि शासन, विभागाध्यक्ष, मंडल एवं जिला स्तर के सभी स्थानांतरण 30 जून, 2017 तक पूर्ण कर लिए जाएंगे। नई नीति के अनुसार समूह क और ख के ऐसे अधिकारियों के तबादले किए जा सकेंगे जो जिले में तीन वर्ष एवं मंडल में सात वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर चुके हैं। समूह ख का तबादला विभागाध्यक्ष कर सकेंगे। विभागाध्यक्ष को 20 फीसद तबादले का अधिकार दिया है। दिव्यांगजन इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे। समूह ख के ऊपर के अधिकारियों का तबादला शासन से होगा। दो वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले समूह ग और घ के कर्मचारी को अपने गृह जिले तथा समूह क और ख के अधिकारियों को गृह जिला छोड़कर इच्छित जिले में तैनाती का मौका मिलेगा। खन्ना ने बताया कि तबादले की अंतिम तारीख 30 जून होगी। समूह ग के कर्मियों का हर तीन वर्ष पर पटल परिवर्तन होगा। इनका तबादला विभागाध्यक्ष कर सकेंगे। तबादले के अवधि के निर्धारण के लिए 31 मार्च, 2017 कट आफ डेट निर्धारित की गई है। विभागीय आवश्यकता की दृष्टि से स्थानांतरण नीति में मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर विचलन किए जाने का प्रावधान किया गया है। जनहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री द्वारा कभी भी किसी भी कार्मिक को स्थानांतरित किए जाने का आदेश दिया जा सकता है। स्थानांतरण नीति में संशोधन की कार्रवाई मुख्यमंत्री से अनुमोदन प्राप्त कर की जा सकेगी। नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि संदिग्ध सत्य निष्ठा वाले कार्मिकों की तैनाती संवेदनशील पदों पर कतई नहीं की जाएगी। मंदित बच्चों के माता-पिता की तैनाती अधिकृत सरकारी चिकित्सक के प्रमाण-पत्र के आधार पर विकल्प प्राप्त करके ऐसे स्थान पर की जा सकेगी, जहां चिकित्सा की समुचित व्यवस्था उपलब्ध हो। समूह 'कÓ के अधिकारियों को उनके गृह मंडल में तैनात नहीं किया जाएगा। सरकारी सेवकों के मान्यता प्राप्त सेवा संघों के अध्यक्ष/सचिव, जिनमें जिला शाखाओं के अध्यक्ष एवं सचिव भी सम्मिलित हैं, के स्थानांतरण उनके द्वारा संगठन में पदधारित करने की तारीख से दो वर्ष तक नहीं किए जाएंगे। यदि स्थानांतरण किया जाना अपरिहार्य हो तो स्थानांतरण हेतु प्राधिकृत अधिकारियों से एक स्तर उच्च अधिकारी का पूर्व में अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा। जिला शाखाओं के पदाधिकारियों के स्थानांतरण प्रकरणों पर जिला अधिकारी की पूर्वानुमति प्राप्त की जाएगी।
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हर वर्ष 24 जनवरी को मनेगा उत्तर प्रदेश दिवस
सरकार अब हर साल 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश दिवस मनाएगी। सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना था कि राज्य या देश की जन्मतिथि उसकी पहचान है। इस पहचान और स्वाभिमान के लिए जन्मतिथि उत्सव दिवस के रूप में मनाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। प्रदेश की जिन महान विभूतियों ने देश की आजादी में योगदान दिया है, उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर उन्हें प्रचारित-प्रसारित किया जाएगा। साथ ही, प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर एवं विविधता को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। नई पीढ़ी को प्रदेश के विकास एवं परिवेश से जोडऩे के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह भी निर्णय लिया गया है कि राज्य के बाहर अन्य प्रांतों में वहां रहने वाले प्रवासी प्रदेश वासियों के बीच भी उत्तर प्रदेश दिवस संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे उनकी प्रतिबद्धता उत्तर प्रदेश के प्रति बढ़ सके। उत्तर प्रदेश दिवस के आयोजन के लिए कैबिनेट की एक समिति गठित होगी जो एक माह में दिवस आयोजन की कार्ययोजना को अंतिम स्वरूप प्रदान करेगी। पहले उत्तर प्रदेश को यूनाइटेड प्राविंस के रूप में जाना जाता था लेकिन, 24 जनवरी 1950 को उत्तर प्रदेश का नाम दिया गया। कैबिनेट ने 24 जनवरी को ही उत्तर प्रदेश दिवस मनाने का फैसला किया है। यह आयोजन सूचना विभाग करेगा लेकिन संस्कृति और पर्यटन विभाग भी सहयोगी होंगे। इसमें ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा औद्योगिक विकास विभाग सहित अन्य विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।  उल्लेखनीय है कि राज्यपाल राम नाईक ने काफी पहले उत्तर प्रदेश दिवस मनाने की पहल की थी।
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तीन माह में ई-टेंडरिंग
कैबिनेट ने प्रशासनिक और शासकीय विभाग को मैन्युअल टेंडरिंग खत्म करने के लिए बाध्य किया है। पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा के लिए सभी तरह के ठेकों में ई-टेंडरिंग और ई-प्रोक्योरमेंट की व्यवस्था लागू होगी। तीन माह के भीतर यह कार्यप्रणाली शुरू हो जाएगी। आइटी विभाग इसमें मददगार होगा। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार यह व्यवस्था लागू होने से विदेशी कंपनियों का भी यहां कारोबार में रुझान बढ़ेगा क्योंकि उन्हें ई-टेंडरिंग पसंद है। इस निर्णय के तहत प्रदेश के सभी शासकीय विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों, स्वायत्त शासी संस्थाओं, निकायों इत्यादि में एनआइसी के ई-प्रोक्योरमेंट प्लेटफार्म का प्रयोग करते हुए सभी निर्माण कार्यो, सेवाओं, जॉब वर्क, सामग्री क्रय के लिए ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली को लागू किया जाएगा। निर्माण कार्यो, सेवाओं, जॉब वर्क, सामग्री क्रय के लिए निविदा प्रक्रिया मैनुअल विधि से संपादित की जाती है। उन निविदाओं को ई-प्रोक्योरमेंट एवं ई-टेंडरिंग के माध्यम से कराया जाना प्रत्येक विभाग के लिए अनिवार्य होगा। संबंधित विभागों, उपक्रमों द्वारा ई-टेंडरिंग तथा ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू करने को आवश्यक हार्डवेयर, प्रशिक्षण, सॉफ्टवेयर कस्टमाइजेशन, डिजिटल सिग्नेचर आदि व्यवस्था तीन माह में पूर्ण करायी जायेगी। निविदा शुल्क (टेण्डर फीस)के भुगतान तथा धरोहर राशि (ईएमडी) के भुगतान एवं वापसी की प्रक्रिया भी भौतिक प्रारूप में न करके ऑनलाइन की जायेगी। समस्त कार्य इलेक्ट्रानिक माध्यम से किए जायेंगे। ई-प्रोक्योरमेंट के बिड्स एवं डाटा की गोपनीयता, सुरक्षा तथा अनुरक्षण का दायित्व एनआइसी का होगा। ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में नियमों एवं प्रक्रिया में कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है। अपितु वर्तमान नियमों एवं प्रक्रिया के अन्तर्गत ही केवल इलेक्ट्रानिक मीडिया का उपयोग करते हुए टेण्डरिंग की कार्यवाही की जायेगी। आइटी एवं इलेक्ट्रानिक विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अधीनस्थ यूपी इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन लिमिटेड, पूर्ववत् प्रदेश में ई-टेंडरिंग/ई-प्रोक्योरमेंट लागू करने हेतु नोडल एजेंसी होगी। ई-प्रोक्योरमेंट/ई-टेंडरिंग में प्रतिभाग करने वाले ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों एवं टेण्डर समिति के सदस्यों को डिजिटल सिग्नेचर प्राप्त करने होंगे। कैबिनेट ने इस संबंध में अन्य फैसलों के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।
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स्टांप ड्यूटी में 210 करोड़ रुपये की छूट
 कैबिनेट ने गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट को पुनर्जीवित करने के लिए फर्टिलाइजर कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (एफसीआइएल) से हिन्दुस्तान उवर्रक एवं रसायन लिमिटेड को भूमि के ट्रांसफर के लिए अनुमानित स्टांप शुल्क 210 करोड़ रूपये की छूट के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि हिन्दुस्तान उवर्रक और रसायन लिमिटेड, एनटीपीसी, कोल इंडिया लिमिटेड तथा इंडियन ऑयल कारपोरेशन का संयुक्त उपक्रम है। भारत सरकार द्वारा 13 जुलाई, 2016 को इस संयुक्त उपक्रम द्वारा गोरखपुर स्थित उवर्रक प्लांट को पुनर्जीवित किये जाने का प्रस्ताव अनुमोदित किया गया है। सरकार ने जुलाई 2016 में 6500 करोड़ रुपये निवेश का निर्णय लिया लेकिन, पिछली सपा सरकार इस कार्यक्रम को गति नहीं दे पा रही थी। अब कैबिनेट के इस फैसले से पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक नई क्रांति की पहल हुई है। वहां रोजगार और विकास की संभावना बढ़ी है। किसानों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। उवर्रक उत्पादन से आपूर्ति में वृद्धि होने से देश में उवर्रक आयात में कमी आयेगी और विदेशी मुद्रा भण्डार की बचत होगी। इस उवर्रक प्लांट की स्थापना फर्टिलाइजर कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (एफसीआइएल) की मौजूदा भूमि के  630 एकड़ पर की जानी है। जिसका चिन्हांकन कर लिया गया है। यह भूमि फर्टिलाइजर कारपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड से हिन्दुस्तान उवर्रक और रसायन लिमिटेड को 55 वर्ष की अवधि के लिए लीज पर दी जानी है।
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जिला खनिज फाउंडेशन न्यास को मंजूरी
कैबिनेट ने जिला खनिज फाउंडेशन न्याय-2017 को मंजूरी दी है। इसके तहत खनिज से मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा क्षेत्रीय लोगों के विकास पर खर्च होगा। इससे विशेष रूप से बुंदेलखंड को लाभ मिलेगा। बुंदेलखंड ने भाजपा को एकतरफा बहुमत दिया तो भाजपा सरकार ने रिटर्न गिफ्ट दिया है। इसके तहत जिला खनिज फाउंडेशन की निधि के 60 प्रतिशत फंड का उपयोग प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र यथा-पेय जल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण उपाय, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, स्वच्छता, कौशल विकास पर खर्च किया जाएगा। इसके अलावा 40 प्रतिशत अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों भौतिक संरक्षण, सिंचाई आदि पर व्यय किया जाएगा। जिला खनिज निधि में पट्टाधारक द्वारा जमा की जाने वाली धनराशि रॉयल्टी के अतिरिक्त होगी और रॉयल्टी के एक तिहाई से अधिक नहीं होगी। न्यास की निधि में प्राप्त होने वाली धनराशि वाणिच्यिक राष्ट्रीयकृत बैंक में रखी जाएगी, जिसका संचालन संबंधित खान अधिकारी व प्रबंध समिति द्वारा नामित सदस्य के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा। जिला खनिज फाउंडेशन की स्थापना 25 अप्रैल, 2017 को अधिसूचना के माध्यम से की गयी है। इस फाउंडेशन की संरचना एवं क्रिया-कलाप के लिए उत्तर प्रदेश जिला खनिज फाउंडेशन न्यास नियमावली, 2017 का प्रख्यापन किया जा रहा है। नियमावली के अनुसार फाउंडेशन की निधि में मुख्य खनिज के प्रत्येक पट्टा धारक द्वारा खनिज की निकासी के सापेक्ष देय रॉयल्टी के ऐसे प्रतिशत की धनराशि, जिसका निर्धारण भारत सरकार द्वारा किया जाएगा एवं जो रॉयल्टी के अतिरिक्त होगा, जमा की जाएगी। इसी प्रकार उप खनिज के पट्टा धारकों द्वारा खनिज की निकासी के सापेक्ष देय रॉयल्टी के 10 प्रतिशत की धनराशि या ऐसी धनराशि, जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाएगी, जिला खनिज फाउण्डेशन की निधि में जमा होगी। खान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जिला खनिज फाउंडेशन की निधि के उपयोग सबंधी निर्देश 'प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजनाÓ में दिए गए हैं।
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विधानमंडल से पारित होगा जीएसटी बिल
सुरेश खन्ना ने बताया कि कैबिनेट ने माल व सेवाकर विधेयक (जीएसटी) का अनुमोदन किया है। अगले विधान मंडल सत्र में इसे पारित किया जाएगा। लोकसभा और राज्यसभा ने इसे पारित किया है। इसी को विधानसभा में भी पारित किया जाना है।
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 छठवीं कैबिनेट

(पुन: अपडेट) महत्वपूर्ण-कैबिनेट- ब्यूरो : अयोध्या और मथुरा-वृंदावन अब नगर निगम
नोट : ठेले-खोमचे वालों के हक में नई नियमावली, खबर में पथ विक्रय समिति में व्यापार मंडल और पार्षदों को शामिल किया जाएगा, जोड़ा गया है।
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 कैबिनेट की मंजूरी
- आने वाले निकाय चुनाव में यहां भी चुने जाएंगे महापौर
- रेल, सड़क और हवाई सुविधाओं का होगा विकास
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 राज्य ब्यूरो, लखनऊ : पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण और भगवान राम व कृष्ण की जन्मस्थली अयोध्या और मथुरा-वृंदावन पर भाजपा सरकार मेहरबान दिखी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की छठवीं बैठक में चार नगर पालिका परिषदों को जोड़कर दो नगर निगम बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। आने वाले निकाय चुनाव में यहां महापौर के लिए चुनाव होगा। भाजपा ने लोक कल्याण संकल्प पत्र में भी इन नगरों के विकास के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है। वैसे पूर्व की सपा सरकार में भी अयोध्या-फैजाबाद और मथुरा को नगर निगम बनाए जाने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की थी।
मंगलवार को लोकभवन में कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा तथा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने पत्रकारों को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। शर्मा ने बताया कि अयोध्या और फैजाबाद नगर पालिका परिषदों को मिलाकर अयोध्या नगर निगम और मथुरा नगर पालिका परिषद तथा वृंदावन नगर पालिका परिषद को मिलाकर मथुरा-वृंदावन नगर निगम के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। राम के प्रति आस्था की वजह से हर वर्ष देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु यहां आते हैं। इस वजह से रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। सरकार श्रद्धालुओं को रेल, सड़क और हवाई सुविधा देने के लिए प्रयासरत हैं। नगर निगम बनने से इसमें सहूलियत होगी और बिजली, पानी समेत तमाम बुनियादी ढांचों को मजबूत करने में सहूलियत होगी। साथ ही, दोनों नए नगर निगमों के लिए अधिसूचना में संशोधन या परिवर्तन के लिए नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को अधिकृत किया गया है।
 शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता धार्मिक नगरों का विकास करना है। कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन में भी देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। मथुरा-वृंदावन जैसे नगर में तमाम बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। नगर निगम बनने से बिजली, पानी, सड़क, रोजगार की दिशा में बढ़ावा मिलेगा। शर्मा ने बताया कि मथुरा और वृंदावन को नगर निगम बनाने में आम जनता की सुविधा का भी ख्याल रखा जाएगा। मथुरा व वृंदावन प्रमुख धार्मिक नगर हैं और श्रीकृष्ण की जन्म स्थली होने की वजह से राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन के क्षेत्र में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। शर्मा ने कहा कि नगर निगमों के गठन से निकाय की आय में वृद्धि होगी और वहां अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता होगी।
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इस बार 16 नगर निगमों के होंगे चुनाव
कैबिनेट से अयोध्या और मथुरा-वृंदावन को नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद अब निकाय चुनाव की तस्वीर बदली दिखेगी। 2012 में हुए निकाय चुनाव में प्रदेश में सिर्फ 12 नगर निगमों में चुनाव हुए थे। इस बीच राज्य सरकार ने सहारनपुर और फीरोजाबाद को भी नगर निगम का दर्जा दिया लेकिन, यहां चुनाव नहीं हुए। अब 2012 के मुकाबले सहारनपुर, फीरोजाबाद, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन के नगर निगम बनने से कुल 16 नगर निगमों में महापौर के चुनाव होने हैं।
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ठेले-खोमचे वालों के हक में नई नियमावली
-अब गठित होगी नगर पथ विक्रय समिति
कैबिनेट ने फुटपाथ पर ठेला-खोमचा लगाकर रोजी-रोटी कमाने वालों के हक में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) नियमावली, 2017 को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि केंद्र ने 2014 में इनके लिए एक अधिनियम बनाया था लेकिन पिछली सपा सरकार ने इसमें रुचि नहीं ली। सरकार तब सिर्फ वसूली के धंधे में लगी थी और सपा सरकार के डीएनए में ही वसूली शामिल थी। योगी सरकार ने गरीबों के हित में कदम बढ़ाया है। भारत सरकार के पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 (अधिनियम संख्या-सात सन 2014) की धारा-36 के अधीन प्रदत्त शक्तियों के अन्तर्गत नगरीय पथ विक्रेताओं के अधिकारों का संरक्षण और पथ विक्रय की गतिविधियों तथा इससे सम्बद्ध या अनुषंगिक मामलों के विनियमन के दृष्टिगत यह फैसला लिया गया है।
नियमावली के मुताबिक प्रत्येक निकाय में यथास्थिति नगर आयुक्त/अधिशासी अधिकारी की अध्यक्षता में नगर पथ विक्रय समिति का गठन किया जाएगा। समिति का कार्यकाल प्रथम बैठक से पांच वर्ष की अवधि के लिए होगा। किन्तु नियमावली के अनुरूप कार्य नहीं करने पर राज्य सरकार समिति को भंग कर सकती है। भंग किए जाने की तारीख से तीन माह के भीतर नई नगर पथ विक्रय समिति का गठन किया जाएगा। नगर पथ विक्रय समिति सभी विद्यमान पथ विक्रेताओं का सर्वेक्षण, पथ विक्रय परिक्षेत्र की धारण क्षमता और पथ विक्रय परिक्षेत्र में पथ विक्रेताओं को स्थान देना सुनिश्चित करेगी। पथ विक्रय प्रमाण पत्र दिए जाने के पश्चात् पथ विक्रेताओं को समिति द्वारा परिचय पत्र भी जारी किया जाएगा। नई अवस्थापना विकास योजनाओं द्वारा हटाए गए पथ विक्रेताओं को समायोजित किया जाएगा, ताकि वह नई अवस्थापना द्वारा उत्पन्न आजीविका अवसरों का उपयोग कर सकें। प्रत्येक नगर पथ विक्रय समिति में नगर आयुक्त या अधिशासी अधिकारी अध्यक्ष होगा। समिति की सदस्य संख्या नगर पंचायत के मामले में अधिकतम 10, नगर पालिका परिषद के मामले में कम से कम 10 और अधिक से अधिक 20 तथा नगर निगम के मामले में कम से कम 20 और अधिकतम 40 होगी। समिति में महिला, पिछड़ा, अनुसूचित जाति और सभी का प्रतिनिधित्व रहेगा। मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि इस समिति में व्यापार मंडल और पार्षदों को शामिल किया जाएगा। विक्रेताओं को अलग जगह भी दी जाएगी।
समिति में नगर पालिका क्षेत्र के पथ विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या 40 प्रतिशत से कम नहीं होगी। 14 वर्ष से कम आयु के लोगों को पथ विक्रेता के रूप में पंजीकृत नहीं किया जाएगा। प्रत्येक स्थिर पथ विक्रेता को पथ विक्रय परिक्षेत्र में, ऐसे जगह उपलब्ध कराई जाएगी जिससे पैदल यातायात में बाधा उत्पन्न न हो। पैदल सेतुओं, ऊपरिगामी सेतुओं और फ्लाईओवर के ऊपर पथ विक्रय क्रिया-कलाप नहीं किया जाएगा। राज्य स्तर पर पथ विक्रय से संबंधित समस्त मामलों के समन्वय के लिए निदेशक, स्थानीय निकाय या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी राज्य नोडल अधिकारी होगा।

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भारतीय स्टांप की अधिसूचना में संशोधन का निर्णय
कैबिनेट ने स्टाम्प के मामलों के निस्तारण के लिए जिम्मेदारी बांटी है। जो मामले अपील में आते हैं उनके निस्तारण के लिए धनराशि को आधार बनाया है। कैबिनेट ने भारतीय स्टांप की 16 सितंबर 2016 की जारी अधिसूचना में संशोधन का निर्णय किया है। इस फैसले से स्टांप शुल्क की सुनवाई के लिए 'न्यायिक सदस्य राजस्व परिषदÓ के स्थान पर 'सदस्य/न्यायिक सदस्य राजस्व परिषदÓ किया गया है। साथ ही उपायुक्त, स्टांप, संबंधित मंडल/वृत्त की स्टांप शुल्क के विवादों की अधिकारिता की सीमा में भी संशोधन किया गया है। इसके तहत मुख्य नियंत्रण राजस्व प्राधिकारी की शक्तियां विभागीय उपायुक्त, स्टांप के अतिरिक्त मंडलायुक्त एवं अपर मंडलायुक्त को अपीलों के निस्तारण के लिए नामित किया गया है। साथ ही, सदस्य/न्यायिक सदस्य, राजस्व परिषद को 25 लाख रुपये से अधिक, मंडलायुक्त को 25 लाख रुपये तक तथा अपर मण्डलायुक्त/उपायुक्त स्टाम्प को 10 लाख रुपये तक की सीमा तक स्टांप वाद के मामलों में सुनवाई का अधिकार दिया गया है। उपायुक्त स्टाम्प, संबंधित  मण्डल/वृत्त की स्टांप शुल्क के विवादों की अधिकारिता में संशोधन करते हुए 10 लाख रुपये तक की सीमा तक का अधिकार दिया गया है। सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि इससे निस्तारण में तेजी आएगी।
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08/11/2012

घोटालों पर पर्दा

आनन्द राय, लखनऊ

उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआइडीसी) के मुख्य अभियंता अरुण कुमार मिश्रा सिर्फ ट्रोनिका सिटी और मनी लांडिं्रग के आरोपों से ही नहीं घिरे हैं, बल्कि सड़कों के निर्माण में संशोधित प्रवेश विधि (एमपीएम) के मद से करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोपी हैं। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि जांच को गति देने के बजाय अफसर मिश्रा के घोटालों पर पर्दा डाल रहे हैं। औद्योगिक विकास विभाग ने नौ अक्टूबर को यूपीएसआइडीसी के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर अरुण मिश्रा द्वारा वर्ष 2008 से 2011 के मध्य एमपीएम मद से किये गये फर्जी भुगतान के संदर्भ में जांच का निर्देश दिया। कहा गया कि मुख्यमंत्री खुद इस मामले पर गंभीर हैं इसलिए प्राथमिकता में जांच कराकर 15 दिनों के भीतर आख्या भेजें। इस निर्देश के बावजूद अब तक जांच शुरू होना तो दूर, उल्टे अरुण मिश्रा को पिकप के प्रबंध निदेशक कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। यह सब अरुण मिश्रा की पहुंच का कमाल बताया जा रहा है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड इम्प्लाइज यूनियन के प्रांतीय महामंत्री बीके तिवारी ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मिश्रा के काले कारनामों की शिकायत की थी। राज्यपाल ने इस मामले में सम्बंधित विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कमेटी कर चुकी है प्रारंभिक जांच : बीते वर्ष यूपीएसआईडीसी इंप्लॉइज यूनियन की शिकायत पर अभियंता दिनेश्र्वर दयाल की अध्यक्षता में बनी कमेटी मामले की प्रारंभिक जांच कर चुकी है। कमेटी ने औद्योगिक क्षेत्र बंथर, रूमा, मंधना, मलवा में आठ करोड़ से अधिक का घोटाला पकड़ा। फैजाबाद में बिना काम कराये 16 करोड़ रुपये भुगतान का मामला भी जांच के दौरान सामने आया। टीम ने देवरिया, जगदीशपुर, उटेलवा औद्योगिक क्षेत्रों में भी एक करोड़ से अधिक के घोटाले पकड़े थे। लेकिन इससे पहले की और क्षेत्रों में जांच होती राजनीतिक दबाव के कारण इसे रोक दिया गया। आरोप है कि वर्ष 2008 से 2010 के बीच मुख्य अभियंता रहते अरुण मिश्रा ने जगदीशपुर, कुर्सी रोड, बस्ती, फैजाबाद, देवरिया, मलवा व अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण में कागज में एमपीएम का कार्य करा करीब एक अरब का घोटाला किया।
 ..तो इस तरह से हुआ एमपीएम घोटाला

यूपीएसआइडीसी में सड़कों के निर्माण का कार्य लोक निर्माण विभाग के मानक के अनुरूप किया जाता है। पीडब्ल्यूडी की सड़कों के निर्माण में मोटाई बढ़ाने के लिए एमपीएम का कार्य नहीं किया जाता है। बावजूद इसके निगम की सड़कों के निर्माण में एमपीएम का प्रावधान कर इस मद में करीब करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। बीके तिवारी का आरोप है कि एमपीएम का प्रावधान पूरी तरह अवैध है और यह यूपीएसआइडीसी में मान्य नहीं है।


12/03/2012

किचन के भी मास्टर हैं अखिलेश यादव

आनन्द राय


लखनऊ, 11 मार्च : सैंतीस साल के चन्द्रशेखर सिंह के अलबम में यूपी के होने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से जुड़ी अनगिनत यादें हैं। आस्ट्रेलिया में पढ़ते समय दोनों एक साथ अगल-बगल पेइंग गेस्ट बनकर रहे। दोनों ने सुख-दुख साझा किया। उन दिनों मुलायम सिंह यादव भारत सरकार के रक्षा मंत्री थे, लेकिन अखिलेश ने अपनी सादगी से कभी चन्द्रशेखर को अहसास नहीं होने दिया कि उन दोनों की हैसियत में जमीन-आसमान का अंतर है। उनके इसी बड़प्पन को चन्द्रशेखर आज तक भूल नहीं पाए हैं और अब भी उनकी दोस्ती की गांठ उतनी ही मजबूत है। 1/2 फैजाबाद रोड, शिवस्थली में रहने वाले चन्द्रशेखर बैंकिंग ट्रेड से जुड़े हैं।

पहली मुलाकात : 1996 में चन्द्रशेखर यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न सिडनी से एमबीए करने गए थे। उन्हीं दिनों अखिलेश यादव ने यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी में एमटेक में दाखिला लिया। अखिलेश के हास्टल के रूम पार्टनर दीपक और चन्द्रशेखर के रूम पार्टनर सुनील धींगरा दिल्ली के रहने वाले थे। अखिलेश ने आस्ट्रेलिया पहंुचते ही भारतीयों को एकत्र करना शुरू किया। तभी दीपक और सुनील ने अखिलेश और चन्द्रशेखर की मुलाकात कराई। फिर धीरे-धीरे दोनों एक दूसरे से मिलने जुलने और फोन पर बातें करने लगे।

छोड़ा हॉस्टल : उस समय चन्द्रशेखर डेनट्रे ड्राइव में पेइंग गेस्ट थे। दोनों के बीच अपनी दिनचर्या को लेकर बातें होती। लगभग ढाई तीन महीने बाद अखिलेश ने हास्टल छोड़ दिया। चन्द्रशेखर के संदर्भ से वह उनके पड़ोस में आस्ट्रेलियन और फिजी इंडियन दंपती डेविड और रश्मि के पेइंग गेस्ट बन गए। अगल-बगल आने के बाद दोनों की नजदीकियां बढ़ती गई। तभी पता चला कि इस नौजवान के दिल में जो ख्वाब पल रहे हैं, उसका सिरा उत्तर प्रदेश की तकदीर से जुड़ा है।

आलू की रसेदार सब्जी और भारतीय प्रेम : आस्ट्रेलिया में अखिलेश का भारतीय प्रेम हर दिन बढ़ता गया। देसी खाने की याद उन्हें खूब आती और उन्होंने किचन में भी अपना दखल दिया। आलू-मटर की रसेदार सब्जी इतनी अच्छी बनाते कि सभी दोस्त तारीफ किए बिना नहीं रहते। उनकी हर पार्टी में यह सब्जी जरूर होती।

संवेदनशील व्यक्तित्व और मुश्किल के साथी : उस दिन बेहद मुश्किल का क्षण था। चन्द्रशेखर के मकान मालिक सैम का अचानक एक्सीडेंट हो गया। उस समय चन्द्रशेखर आटोमेटिक गाड़ी चलाना जानते थे। अस्पताल जाने के लिए अपने एक परिचित की गाड़ी मांगी। खूब बारिश हो रही थी और वह घबराहट में भी थे। तभी अखिलेश को पता चला तो वह भी साथ चल दिए। ड्राइविंग करते समय चन्द्रशेखर से गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया। अखिलेश ने उनको तसल्ली दी और खुद ड्राइव कर अस्पताल तक ले गए।

बच्चों से लगाव : अखिलेश को बच्चों से बहुत लगाव है। चन्द्रशेखर के मकान मालिक सैम के बच्चों के जन्मदिन पर अखिलेश और वह मिल जुलकर केक काटते और उनको गिफ्ट देते। इसी तरह डेविड के बच्चों के जन्म दिन पर भी वह लोग मिलकर आयोजन करते।

मेधावी विद्यार्थी और सादा जीवन : चन्द्रशेखर बताते हैं कि अखिलेश पढ़ाई में बहुत रुचि लेते थे। अपना हर असाइनमेंट पूरा करते थे। उनका जीवन इतना सादा था कि मेट्रो जैसी सेवा का प्रयोग करते थे। वह टंगारा से ही यात्रा करते थे।

पर्यावरण में गहरी रुचि : अखिलेश की पर्यावरण में गहरी रुचि है। आस्ट्रेलिया में क्रीक (नहरों) के किनारे पेड़ पौधे और फूलों को देखकर वह बहुत खुश होते और भारत के लिए उसी तरह की परिकल्पना करते।







UP Election 2012 Perception| Post Issues, Views at Dainik Jagran

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01/03/2012

मैं इतना स्वार्थी भी नहीं हूं कि सिर्फ अपने लिए सोचूं

बाबू सिंह कुशवाहा


एक समय था जब बाबू सिंह कुशवाहा बसपा प्रमुख मायावती के गिने चुने राजदारों में शुमार होते थे। एनआरएचएम में जब हत्याओं का दौर शुरू हुआ तो खून की छीटे बाबू सिंह कुशवाहा के भी दामन पर आए लेकिन तब बसपा और पूरी सरकार उनके बचाव में खड़ी हुई। भले ही उनका मंत्री पद चला गया था लेकिन सत्ता के गलियारों में उनकी हनक और धमक खत्म नहीं हुई लेकिन न जाने अचानक ऐसा क्या हुआ कि बसपा के अंदर ही बाबू सिंह कुशवाहा अपने को असुरक्षित महसूस करने लगे और नौबत यहां तक आ गई कि उन्हें सार्वजनिक तौर पर यह कहना पड़ा कि कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन, कैबिनेट सचिव शशांक शेखर और प्रमुख सचिव गृह फतेहबहादुर उनकी हत्या करा देना चाहते हैं। उसके बाद उन्हें बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कुछ समय तक उनकी कांग्रेस के साथ खिचड़ी पकी लेकिन बात नहीं बनी तो उन्होंने भाजपा से हाथ मिला लिया। वह आज कल भाजपा के लिए वोट मांग रहे हैं। मंगलवार को दैनिक जागरण के साथ बातचीत में उन्होंने अपने दिल की बात रखी है। प्रस्तुत है आनन्द राय के साथ हुई उनकी बातचीत के प्रमुख अंश :

0बसपा से आपका मोहभंग क्यों हो गया?


- मेरे खिलाफ तमाम षडयंत्र हुए और मैं चुप रहा। 28 नवंबर को मुझे बसपा से बाहर कर दिया गया तो भी खामोश रहा। लेकिन जब हद हो गयी.... (फिर खामोश हो जाते हैं)

0 क्या हद हो गयी ?

- मेरे खिलाफ बड़ी साजिशें हुई। अचानक बांदा में मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया और जिसने मुकदमा किया उसकी सुरक्षा बढ़ाई गयी। उसे टिकट दिया गया। मेरे लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराकर मुझे तहस-नहस करने की कोशिश की गई।

0यह सब क्यों किया गया!
- मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, कैबिनेट सचिव शशांक शेखर और प्रमुख सचिव गृह फतेहबहादुर मेरी हत्या की साजिश में लगे थे। मुकदमे इसलिए दर्ज करवाए जा रहे थे कि जेल भेजकर वहां मेरी हत्या करा दी जाए। इसकी तैयारी हो चुकी थी।

0 क्या इसी खौफ और सीबीआइ की डर से आप कांग्रेस में जाना चाह रहे थे?

- यह तो अफवाह है। सीबीआइ जांच से बचने के लिए बसपा ने आठ साल से कांग्रेस को समर्थन दिया है। यह कौन नहीं जानता है। मैं तो यह भी जानता हूं कि बसपा ने किसको बचाने के लिए कब किससे समझौता किया है।

0राहुल गांधी से तो आपकी मुलाकात हुई?

-राहुल से मेरी कोई मुलाकात नहीं हुई।

0 तो क्या वह गलत बोल रहे हैं?

- मैं यह कैसे कह सकता हूं। वह बड़े नेता हैं, लेकिन मेरी उनसे मुलाकात नहीं हुई, यही सच है।

0भाजपा वालों ने आपसे सम्पर्क किया था या आपने किया था?

- ओबीसी के आरक्षण की कटौती के खिलाफ भाजपा पिछड़ों के साथ थी, इसलिए हम उसके साथ हो गए। सपा और बसपा तो कांग्रेस के पक्ष में थीं और एक बार भी विरोध में जुबान नहीं खोली। यह दोनों दल सही मायने में पिछड़ों के विरोधी हैं।

0लेकिन भाजपा विपक्ष के दबाव में आ गई और आपकी सदस्यता भी स्थगित हो गई?

- विपक्ष नहीं, मीडिया ने मेरा इतना बाजा बजा दिया कि .. और मैं इतना स्वार्थी भी नहीं हूं कि सिर्फ अपने लिए सोचूं।

0तो फिर इतना त्याग मायावती के साथ क्यों नहीं किए?

- मुझे तीखा बोलने पर मजबूर न करें। मुझे बसपा अध्यक्ष के चरित्र की नहीं, अपनी चिंता है। 20 साल किसी के साथ रहा हूं तो सोचता हूं कि ऐसी बात न निकले जिससे मुझे पछतावा हो। लेकिन 20 साल की वफादारी की उन लोगों ने कोई कीमत नहीं समझी। मेरी पीठ में छुरा घोंप दिया।

0एनआरएचएम घोटाले में तो आपके खिलाफ सीबीआइ के पास सबूत हैं?

-पहले यह जानकारी करिए कि वाकई घोटाला कहां हुआ। एनआरएचएम के प्रोसीजर मिस्टेक को जानिए। इसमें मंत्री की कोई भूमिका नहीं होती। मुख्यमंत्री पदेन अध्यक्ष हैं और सभी फैसले उनकी अध्यक्षता में होने वाली बैठकों में होते हैं। उनकी अनुपस्थिति में विभागीय मंत्री को अध्यक्षता करनी होती है। पौने दो साल के कार्यकाल में मुझे तो कभी अवसर ही नहीं मिला। मेरा इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है।

0फिर आपके खिलाफ सीबीआइ का मुकदमा और बार-बार पूछताछ?

- देखिए यह तो शशांक शेखर और फतेहबहादुर ने पूरा होमवर्क किया। इन्हीं लोगों ने सारी पीआइएल कराई। सभी पेपरवर्क ऐसे कराया, जिससे मैसेज जाए कि कुछ गड़बड़ है। इसमें नीता चौधरी ने भी उन लोगों का साथ दिया। यह लोग तो मुझे सचान मामले में जेल भेजने की तैयारी कर चुके थे। (यह बताते हुए कुशवाहा रोने लगे) .... वे लोग अभी भी मेरी हत्या की साजिश कर रहे हैं।

0दो-दो सीएमओ की हत्याएं? इसकी वजह?

-यह तो मुझे फंसाने और बदनाम करने का षड्यंत्र रहा। कुछ बड़े लोगों का नाम नहीं लेना चाहूंगा, लेकिन हत्याएं इसीलिए कराई गई कि मैं बदनाम हो जाऊं।

0 कहा जाता है कि बसपा सरकार में कोई काम बगैर पैसे के नहीं होता?

(अनमना होकर) दूसरा सवाल पूछिए।

0 लेकिन यह तो बता सकते हैं कि सरकार में पैसों के लेन-देन में कौन लोग शामिल रहते हैं?

बहुत सारी चीजें कहने की नहीं होती हैं। कौन सी ऐसी चीज है जो मीडिया से छिपी है।






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