16/02/2011

नेपाली के हाथ था यूपी के शूटरों का 'रिमोट






- बैंकाक में मारा गया भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली

- दत्ता सामंत, जमीम, तानशा और शाहिद आजमी की हत्या नेपाली ने कराई

लखनऊ, 16 फरवरी। उत्तर प्रदेश, मुंबई और नेपाल में आपराधिक गिरोह चला रहे डान भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली के बैंकाक में मारे जाने की बात सूत्रों ने पुष्ट कर दी है। गुजरे दिसम्बर के आखिरी हफ्ते में नेपाली के बैंकाक में मारे जाने की खबर चर्चा में आयी, लेकिन तबसे इस खबर को लेकर संशय बरकरार था। नेपाली के मारे जाने से यूपी पुलिस को राहत मिली है, क्योंकि यहां के हाइप्रोफाइल नए शूटरों का रिमोट उसके ही हाथों में था। वह शूटरों को हथियार, सुपारी और पनाह भी देता था।

भरत नेपाली का नाम यूं तो अण्डरवल्र्ड में तबसे कायम है, जबसे दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन का गैंगवार शुरू हुआ, लेकिन मुंबई में मजदूर नेता दत्ता सामंत की हत्या के बाद वह सुर्खियों में आ गया। मुंबई के मलाड इलाके में रहकर कभी छोटा राजन गैंग के लिए ड्राइवर की भूमिका निभाने वाले नेपाली की महत्वाकांक्षा इतनी तेज बढ़ी कि उसने छोटा राजन से बगावत कर खुद का गैंग खड़ा कर लिया। फिर नेपाल में भी उसने अपना साम्राज्य खड़ा किया। भरत नेपाली ने जून 2010 में छोटा राजन के साथी फरीद तानशा की हत्या चेंबूर के तिलकनगर में यूपी के शूटरों से कराई। उसने इलाहाबाद के चर्चित अपराधी राजेश यादव गैंग को हत्या की सुपारी दी। यह बात तब खुली जब एसटीएफ ने अगस्त 2010 में जौनपुर निवासी ओसामा उर्फ राहुल राय को बादशाहनगर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। ओसामा भी तानशा की हत्या में शामिल था। मुंबई बम विस्फोट के एक आरोपी के वकील शाहिद आजमी की हत्या 11 फरवरी 2010 को भरत नेपाली गैंग के विजय शेट्टी उर्फ बाबा और जौनपुर, आजमगढ़ के शूटरों ने की।

वियतनाम तक आपराधिक गतिविधि संचालित करने वाले प्रकाश पाण्डेय उर्फ बंटी के साथी उत्तरांचल के भूपेन्द्र सिंह वोहरा को अभी महराजगंज जिले के सोनौली बार्डर से गिरफ्तार किया गया, तब भी भरत नेपाली के यूपी में बढ़ती गतिविधियों की बात सामने आयी। भूपेन्द्र भी भरत नेपाली के लिए काम कर चुका है। नेपाल में भी भरत नेपाली ने अपने हाथ दिखाए। उसने सात फरवरी 2010 को काठमाण्डू में स्पेस टाइम्स नेटवर्क समूह के सीइओ जमीम शाह की हत्या करा दी। यह हाई प्रोफाइल हत्या जाली नोटों के अन्तर्राष्ट्रीय कारोबार में वर्चस्व के लिए हुई और इसमें मुख्य भूमिका नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी ने निभाई, जो हत्या के कुछ दिन पहले 25 लाख रुपये जाली नोटों के साथ काठमाण्डूू में गिरफ्तार हुआ था। इसके पूर्व जमीम शाह से जुड़े जाली नोटों के कारोबार में शामिल डान माजिद मनिहार की 6 अक्टूबर 2009 को नेपालगंज तथा परवेज टाण्डा की 25 दिसंबर 2009 को बुटवल में हत्या हुई। इस हत्या में भी भरत नेपाली के गुर्गे शामिल थे। लखनऊ, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर और गोरखपुर के अपराधियों से भरत नेपाली के रिश्ते जगजाहिर हैं।

1 टिप्पणी:

nilesh mathur ने कहा…

आनंद साहब, कमाल की रिपोर्टिंग है!

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