22/08/2009

बुद्ध की धरती से एक नया अखबार



आनंद राय , गोरखपुर

चार पाँच दिन पहले नजीर भाई का फोन आया। बोले एक अनुरोध है। हमने छूटते ही कहा आदेश करें साहब। कहने लगे एक अखबार का आपको लोकार्पण करना है। मेरी तो साँस टंग गयी। पर उनका जोर ऐसा कि मेरा कुछ बस नही चला। बस मैंने यही कहा आउंगा लेकिन मुझे आप कोई जिम्मेदारी न दे तो ही बेहतर है। निर्धारित समय पर मैं पहुंचा तो मुझे पता चला कि मुझे ही समारोह की अध्यक्षता करनी है। सिद्धार्थ नगर जिले में बुद्धा की धरती से एक अखबार सिटी की आवाज का प्रकाशन, मुझे कुछ अच्छा भी लगा और कुछ सोचने पर मजबूर करने जैसा भी। नजीर मलिक दैनिक जागरण के जिले के ब्यूरो प्रमुख हैं और दो दशक पुराने मित्र भी। ब्यूरो के साथी संतोष श्रीवास्तव ने भी हर हाल में पहुचने पर जोर दिया था। अखबार के प्रकाशन की जिम्मेदारी मनोज श्रीवास्तव ने उठायी। वे ही सम्पादक हैं । उन्हें शुभकामनाओं के साथ अखबार का लोकार्पण हो गया। जिलाधिकारी शशिकांत शर्मा मुख्य अतिथि थे और कई अधिकारी मौके पर उपस्थित थे। जिला पंचायत के सभागार में संपन्न हुए इस समारोह में मुझे लगा कि सिद्धार्थ नगर की धरती तो बहुत ही उर्वरा है। साप्ताहिक अखबार सिटी की आवाज को लेकर मेरे मन में जो कुछ संशय था वह मेरे उद्बोधन के दौरान ख़त्म हो गया। अखबार का भविष्य क्या होगा मैं कुछ कह नही सकता। मैंने तो अपनी भरपूर शुभकामना दी है। अखबार जनता की आवाज बने यही मेरी कामना भी है।पर जिन लोगों ने अपने संसाधन और छोटी जगह का रोना रोया उनके लिए हमने यह जरूर कहा कि तथागत इसी धरती पर पैदा हुए। उन्हें राजपाट अपने से बाँध नही पाया। अनोमा के तट पर उन्होंने राजसी वस्त्रों का परित्याग किया और शान्ति की तलाश में चल पड़े। उन्होंने तो अपने विचारों की ताकत से पूरी दुनिया को अपना अनुयायी बना लिया। सिटी की आवाज विचारों की ताकत पैदा करे तो कौन कहेगा कि उसकी सरहद छोटी है। दैनिक जागरण अखबार में काम करते हुए मुझे १४ साल गुजर गए। इसके पहले कई अखबारों में रहा लेकिन यह तो मैं बड़ी साफगोई से स्वीकार कर रहा हूँ कि हमें अपने को जमाने की रफ़्तार से बदलना पड़ता है। मैं हाथ से कम्पोज होने वाले पूर्वांचल संदेश में काम करता था और उन दिनों उस अखबार की एक ताकत थी/ आज भले सूचना क्रांति ने हर आदमी को जागरूक कर दिया और सबके पास पल प्की ख़बर रहती है लेकिन जिस किसी भी अखबार में अच्छी ख़बर छप जाती उसे लोग खोज कर पढ़ते हैं। हमारे एक साथी जीतेन्द्र ने सुबह फोन करके कुछ चिंता जतायी और मूल्यों की बात कही। हमने उन्हें निराश नही किया। नजीर भाई के साथ भी अपने पुराने संघर्ष पर ही हम लोग चर्चा करते रहे। हमारे साथ शिवमूर्ति भैया भी गए थे। छुट्टी लेकर गया था इसलिए शान्ति की धरती पर खूब शांत चित्त से नजीर भाई की गजलें सुनता रहा। लिखने पढने से बावस्ता नजीर भाई जब ख़ुद की लिखी गजलों को अपनी आवाज देते हैं तो पूरी तरह बाँध लेते हैं। मैं अपनी असली भावना पर आ रहा हूँ । किसी ने उनका मन यह कह कर दुखा दिया था कि हिन्दू और मुसलमान की सरहद बनाते हैं। उनकी आँखे भर आयी थी। मैं बहुर देर तक उन्हें यह कहता रहा कि आपको किसी के प्रमाण पत्र की क्या जरूरत है। उन्हें मैंने राही मासूम राजा के आधा गाँव की भुमिका से लेकर टोपी शुक्ला के कई प्रसंगों को सुनाता रहा। उन्होंने मुझे वसीम वरेल्वी की एक रचना सुनाई और मैंने यही कहा कि नजीर भाई हर संशय वाले के लिए आपके पास सबसे बड़ा जवाब यही है। मैंने उनसे वसीम साहब की गजल नही ली इसलिए उसे पोस्ट नही कर रहा हूँ। पर जल्द ही नजीर भाई की और से वह रचना आपके सामने होगी।

4 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

achchaa hai ek akhbaar jantaa kee aavaaj bane.

आनन्द राय ने कहा…

meree bhee yahee khvaahish hai

बेनामी ने कहा…

फोटू बढ़िया हैं.......... बहुत खूब |


:) :( :P :D :$ ;)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

सिद्धार्थनगर से मेरी भी कुछ बेहतरीन यादें जुड़ी हुई हैं। वित्त सेवा की नौकरी की पहली तैनाती यहीं हुई थी। मैं भी नया था और यह जिला भी नया ही था। मैं अपने उत्साह और सक्रियता से जो भी काम शुरू करता लोगों के लिए नया होता। भौचक देखने वालों और नकारात्मक प्रतिक्रिया देने वालों की कमी नहीं थी। जागरण से कभी जुड़ा हुआ था इसलिए नजीर मलिक और संतोष श्रीवास्तव से आत्मीयता स्वाभाविक थी। इन लोगों का बहुत प्यार मिला था।

आज जब एक नया अखबार शुरू हुआ तो विघ्नतोषी फिर हाजिर हो गये। कमाल है...। इस धरती को राजकुमार सिद्धार्थ ने शायद इसी लिए छोड़ दिया था और दुनिया को ज्ञान बाँटते हुए गौतम बुद्ध कहलाए। तथागत की जीवनी कुछ गहराई से पढ़िए तो इस क्षेत्र के बारे में धारणा बदल जाएगी।

मुझे लगता है कि नजीर भाई जैसा प्रतिभाशाली पत्रकार सिद्धार्थनगर का मोह नहीं छोड़ पाने की वजह से ही राष्ट्रीय पहचान नहीं बना पाया। अब वे उसी स्थान से एक नया अखबार निकाल रहे हैं तो हम हार्दिक बधाई और शुभकामना प्रेषित करते हैं। ईश्वर इ्स प्रयास को खूब सफलता दें यही हमारी प्रार्थना है।

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