11/10/2009

मनोज तिवारी मृदुल को क्या अब गोरखपुर की याद आती है.



अभी कुछ दिन पहले मनोज तिवारी मृदुल ने कहा कि अब वे गोरखपुर की राजनीति से तौबा कर रहे हैं. बाकी और कहाँ उनकी नजर है, इसका तो कोई संकेत नहीं है लेकिन मनोज बबुआ वाकई सियासत के बाजीगरों के शिकार हो गए. वे गोरखपुर में लोकसभा का चुनाव लड़ने इस आश्वासन पर आ गए कि यहाँ फिल्म सिटी का निर्माण होगा. चुनावी सभा में वे खूब भीड़ जुटाते थे और यह वादा करते थे कि हर हाल में यहाँ फिल्म सिटी बनवायेंगे. चुनाव हार गए. हार क्या गए, बुरी तरह हार गए. दो लाख से ऊपर वोट पाने वाली समाजवादी पार्टी सिमट कर ७० हजार पर आ गयी. अब वे क्या करते. पंडाल में गए. योगी आदित्य नाथ से आर्शीवाद लिए और फिर चलते बने. तबसे वे कई बार यहाँ आये. एक दो बार गोरखपुर महोत्सव के ऐलान भी किये लेकिन हालत कुछ ऐसी हुई कि उन्होंने आपदा का हवाला देकर महोत्सव से भी पल्ला झाड़ लिया. अब बतौर कलाकार उन्हें गोरखपुर की सुधि आती है. लेकिन कितनी कहा नहीं जा सकता. वैसे यहाँ कलाकार भी बहुत हो गए हैं. मनोज की तो रफ़्तार बहुत तेज है पर उनके मुकाबले कई मनोज खड़े होने की कोशिश में हैं. मनोज कहते हैं कि फिल्म सिटी तो तब बनती जब मैं चुनाव जीत जाता.

    मनोज को अपने वादे याद नहीं हैं. उन्हें यह भी याद नहीं होगा कि गोरखपुर को लेकर क्या क्या बोले. वजह भी है. जबसे उनका यहाँ चुनाव लड़ना तय हुआ तबसे कुछ न कुछ ऐसा हुआ कि लोग उनके पार्टी गंभीर नहीं हो पाए. मनोज पहली बार टिकट मिलने पर अमर सिंह के साथ आ रहे थे. प्रशासन ने उन्हें आने नहीं दिया. एयर पोर्ट पर पुलिस और अमर सिंह के बीच विवाद हो गया. अमर सिंह ने कहा कि पुलिस ने उन्हें मारा है. मनोज ने कहा कि उन्होंने खुद अपना सर कार में दे मारा. बाद में मनोज ने कहा कि यह तो मीडिया वालों ने गलत तरीके से फुटेज दिखा दिया. खैर उन्हें दुबारा अमर सिंह लेकर आये. इस बार उत्साह खूब था. खुली जिप्सी पर वे चले तो गांधी प्रतिमा के पास उन्हें देखने के लिए हुजूम आ गया. पर इस बार कुदरती कहर हो गया. मनोज तिवारी का मंच टूट गया. अमर सिंह गुस्से से लाल पीले हुए और एयर पोर्ट चले गए. इसके बाद तो कोई न कोई ऐसा मामला जरूर हुआ जिससे थोड़ी किरकिरी हुई. एक बार तो हद यह हो गयी कि मनोज के खासमखास सपा नेता भानु प्रकाश मिश्रा ने चुनावी तैयारी की बैठक में कुछ कहा तो सपा महासचिव के के त्रिपाठी और नगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम से उनकी बात बढ़ गयी. भानु के आदमियों ने राइफल लगाकर दोनों सपा नेताओं की खूब लानत मलानत की. इसी तरह एक बार मनोज लगातार किसी न किसी बहाने विवादों में फंसे रहे. अब उनका मोह भंग है. उनसे सिर्फा यही पूछना है कि क्या अब गोरखपुर की याद आती है.

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