30/10/2009

मुन्ना बजरंगी ने दे दी थी यमराज को भी मात

आनन्द राय , गोरखपुर  29 अक्टूबर।




 देश भर की पुलिस के लिए सिरदर्द बने मुन्ना बजरंगी की गिरफ्तारी ने अण्डरव‌र्ल्ड की हलचल तेज कर दी है। सवालों का सिलसिला चल पड़ा है। अण्डरव‌र्ल्ड में अपनी मजबूत पकड़ बना चुके इस अपराधी के बारे में बहुत कम लोगों को पता है कि महज 15 साल की उम्र में उसने अपराध की राह पकड़ ली थी। यही नहीं मुठभेड़ में गोली खाने के बाद भी वह जिंदा बच गया।  उसने यमराज को भी मात दे दी .

     जौनपुर जिले के सुरेरी थाना क्षेत्र के पूरे दयाल कसेरू गांव के पारसनाथ सिंह के बेटे मुन्ना बजरंगी और उसके साथियों ने 29 नवम्बर 2005 को गाजीपुर जिले में मोहम्मदाबाद क्षेत्र के विधायक कृष्णानन्द राय की हत्या की तो उसका नाम सुर्खियों में आ गया। इसके बाद उसने नेपाल में एक पूर्व मंत्री के घर शरण ली। इस दौरान कई बार उसके गोरखपुर में होने की खबर मिली। एक बार सहजनवा में वह पुलिस के हाथ से बच निकला। आपराधिक सफर में मुन्ना के इतने किस्से हैं जिनके लिए पन्ने कम पड़ जायेंगे। एक बार तो यमराज को भी धता बताकर वह वापस लौट आया। इण्टरस्टेट गैंग नम्बर 233 के सरगना और पांच लाख रुपये के इस इनामी अपराधी को दिल्ली पुलिस ने समय बादली थाना क्षेत्र में 11 सितम्बर 1998 को एक मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था। मुन्ना की मौत की खबर भी प्रसारित हो गयी। पर अस्पताल पहुंचा तो उसकी सांसें चलती मिली।



जौनपुर जिले के सुरेरी थाने में पहली बार 1 जनवरी 1982 को उस पर मुकदमा दर्ज हुआ। यह मारपीट का मुकदमा था और तब वह महज 15 साल का था। बेहद गरीबी में अपनी जिंदगी की शुरूआत करने वाले मुन्ना ने भदोही के कालीन व्यापारियों के यहां मजदूरी की। जब अपराध में उसका दबदबा बढ़ा तो वही व्यापारी के उसके फाइनेंसर और संरक्षण दाता हो गये। मुन्ना ने क्षेत्र के टपोरियों के साथ मिलकर गैंग बनाया और बाद में माफिया विधायक मुख्तार अंसारी तक पहुंच गया। 1984 में जौनपुर जिले के रामपुर थाना क्षेत्र में मुन्ना ने एक व्यक्ति की हत्या कर लूटपाट की। फिर वह लापता रहा। मिर्जापुर से लेकर बनारस तक घूमता रहा। 1993 में उसने ब्लाक प्रमुख रामचन्द्र सिंह की हत्या कर दी और उनके असलहे लेकर भाग गया। 1995 में मुन्ना ने वाराणसी के कैण्ट थाना क्षेत्र में दो लोगों की हत्या कर सनसनी फैला दी। 24 जनवरी 1995 को उसने अपने जिले के जमलापुर गांव में ब्लाक प्रमुख कैलाश दुबे की हत्या कर दी। इसके बाद उसका सिक्का जम गया। वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र में काशी विद्यापीठ छात्रसंघ के अध्यक्ष रामप्रकाश पाण्डेय और पूर्व अध्यक्ष सुनील राय समेत चार लोगों की हत्या के बाद तो उसके दहशत की तूती बोलने लगी।



गौर करें तो पूर्वाचल की जड़े मुम्बई में बहुत गहरी हैं। मुन्ना ने भी इन जड़ों से जुड़कर मुम्बई की राह पकड़ ली। वह मुम्बई में गुजरात के ड्रग माफिया अनिरूद्ध जडेजा के सम्पर्क में आया। इसके बाद तो मामूली पढ़ा लिखा मुन्ना हाईटेक हो गया। विदेशी असलहों के साथ दिल्ली, मुम्बई, गुजरात, कर्नाटक, मंगलौर, इंदौर, भोपाल जैसे इलाकों को उसने अपनी आपराधिक गतिविधियों का केन्द्र बना लिया। ठेके पर हत्या करना उसका सबसे बड़ा कारोबार बन गया। 1998 में जब पुलिस मुठभेड़ में उसके मारे जाने की खबर आयी तो लोगों ने राहत की सांस ली लेकिन राममनोहर लोहिया अस्पताल पहुंच कर जब उसने आंखें खोल दी तब उसके शातिर होने का लोगों को अहसास हुआ। फिर वह कई साल जेल में रहा। 28 मई 2001 को मुन्ना जमानत पर रिहा हुआ। तबसे फिर कभी पुलिस की पकड़ में नहीं आया। वर्ष 2002 के जनवरी माह में उसने रंगदारी वसूलने के लिए वाराणसी जिले के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के केसरी रेस्टोरेंट के मालिक सुरेश शाहू समेत दो लोगों को भून दिया। फिर 29 नवम्बर 2005 को उसने विधायक कृष्णानन्द राय को मारा।


बजरंगी को मिली थी सलेम की सुपारी


गोरखपुर। अबू सलेम की जब पुर्तगाल में गिरफ्तारी हुई और उसे भारत लाया गया तब डी कम्पनी ने उसे रास्ते से हटाने की ठान ली। पूर्वाचल के शूटरों के बल पर अपना सब काम कराने वाले दाऊद इब्राहीम ने मुन्ना बजरंगी को आपरेशन सलेम का ठेका सौंपा। बजरंगी ने सलेम को रास्ते से हटाने की योजना बनायी तब तक उसे दूसरी चुनौती मिल गयी।



कृष्णानन्द का कत्ल आपरेशन सलेम का पूर्वाभ्यास था


गोरखपुर। विधायक कृष्णानन्द राय का कत्ल आपरेशन सलेम का पूर्वाभ्यास था। कड़ी सुरक्षा के बीच बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए मुन्ना ने अपने साथियों संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा, कृपा , नौशाद, फिरदौस जैसे कई अपराधियों का गठजोड़ किया और एक कार्यक्रम से लौट रहे कृष्णानन्द राय पर गोलियों की बौंछार कर दी।


पुलिस की आंखों में झोंकता रहा धूल

गोरखपुर। मुन्ना बजरंगी ने कई बार पुलिस की आंखों में धूल झोंका। अपनी पहली पत्नी को छोड़ चुके मुन्ना ने सुल्तानपुर जिले में एक बड़े अपराधी की बहन से शादी की। उसकी स्मार्ट पत्‍‌नी भी उसके धंधे को चमकाने में सक्रिय रहती है। उसने अपने एक साले की शादी लखनऊ में धूमधाम से की। पहले उसने पुलिस को खुद गलत सूचना दिलवायी और जिस होटल का पता दिया वहां पुलिस झक मारती रही। मुन्ना ने शादी का इंतजाम दूसरी जगह करा दिया।

ब्रजेश गैंग के समानांतर खड़ा हो गया मुन्ना

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में जरायम के सबसे बड़े बादशाह ब्रजेश सिंह को मुन्ना ने हमेशा चुनौती दी। मुन्ना ने जिन पर निशाना साधा उनमें ज्यादातर लोग ब्रजेश के मददगार थे। ब्रजेश के जेल में जाकर सुरक्षित होने के बाद से ही इस बात के कयास लग रहे थे कि अब मुन्ना भी खुद को सुरक्षित करेगा।



बबलू ने भी मुन्ना की जान बचाने में की मदद

गोरखपुर। माफिया डान ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू ने भी मुन्ना की जान बचाने में मदद की। तब जब 11 सितम्बर 1998 को मुन्ना को मारा गया था तब ब्रजेश दाऊद गैंग से जुड़ा था और मुन्ना ने छोटा राजन का काम संभाल लिया था। छोटा राजन के कहने पर नैनी जेल में बंद बबलू ने दिल्ली में अपने लोगों को मुन्ना की मदद के लिए लगाया था। यह बात बहुत लोग जानते हैं कि नैनी जेल में बबलू फोन का खूब दुरुपयोग करता था। इसी आरोप में एक जेल अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी हुई।

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