29/12/2009

जो नेपाल में टिके वे मिटे


आनन्द राय, गोरखपुर

भारत के कई भगोड़े अपराधियों को नेपाल में पनाह तो मिली लेकिन वे अपनी जिंदगी की पारी खेल नहीं पाये। किसी दोस्त-दुश्मन के असलहों से निकली गोली ने उन सबकी उम्र छोटी कर दी। भारत के वांछित अण्डरव‌र्ल्ड डान मिर्जा दिलशाद बेग, जावेद, माजिद मनिहार, विक्रम वाही जैसों के लिए नेपाल की जमीन जानलेवा साबित हुई। नियति ने इन सभी नामचीन अपराधियों के हाथ की जीवन रेखा मिटा दी।
 पूर्वाचल से लेकर पंजाब के फगवाड़ा तक अपनी आपराधिक गतिविधियों की छाप छोड़ चुके टाण्डा के मूल निवासी कुख्यात शूटर परवेज टाण्डा को शुक्रवार की शाम नेपाल के सुक्खानगर में गोलियों से छलनी कर दिया गया। तब यह बात गूंजने लगी कि नेपाल की भूमि भारत के गुनहगारों को बख्शती नहीं है। भारत का वांछित परवेज पिछले एक दशक से नेपाल में पनाह लिये था। आखिर मौत का शिकार हुआ। कई साल पहले देवरिया जिले के रुद्रपुर क्षेत्र के भैंसही गांव से भागकर मिर्जा दिलशाद बेग नेपाल के कृष्णानगर पहंुचा तो कुछ ही समय में वहां उसकी रंगबाजी चल निकली। राजस्थानी मूल के तस्कर जावेद ने उसे संरक्षण दिया लेकिन एक शाम मिर्जा के गुर्गो ने जावेद का जनाजा उठवा दिया। फिर कृष्णानगर में मिर्जा की तूती बोलने लगी। वह नेपाल का सांसद और मंत्री बना मगर 29 जून 1998 की रात काठमाण्डू में अण्डरव‌र्ल्ड के असलहों से निकली गोली ने उसका भेजा उड़ा दिया।
 मिर्जा को भारत में तबाही फैलाने की सुपारी आईएसआई ने सौंपी थी और नेपाल में वह दाऊद का सबसे बड़े सहयोगी था। बेहद क्रूर मिर्जा खुद कई भारतीय भगोड़ों की मौत के वारण्ट पर हस्ताक्षर कर चुका था। लोगों को कैसेट किंग गुलशन कुमार के हत्यारे लखनऊ मूल के शूटर विक्रम वाही की याद भूली नहीं होगी जिसे मिर्जा के इशारे पर 30 अगस्त 1997 को पैसों के बंटवारे के लिए कृष्णानगर के एक बूचड़खाने में 6 टुकड़ों में काटकर भारत और नेपाल की सीमा में फेंक दिया गया था। 26 जनवरी 1993 को तिरंगा फिल्म के प्रदर्शन पर यहां मेनका टाकीज में बम विस्फोट कराने वाले मिर्जा के दायें हाथ गोरखपुर के कुख्यात शूटर/तस्कर इरफान उर्फ गामा को भी नेपाल में रहस्यमयी मौत मिली।
   सर्वाधिक सनसनी तो गुजरे 6 अक्टूबर को हुई जब नेपालगंज के एक होटल में भारत की अर्थव्यवस्था बिगाड़ने वाले जाली नोटों के धंधे के सरगना और मिर्जा के उत्तराधिकारी माजिद मनिहार को गोलियों से भून दिया गया। श्रावस्ती जिले के भिनगा क्षेत्र के रहने वाले माजिद ने नेपाल में अपना ठिकाना बना लिया था। मिर्जा की मौत के बाद आई एस आई ने माजिद को भारत में गड़बड़ी फैलाने का मुख्य सूत्रधार बना दिया था। माजिद के बाद यह कमान परवेज के हाथों में आ गयी थी। ये सभी नामचीन लोग ही नहीं कई छुटभैये टपोरी भी भारत में गुनाह करके नेपाल में शरण लिये और वहां कम समय में उनकी पहचान बन गयी। मगर नियति ने लम्बे समय तक उनका बोझ नहीं उठाया। कोई अपने और कोई बेगानों की गोली का शिकार हो गया।

4 टिप्‍पणियां:

श्रीश पाठक 'प्रखर' ने कहा…

ओह क्या बात बताई आपने...!

Suman ने कहा…

nice

smit ने कहा…

us mulk kee sarhad ko koi chhoo nahi saktaa, jis mulk ke sarhad kee nighbaan hain aankhe. nepal nahi dunia ke kise desh men bharat ko mitane vaale tikenge to mit jaayenge. umda lekh. badhai.

smit ने कहा…

sir
apne lalitman jaise logon ka nam chhod diya hai jise 2001 men mara gaya. nepal men radhe aur ramdhani bhi mare gaye hain.

..............................
Bookmark and Share