आमी नदी के लिए तीन दिन तक कमिश्नर कार्यालय गरम रहा. जन जन ने आमी की मुक्ति की पुकार लगाई. इसमें याचना का भाव नहीं बल्कि रण का अंदाज दिखा. आर या पार लड़ने की कूवत के साथ तटवर्ती गाँव के लोंगों ने हुंकार भरी तो सांसदों, विधायकों, पूर्व विधाय्व्कों, पूर्व मंत्रियों और तमाम संगठनों के लोगों ने गाँव की गंगा को बचाने के अनुष्ठान में अपनी आहुति दी. सभी नीलकंठ बनकर गाँव की गंगा का जहर पीने निकल पड़े.
गांव की गंगा को बचाकर ही लेंगे दम
कार्यालय संवाददाता, गोरखपुर : उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और डुमरियागंज के सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा है कि ऐतिहासिक आमी नदी से हमारी आस्था जुड़ी है। यह हमारे पूर्वजों की गौरवमयी विरासत है। यह पूर्वाचल की धरोहर है और हर हाल में हम इस धरोहर को बचायेंगे। श्री पाल शुक्रवार को कमिश्नरी कम्पाउण्ड में आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह की अगुवाई में चल रहे तीन दिवसीय डेरा डालो- घेरा डालो आंदोलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आमी को सुनियोजित रूप से प्रदूषित किया जा रहा है और प्रशासन मौन बना है। इसके लिए उद्यमी और सरकार जिम्मेदार है। श्री पाल ने कहा कि इस मुद्दे को उन्होंने विधानसभा में उठाया था और केन्द्र सरकार के समक्ष भी मजबूती से उठायेंगे। उन्होंने आमी बचाओ मंच को हर तरह के सहयोग का भरोसा दिया। सभा को सम्बोधित करते हुये उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता द्विजेन्द्र राम त्रिपाठी ने आमी के साथ अपना संस्मरण सुनाया। उन्होंने कहा कि इस नदी का गौरवशाली अतीत मुझे पल पल याद है लेकिन इसका वर्तमान देखकर आंखें भर जाती हैं। उन्होंने कहा कि आमी नदी से हमारी आत्मा जुड़ी है और इसकी लड़ाई में मैं आखिरी दम तक साथ निभाऊंगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का अपार समर्थन देखकर पूरी उम्मीद है कि गांव की गंगा अपजल से मुक्त होगी। गोरखपुर विश्र्वविद्यालय शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष डा. मानवेन्द्र प्रताप सिंह ने आमी के सामाजिक ताने बाने को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस नदी से समाज के सभी वर्गो की कड़ी जुड़ी है और यदि यह नदी बिसुरती है तो सभी कडि़यां टूट जायेंगी। डा. मानवेन्द्र ने कहा कि एक पुरानी परम्परा को जिंदा रखने के लिए इन कडि़यों का आपस में जुड़ना जरूरी है। सभा की अध्यक्षता करते हुये पूर्व एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि नदियां हमारी जीवन रेखा हैं और औद्योगिक घरानों तथा नौकरशाहों के गठजोड़ से इन पर संकट मड़रा रहा है। उन्होंने कहा कि मरती हुई आमी को बचाने के लिए जनता लगाम कसेगी। विधान परिषद सदस्य डा. वाई.डी. सिंह ने कहा कि आमी को बचाने के लिए मैंने सदन में सवाल उठाया और आगे भी इस लड़ाई में शामिल रहूंगा। मानीराम के विधायक विजय बहादुर यादव ने कहा कि प्रदूषण से सर्वाधिक नुकसान किसानों और पशुपालकों का हुआ है। इस मुद्दे पर सदन में आवाज उठेगी। मंच के अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह ने तीन दिनों तक चले आंदोलन में जनता के प्रति आभार जताया और कहा कि अब गीडा मार्च इस आंदोलन का अगला पड़ाव होगा। पूर्व विधायक अवधेश श्रीवास्तव ने कहा कि कहा कि मेरी अंतिम इच्छा है कि आंदोलन पूरे भारत में पर्यावरण बचाने का प्रतीक बन जाये। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव डा. सैयद जमाल अहमद ने कहा कि आमी नदी के प्रदूषण से लाखों लोग प्रभावित हैं। उनके जीवन के लिए मानवीय संवेदना का परिचय देना होगा। सभा को पूर्व प्रमुख चतुर्भुज सिंह, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह, वरिष्ठ नेता कृष्ण बिहारी दुबे, डा. चन्द्रप्रकाश त्रिपाठी, सरोज रंजन शुक्ल, नवल किशोर सिंह, रामपाल सिंह, भाजपा के पूर्व प्रत्याशी शरद त्रिपाठी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शीतल पाण्डेय, विभ्राट कौशिक, प्रेमशंकर मिश्र, बच्चन त्रिपाठी, विनय कुमार सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष महेन्द्र राय, धर्मेन्द्र सिंह, बंधु उपेन्द्र नाथ सिंह, जन सम्पर्क प्रमुख संजय सिंह, सुनील सिंह, बलवीर सिंह, अरुण सिंह, जेपी नायक, कृष्णभान सिंह उर्फ किसान सिंह, नरेन्द्र जीत छोटे, मदन त्रिपाठी ने सम्बोधित किया। आंदोलन में तीन दिनों तक भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उपेन्द्र दत्त शुक्ल ने सक्रिय भूमिका निभायी और सफल संचालन किया। आंदोलन को कमिश्नर कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण श्रीवास्तव, मंत्री प्रमोद पाठक, पूर्वाचल जन शक्ति पार्टी और निषाद विकास मंच के अध्यक्ष देवेन्द्र निषाद, सुरेश शुक्ल एडवोकेट, प्रियानन्द सिंह एडवोकेट समेत कई प्रमुख संगठनों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
गीडा मार्च की चेतावनी के साथ उठा डेरा
कार्यालय संवाददाता, गोरखपुर : औद्योगिक इकाइयों के अपजल से प्रदूषित हो चुकी ऐतिहासिक आमी नदी की मुक्ति के लिए कमिश्नरी में बुधवार से चलाये जा रहे डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन का डेरा गीडा मार्च की चेतावनी के साथ शुक्रवार की शाम को उठा। आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा कि आमी नदी से पूर्वाचल का जन जीवन जुड़ा है और अपनी सांस को बचाने के लिए आर-पार की लड़ाई होगी। कमिश्नरी कार्यालय पर बुधवार से ही चल रहे आमी बचाओ मंच के डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन को जनता के साथ ही जनप्रतिनिधियों का अपार समर्थन मिला। जहां गोरखपुर सदर के सांसद और गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ, बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान और डुमरियागंज के सांसद जगदम्बिका पाल ने अपना समय और समर्थन दिया वहीं भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, एमएलसी विनोद पाण्डेय, विधायक डा. राधा मोहन दास अग्रवाल, विजय बहादुर यादव और एमएलसी डा. वाई डी सिंह ने भी इस आंदोलन से खुद को जोड़ा। आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह की अगुवाई में चले इस आंदोलन ने एक नया माहौल पैदा किया। शांतिपूर्ण आंदोलन में ग्रामीणों का आक्रोश और संयमित गुस्सा देखने को मिला। आंदोलनकारियों ने यह चेतावनी भी दे दी है कि अब उनके आंदोलन का स्वरूप बदला हुआ नजर आयेगा। तीन दिन तक चले आंदोलन में लोक कलाकारों ने ग्रामीणों के दर्द को उकेरा। आमी के तट पर दो दशक से अधिक समय से सिसक सिसक कर जी रहे लोगों की व्यथा को शब्द मिले। घुना, सुरसती, राधिका, सहदेई, रंभा, सोनमती, गुडडी, गुलजारी जैसी औरतों की आंखों से गंगा यमुना बह निकली। पहलवानों ने मल्ल युद्ध कर अपनी ताकत भी दिखा दी। किसानों ने अपने हथियार हंसिया और फावड़ा का संकेत भी दिया। तीन दिनों तक जल रहे चूल्हे ने सामाजिक समरसता भी बनायी। गौतम बुद्ध, कबीर, गुरू नानक और गुरू गोरक्षनाथ के संकल्पों की साक्षी इस नदी की कातर पुकार इस आंदोलन में सुनी गयी। कभी अमृत की तरह बहती हुई इस धारा को अविरल और निर्मल करने का मंसूबा और जज्बा देखने को मिला। निष्कर्ष यही निकला कि अब अगला पड़ाव गीडा होगा। उसकी तिथि तय होगी और जो उद्योग नदी में अपना कचरा गिराते हैं, उन पर लगाम लगायी जायेगी।
लोग साथ आते गये और कारवां बनता गया


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