30/09/2009

राहुल के पूर्वजों की याद दिलायेगा श्रीभवन



आनन्द राय, गोरखपुर



मलांव का लगभग 115 साल पुराना श्रीभवन घुमक्कड़ महापण्डित राहुल सांकृत्यायन के पूर्वजों की याद दिलायेगा। श्रीभवन को हेरिटेज बनाने की पहल शुरू हो गयी है। इस हवेली के मालिक और रिश्ते में राहुल के प्रपौत्र लगने वाले शरदेंदु कुमार पाण्डेय ने भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय से पत्राचार शुरू कर दिया है। उन्होंने इसके लिए भागदौड़ भी की है। यदि उनके इस प्रयास को मूर्त रूप नहीं मिला तो भी इस ऐतिहासिक धरोहर को वे यादगार बनायेंगे। मलांव राहुल के पूर्वजों का गांव है। इस गांव के इतिहास में यश और पौरुष की कीर्ति पताका है तो कुछ त्रासद कथा भी है।

16वीं सदी में अपनी पत्नी के अपमान से क्षुब्ध डोमिनगढ़ के राजा ने इस गांव में कत्लेआम कर खून की नदी बहा दी। मलांव के एक एक बच्चे, बड़े-बूढ़े और स्ति्रयों को भी मौत के घाट उतार दिया। कोई नहीं बचा। एक गर्भवती बहू अगर अपने पीहर न गयी होती तो मलांव का सूरज डूब गया होता। उनके ही वंश से फिर पीढि़यों का सिलसिला चल पड़ा और आज यह ऐतिहासिक गांव अपनी पूरी ताकत से दुनिया के साथ कदमताल कर रहा है। मलांव में राप्ती तट पर 1895 में बना बना श्रीभवन उन सभी स्मृतियों का प्रतीक है। इस महल का कैम्पस 30 एकड़ में फैला है। इस महल को हेरिटेज बनाने की प्रक्रिया में जुटे शरदेंदु पाण्डेय बताते हैं-मलांव के पाण्डेय विद्वता के साथ ही अपने भुजबल के लिए पहचाने जाते हैं।

इतिहास के पन्नों में इस गांव की गौरवगाथाएं दर्ज हैं लेकिन जो रोमांचित करने वाली बात है उसका जिक्र राहुल सांकृत्यायन ने भी अपनी पुस्तक कनैला की कथा और मेरी जीवन यात्रा में किया है। दस्तावेज के मुताबिक 16वीं सदी में डोमिनगढ़ के डोमकटार राजा की पत्नी तीर्थ के लिए वाराणसी जा रही थीं। रानी को किसी ने बताया था कि मलांव के कुएं का पानी पीने से बंध्या पुत्रवती हो जाती हैं। वीर संतान पैदा करने की अभिलाषा से रानी ने मलांव में अपना कारवां रोककर वहां के कुएं से एक घड़ा पानी मंगवाया। पाण्डेय लोगों ने रानी के आदमियों को पानी भरने से रोक दिया। तीर्थ से लौटकर रानी ने राजा को अपने अपमान की कथा सुनायी। अनंत चतुर्दशी को मलांव के पाण्डेय लोग व्रत रखते और हथियार साफ कर उन्हें सजाते थे। उसी दिन राजा ने निहत्थे लोगों पर धावा बोल दिया। मलांव के एक एक बच्चे मारे गये। महिलाओं को भी आक्रमणकारियों ने नहीं बख्शा। जिस कुएं से रानी को पानी नहीं लेने दिया गया उसको ऊपर तक लाशों से पाट दिया गया। यहां कोई नहीं बचा था।

राहुल सांकृत्यायन ने कनैला की कथा में लिखा है- महाभारत में कौरव पाण्डव कुल का एक तरह बिल्कुल संहार हो गया था, लेकिन अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में परीक्षित के रूप में एक अंकुर बच रहा था जिसने पाण्डव वंश को नष्ट होने से बचाया। ठीक यही बात मलांव में हुई। राजेन्द्र दत्त पाण्डेय की पत्नी नरमेध के समय अपने पीहर प्रतापगढ़ में गयी इसलिए उनके प्राण बच गये। उनके गर्भ में पले अहिरुद्र पाण्डेय मलांव के पुन: वंश संस्थापक बने। लगभग सत्तर वर्षीय शरदेंदु कुमार पाण्डेय अहिरुद पाण्डेय की 18वीं पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं। वे बताते हैं कि 25 वर्ष की आयु में अहिरुद्र पाण्डेय ने ननिहाल से लौटकर फिर से मलांव को बसाया। अहिरुद्र पाण्डेय के वंशज बाद में बहुत से स्थानों पर बिखर गये। इच्छा पाण्डेय कनैला गांव गये जिनकी पीढ़ी में राहुल सांकृत्यायन पैदा हुये। बस्ती से लेकर बिहार तक और उधर मध्य प्रदेश और अन्य कई स्थानों पर भी यहां के पाण्डेय कालांतर में गये। बातचीत में शरदेंदु पाण्डेय कहते हैं कि आज भी मलांव की यश कीर्ति पूरी दुनिया में है और अकेले राहुल सांकृत्यायन ने इस गांव को अमर कर दिया है। श्रीभवन के हेरिटेज बनाने के पीछे उनकी मंशा गांव की गौरवगाथा को जीवंत रूप देना है।
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