2 जून 2009

वे गुस्से से लाल हैं मगर ये बच्चे खुशहाल हैं


गोरखपुर में एक मुसलमान युवक ने हिन्दू रीति से शादी कर ली तो हाय तोबा मच गयी। उलेमाओं ने इसे गैर मजहबी करार दिया और उनकी भवें तन गयी। शादी शुदा बच्चों की जिंदगी फिलहाल खुशहाल है लेकिन फटे में टांग अदाने वाले परेशान हैं। वे लोग गुस्से से लाल हैं लेकिन ये बच्चे खुशहाल हैं।

हिंदू रीति से विवाह कर खुश हैं अकबर व तराबुन निशां
गोरखपुर : जनपद के जंगल कौडि़या ग्राम में शनिवार को एक सामूहिक वैवाहिक सम्मेलन में हिंदू रीति से हुई मुस्लिम जोड़े की शादी की चर्चा रविवार को भी जोरों पर रही। लीक से हटकर किये इस विवाह को जाति-सम्प्रदायवाद की रूढि़वादी परंपराओं में फंसे लोग चाहे जो मानते हों लेकिन स्वयं नवदंपत्ति अकबर अली व तराबुन निशां बेहद खुश हैं। हमारे जंगल कौडि़या प्रतिनिधि के अनुसार विवाह के दूसरे दिन रविवार को अकबर के घर में शादी समारोह से थके हारे सभी परिजन आराम की मुद्रा में थे। अकबर सो रहा था सो उसके पिता यासीन से बात हुयी। यासीन ने बताया कि गांव में हिंदू और मुसलमान लंबे समय से मुहब्बत से रहते हैं। उन्होंने कहा कि मैने अपने बेटे की शादी बहुत सोच समझकर तथा अपने सभी निकटस्थ लोगों से राय मशविरा लेकर ही की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग इस विवाह से खुश हैं। विवाह हो गया तो इसे कैसे झुठला दें। बता दें कि बहू तराबुन निशां को विदाई कराकर अपने घर लाने के बाद यासीन ने रविवार को बहुभोज किया, जिसमें मोहल्ले के सभी हिंदू-मुसलमान शामिल हुए। दरअसल यासीन के पांच बेटे हैं जिनमें से चार की पहले ही शादी हो चुकी है। तीसरे नम्बर के अकबर की शादी इसलिए नहीं हो पा रही थी कि वह विकलांग है। बहुत ढूंढने के बाद तराबुन निशां से रिश्ता तय हुआ। तराबुन सन्तकबीरनगर जिले के बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है। यासीन बताते हैं कि उन्हें पता चला कि मानीराम क्षेत्र के विधायक विजय बहादुर यादव अपने प्रयास से बिना दहेज की शादियां करा रहे हैं। इस बात का पता चलने पर हम लोग स्वेच्छा से विधायक के पास गए और सामूहिक विवाह में ही अपने बेटे की शादी कराने का निर्णय लिया। यासीन ने कहा कि इस गांव में हिंदू हो या मुसलमान सभी लोग बहुत प्यार से रहते हैं। फिर शादी तो शादी है चाहे हिंदू रिवाज से या मुस्लिम रिवाज से। पहले तो हम सभी इंसान हैं। हमने पहले भी कहा था कि अल्लाह सबका एक है। मालूम हो कि यासीन के पांच बेटे व उसके परिवार के सभी लोग इस विवाह से प्रसन्न हैं। गांव के प्रधान अरविंद यादव से बात हुयी तो उन्होंने कहा कि हर इंसान की अपनी मर्जी है कि वो किस तरह जीना चाहता है। इसी तरह अकबर व तराबुन निशां की शादी दोनों ही परिवार की मर्जी से हुयी है तो उसमें क्या हर्ज है।

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