<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912</id><updated>2012-01-29T06:14:05.698+05:30</updated><title type='text'>दीक्षा</title><subtitle type='html'>चुप रहना बेहद खतरनाक है। दीक्षा एक ऐसा मंच है  जहाँ चुप्पी टूटती है।</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link 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left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/-hbe9T0Jdtyo/TuoF3QMSABI/AAAAAAAAAxg/jJJZtHmYQDE/s1600/G22.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" oda="true" src="http://1.bp.blogspot.com/-hbe9T0Jdtyo/TuoF3QMSABI/AAAAAAAAAxg/jJJZtHmYQDE/s320/G22.jpg" width="229" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय &lt;br /&gt;लखनऊ, 11 दिसंबर : भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अन्ना हजारे के आंदोलन को लेकर पूरा देश उद्वेलित है, लेकिन सूबे की सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले हाथ बांध दिए हैं। भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) ने एलडीए, केडीए और स्वास्थ्य समेत विभिन्न विभागों के भ्रष्टाचार की 35 फाइलें सरकार के पास भेजकर खुली जांच की अनुमति मांगी है पर सरकार इनको दबाए बैठी है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एसीओ, सीबीसीआइडी व विजिलेंस को खुली जांच की अनुमति सरकार देती है। सूत्रों के मुताबिक एसीओ ने विभिन्न विभागों की शिकायतों, अभिसूचना संकलन और सर्वेक्षण के आधार पर खुली जांच के लिए इस वर्ष 35 फाइलें तैयार कीं। साल बीतने को है मगर सरकार की ओर से केवल 12 मामलों की खुली जांच की अनुमति मिल सकी है। बताते हैं कि एसीओ व सरकार के बीच सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। बीते दिनों उच्चाधिकारियों की एक बैठक हुई जिसमें एसीओ के महानिदेशक अतुल भी शामिल हुए। इस बैठक में एसीओ की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हुए और एक शीर्ष अधिकारी ने दायरे में रहने तक की नसीहत दे डाली। एसीओ के बारे में बैठक में कहा गया कि वह सरकार के संज्ञान में मामला डाले बिना अपनी रिपोर्ट भेजते हैं, जबकि विजिलेंस और सीबीसीआइडी के लोग सभी सूचनाएं मुहैया कराते हैं। एसीओकी ओर से कहा गया कि जब किसी मामले में मुकदमा दर्ज हो जाता तो पूरा मामला एसीओ व कोर्ट के बीच हो जाता है। सूत्रों के अनुसार एसीओ के महानिदेशक के अधिकार क्षेत्र को लेकर सरकारी तंत्र विचार-विमर्श कर रहा है और खबर यह भी है कि विजिलेंस एक्ट की तरह इस संगठन में भी कुछ बदलाव की भूमिका बन रही है। नजर डालें तो वर्ष 2010 में करीब 300 मामलों की जांच, विवेचना और सूचनाओं का सत्यापन एसीयू ने किया है। इस साल एसीओ अभी तक 230 मामलों की ही जांच, विवेचना और सूचनाओं का सत्यापन कर सका है। अभी इनके पास 160 मामले लंबित हैं, जिसमें शासन की ओर से दी गई 12 जांचें भी शामिल हैं। बताते हैं कि 1977 के एक शासनादेश के तहत यह व्यवस्था दी गई कि किसी विभाग का प्रमुख सचिव और यहां तक कि जिलाधिकारी भी एसीओ को जांच दे सकता है, लेकिन मौजूदा समय में सब कुछ पहरे में है! &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-723847971433459552?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/723847971433459552/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=723847971433459552' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/723847971433459552'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/723847971433459552'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_7139.html' title='भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाले हाथ बंधे'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-hbe9T0Jdtyo/TuoF3QMSABI/AAAAAAAAAxg/jJJZtHmYQDE/s72-c/G22.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1046725245313039297</id><published>2011-12-15T20:03:00.001+05:30</published><updated>2011-12-15T20:03:49.505+05:30</updated><title type='text'>छद्म नामों से संपत्ति बनाई बाबू ने!</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : आप भले ही पूर्व मंत्री व एमएलसी बाबू सिंह कुशवाहा को बस इसी नाम से जानते हों, लेकिन उनका एक नाम राम चरन कुशवाहा भी है। इतना ही नहीं उनकी पत्नी का नाम सुकन्या के साथ ही शिवकन्या देवी भी है। लोकायुक्त ने कुशवाहा के मंत्री पद का दुरुपयोग कर इन नामों से खरीदी गई अकूत संपत्ति संबंधी दो और शिकायतों को पंजीकृत कर जांच कराने का फैसला किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को सूचना भेजने के साथ ही कुशवाहा से 26 दिसंबर तक जवाब तलब किया गया है। &lt;br /&gt;झांसी के अरविंद कुमार सोनी की बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ की गई शिकायत पर अभी जांच चल ही रही थी कि शिव पूजन सिंह कछवाह, अरुण देव द्विवेदी तथा कुलदीप सिंह ने भी पूर्व मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया कि शिव पूजन व अरुण देव द्विवेदी की शिकायत में पहले के आरोप तो हैं ही, कई नए आरोप भी हैं। आरोपों के संबंध में करीब एक हजार पेज के दस्तावेज भी दिए गए हैं। कहा गया है कि बाबू सिंह व राम चरन कुशवाहा एक ही व्यक्ति है। उनकी पत्नी सुकन्या व शिव कन्या देवी भी एक ही महिला। निर्वाचन पर्चे में तो बाबू सिंह कुशवाहा नाम लिखा गया है लेकिन पिता स्व. भागवत प्रसाद के अभिलेखों में एक मात्र राम चरन कुशवाहा को ही पुत्र बताया गया है। हाई स्कूल की अंक तालिका में भी राम चरन नाम है। मतदाता सूची में भी यही नाम लिखा है। यह भी कहा गया है कि बाबू सिंह की बीए की डिग्री भी फर्जी है। बीते माह अरविंद सोनी ने कुशवाहा पर मंत्री पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। कहा गया था कि मंत्री बनने से पहले उनके पास मात्र कुछ बीघा जमीन थी, लेकिन अब उनके सगे-संबंधियों के नाम से करोड़ों की संपत्ति है। कुशवाहा ने खनिकर्म मंत्री रहते बांदा-महोबा, चित्रकूट-हमीरपुर जिले में जमीन के खनन पट्टे परिवारिक सदस्यों के साथ ही कुछ खास लोगों को आवंटित किया है। बांदा में मेसर्स श्रीनाथ प्रापर्टीज, पिता के नाम भागवत प्रसाद एजुकेशनल वेलफेयर ट्रस्ट व पत्नी सुकन्या कुशवाहा के नाम तथागत शिक्षास्थली बनाकर उसमें करोड़ों रुपये का कालाधन लगाया गया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आरोपों के संबंध में कैबिनेट सचिव, विधान परिषद सचिव व भारत निर्वाचन आयोग से जानकारी हासिल करने की भी बात कही गई है। लोकायुक्त ने बताया कि दोनों नई शिकायतों को भी पंजीकृत कर उनमें दिए गए तथ्यों की भी अब जांच कराने का निर्णय किया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;(अब करीबी अफसरों पर नजर- पेज 9)&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ के निशाने पर पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के कई करीबी अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें पैकफेड के अभियंता से लेकर आइएएस अधिकारी तक शामिल हैं। सीबीआइ बहुत जल्द इनकी भी पड़ताल शुरू करेगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूबे में वर्ष 2005 से 2011 तक के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने जांच में उनका भी ब्योरा हासिल किया है, जिनकी इस घोटाले में भूमिका रही। अब तक दर्जन भर ठेकेदारों व आपूर्तिकर्ताओं से हुई पूछताछ में इनका नाम सामने आया है। सीबीआइ ने ठेकदारों से जब उनको काम मिलने के साथ ही अन्य पहलुओं तथा पेमेंट की बाबत पूछताछ की तो तो माननीयों के साथ आइएएस अधिकारी और अभियंताओं का नाम सामने आया। सीबीआइ ने अभिसूचना संकलन में भी खास लोगों की भूमिका की जानकारी हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने तो कमीशन खाने में रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बताते हैं उन्होंने छोटे-छोटे ठेकेदारों को काम दिया, लेकिन इतना भारी कमीशन लिया कि उन्हें कुछ बचा ही नहीं। यह एक दूसरे पूर्व मंत्री के कृपा पात्र थ! &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-1046725245313039297?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1046725245313039297/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=1046725245313039297' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1046725245313039297'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1046725245313039297'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_4699.html' title='छद्म नामों से संपत्ति बनाई बाबू ने!'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-3153687722258338654</id><published>2011-12-15T19:54:00.000+05:30</published><updated>2011-12-15T19:54:33.726+05:30</updated><title type='text'>नजर अब कुशवाहा के करीबी अफसरों पर</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ के निशाने पर पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के कई करीबी अधिकारी भी शामिल हैं। इनमें पैकफेड के अभियंता से लेकर आइएएस अधिकारी तक शामिल हैं। सीबीआइ बहुत जल्द इनकी भी पड़ताल शुरू करेगी। &lt;br /&gt;सूबे में वर्ष 2005 से 2011 तक के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने जांच में उनका भी ब्योरा हासिल किया है, जिनकी इस घोटाले में भूमिका रही। अब तक दर्जन भर ठेकेदारों व आपूर्तिकर्ताओं से हुई पूछताछ में इनका नाम सामने आया है। सीबीआइ ने ठेकदारों से जब उनको काम मिलने के साथ ही अन्य पहलुओं तथा पेमेंट की बाबत पूछताछ की तो तो माननीयों के साथ आइएएस अधिकारी और अभियंताओं का नाम सामने आया। सीबीआइ ने अभिसूचना संकलन में भी खास लोगों की भूमिका की जानकारी हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने तो कमीशन खाने में रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बताते हैं उन्होंने छोटे-छोटे ठेकेदारों को काम दिया, लेकिन इतना भारी कमीशन लिया कि उन्हें कुछ बचा ही नहीं। यह एक दूसरे पूर्व मंत्री के कृपा पात्र थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;छद्म नामों से संपत्ति बनाई बाबू ने&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ, 14 दिसंबर (जाब्यू) : आप भले ही पूर्व मंत्री व एमएलसी बाबू सिंह कुशवाहा को बस इसी नाम से जानते हों, लेकिन उनका एक नाम राम चरन कुशवाहा भी है। इतना ही नहीं उनकी पत्नी का नाम सुकन्या के साथ ही शिवकन्या देवी भी है। लोकायुक्त ने कुशवाहा के मंत्री पद का दुरुपयोग कर इन नामों से खरीदी गई अकूत संपत्ति संबंधी दो और शिकायतों को पंजीकृत कर जांच कराने का फैसला किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को सूचना भेजने के साथ ही कुशवाहा से 26 दिसंबर तक जवाब तलब किया गया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;झांसी के अरविंद कुमार सोनी की बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ की गई शिकायत पर अभी जांच चल ही रही थी कि शिव पूजन सिंह कछवाह, अरुण देव द्विवेदी तथा कुलदीप सिंह ने भी पूर्व मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त से शिकायत की है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया कि शिव पूजन व अरुण देव द्विवेदी की शिकायत में पहले के आरोप तो हैं ही, कई नए आरोप भी हैं। आरोपों के संबंध में करीब एक हजार पेज के दस्तावेज भी दिए गए हैं। कहा गया है कि बाबू सिंह व राम चरन कुशवाहा एक ही व्यक्ति है। उनकी पत्नी सुकन्या व शिव कन्या देवी भी एक ही महिला। निर्वाचन पर्चे में तो बाबू सिंह कुशवाहा नाम लिखा गया है लेकिन पिता स्व. भागवत प्रसाद के अभिलेखों में एक मात्र राम चरन कुशवाहा को ही पुत्र बताया गया है। हाई स्कूल की अंक तालिका में भी राम चरन नाम है। मतदाता सूची में भी यही नाम लिखा है। यह भी कहा गया है कि बाबू सिंह की बीए की डिग्री भी फर्जी है। बीते माह अरविंद सोनी ने कुशवाहा पर मंत्री पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। कहा गया था कि मंत्री बनने से पहले उनके पास मात्र 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src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-3153687722258338654?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/3153687722258338654/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=3153687722258338654' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3153687722258338654'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3153687722258338654'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_8785.html' title='नजर अब कुशवाहा के करीबी अफसरों पर'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-7156685879834433723</id><published>2011-12-15T19:51:00.001+05:30</published><updated>2011-12-15T20:02:52.194+05:30</updated><title type='text'>सीबीआइ के सर्विलांस पर माननीय और नौकरशाह</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;आनन्द राय &lt;br /&gt;लखनऊ, 13 दिसंबर : यूपी में एनआरएचएम घोटाला और डबल सीएमओ मर्डर की जांच में जुटी सीबीआइ तह तक पहंुचने की हर मुमकिन कोशिश में जुटी है। उसके सर्विलांस पर सूबे के 40 प्रमुख लोग हैं। इनमें जनप्रतिनिधि, अफसर और सरकार के कुछ खास दिग्गज शामिल हैं। सीबीआइ को इससे कई अहम सूचनाएं हासिल हो रही हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में सीबीआइ की एक स्पेशल यूनिट पिछले चार महीने से प्रदेश सरकार के चार मंत्रियों, दो पूर्व मंत्रियों, दर्जन भर विधायक, सांसद, कई आइएएस और स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों का फोन हर दिन रिकार्ड कर रही है। बताते हैं कि सीबीआइ की यह कार्यशैली कुछ लोगों को पता चल गयी है। इससे वे सावधान हो गये हैं, लेकिन शुरुआती दौर में कई अहम चीजें सीबीआइ को फोन टेप के जरिए ही पता चली हैं। इनमें सरकार के एक चर्चित नौकरशाह की बातें भी हैं, जिसमें एक पूर्व मंत्री द्वारा सीएमओ की पोस्टिंग में भारी पैसा खाने की बात है। शुरुआती दौर में सचान के सुसाइड नोट के बारे में भी सीबीआइ को ऐसे ही जानकारी मिली थी। सीबीआइ के पास कई महत्वपूर्ण सूचनाएं हैं, जिन्हें सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस संवाददाता से बातचीत में एक सांसद ने बताया कि उनको चार माह से पता है कि सीबीआइ उनका फोन टेप कर रही है। किसी शिकायत की बजाय वह अपने फोन पर सारी बातचीत कर रहे हैं और चाह रहे हैं कि सीबीआइ उनकी बात सुने और सच जाने। सीबीआइ 40 नहीं, 200 लोगों का फोन टेप कर रही है। इस दहशत में कई लोगों ने अपना फोन इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। जांच के दायरे में आये एक विधायक काफी समय से अपने साथ मोबाइल फोन नहीं रखते। वे बातचीत करने के लिए दूसरों का फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। सीबीआइ चिह्नित लोगों का लोकेशन जानने से लेकर उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखे है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;(नपेंगे खरीद और निर्माण की हेराफेरी करने वाले- पेज 9)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ, 13 दिसंबर (जाब्यू) : राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के घोटाले की जांच में सीबीआइ खरीद और निर्माण की हेराफेरी करने वालों पर केंद्रित हो गई है। महराजगंज जिले में स्वास्थ्य उपकरणों की खरीद स्टेशनरी की दुकान से किए जाने का मामला सामने आने के बाद सीबीआइ को अंदेशा है कि जिलों में कुछ हेरफेर के साथ एक ही तरह का गोरखधंधा किया गया है। टीम बनाकर खरीददार और विक्रेता का भौतिक सत्यापन शुरू हो गया है। निर्माण एजेंसियों की गड़बड़ी भी सीबीआइ जांच में सामने आ रही है। इन सभी के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर कार्रवाई की तैयारी हो रही है। मदद करने वालों को सरकारी गवाह बनाने पर भी सीबीआइ विचार कर रही है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ मुख्यालय से आए अतिरिक्त निदेशक सलीम अली ने मंगलवार को समीक्षा के दौरान यह हिदायत दी कि अभिलेखों की पड़ताल के दौरान क्रय करने वाली फर्म और विक्रेता की जांच अवश्य करें और प्रमाणिक सबूत मिलने के साथ ही विधिक कार्रवाई शुरू करें। अधिकारियों ने कहा कि टीम इसी दिशा में काम कर रही है, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से जांच कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने इस घोटाले में शामिल बड़े लोगों, अधिकारियों और ठेकेदारों को चिन्हित कर उनसे प्रारंभिक पूछताछ का भी निर्देश दिया। पहले चरण की बैठक के बाद शाम को सलीम अली दिल्ली चले गए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूत्रों के मुताबिक दूसरे चरण की बैठक में सीबीआइ मुख्यालय से आए डीआइजी सतीश गोलचा, नीरजा गोत्रू, एसपी एमसी साहनी, देहरादून एसीबी के एसपी नीलाभ किशोर और लखनऊ एससीबी के एसपी एसके खरे समेत कई अधिकारियों ने एनआरएचएम घोटाला, डबल सीएमओ मर्डर और जिला कारागार में डिप्टी सीएमओ डॉ.वाइएस सचान की रहस्यमयी मौत की जांच की समीक्षा की और सभी घटनाओं की आपस में जुड़ रही कडि़यों पर फोकस किया। अधिकारियों ने समय से जांच पूरा करने और अब तक मिले सबूतों का एक बार फिर सत्यापन करने की भी नसीहत दी। जांच टीमों ने अपनी दिक्कतें भी बताई।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-7156685879834433723?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/7156685879834433723/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=7156685879834433723' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7156685879834433723'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7156685879834433723'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_8555.html' title='सीबीआइ के सर्विलांस पर माननीय और नौकरशाह'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1138831149525179895</id><published>2011-12-15T19:50:00.001+05:30</published><updated>2011-12-15T20:02:22.849+05:30</updated><title type='text'>चुनाव में  मुसीबत बनेंगे अवैध असलहे</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;strong&gt;आनन्द राय&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;लखनऊ, 12 दिसंबर : सूबे में बड़े पैमाने पर अवैध असलहों की खेप उतारी जा रही है। इसमें बिहार के देशी तथा इटली और यूएसए के बने असलहे भी शामिल हैं। खबर है कि 2012 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे दबंग किस्म के लोग ये असलहे खरीद रहे हैं। अभिसूचना संकलन में बराबर इसकी आमद की खबर मिल रही है, लेकिन असली संचालकों तक पुलिस के हाथ नहीं पहंुच रहे हैं। इससे सरकार की नींद उड़ी है, क्योंकि चुनाव आयोग ने असलहा रखने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। इन दिनों असलहों की बरामदगी पर पुलिस का जोर है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी तक बिहार के मुंगेर जैसे इलाकों में बने कंट्री मेड असलहों की आपूर्ति हो रही थी, लेकिन बीते कुछ दिनों में अत्याधुनिक अवैध असलहों की बरामदगी ने नए नेटवर्क का राजफाश किया है। अब नेपाल और इंदौर से भी अवैध असलहे लाए जा रहे हैं। इस महीने मेरठ पुलिस ने छह असलहा तस्करों को गिरफ्तार कर इटली और यूएसए की बनी 32 बोर की छह पिस्टल बरामद कीं। मुजफ्फरनगर में भी इटली की छह और यूएसए निर्मित चार पिस्टल के साथ एक अभियुक्त गिरफ्तार किया गया। उसने बताया कि नेपाल से लाकर वह मुजफ्फरनगर, बागपत और मेरठ में असलहे बेचता है। मथुरा पुलिस ने मध्यप्रदेश के इंदौर से असलहा लाकर बेचने वाले गिरोह के चार सदस्यों को असलहों के साथ पकड़ा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;खरीदारों तक नहीं पहंुच रहे हाथ : आए दिन किसी न किसी जिले की पुलिस तस्करी में लगे कैरियरों को पकड़ती है और उनका चालान कर देती है। छूटने के बाद वे फिर धंधे में लग जाते हैं, लेकिन पुलिस न असली संचालक और न ही असली खरीदार तक पहंुच पाती है। चुनाव के दौरान होने वाली हिंसक घटनाओं पर गौर करें तो ज्यादातर मामलों में अवैध असलहों का ही प्रयोग होता है। इस बात से पुलिस महकमा भली भांति परिचित है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कैसे मिलते हैं कारतूस : सबसे बड़ा सवाल असलहों के लिए मिलने वाले कारतूस का है। अवैध असलहे तो कहीं बन सकते हैं, लेकिन कारतूस तो वैध फैक्टि्रयों में ही बनते हैं। पिछली घटनाओं पर नजर डालें तो पुलिसकर्मियों और शस्त्र विक्रेताओं ने ही अवैध तरीके से कारतूस मुहैया कराया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गौर करें 2004 में मिर्जापुर के पीएसी शस्त्रागार के हेड कांस्टेबल ने 99589 कारतूस गायब किए थे। 2008 में गोरखपुर, रामपुर, बस्ती और बलिया समेत कई जिलों में शस्त्रागारों से कारतूस गायब होने का खेल उजागर हुआ और कई आरमोरर पकड़े गए। पिछले साल एसटीएफ ने लखनऊ के मोहनलालगंज से हिमाचल प्रदेश के लाइसेंसी शस्त्र विक्रेता मनवीर कैथू और रामप्रताप भदौरिया को गिरफ्तार किया तो पता चला कि कारोबार की जड़ पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश और हिमाचल तक जुड़ी है। &lt;br /&gt;---------------------------------------------------------------------------------------&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;अब पुलिस भी रखेगी चुनावी खर्च का ब्योरा&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ, 12 दिसंबर (जाब्यू) : इस बार के चुनाव में पुलिस पर कानून व्यवस्था पर नियंत्रण के साथ ही प्रत्याशियों के चुनावी खर्च पर भी नजर रखने की जिम्मेदारी होगी। अधिक से अधिक सूचनाएं हासिल करने के लिए चुनाव आयोग इनकी मदद लेगा। आयोग ने प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में जरूरी निर्देश दे दिए हैं। वे जिलों में तैनात अधिकारियों को इस नई भूमिका के बारे में 14 दिसंबर को बैठक बुलाकर समझाएंगे। 23 दिसंबर को लखनऊ में कार्यशाला का आयोजन भी होगा ताकि सभी विभागों में समन्वय बना रहे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आयोग का मानना है कि पुलिस को स्थानीय समझ अधिक होती है, इसलिए वे कहां कौन प्रत्याशी किसे प्रलोभन दे रहा है, इस बारे में सहजता से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आयोग उनकी इसी क्षमता का लाभ उठाना चाहता है। शासन के सूत्रों के अनुसार मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने पिछले दिनों पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें इस बाबत जानकारी दे दी है। कहा है कि हर विधानसभा क्षेत्र में पुलिस के बड़े अफसरों से लेकर सिपाही तक की मदद ली जाए। पुलिसकर्मियों को यह पता करना होगा कि प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में कितनी गाडि़यां लगी हैं, कितने कार्यकर्ता किस प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं, प्रतिदिन किस प्रत्याशी और उसके समर्थकों ने कहां-कहां पर चुनावी सभाएं की, जनसम्पर्क के दौरान प्रत्याशी एवं उसके समर्थक कहां-कहां और किन किन वाहनों से गए, किस प्रत्याशी ने क्षेत्र में कहां-कहां कुल कितने पोस्टर-बैनर आदि लगवाए, किस प्रत्याशी ने मोटरसाइकिल या कार रैली निकाल कर प्रचार किया और किस प्रत्याशी ने अपने क्षेत्र में कंबल, साड़ी, अनाज आदि बांटा। पुलिस यह सूचनाएं निर्वाचन आयोग के प्रेक्षक को देगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;14 दिसंबर को जिलों में तैनात एएसपी को आयोग की अपेक्षा से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद सभी पुलिस कप्तानों तथा रेंज आइजी एवं डीआइजी को इसकी जानकारी दी जायेगी। पुलिसकर्मियों को अवैध शराब एवं शस्त्र आदि की धरपकड़ के लिए क्षेत्र में अभियान चलाने के भी निर्देश दिए जाएंगे।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-1138831149525179895?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1138831149525179895/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=1138831149525179895' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1138831149525179895'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1138831149525179895'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_1827.html' title='चुनाव में  मुसीबत बनेंगे अवैध असलहे'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-4188839811284330639</id><published>2011-12-15T19:46:00.003+05:30</published><updated>2011-12-15T20:01:49.989+05:30</updated><title type='text'>जांच को लेकर मुश्किल में सीबीआइ</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;br /&gt;आनन्द राय&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ, 8 दिसंबर : डिप्टी सीएमओ डाक्टर वाइएस सचान की रहस्यमय मौत की जांच कर रही सीबीआइ की मुश्किलें अब तक मिले सबूतों और साक्ष्यों ने बढ़ा दी हैं। सचान के सुसाइड नोट की छाया प्रति सीबीआइ को आत्महत्या की बात सोचने पर मजबूर कर रही है, वहीं परिस्थितियां और घटनास्थल के साक्ष्य हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। इस दुविधा में सीबीआइ दोराहे पर आकर खड़ी हो गई है और उसे जांच को गति देने के लिए कोई नया सिरा नहीं मिल रहा है। फिर भी सीबीआइ को भरोसा है कि वह तय समय में इसका राजफाश कर देगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजधानी के डबल सीएमओ मर्डर और एनआरएचएम घोटाले के आरोपी डाक्टर सचान की लाश 22 जून को लखनऊ जिला कारागार के शौचालय में पाई गई। तब जेल प्रशासन और पुलिस ने कहा कि सचान ने आत्महत्या की है। उनके पास से सुसाइड नोट भी मिला, लेकिन जब रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर हंगामा शुरू हुआ तो सुसाइड नोट गायब हो गया। जेल विभाग के एक उच्चाधिकारी के जरिए होकर यह सुसाइड नोट कहां गया, इस सवाल का जवाब सीबीआइ को भी नहीं मिल सका है। सूत्रों के मुताबिक सुसाइड नोट की तलाश में काफी समय से जुटी सीबीआइ को गत दिनों छाया प्रति मिली। यह सुसाइड नोट सचान की ही लिखावट में है। सीबीआइ इस विषय पर अनुसंधान कर रही है कि क्या वाकई सचान ने सुसाइड नोट लिखा है, या उनका टार्चर करके लिखवाया गया है। असल में उनके शरीर पर जिस तरह जख्मों के निशान मिले, वह उनके उत्पीड़न की ही दास्तां बयां करते हैं, इसीलिए सीबीआइ वह मूल प्रति हासिल करने के लिए शीर्ष अधिकारी से लेकर कई महत्वपूर्ण लोगों से पूछताछ कर चुकी है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जेल प्रशासन की कहानी पर विश्र्वास नहीं : उधर, घटनास्थल के साक्ष्यों ने सीबीआइ को हत्या पर भी सोचने को मजबूर कर दिया है। चूंकि जिस तरह सर्जिकल ब्लेड से उनके शरीर पर कटे के 8 निशान और शौचालय में बेल्ट से फंदा डालकर आत्महत्या करने की कहानी जेल प्रशासन ने सुनाई, वह अभी भी सीबीआइ के गले के नीचे नहीं उतर रही है। शौचालय में मिले खून और बिना पुलिस को सूचित किए लाश को बरामदे में रख देना भी सीबीआइ को तफ्तीश की एक और दिशा देने पर मजबूर कर रहा है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़ भी एक वजह : संशय की एक और वजह यह भी है कि सीबीआइ को घटना के दिन का मिला सीसीटीवी फुटेज अस्पष्ट है। अंदेशा है कि सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ हुई है, क्योंकि घटना के दिन जेल परिसर में 23 घंटा विद्युत आपूर्ति हुई है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पालीग्राफी टेस्ट से बंदी के इंकार पर भी शक बढ़ा : जेलर समेत सात जेलकर्मियों और दो कैदियों के पालीग्राफी टेस्ट के लिए सीबीआइ ने अदालत में अर्जी डाली थी। बिचाराधीन बंदी सोनू दारा सिंह द्वारा टेस्ट कराने से इंकार करने से सीबीआइ का शक बढ़ गया है। चूंकि घटना के दिन सोनू दारा सिंह जेल अस्पताल में मंडरा रहा था, इसलिए वह शक के दायरे में है। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-4188839811284330639?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4188839811284330639/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=4188839811284330639' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4188839811284330639'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4188839811284330639'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_3389.html' title='जांच को लेकर मुश्किल में सीबीआइ'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-4517454003555866949</id><published>2011-12-15T19:45:00.006+05:30</published><updated>2011-12-15T20:01:22.289+05:30</updated><title type='text'>कॉल डिटेल भी बनेगी फांस</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ, 7 दिसंबर (जाब्यू) : राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ को अहम सुबूत मिल रहे हैं। सीबीआइ ने जिलों में काम करने वाली फर्मो के ठेकेदारों व माननीयों की कॉल डिटेल पर भी नजर टिका दी है। यही कॉल डिटेल उनके गले की फांस बनेगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एनआरएचएम घोटाले का मामला प्रकाश में आने के बाद इस्तीफा देने वाले मंत्री सीबीआइ के निशाने पर हैं। सीबीआइ पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व अनंत मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा के करीबी अधिकारी, सांसद, विधायकों और ठेकेदारों की सूची बना चुकी है। माननीयों, ठेकेदारों व अधिकारियों का मोबाइल नंबर लेकर उसके कॉल डिटेल निकाले जा चुके हैं। कई लोगों के कॉल डिटेल निकालने की प्रक्रिया जारी है। दवा की आपूर्ति करने और निर्माण कार्य में लगे उन दबंग ठेकेदारों का भी ब्योरा तैयार हो रहा है, जिनकी पहंुच सांसद या विधायक के जरिए विभागीय मंत्रियों तक रही है। जौनपुर समेत पूर्वाचल के विभिन्न जिलों में काम करने वाले गुडडू खान और मलिक समेत कई अन्य आपूर्तिकर्ताओं के संबंधों की खास पड़ताल की जा रही है। सीबीआइ वैसे तो सभी जिलों की जांच में जुटी है, लेकिन अभिसूचना संकलन के दौरान पूर्व मंत्री के करीबियों के जो नाम सामने आए हैं, उनकी फर्मो से लेकर आर्थिक साम्राज्य की विशेष जांच हो रही है। सुबूत जुटाने में लगी सीबीआइ निर्माण कार्य और दवा खरीद की गड़बडि़यों के तह तक जाने में लगी है। इस बीच यह भी खबर मिली है कि कई जिलों में दबंगों और प्रभावी लोगों के इशारे पर दस्तावेज भी गायब किए जा रहे हैं। दस्तावेज गायब होने पर गोरखपुर जिले में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराने का मामला प्रकाश में आया है। सीबीआइ का शिकंजा कसता देख कुछ लोग अपने बचाव की पेशबंदी में भी जुट गए हैं।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-4517454003555866949?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4517454003555866949/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=4517454003555866949' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4517454003555866949'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4517454003555866949'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_9080.html' title='कॉल डिटेल भी बनेगी फांस'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-3923913467529955306</id><published>2011-12-15T19:45:00.004+05:30</published><updated>2011-12-15T20:00:21.163+05:30</updated><title type='text'>बाबू सिंह पर सीबीआइ का शिकंजा</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;आनन्द राय &lt;br /&gt;लखनऊ, 5 दिसंबर : एनआरएचएम घोटाले में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पर सीबीआइ का शिकंजा कसता जा रहा है। उनके करीबी रहे सांसद, विधायक व ठेकेदारों की भी जांच-पड़ताल चल रही है। सीबीआइ जिलों और विभिन्न इकाइयों से मिले दस्तावेजों की पड़ताल कर यह ब्योरा तैयार कर रही है कि किन-किन सांसद-विधायक के करीबी ठेकेदारों ने एनआरएचएम के तहत निर्माण, आपूर्ति व दवा खरीद का कार्य किया है और अवैध कमाई कहां पहुंचाई गई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बाबू सिंह कुशवाहा के बेहद करीबी रहे पीसीएफ चेयरमैन, एमएलसी रामचंद्र प्रधान की पत्नी के नाम पर बने फर्म पर ठेकेदारी का मामला प्रकाश में आने के बाद सीबीआइ ने जिलों की ओर रुख कर दिया है। सीबीआइ को खबर है कि बाबू सिंह कुशवाहा के प्रभाव में करोड़ों के कार्य चहेतों में बांटे गए हैं। हफ्ते भर में पचास से अधिक जिलों के दस्तावेज सीबीआइ के पास आये हैं। सीबीआइ ने पैक्सफेड के जरिए काम करने वालों का भी ब्यौरा हासिल किया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सीबीआइ को अंदेशा है कि जिस तरह एनआरएचएम के पैसे का भुगतान नमित टंडन की फर्म के नाम पर हुआ और उसे एमएलसी तक पहंुचाया गया, उसी तरह का कार्य सूबे के कई जिलों में अलग-अलग फर्मो से हुआ है। इसी कारण सीबीआइ की ध्यान अब जनप्रतिनिधियों और बिचौलियों पर केन्दि्रत है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ एनआरएचएम के तहत कार्य करने वाले ठेकेदारों के विधायक रामप्रसाद जायसवाल व मुख्तार अंसारी, एमएलसी प्रदीप सिंह व रामू द्विवेदी तथा सांसद धनंजय सिंह के अलावा दो दर्जन से अधिक विधायकों व सांसदों से रिश्तों की पड़ताल कर रही है। रामप्रसाद जायसवाल का नाम सीबीआइ की खास सूची में हैं। जांच एजेंसी जानने में जुटी है कि क्या ठेकेदारों की लेनदेन का कोई सिरा जनप्रतिनिधियों से जुड़ा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रधान से होगी पूछताछ : सीबीआइ एमएलसी रामचंद्र प्रधान से भी पूछताछ करेगी। प्रधान ने अपने प्रभाव में किसको-किसको ठेका दिलवाया। नमित टण्डन से उनके क्या रिश्ते रहे हैं। ठेकेदार को अपनी फर्म देने का उनका उद्देश्य क्या रहा है। क्या नाम छिपाने के लिए उन्होंने नमित टण्डन पर वाकई दबाव डाला। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आगा रिजवान को हिरासत में लेने की तैयारी : सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ दूसरों के नाम पर ठेकेदारी करने वाले आगा रिजवान को हिरासत में लेने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा हफ्ते भीतर पूछताछ के लिए दो दर्जन से अधिक ठेकेदारों और पैक्सफेड के अभियंताओं समेत कई अन्य लोगों से पूछताछ करेगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;(माननीयों की अकूत संपत्ति पर भी नजर- पेज 11)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ, 5 दिसंबर (जाब्यू) : सीबीआइ के निशाने पर माननीयों की आय से अधिक संपत्ति भी है। सीबीआइ ने होमवर्क में एक दर्जन से अधिक जनप्रतिनिधियों की हैसियत आंकी है, जो एक दशक में कई गुना बढ़ गयी है। सीबीआइ की टीम कभी भी इनके यहां छापेमारी कर सकती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कौन हैं रामचंद्र प्रधान : लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के निवासी रामचंद्र प्रधान के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत लखनऊ विश्र्वविद्यालय की छात्र राजनीति से हुई। फिर उन्होंने बसपा की राजनीति शुरू की और लखनऊ का उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया। प्रधान ने न केवल एमएलसी बनने से लेकर पीसीएफ चेयरमैन तक का सफर किया, बल्कि अपने भाई को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने में भी कामयाब रहे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रधान की पत्नी भी एक सहकारी बैंक की अध्यक्ष हैं। बाबू सिंह कुशवाहा की जब सरकार में तूती बोलती थी, तब उनके हमकदम के रूप में प्रधान का भी जलवा कम नहीं था। अभी भी प्रधान को अपनी हैसियत का गुमान है और उनका आर्थिक साम्राज्य भी राजनीतिक रुतबे की तरह ही बढ़ा है।&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-3923913467529955306?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/3923913467529955306/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=3923913467529955306' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3923913467529955306'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3923913467529955306'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post_15.html' title='बाबू सिंह पर सीबीआइ का शिकंजा'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-2756894279532510886</id><published>2011-12-15T19:42:00.000+05:30</published><updated>2011-12-15T19:42:59.881+05:30</updated><title type='text'>ठेकेदारी में बड़े चेहरे उजागर</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;br /&gt;आनन्द राय&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ, 4 दिसंबर 2011&amp;nbsp;: एनआरएचएम घोटाले की जांच के घेरे में आए ठेकेदार नमित टंडन के आत्महत्या के प्रयास के बाद भले परिवारीजनों ने सीबीआइ पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हों, लेकिन एनआरएचएम की ठेकेदारी में शामिल बड़े लोगों का भी चेहरा उजागर कर दिया है। दरअसल नमित टंडन ठेके में मोहरा मात्र थे। असली ठेकेदारी पीसीएफ के चेयरमैन, एमएलसी रामचंद्र प्रधान की पत्नी की फर्म पर उनके खास सहयोगी आगा रिजवान कर रहे थे। नमित टंडन पर सीबीआइ का दबाव इन सबका नाम उजागर करने के लिए था, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ मुंह खोलने का खामियाजा टंडन को भी बखूबी मालूम है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रमा इंटरप्राइजेज के जरिए नमित टंडन ने जननी सुरक्षा योजना के तहत 27 एएनएम केंद्र बनवाने का काम पैक्सफेड से लिया। इस कार्य में श्रेया इंटरप्राइजेज भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार काम दिलाने की भूमिका पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के सबसे करीबी पीसीएफ चेयरमैन और एमएलसी रामचंद्र प्रधान ने निभाई। प्रधान के करीबी आगा रिजवान इसमें माध्यम थे। सूत्रों के मुताबिक 22 फरवरी 2010 से दिसंबर 2010 तक रमा इंटरप्राइजेज के खाते में एक करोड़ रुपये आए और नमित टंडन ने 50 लाख रुपये नकद और 50 लाख रुपये कई लोगों के नाम के चेक के जरिए आगा रिजवान को ही दे दिए। सीबीआइ को खबर मिली है कि पैसे रामचंद्र प्रधान को दिए गए। मामले में नमित टंडन से 28 नवंबर व दो दिसंबर को सीबीआइ ने पूछताछ की तो सबसे बड़ा सवाल श्रेया इंटरप्राइजेज के बारे में उठा, जिसकी प्रोपराइटर प्रधान की पत्नी अनीता प्रधान हैं। चूंकि पैसों का लेन-देन फर्म के नाम पर भी है, इसलिए सीबीआइ इनकी घेरेबंदी के लिए नमित की गवाही चाहती थी, लेकिन नमित टंडन पर प्रधान की फर्म का नाम न लेने का दबाव था। सीबीआइ और सत्ता पक्ष के नेताओं के दबाव में नमित परेशान हो गए। फिलहाल वे ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं और होश में आने के बाद ही सच सामने आएगा। वैसे जो भी कार्य हुए उसे आगा ने कराया और वर्कआर्डर पर भी नमित टंडन के हस्ताक्षर नहीं हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-2756894279532510886?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/2756894279532510886/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=2756894279532510886' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2756894279532510886'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2756894279532510886'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/12/blog-post.html' title='ठेकेदारी में बड़े चेहरे उजागर'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-4926034420463114517</id><published>2011-02-16T20:37:00.002+05:30</published><updated>2011-02-16T20:37:52.267+05:30</updated><title type='text'>नेपाली के हाथ था यूपी के शूटरों का 'रिमोट</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;- बैंकाक में मारा गया भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;- दत्ता सामंत, जमीम, तानशा और शाहिद आजमी की हत्या नेपाली ने कराई&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ, 16 फरवरी। उत्तर प्रदेश, मुंबई और नेपाल में आपराधिक गिरोह चला रहे डान भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली के बैंकाक में मारे जाने की बात सूत्रों ने पुष्ट कर दी है। गुजरे दिसम्बर के आखिरी हफ्ते में नेपाली के बैंकाक में मारे जाने की खबर चर्चा में आयी, लेकिन तबसे इस खबर को लेकर संशय बरकरार था। नेपाली के मारे जाने से यूपी पुलिस को राहत मिली है, क्योंकि यहां के हाइप्रोफाइल नए शूटरों का रिमोट उसके ही हाथों में था। वह शूटरों को हथियार, सुपारी और पनाह भी देता था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भरत नेपाली का नाम यूं तो अण्डरवल्र्ड में तबसे कायम है, जबसे दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन का गैंगवार शुरू हुआ, लेकिन मुंबई में मजदूर नेता दत्ता सामंत की हत्या के बाद वह सुर्खियों में आ गया। मुंबई के मलाड इलाके में रहकर कभी छोटा राजन गैंग के लिए ड्राइवर की भूमिका निभाने वाले नेपाली की महत्वाकांक्षा इतनी तेज बढ़ी कि उसने छोटा राजन से बगावत कर खुद का गैंग खड़ा कर लिया। फिर नेपाल में भी उसने अपना साम्राज्य खड़ा किया। भरत नेपाली ने जून 2010 में छोटा राजन के साथी फरीद तानशा की हत्या चेंबूर के तिलकनगर में यूपी के शूटरों से कराई। उसने इलाहाबाद के चर्चित अपराधी राजेश यादव गैंग को हत्या की सुपारी दी। यह बात तब खुली जब एसटीएफ ने अगस्त 2010 में जौनपुर निवासी ओसामा उर्फ राहुल राय को बादशाहनगर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। ओसामा भी तानशा की हत्या में शामिल था। मुंबई बम विस्फोट के एक आरोपी के वकील शाहिद आजमी की हत्या 11 फरवरी 2010 को भरत नेपाली गैंग के विजय शेट्टी उर्फ बाबा और जौनपुर, आजमगढ़ के शूटरों ने की। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वियतनाम तक आपराधिक गतिविधि संचालित करने वाले प्रकाश पाण्डेय उर्फ बंटी के साथी उत्तरांचल के भूपेन्द्र सिंह वोहरा को अभी महराजगंज जिले के सोनौली बार्डर से गिरफ्तार किया गया, तब भी भरत नेपाली के यूपी में बढ़ती गतिविधियों की बात सामने आयी। भूपेन्द्र भी भरत नेपाली के लिए काम कर चुका है। नेपाल में भी भरत नेपाली ने अपने हाथ दिखाए। उसने सात फरवरी 2010 को काठमाण्डू में स्पेस टाइम्स नेटवर्क समूह के सीइओ जमीम शाह की हत्या करा दी। यह हाई प्रोफाइल हत्या जाली नोटों के अन्तर्राष्ट्रीय कारोबार में वर्चस्व के लिए हुई और इसमें मुख्य भूमिका नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी ने निभाई, जो हत्या के कुछ दिन पहले 25 लाख रुपये जाली नोटों के साथ काठमाण्डूू में गिरफ्तार हुआ था। इसके पूर्व जमीम शाह से जुड़े जाली नोटों के कारोबार में शामिल डान माजिद मनिहार की 6 अक्टूबर 2009 को नेपालगंज तथा परवेज टाण्डा की 25 दिसंबर 2009 को बुटवल में हत्या हुई। इस हत्या में भी भरत नेपाली के गुर्गे शामिल थे। लखनऊ, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर और गोरखपुर के अपराधियों से भरत नेपाली के रिश्ते जगजाहिर हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-4926034420463114517?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4926034420463114517/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=4926034420463114517' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4926034420463114517'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4926034420463114517'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2011/02/blog-post_16.html' title='नेपाली के हाथ था यूपी के शूटरों का &apos;रिमोट'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-7669001891485094045</id><published>2011-02-10T02:14:00.000+05:30</published><updated>2011-02-10T02:14:23.506+05:30</updated><title type='text'>क्या जवाब दूं मैं !</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;एक आदमी ने पूछा आज हमसे तुम्हारा ब्लॉग खामोश क्यूँ है. आप बताओ क्या जवाब दूं मैं ! &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' 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type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/8792887870536652761/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=8792887870536652761' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8792887870536652761'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8792887870536652761'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='लखनऊ: यूपी में सियासी जंग में खून बहने का सिलसिला बड़ा पुराना है। वर्चस्व की लड़ाई और जर-जमीन के चक्कर में यहां कई जनप्रतिनिधि अपनी जान गंवा चुके हैं। जनप्रतिनिधियों के खून से यूपी पुलिस की डायरी रंगी पड़ी है। सूबे के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के ऊपर हुए जानलेवा हमले के बाद यह रंग और गाढ़ा हो गया है।'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-7321728156088682524</id><published>2010-03-04T07:39:00.002+05:30</published><updated>2010-03-04T07:44:12.671+05:30</updated><title type='text'>नेपाल की मीडिया में  इण्‍टरनल गैंगवार !</title><content type='html'>नेपाल में होली की शाम जनकपुर टुडे के प्रकाशक अरुण सिंघानियां की गोली मारकर हत्‍या कर दी गयी। मेरे एक दो मित्रों ने मुझे फोन किया और पिछली घटनाओं से मामले को जोडने लगे। लोग कई तरह का तर्क दे रहे थे। कुछ लोग घटनाओं की तह में पहुंचकर बहुत कुछ दावा भी करने लगे। मैं इस घटना पर और कुछ लिखूं या कयास लगाऊं उससे पहले दो तीन प्रमुख बातों की याद दिलाना जरुरी समझ रहा हूं। सभी मामले इसी साल के हैं और सबके तार आपस में एक दूसरे से जुडे हुये हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; सबसे पहले यूनुस अंसारी की गिरफ़तारी की चर्चा जरूरी है। नेपाल में राजा ज्ञानेन्‍द्र वीर विक्रम शाह के शासन में मंत्री रहे सलीम मियां अंसारी के बदनाम बेटे और मीडया के क्षेत्र में पैर जमा चुके आईएसआई परस्‍त, जाली नोटों के कारोबारी और दाऊद के खास सहयोगी यूनुस अंसारी की 1 जनवरी 2010 को गिरफ़तारी हुई। यूनुस के साथ दो पाकिस्‍तानी नागरिक और लगभग 25 लाख भारतीय जाली नोट भी पकडा गया। इस घटना के बाद भारत में बडे पैमाने पर जाली नोटों के धंधों का खुलासा हुआ और विभिन्‍न शहरों से लोग पकडे गये। इस मामले के कुछ दिन बाद नेपाल में सन्‍नाटा छा गया और लोग यूनुस अंसारी की चर्चा करना भूल गये। पर यह सब कुछ तूफान आने से पहले की खामोशी थी।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; सात फरवरी को नेपाल के मीडिया मुगल, दाऊद के सहयोगी और जाली नोटों के धंधे में अरसे से लिप्‍त जमीम शाह को काठमाण्‍डू में गोलियों से भून दिया गया। नेपाल के एक पूर्व नौकरशाह के पुत्र जमीम शाह ने अम्बिका प्रधान से प्रेम विवाह किया था। अम्बिका नेपाल में एफ एम चैनल की शुरुआत करने वाले प्रसन्‍न मानचिंग प्रधान की बेटी हैं। मीडिया के क्षेत्र में अपनी ससुराल के लोगों का प्रभाव देखकर ही जमीम ने अपना दांव लगाया। लोग कहते हैं कि बाद में दाऊद इब्राहिम ने साढे चार करोड रुपये की पूंजी लगाकर रातों रात जमीम शाह का प्रभाव बढा दिया और नेपाली मीडिया में स्‍पेस टाइम्‍स का वर्चस्‍व हो गया। इस समय स्‍पेस टाइम्‍स ग्रुप का कारोबार 500 करोड रुपये का है।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; जमीम की हत्‍या के बाद 15 फरवरी को काठमाण्‍डू के एआईजी मदन खडका ने जमीम शाह मर्डर का खुलासा किया। उन्‍होंने बताया कि बरेली जेल में बंद डान बबलू ने भरत नेपाली, दीपक शाही उर्फ बबलू और अन्‍य कई लोगों के साथ मिलकर इस मामले की साजिश रची। नेपाल के कई मंत्रियों ने इस मामले को अन्‍तर्राष्‍ट्रीय साजिश करार दिया। इस खुलासे के बाद नेपाल में मामले पर बहुत कुछ खास चर्चा नहीं हो रही थी। इस बीच 2 मार्च की शाम को होली मनाकर लौट रहे भारतीय मूल के मीडियामैन जनकपुर टुडे के प्रकाशक अरुण सिंघानियां की गोली मारकर हत्‍या कर दी गयी।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; दरअसल अरुण सिंघानिया की हत्‍या के बाद मुझसे कुछ लोग जो सवाल कर रहे थे वह मेरी लिखी तीन चार खबरों की वजह से है। जब जमीम शाह की हत्‍या हुई तो अगले ही दिन- यूनुस ने खत्‍म करा दिया जमीम का खेल, प्रकाशित हुई। मेरे सूत्रों ने बताया था कि जमीम की हत्‍या के पीछे मुख्‍य भूमिका यूनुस अंसारी की है और इस मामले में कई भारतीय डान लगे हैं। शुरु में छोटा राजन और भरत नेपाली का नाम आया। इसके कुछ घण्‍टे बाद बबलू का भी नाम मुझे बताया गया। पहले तो मुझे लगा कि बडबोले बबलू ने यह झूठ बोला लेकिन कयास लगाते हुये और यह आशंका जाहिर करते हुये 9 फरवरी को ही मैंने मामले में बबलू का नाम शामिल करते हुये एक रपट लिखी। उस समय तक नेपाल की मीडिया या भारतीय मीडिया में बबलू के नाम की चर्चा नहीं थी। 15 फरवरी को जब नेपाल के एआईजी मदन खडका ने पूरे मामले में बबलू का ही नाम शामिल किया तब मुझे उन सूत्रों की याद आयी जिन लोगों का कहना था कि बबलू ने एक करोड रुपये के लिए यूनुस अंसारी से यह डील की। जहां तक भरत नेपाली की बात है तो वह सेना से स्‍वैच्छिक अवकाश लेकर छोटा राजन के लिए काम करता है। भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली के अलावा यूपी मूल के दीपक शाही उर्फ बबलू सिंह समेत और कई नाम सामने आये। मामले का दूसरा पक्ष यहीं से शुरू होता है। जैसे सियासत में रिश्‍ते बदलते रहते हैं उसी तरह अपराधियों की कौम कभी रिश्‍ते नहीं पहचानती हैं। होंगे कुछ लोग जो समझते होंगे कि जमीम और यूनुस जब एक ही मिशन के लिए काम करते हैं तो उनके बीच कैसी दुश्‍मनी लेकिन इसके उदाहरण तो सैकडों पडे हैं कि एक ही पार्टी के लिए काम करने वाले लोग भी आपस में एक दूसरे को फूटी आंखों देखना नहीं चाहते। दरअसल आईएसआई, नेपाल के पाक दूतावास और दाऊद की नजर में सर्वाधिक महत्‍व हासिल करने की चाह ने ही यूनुस को जमीम का प्रतिद्वंदी बना दिया। यूनुस ने मीडिया के क्षेत्र में जमीम का प्रभाव देखकर ही कदम रखा। जमीम के चलते कारोबार में उसका वह स्‍थान नहीं बन रहा था जिसकी उसे चाह रही। जैसाकि यह बात सामने आयी कि अपनी राह का कांटा हटाने के लिए ही यूनुस ने जमीम का खेल खत्‍म करा दिया।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अब सबसे महत्‍वपूर्ण और आखिरी बात। बात यह कि 20 फरवरी के अंक में मेरी एक रपट बहुत प्रमुखता से छपी। डान की जान खतरे में। जी हां, इसी शीर्षक से छपी खबर में नेपाल के मापिफयाओं और पाक परस्‍त तथा आईएसआई से जुडे लोगों के बीच मची खलबली और प्रतिशोध में बबलू और उससे जुडे लोगों पर हमले की तैयारी का जिक्र किया था। इस रपट को लोगों ने खूब मन से पढा और मुझसे कई सवाल जवाब हुये। मंगलवार से ही भाई लोग पूछ रहे हैं कि क्‍या अरुण सिंघानियां बबलू के मददगार थे। एक सज्‍जन ने दिल्‍ली में एमबीए कर रहे संघानियां के पुत्र राहुल से बात कराने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो पायी। नेपाल के एक मित्र ने इस पर अपने देश का ही नजरिया रखा। यह भी पता चला कि अरुण सिंघानियां के यहां काम करने वाली उमा नाम की कोई महिला पिछले साल रहस्‍यमय हालत में मारी गयी थी। उनके आपसी विवाद का भी कुछ लोगों ने जिक्र किया लेकिन मेरे एक साथी ने यह सवाल उठाया कि कहीं अरुण सिंघानियां बौखलाये हुये लोगों के तो शिकार नहीं हैं। अब यह बात इसलिए भी कि नेपाल की आपराधिक गतिविधियों में लिप्‍त और दाऊद खेमे से प्रभावित लोग जमीम की हत्‍या में यूनुस की भूमिका से इंकार करते हैं। ऐसा इसलिए कि उन सभी के मन में यह बात भर दी गयी कि भारत के प्रति सद़भावना रखने वाले लोग हमारे खिलाफ हैं और एक एक करके हमारी जडों पर हमला बोला जा रहा है। इसके पीछे 29 जून 1998 को काठमाण्‍डू में मारे गये नेपाल के पूर्व मंत्री मिर्जा दिलशाद बेग से लेकर 6 अक्‍टूबर 2009 को नेपालगंज में मारे गये डान माजिद मनिहार और 25 दिसम्‍बर को बुटवल में मारे गये डान परवेज टाण्‍डा की मौत को भी जोडा जा रहा है। सभी हत्‍याओं को रॉ, आईबी, यूपी एटीएस और भारतीय मूल के मधेशियों या उनकी आर्मी के मत्‍थे मढ रहे हैं। नेपाल की पुलिस अपने हित के लिए और इण्‍टरनल गैंगवार रोकने की मंशा से इसी बात को प्रचारित करने में जुटी है। तो क्‍या मीडिया के क्षेत्र में प्रभावी कदम बढा रहे भारतीय मूल के अरुण सिंघानियां इसी मानिसकता के शिकार हो गये। वर्चस्‍व और नफरत के लिए किसी ने अरुण की जान ले ली या पिफर वे अपने किसी निजी विवाद की वजह से मारे गये। जागरण जंक्‍शन के इस ब्‍लाग को नेपाल के मेरे कई साथी पढते हैं और समय समय पर उनका गोपनीय मेल भी मुझे मिलता है। मैं अपने उन मित्रों का आभारी हूं। अरुण सिंघानियां की मौत के पीछे कि असली सच्‍चाई के लिए उन सबकी सूचनाओं का मुझे इंतजार है। मैं चाहता हूं कि जैसे जमीम और यूनुस वाले मामले की सच्‍चाई मेरे पास तक आयी वैसे ही अरुण सिंघानियां का भी सच सामने आये। दैनिक जागरण दुनिया का सबसे बडा अखबार है। इसके पाठकों की सबसे बडी संख्‍या है इसीलिए मैंने सार्वजनिक तौर पर आहवान किया है। अब और बातें तो बाद में लेकिन कहीं न कहीं कुछ न कुछ तो है। देर सवेर मामले का खुलासा होगा ही। पर यह सवाल तो है ही कि नेपाल के मीडिया मुगलों पर आखिर फंदा क्‍यों कस रहा है। क्‍या मीडिया के क्षेत्र में भी कोई इण्‍टरनल गैंगवार चल रही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-7321728156088682524?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/7321728156088682524/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=7321728156088682524' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7321728156088682524'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7321728156088682524'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='नेपाल की मीडिया में  इण्‍टरनल गैंगवार !'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-3794012102681336077</id><published>2010-03-04T07:19:00.001+05:30</published><updated>2010-03-04T07:19:19.099+05:30</updated><title type='text'>Check out नेपाल की मीडिया में कहीं इंटरनल गैंगवार तो नहीं « अनुभूति</title><content type='html'>Title: नेपाल की मीडिया में कहीं इंटरनल गैंगवार तो नहीं « अनुभूति&lt;br/&gt;Link: http://gotaf.socialtwist.com/redirect?l=209213383117093116411&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-3794012102681336077?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/3794012102681336077/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=3794012102681336077' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3794012102681336077'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3794012102681336077'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/03/check-out.html' title='Check out नेपाल की मीडिया में कहीं इंटरनल गैंगवार तो नहीं « अनुभूति'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1845916696588405216</id><published>2010-02-20T09:04:00.000+05:30</published><updated>2010-02-20T09:04:06.940+05:30</updated><title type='text'>डॉन  की जान खतरे में</title><content type='html'>गोरखपुर। बड़बोले माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव और उसके गुर्गो की जान खतरे में है। ये लोग नेपाली माफियाओं की आंख की किरकिरी हो गये हैं। इनकी हस्ती मिटाने के लिए अण्डरव‌र्ल्ड में 'बोली' लगनी शुरू हो गयी है। बबलू की पेशी के दौरान कभी भी यह 'बोली' 'गोली' में तब्दील हो सकती है। खुफिया एजेंसियों ने भी सरकार और सुरक्षा तंत्र को इससे अवगत करा दिया है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;काठमाण्डू में 7 फरवरी को मारे गये मीडिया किंग और दाऊद के खास जमीम शाह की हत्या का इल्जाम बरेली जेल में बंद डान बबलू और उसके साथियों पर है। इसके पहले भी मिर्जा दिलशाद बेग की हत्या से लेकर फजलूर्रहमान की गिरफ्तारी तक कई मामलों में बबलू का नाम उछलता रहा है। बबलू ने हमेशा फोन के जरिये एक-दूसरे गैंग से तार जोड़ने की भूमिका निभायी है। वह कुछ खास पुलिसकर्मियों का मददगार है। लंबी रकम लेकर आईएसआई के इशारे पर काम करने वालों की हत्या में भी सक्रिय है। इसीलिए पाक दूतावास के एक अफसर, जमीम के रिश्तेदार और आईएसआई परस्त कई बड़े माफिया बबलू का विकेट गिराने की योजना बना रहे हैं। उधर भारतीय फेक करेंसी के साथ पकड़ा गया नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी का पुत्र यूनुस अंसारी भी बबलू से खफा है। &lt;br /&gt;यूनुस ने अपने साइलेंट प्रतिद्वंदी जमीम शाह को निपटाने की डील एक करोड़ रुपये में बबलू से की थी। बबलू के चलते ही इस डील को अमलीजामा पहनाया जा सका। यूनुस के लोगों को शक है कि जमीम की हत्या के बाद खुद बड़बोले बबलू ने ही यह राज जाहिर कर दिया। अण्डरव‌र्ल्ड की सूचना के मुताबिक अब खुद को सच्चा साबित करने के लिए यूनुस कोई भी जोखिम उठाने को तैयार है। बबलू को निपटाने में वह उन भारतीय अपराधियों की मदद ले सकता है जिन्हें समय समय पर पनाह देता रहा है। &lt;br /&gt;जमीम के खून के छींटे धोना चाहता यूनुस &lt;br /&gt;यूनुस अंसारी ने सोचा था कि जमीम शाह की हत्या से उसकी राह का कांटा निकल जायेगा लेकिन हुआ ठीक उल्टा। एक तरफ उसकी मुश्किलें बढ़ीं तो दूसरी तरफ वह अपने ही लोगों की निगाह में दागी हो गया। इससे न सिर्फ उसकी ताकत कमजोर हुई बल्कि अपने सहयोगियों का भी निशाना बन गया। पाक दूतावास इस मामले पर पर्दा डालते हुये अपने सभी सहयोगियों को एक साथ रखने की मुहिम में जुटा है। काठमाण्डू सेंट्रल जेल में बंद यूनुस इस मुहिम में सक्रिय होकर जमीम के खून के छींटों को धोना चाहता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यूनुस को बचाने में जुटी नेपाल पुलिस&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर, 16 फरवरी। नेपाल के मीडिया किंग और दाऊद इब्राहिम के सहयोगी जमीम शाह की हत्या के हफ्ते भर बाद पुलिस ने रहस्य से पर्दा उठाने का दावा कर दिया है लेकिन इस पूरे घटना क्रम में वह यूनुस अंसारी को बचाने में जुट गयी है। नेपाल पुलिस अपने यहां के कुछ लोगों का नाम जोड़कर सिर्फ भारतीय अपराधियों के नाम की लकीर पीट रही है। बबलू श्रीवास्तव, भगवंत सिंह उर्फ भरत नेपाली, दीपक शाही उर्फ बबलू सिंह और छोटा राजन का कनेक्शन जोड़कर पुलिस ने कमोवेश जमीम शाह मर्डर केस की तफ्तीश पूरी कर दी है। &lt;br /&gt;नेपाल के एआईजी कदम खड़का ने मीडिया के समक्ष शाह मर्डर केस की फाइल खोलते हुये बबलू श्रीवास्तव और भरत नेपाली को कसूरवार ठहराया। इस मामले में नेपाल के पुलिस कर्मी प्रकाश क्षेत्री को संदिग्ध करार दिया जबकि घटना में छह अन्य नेपालियों की भी संलिप्तता बतायी। शूटर के तौर पर मोहम्मद वकार और उसके साथी का नाम उजागर हुआ। जमीम की हत्या के तत्काल बाद दैनिक जागरण ने अपनी रपट में यह आशंका जाहिर की कि वर्चस्व की लड़ाई और अपनी गिरफ्तारी के शक के चलते पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी ने जमीम का खेल खत्म करा दिया। अगले दिन दस फरवरी के अंक में 'यूनुस व भरत के संबंध तलाश रही पुलिस' शीर्षक से बबलू श्रीवास्तव, भरत नेपाली और यूनुस अंसारी के कनेक्शन जोड़ते हुये एक और खबर प्रकाशित की जिसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया कि यूनुस को बचाने में पुलिस सक्रिय हो गयी है। &lt;br /&gt;प्रारंभ में नेपाल पुलिस ने अपनी तफ्तीश के केन्द्र में यूनुस को रखा और काठमाण्डू सेण्ट्रल जेल में उससे कई च्रकों में पूछताछ की। बाद में पुलिस ने यह तर्क गढ़ा कि हत्यारे पहले यूनुस अंसारी पर ही हमला बोलने वाले थे लेकिन उसके जेल जाने के बाद इरादा बदल दिये और निशाने पर जमीम आ गये। सूत्रों का कहना है कि भगोड़े सैनिक भरत नेपाली और बदायूं के दीपक शाही की आमदरफ्त बबलू श्रीवास्तव के जरिये यूनुस से रही है। घटना की पृष्ठभूमि तैयार करने में इनकी भूमिका भले रही हो लेकिन पुलिस कर्मी प्रकाश क्षेत्री और शूटर मोहम्मद वकार से यूनुस के संबंधों पर पर्दा क्यों डाला जा रहा है। दरअसल नेपाल पुलिस इण्टरनल गैंगवार रोकने के लिए पूरा मामला भारतीय अपराधियों के हवाले कर रही है। इस हाई प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री में नेपाल के कुछ और प्रमुख लोगों की भूमिका है। वैसे इस मामले में वाराणसी जेल में बंद एक व्यक्ति पर भी नेपाल पुलिस शक की निगाह लगाये है।&lt;br /&gt;यूनुस व भरत के रिश्तों का सिरा तलाश रही पुलिस&lt;br /&gt;गोरखपुर। स्पेस टाइम्स ग्रुप के प्रबंध निदेशक जमीम शाह की हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी नेपाल पुलिस पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी और भरत नेपाली के बीच तालमेल की जड़ तलाश रही है। भरत नेपाली द्वारा जमीम शाह की हत्या की जिम्मेदारी लिये जाने के बाद ही पुलिस की तफ्तीश में कई नये आयाम जुड़ गए हैं। बरेली जेल में बंद अंडरव‌र्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव के रिश्तों पर भी पुलिस की नजर है। &lt;br /&gt;छोटा राजन गैंग के महत्वपूर्ण अंग रहे भरत नेपाली ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि जमीम की हत्या उसने करवायी है। पुलिस मान रही है इस हत्या में कई चैनल शामिल हैं। &lt;br /&gt;29 जून 1998 को मिर्जा दिलशाद बेग की हत्या, छह अक्टूबर 2009 को नेपालगंज में डॉन माजिद मनिहार की हत्या और 25 दिसम्बर को बुटवल में परवेज टांडा की हत्या की कड़ी में ही पुलिस जमीम की हत्या को भी जोड़ रही है। ये सभी आईएसआई और दाऊद के मोहरे रहे, इसलिए इनकी हत्या के तार कहीं न कहीं भारतीय अपराध जगत से जुड़ गये। वैसे नेपाल पुलिस की सबसे चौकस निगाह भारतीय जाली करेंसी के साथ पकड़े गये आईएसआईपरस्त यूनुस अंसारी पर ही है। इस खेल में यूनुस और भरत की भूमिका कहां तक हो सकती है इसके लिए अंडरव‌र्ल्ड के कुछ नामी मोहरों से उनके कनेक्शन की जांच हो रही है। केंद्र में बबलू श्रीवास्तव का भी नाम उभरकर सामने आया है। जगजाहिर है कि छोटा राजन, बबलू श्रीवास्तव और भरत नेपाली के बीच बेहतर रिश्ते रहे हैं। मुम्बई बम विस्फोट के बाद दाऊद और छोटा राजन के बीच तनातनी बढ़ी तो बबलू छोटा राजन खेमे में आ गया। तब भी सलीम मियां से उसके सम्पर्क बने रहे। अपने अधूरा ख्वाब उपन्यास में भी उसने सलीम का जिक्र किया है। &lt;br /&gt;पुलिस इस बात को मान रही है कि इधर, जबसे यूनुस अंसारी पकड़ा गया तबसे वह शक के कारण जमीम से खार खाये था। माना जा रहा है कि जमीम शाह और उसकी प्रतिद्वंदिता का लाभ उठाते हुए जेल में बंद बबलू ने यूनुस अंसारी की मंशा को हवा देकर डील करायी और जमीम का खेल खत्म हो गया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-1845916696588405216?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1845916696588405216/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=1845916696588405216' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1845916696588405216'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1845916696588405216'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/02/blog-post_20.html' title='डॉन  की जान खतरे में'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-7907914606783280544</id><published>2010-02-09T20:46:00.000+05:30</published><updated>2010-02-09T20:46:03.352+05:30</updated><title type='text'>यूनुस ने खत्म करा दिया जमीम का खेल!</title><content type='html'>आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S3F7rVxH6YI/AAAAAAAAAuU/eASsp8sMPus/s1600-h/JAMIM-SHAH-1_20100208090558.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S3F7rVxH6YI/AAAAAAAAAuU/eASsp8sMPus/s320/JAMIM-SHAH-1_20100208090558.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;नेपाल में जाली नोटों के कारोबारी यूनुस अंसारी की गिरफ्तारी के एक माह के अंदर स्पेस टाइम्स समूह के प्रबंध निदेशक जमीम शाह की हत्या से कई सवाल खड़े हो गये हैं। उसकी हत्या के पीछे किसी बड़े षड्यंत्र के कयास लग रहे हैं। यह बात भी सामने आ रही है कि जमीम का खेल खत्म कराने में यूनुस अंसारी ने एक महत्वपूर्ण सूत्रधार की भूमिका निभायी है। &lt;br /&gt;दबी जुबान से यह बात सामने आयी कि नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी की गिरफ्तारी जमीम शाह की योजना के चलते हुई। अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए यूनुस ने हमेशा जमीम की नकल की और मीडिया के क्षेत्र में उसका वर्चस्व देखकर ही आया इसलिए दोनों के बीच बराबर प्रतिद्वंदिता बनी रही। आईएसआई और दाऊद तक पहंुच बनाने के बाद तो वह जमीम शाह की आंख की किरकिरी बन गया। इसीलिए माना यही जा रहा है कि जमीम ने यूनुस को जेल भिजवाया तो उसने उसकी इस दुनिया से छुट्टी करवाने में खास भूमिका निभायी। ध्यान रहे कि जमीम शाह नेपाल के पूर्व नौकरशाह मोइन शाह का बेटा है। विराटनगर में सबसे पहले रेडियो की शुरूआत करने वाले प्रसन्न मानचिंग प्रधान की बेटी अम्बिका से उसने शादी की। फिर वह मीडिया के क्षेत्र में आ गया। बाद में पाक दूतावास के एक अफसर ने जमीम का सम्बंध दाऊद इब्राहिम से करा दिया। दाऊद ने साढ़े चार करोड़ रुपये की पूंजी लगाकर स्पेस टाइम्स नेटवर्क की शुरूआत करवायी। फिर जमीम का प्रभाव बढ़ता गया और वह काले कारोबार में शामिल होकर अरबों रुपये का मालिक हो गया। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S3F70h3V-JI/AAAAAAAAAuc/mRftXiV1sgw/s1600-h/babloo1_fix-1_1236187817_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" kt="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S3F70h3V-JI/AAAAAAAAAuc/mRftXiV1sgw/s320/babloo1_fix-1_1236187817_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;जब दाऊद ने काठमाण्डू में एक बंगला खरीदने की जिम्मेदारी जमीम शाह पर डाली तो पैसों के लिए उसने हाथ खड़े कर दिये। फिर दोनों के बीच तनाव बढ़ गया। तब पाक दूतावास ने भारत विरोधी गतिविधियों के लिए दोनों का समझौता करवाया। हालांकि समझौते के बाद भी वह दाऊद से डरा हुआ था। उसने दार्जिलिंग में पढ़ रहे अपने बेटे जैकी को काठमाण्डू बुलवा लिया था। उसके पहले जमीम ने ऋत्विक रोशन का इण्टरव्यू अपने अखबार में तोड़ मरोड़ कर छापा और एक भडकाऊ कैसेट बनाकर रोशन विरोधी अभियान शुरू कर दिया। वर्ष 2004 में नेपाल के भारतीय दूतावास ने जमीम की सभी करतूतों का जिक्र करते हुये नकेल कसने के लिए भारत सरकार को एक रिपोर्ट भेजी। तभी आईएसआई ने जमीम के विकल्प के तौर पर यूनुस अंसारी को उभार दिया। भारत के भगोड़े अपराधियों को पनाह देने की वजह से यूनुस का नेटवर्क प्रभावी हो गया। इसीलिए वह दाऊद के लिए महत्वपूर्ण हो गया और जमीम की उपयोगिता कम हो गयी। जमीम के निपटारे में दाऊद की सहमति है या जेल में बंद होने का लाभ उठाने के लिए यूनुस ने खुद अपनी मर्जी से अपनी राह का रोड़ा हटा दिया, इस तरह के कई कयास लग रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;छोटा राजन का भी नाम उछला&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर : स्पेस टाइम्स नेटवर्क समूह के प्रबंध निदेशक जमीम शाह की हत्या में छोटा राजन के हाथ होने की भी चर्चा तेज हो गयी है। अण्डरव‌र्ल्ड का एक खेमा इस बात की चर्चा में लगा है कि जमीम की हत्या छोटा राजन ने करवायी है। हालांकि एक दूसरा खेमा इसे उड़ती खबर बता रहा है। अपराध जगत के कुछ जानकारों का कहना है कि जब भी ऐसी वारदात होती तो अण्डरव‌र्ल्ड में अपनी धमक कायम करने के लिए कुछ माफिया खुद ही अपना नाम प्रचारित करवा देते हैं। इस तरह कई महत्वपूर्ण मसले अफवाहों की भेंट चढ़ जाते हैं और असली गुत्थी सुलझ नहीं पाती है। बहरहाल इस बात की भी चर्चा जोरों पर है कि जमीम की हत्या में छोटा राजन और उसके शूटरों की प्रमुख भूमिका है।माना यह जा रहा है कि बरेली जेल में बंद बबलू श्रीवास्तव ने इसमें सबसे अहम् रोल निभाया है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-7907914606783280544?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/7907914606783280544/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=7907914606783280544' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7907914606783280544'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/7907914606783280544'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/02/blog-post_09.html' title='यूनुस ने खत्म करा दिया जमीम का खेल!'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S3F7rVxH6YI/AAAAAAAAAuU/eASsp8sMPus/s72-c/JAMIM-SHAH-1_20100208090558.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-5239638179584922771</id><published>2010-02-02T20:55:00.001+05:30</published><updated>2010-02-02T21:05:05.503+05:30</updated><title type='text'>सोहगौरा- कभी फिजा में गूंजते थे वेदमंत्र मगर ..</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S2hDPjI3o1I/AAAAAAAAAt8/wudckfKftVI/s1600-h/GKP23ahv14-1_1264980865_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="214" kt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S2hDPjI3o1I/AAAAAAAAAt8/wudckfKftVI/s320/GKP23ahv14-1_1264980865_m.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;पांच हजार साल पुराने ऐतिहासिक सोहगौरा गांव के पं. धनंजय राम त्रिपाठी 84 बसंत पार कर चुके हैं। देश के गणतंत्र होने पर उनके दिल में विकास की बेइंतहा उम्मीदें जगी मगर साठ साल बाद भी विकास की बयार उनके गांव को छू नहीं पायी। अब तो इस गांव के लोग खुद को स्थापित करने के लिए पलायन करने लगे हैं। कौड़ीराम से चार किलोमीटर दूर आमी और राप्ती नदी के संगम पर बसे सोहगौरा गांव में कुछ पुश्तैनी मकान टूटकर भव्य इमारतों में तब्दील हो गये हैं लेकिन बाकी खण्डहर हो रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S2hDbFzi3cI/AAAAAAAAAuE/A833De5jzEs/s1600-h/GKP23ahv19-1_1264980865.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" kt="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S2hDbFzi3cI/AAAAAAAAAuE/A833De5jzEs/s200/GKP23ahv19-1_1264980865.jpg" width="158" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;गांव की युवा पीढ़ी रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर हो गयी है। इसीलिए गांव में सुबह और शाम को भी सन्नाटा दिखता है। दुनिया के सबसे पुराने इस गांव में अब पहले की तरह वेदमंत्रों की आवाज नहीं गूंजती है। बारुदी गंध ने यहां की फिजा बदल दी है। गैंगवार के चलते यहां अब तक 38 लोगों की जानें जा चुकी हैं। इसीलिए पण्डित धनंजय राम त्रिपाठी क्षोभ से भरे हैं। उनके पितामह पण्डित परमार्थी राम त्रिपाठी ने इच्छा मृत्यु पायी। यह कहते समय उनका चेहरा गौरवान्वित रहता है लेकिन गांव की बदहाली ने उन्हें दुखी कर दिया है। भारतीय इतिहास अनुसंधान केन्द्र के पूर्व चेयरमैन प्रोफेसर दयानाथ त्रिपाठी ने इस गांव में खुदाई करवाकर यहां की ऐतिहासिकता प्रमाणित की है।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;प्रोफेसर त्रिपाठी के मुताबिक सोहगौरा विश्र्व का प्राचीनतम ग्राम है जो 5000 वर्षो से एक ही स्थल पर अपने होने का साक्ष्य प्रस्तुत करता है। इस गांव में खुदाई के समय चित्रित धूसर मृदभाण्ड, चन्द्रगुप्त मौर्य के समय का ताम्रपत्र, अकाल के समय दुर्भिक्ष को दान देने का प्रमाण और अन्य कई साक्ष्य मिले हैं। प्राचीन इतिहास के शोधार्थी आशुतोष राम त्रिपाठी कहते हैं कि पुरातत्व विभाग ने भी इस गांव को उपेक्षित कर दिया वरना यह तो पूरी दुनिया के लिए एक धरोहर है। इन दिनों गांव की आभा बिगड़ गयी है। दाग इतने लग गये कि गांव के लोग ही झेंपते हैं। बड़े बड़े जमींदारों और राजाओं को दीक्षा देने वाले इस गांव में अब बदनामी के निशान पड़ने लगे हैं। हालांकि 67 साल के शास्त्रार्थ महारथी कैप्टन रामचंद्र राम त्रिपाठी इसे खारिज करते हैं। उनका दावा है कि सोहगौरा के जीन में वेद है, संस्कार है और यह कभी खत्म नहीं हो सकता। लेकिन वे भी यह मानते हैं कि सरकार ने इस ऐतिहासिक गांव के लिए कुछ नहीं किया। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S2hDs8s2njI/AAAAAAAAAuM/zLUuxGLNd0M/s1600-h/GKP23ahv18-1_1264980865.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" kt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S2hDs8s2njI/AAAAAAAAAuM/zLUuxGLNd0M/s200/GKP23ahv18-1_1264980865.jpg" width="165" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;सचमुच इस गांव में प्रदूषण और पिछड़ेपन का पांव पसरता गया है। 20 गांवों के केन्द्र में होने के बावजूद यहां आठवीं के बाद कोई स्कूल नहीं है। लड़कियों को शिक्षा के लिए कौड़ीराम जाना पड़ता है। पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। हैण्डपम्प में प्रदूषित जल आता है। कोई स्वास्थ्य केन्द्र भी नहीं बन पाया है। आमी-राप्ती की बाढ़ से तबाही आती ही है। बाढ़ न रहने पर कटान होने के बाद सैकड़ों एकड़ भूमि रेत में तब्दील हो जाती है। शिक्षक शिवाकर राम त्रिपाठी और युवा नेता राकेश राम त्रिपाठी गांव के बंधे पर बन रही पीएमआरवाई की अधूरी सड़क की ओर इशारा करते हैं। सरकार अभी तक एक मुकम्मल सड़क भी नहीं दे पायी है। गांव की बदहाली के अभी और भी किस्से बाकी हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-5239638179584922771?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/5239638179584922771/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=5239638179584922771' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5239638179584922771'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5239638179584922771'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='सोहगौरा- कभी फिजा में गूंजते थे वेदमंत्र मगर ..'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S2hDPjI3o1I/AAAAAAAAAt8/wudckfKftVI/s72-c/GKP23ahv14-1_1264980865_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-2384966007602959617</id><published>2010-01-26T12:03:00.001+05:30</published><updated>2010-02-02T20:48:08.487+05:30</updated><title type='text'>पूर्वजों का शौर्य देख रोमांचित हो गए पिण्डारी</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16MsTmMWQI/AAAAAAAAAt0/-jvZDxu4oSA/s1600-h/GKP22ar1-1_1264206501_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" mt="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16MsTmMWQI/AAAAAAAAAt0/-jvZDxu4oSA/s200/GKP22ar1-1_1264206501_m.jpg" width="164" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;इतिहास की बुनियाद और कल्पना के सहारे पिण्डारियों की शौर्य गाथा पर बनी फिल्म वीर को पूर्वाचल में ऐतिहासिक सलामी मिली। हाड़ कंपा देने वाली ठण्ड में भी यहां के सिनेमा हाल गरम हो गये। जुमे की नमाज की वजह से पिण्डारी दिन का शो नहीं देख सके। दोस्तों के साथ पिण्डारी मुखिया ने रात का शो देखा। पर्दे पर पिण्डारियों की शौर्य गाथा देखकर वे लोग रोमांचित हो गये। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;फिल्म वीर पूर्वाचल में इसलिए बेहद प्रांसगिक हो गयी क्योंकि अंग्रेजों ने समझौते के तहत पिण्डारी सरदार करीम खां को गोरखपुर के सिकरीगंज में जागीर देकर बसाया। अब उनकी वंश बेल दूर दूर तक फैल गयी है। इस ऐतिहासिक तथ्य को दैनिक जागरण ने 21 जनवरी के अंक में उजागर किया इसलिए सिनेमा घरों पर दर्शक उमड़ पड़े। पिण्डारी परिवार के मुखिया अब्दुल रहमत करीम खां और अब्दुल माबूद करीम खां जुमे की वजह से दिन में नहीं जा पाये लेकिन रात को एसआरएस में शो देखा। एक एक दृश्य पर उन लोगों की निगाह जमी थी। पहले उन लोगों ने तय किया था कि यदि फिल्म में उनके पूर्वजों पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी हुई तो न्यायालय का दरवाजा खटखटायेंगे। पूरी फिल्म पिण्डारी कौम की शौर्य गाथा को प्रदर्शित कर रही है इसलिए उन लोगों की खुशी बढ़ गयी। &lt;br /&gt;फिल्म वीर में पिण्डारियों के कबीले में हिन्दू मुसलमान दोनों दिखे। फिल्म में हैदर अली पिण्डारियों के सरदार हैं जबकि पूरी फिल्म की कहानी पिण्डारी पृथ्वी सिंह के पुत्र वीर के इर्द गिर्द ही घूमती है। फिल्म में इस बात को झुठलाने की कोशिश की गयी है कि पिण्डारी अमानवीय, बेहद क्रूर और अराजक थे। माधवगढ़ की युवराज्ञी यशोधरा से प्रेम की शुरूआत ही लूटपाट करने गये वीर के मानवीय गुणों से होती है। पिण्डारी परिवार के रहमत खां और माबूद खां यह सुनना पसंद नहीं करते हैं कि पिण्डारी लुटेरे और क्रूर थे। उनका कहना है कि पिण्डारी कौम हमेशा से बहादुर थी, अन्याय के खिलाफ लड़ी । उन लोगों का कहना है कि फिल्म में हमारी सही समीक्षा की गयी है। फिल्म की बारीकियों पर नजर रखने वाले सिनेमा वितरक अख्तर हुसैन अंसारी कहते हैं कि वीर फिल्म में इतिहास के कुछ जीवित संदर्भ हैं लेकिन काल्पनिक जिंदगी की तस्वीरें सब पर भारी है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यह रपट २३ जनवरी के अंक में दैनिक जागरण ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है.&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue; font-size: large;"&gt;परवान चढ़ रही पिण्डारियों की सक्रियता&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;आनन्द राय , गोरखपुर: अंग्रेजों की कूटनीति से बिछड़ गये पिण्डारी अब मिलने लगे हैं। एक दूसरे से जुड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। ऐतिहासिक तथ्यों की गड़बड़ी को सही करने की दिशा में भी उनकी सक्रियता परवान चढ़ रही है। पिण्डारी अब इस बात का दावा करने लगे हैं कि सियासी चाल के तहत उनके इतिहास को कलंकित कर उन्हें लुटेरा लिखा गया। वीर फिल्म से चर्चा में आये पिण्डारियों के बारे में जब दैनिक जागरण ने सिलसिलेवार खबरों का प्रकाशन शुरू किया तो वे लोग सक्रिय होने लगे। पिण्डारी मुखिया अब्दुल रहमत करीम खां का कहना है कि अंग्रेजों ने एक योजना के तहत हम लोगों को अलग अलग बिखेर दिया और कई लोगों के मरने की झूठी खबर फैला दी। उनका कहना है कि जैसे गनेशपुर में चीतू खां के मरने के झूठे इतिहास का सच उजागर हो गया उसी तरह और भी कई सच सामने आने बाकी हैं। उन्होंने यह कयास लगाया है कि जिस वसील मोहम्मद को गाजीपुर के जेल में मरने की बात इतिहास में कही गयी है, हो सकता है कि वह भी झूठ हो और उनके भी वंशज गाजीपुर में हों। ध्यान रहे कि इतिहास में यह पढ़ाया जाता है कि पिण्डारियों के सरदार करीम खां ने जब अंग्रेजों के सामने समर्पण कर दिया तब उन्हें गौशपुर में बसाया गया। चीतू खां को जंगल में चीता खा गया जबकि वसील मोहम्मद गाजीपुर जेल में बंद किये गये जहां उनकी मौत हो गयी। बस्ती के डा. सलीम अहमद पिण्डारी ने इस झूठे तथ्य से पर्दा उठाया कि कादिर बख्श खान उर्फ चीतू खान जंगल में चीता के मारने से नहीं मरे बल्कि गनेशपुर में बहुत दिनों तक सामान्य जिंदगी जिये। अब गनेशपुर में उनके वंशज समाज की मुख्यधारा से कदमताल कर रहे हैं। सरदार करीम खां ने अपने जिंदगी की नयी शुरूआत सिकरीगंज के नवाबहाता से की जहां उनकी मजार है। देवरिया जिले के खुखुंद गांव से अब डा. शमीम सामने आये हैं। उन्होंने कहा है कि उन लोगों के साथ बेहद नाइंसाफी हुई। उन लोगों को घुमंतू जाति में शामिल कर दिया गया। डा. शमीम के मुताबिक वे लोग लुकमान पिण्डारी के वंशज हैं। लुकमान भी बहादुर योद्धा थे। शुरू में जिन्हें जौनपुर के सोहौली गांव में बसाया गया, बाद में वे लोग देवरिया जिले में आ गये। डा. शमीम कहते हैं कि हम लोग पढ़े लिखे और बलशाली लोग हैं जो हमेशा समाज में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। पिण्डारी आंदोलन के प्रवक्ता माबूद अहमद करीम खां कहते हैं कि हम अपने मुखिया अब्दुल रहमत करीम खां के निर्देश पर सभी पिण्डारियों को जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्ती के डा. सलीम पिण्डारी हम लोगों के रिश्तेदार हैं। दूसरे और भी लोग हम लोगों से जुड़े हैं। लोगों के खुलकर आने से हमारी ताकत बढ़ रही है। एक विशेष समारोह के बाद हम लोग मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और राज्यपाल के साथ ही चेयरमैन भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद को पत्रक सौंपेंगे और इतिहास के गलत तथ्य को मिटाने की मांग करेंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;यह खबर १ फरवरी को दैनिक जागरण गोरखपुर में पेज ५ पर छपी है.&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-2384966007602959617?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/2384966007602959617/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=2384966007602959617' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2384966007602959617'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2384966007602959617'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_7673.html' title='पूर्वजों का शौर्य देख रोमांचित हो गए पिण्डारी'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16MsTmMWQI/AAAAAAAAAt0/-jvZDxu4oSA/s72-c/GKP22ar1-1_1264206501_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-2328213647354581812</id><published>2010-01-26T11:59:00.000+05:30</published><updated>2010-01-26T11:59:47.419+05:30</updated><title type='text'>हां! मेरे पूर्वज लुटेरे थे मगर..</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16LRvW4oDI/AAAAAAAAAtc/jnsE5opRfao/s1600-h/GKPpindari3-1_1264292159.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="150" mt="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16LRvW4oDI/AAAAAAAAAtc/jnsE5opRfao/s200/GKPpindari3-1_1264292159.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय, गोरखपुर&lt;br /&gt;&amp;nbsp;पिण्डारियों की शौर्य गाथा को प्रदर्शित करने वाली फिल्म वीर पिण्डारियों के मुखिया रहमत करीम खां और उनके चचेरे भाई अब्दुल माबूद करीम खां को जितनी अच्छी लगी, उतना ही इतिहास से उनकी नाराजगी बढ़ गयी। इतिहास में पिण्डारियों को बर्बर और लुटेरा लिखे जाने पर उन लोगों ने क्षोभ जाहिर किया है और भारत सरकार से मांग की है कि इतिहास से झूठे तथ्यों को हटाया जाये। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16LsSpyqnI/AAAAAAAAAts/0g3AgF8-_uw/s1600-h/GKP20gkp-c3-1_1264032446.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" mt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16LsSpyqnI/AAAAAAAAAts/0g3AgF8-_uw/s200/GKP20gkp-c3-1_1264032446.jpg" width="171" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;बातचीत में उन लोगों ने यह स्वीकार किया कि हमारे पूर्वज लुटेरे थे, लेकिन उन्होंने अंग्रेजों को ही लूटा। अंग्रेजों के लिखे इतिहास को ही हमारा इतिहास मान लिया गया। इस कलंक को मिटाने के लिए वे अभियान चलायेंगे। लार्ड हेस्टिंग्स के साथ हुए समझौते के तहत 1820 में सिकरीगंज में जागीर देकर बसाये गये पिण्डारी सरदार करीम खां के वंशज अब्दुल रहमत करीम खां, अब्दुल माबूद करीम खां और उनके परिवारीजन ने शुक्रवार की रात को फिल्म वीर देखी। इस फिल्म को देखने के बाद उन लोगों ने शनिवार की सुबह सिकरीगंज नवाब हाता में अपने परिवारीजन में खुशी बांटी। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16LeTm7ZNI/AAAAAAAAAtk/Mu4FYmJLBcw/s1600-h/GKP20gkp-c2-1_1264032446.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" mt="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16LeTm7ZNI/AAAAAAAAAtk/Mu4FYmJLBcw/s200/GKP20gkp-c2-1_1264032446.jpg" width="163" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;फिल्म से संतुष्ट पिण्डारी मुखिया को सलमान खान से सिर्फ इतनी शिकायत है कि उनके पूर्वज करीम खां का फिल्म में जिक्र नहीं हुआ है। पर इसी फिल्म ने उन लोगों का हौसला बढ़ा दिया है। उन लोगों को अब इतिहास पर आपत्ति है। पिण्डारी मुखिया का कहना है कि हां, हमारे पूर्वज लुटेरे थे, लेकिन उन्हें गलत ढंग से इतिहास में दिखाया गया है। आजादी की लड़ाई में हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से संघर्ष किया और उनके खजाने को लूटा। इतिहासकारों से पिण्डारी परिवार का सवाल है कि क्या आजादी की लड़ाई के दौरान जिन-जिन नामचीन सेनानियों ने अंग्रेजों का खजाना लूटा उन्हें लुटेरा कहा जाये? पिण्डारियों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने अंग्रेजों और उनके सरपरस्तों को लूटा। अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया, इसलिए उन्होंने हमसे समझौता किया। हम अंग्रेजों पर भारी पड़े, यह बहुतों को हजम नहीं हुआ। माबूद खान का तर्क है कि चूंकि हम बेहद अल्पसंख्यक हो गये और पिण्डारी सेना को अंग्रेजों व उनकी गुलाम राजाओं ने तबाह कर दिया, इसलिए सियासी चाल के तहत हमारे इतिहास को दागदार कर दिया गया। अब हमारा मकसद इस कलंक को धोना है। इतिहास के पन्नों लिखी गलत इबारत को दुरुस्त करना है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यह रपट २४ जनवरी के अंक में दैनिक जागरण गोरखपुर समेत अन्य कई संस्करों में छपी है. गोरखपुर दैनिक जागरण में पेज ३ पर देंखे.&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-2328213647354581812?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/2328213647354581812/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=2328213647354581812' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2328213647354581812'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2328213647354581812'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_1191.html' title='हां! मेरे पूर्वज लुटेरे थे मगर..'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16LRvW4oDI/AAAAAAAAAtc/jnsE5opRfao/s72-c/GKPpindari3-1_1264292159.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1083975625268097252</id><published>2010-01-26T11:52:00.000+05:30</published><updated>2010-01-26T11:52:59.951+05:30</updated><title type='text'>पिण्डारी बोले हमें भी सम्मान चाहिए</title><content type='html'>आनन्द राय , गोरखपुर: इतिहास के पन्नों में लुटेरा साबित हुये पिण्डारियों ने वीर फिल्म के प्रदर्शन के बाद अपने स्वाभिमान की लड़ाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम सम्बोधित चिट्ठी में पिण्डारियों ने कहा है कि सरकार हमे भी सम्मान दो ताकि हम चैन से जी सकें। यह चिट्ठी पिण्डारियों के बीच सोमवार से घूमेगी और सबके हस्ताक्षर के बाद ही इसे सौंपा जायेगा।अंग्रेजों के कहने पर बने इतिहास में कितना छुक है इसका उदाहरण इस चार्ट में है. इसमें लार्ड वारेन हेस्टिंग्ज और लार्ड हेस्टिंग्ज को एक समझ लिया गया है. &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16KNnaFx8I/AAAAAAAAAtU/yWtdQsrkTf8/s1600-h/GKP24ak-96-1_1264375604_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" mt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16KNnaFx8I/AAAAAAAAAtU/yWtdQsrkTf8/s320/GKP24ak-96-1_1264375604_m.jpg" width="216" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;सलमान खान की फिल्म वीर के प्रदर्शन के बाद सिकरीगंज स्थित नवाब हाता में सक्रियता बढ़ गयी है। पिण्डारी सरदार करीम खां के वंशज परिवार के मुखिया अब्दुल रहमत करीम खां और उनके भाई अब्दुल माबूद करीम खां ने अपने सम्मान के लिए अभियान शुरू कर दिया। रविवार को मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम सम्बोधित एक पत्रक तैयार हुआ जिसमें उन लोगों ने यह लिखा है कि पिण्डारी कौम बहुत बहादुर थी। आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ी। लेकिन मालवा प्रदेश में पिण्डारियों को घेरकर धोखे से मारा गया।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;धोखा देने के बाद भी जब बचे हुये पिण्डारी उन पर भारी पड़े तो उन लोगों ने समझौता किया। अमीर को टोंक और करीम खां को गोरखपुर के सिकरीगंज में जागीर दी गयी। वसील मुहम्मद को उन लोगों ने गाजीपुर कारागार में बंद कर दिया जहां उनकी मौत हो गयी। जबकि चीतू को जंगल में चीता खा गया। इस बहादुर कौम को अल्पसंख्यक होने के नाते इतिहास में लुटेरा लिख दिया गया। इस तथ्य को सही किया जाय और यह स्पष्ट किया जाय कि पिण्डारी कौम देश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाली बहादुर कौम थी। इस अभियान के प्रवक्ता माबूद करीम खान ने कहा है कि हम अपने मुखिया के निर्देश पर इस पत्रक पर अपने समाज के लोगों का सोमवार से हस्ताक्षर करायेंगे और फिर इसे सरकार को सौंपा.&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यह&amp;nbsp;रपट दैनिक जागरण गोरखपुर&amp;nbsp;संस्करण&amp;nbsp;समेत&amp;nbsp;और भी कई&amp;nbsp;जगह&amp;nbsp;२५ जनवरी के अंक में&amp;nbsp;छपी है.&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-1083975625268097252?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1083975625268097252/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=1083975625268097252' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1083975625268097252'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1083975625268097252'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_4470.html' title='पिण्डारी बोले हमें भी सम्मान चाहिए'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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/&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;इतिहास में पिण्डारियों को लुटेरा कहे जाने के खिलाफ पिण्डारी सरदार करीम खां के वंशज अब्दुल रहमत करीम खां और अब्दुल माबूद करीम खां द्वारा शुरू किये गये संघर्ष की लौ तेज हो गयी है। बस्ती के डा. सलीम अहमद पिण्डारी ने इस अभियान को आगे बढ़ाने का फैसला किया है और कहा है कि अब यह मशाल लखनऊ, टोंक और भोपाल तक जलेगी। डा. सलीम खां की माने तो वे उसी पिण्डारी सरदार चीतू खां के वंशज हैं, जिनके बारे में इतिहास में दर्ज हो गया कि चीतू को जंगल का चीता खा गया। जंगल में उनके मरने का तथ्य झूठा है।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;पिण्डारी सरदार करीम खां की पांचवीं पीढ़ी के वंशज रहमत करीम खां और माबूद करीम खां ने इतिहास में सही तथ्य दर्ज करने के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को सम्बोधित पत्र को लेकर सोमवार से हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। यह चिट्ठी अभी गोरखपुर से आगे नहीं बढ़ी है लेकिन बस्ती के डा. सलीम अहमद पिण्डारी ने भी इतिहास के गलत तथ्यों को मिटाने का बीड़ा उठा लिया है। उन्होंने कहा है कि रहमत करीम खां हमारे परिवार के हैं।&lt;br /&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;उन्होंने दावा किया कि हमारी कौम आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लड़ी और बहादुरी से लड़ी। उन्होंने बताया कि चीतू खां का असली नाम कादिर बख्श था। 1816 से 1818 तक लखनऊ में वे लार्ड हेस्टिंग्स की सेना से लड़े। 1920 में उन्हें भी समझौते के तहत बस्ती जिले से सात किलोमीटर दूर गनेशपुर में ससम्मान बसाया गया। कादिर बख्श के पुत्र खादिम हुसैन को दो बेटे खान बहादुर नवाब गुलाम हुसैन और नवाब गुलाम मुहम्मद हुये। डा. सलीम पिण्डारी नवाब गुलाम हुसैन के इकलौते पुत्र नवाब सैदा हुसैन के पुत्र हैं। चीतू की पांचवीं पीढ़ी के डा. सलीम को सदा से पिण्डारी होने का गर्व है इसीलिए उन्होंने बस्ती में अपने अस्पताल का नाम पिण्डारी हास्पीटल रखा। डा. सलीम कहते हैं कि हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से इतनी जबर्दस्त लड़ाई लड़ी कि उन्हें हमारे आगे झुकना पड़ा। उन्होंने बताया कि 4 जून 1928 को यूके में मेरे दादा खान बहादुर गुलाम हुसैन को सम्मानित किया गया। इसके अलावा 12 मई 1937 को ब्रिटिश महारानी ने भी उनका सम्मान किया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों की लड़ाई का परिणाम रहा कि देश को आजादी मिली। इतिहास में गलत ढंग से तथ्यों को तोड़ा मरोड़ा गया है। अब गनेशपुर के जर्रार अहमद पिण्डारी, अब्दुल्ला पिण्डारी, अब्दुल रहमान, अब्दुल रहीम और आसिल पिण्डारी भी अपने सम्मान के लिए शुरू हुये आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभायेंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यह रपट दैनिक जागरण गोरखपुर समेत कई संस्करणों में २६ जनवरी को&amp;nbsp;&amp;nbsp;छपी है.&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-8867862251711520750?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/8867862251711520750/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=8867862251711520750' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8867862251711520750'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8867862251711520750'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_26.html' title='पिण्डारी चीतू खां के जंगल में मरने का तथ्य झूठा'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S16IxaUntfI/AAAAAAAAAtM/SI0JFfheOp0/s72-c/GKP25bas-11-1_1264465418.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1994655322900949710</id><published>2010-01-21T09:49:00.001+05:30</published><updated>2010-01-26T12:06:49.236+05:30</updated><title type='text'>वीर फिल्म के बहाने खुल गए इतिहास के पन्ने</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fU_owcgWI/AAAAAAAAAsc/k1-gexwVpRs/s1600-h/arai16.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" mt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fU_owcgWI/AAAAAAAAAsc/k1-gexwVpRs/s200/arai16.jpg" width="150" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;वीर फिल्म के बहाने इतिहास के पन्ने खुल गए. इतिहास और किम्वदंतियों को जोडकर मैंने एक रपट लिखी जो चर्चा में आ गयी. मेरे एक आदरणीय हैं जिन्होंने मुझे इस खबर के लिए प्रेरित किया. कभी मैं उनका नाम बताउंगा. ऐसी कई ख़बरों के लिए मैं उनका शुक्रगुजार हूँ. मैं इस रपट को तैयार करते समय बेहद भावुक था. सिर्फ इसलिए कि वीर फिल्म चर्चा में है और यह रपट भी मुझे चर्चा में रखेगी. इस ठण्ड में जूनून के साथ मैं गोरखपुर में पिंडारियों और उनके वंश को तलाश करने लगा. चार दिन पहले ११ बजे सुबह मेरा प्रयास शुरू हुआ और लगभग २५ लोगों से बातचीत के बाद मध्यकालीन इतिहास विभाग के प्रवक्ता डाक्टर ध्यानेन्द्र नारायण दुबे ने क्लू दिया. पता चला कि मदीना मस्जिद के पास पिंडारी बिल्डिंग है. वहां कुछ जानकारी मिल सकती है. मदीना मस्जिद के पास गया तो किसी को पिंडारी बिल्डिंग के बारे में पता नहीं था. एक बुजुर्ग चाचा ने मेरी समस्या हल कर दी. उन्होंने बताया कि लुटेरों के सरदार के वारिसों की बिल्डिंग में ही इलाहाबाद बैंक है. मैं पहुंचा तो वहां नीचे दुकाने थी. ऊपर बैंक था. थोड़ा सहमते हुए सबसे उपरी मंजिल पर पहुँच गया. एक छोटे से बंगले में एक परिवार के रहने की आहात मिली. वहां माबूद करीम खान मिले. पहले तो मुझे टालने लगे. अखबार वालों के बारे में उनकी धारणा कुछ ठीक नहीं थी. पर मेने अनुरोध के बाद उन्होंने अपने पूर्वजों की कहानी बतायी. यह पूछना थोड़ा असहज था कि पिंडारी लुटेरे थे. पर मेरे पूछने पर उन्होंने इतिहासकारों को कटघरे में खडा कर दिया. फिर गोरखपुर विश्वविद्यालय मध्यकालीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर ए.के श्रीवास्तव से बात हुई. विशेषग्य के तौर पर प्रोफ़ेसर रिजवी से बातचीत की. बस एक सिलसिला शुरू हो गया. पिंडारी परिवार के मुखिया सिकरीगंज में रहने वाले रहमत करीम खान से भी मैंने बात की. मेरी रपट तैयार हो गयी. आभारी हूँ अपने संस्थान के सम्पादकीय विभाग के सभी साथियों का जिन लोगों ने रुचि लेकर खबर को बेहतर ढंग से लगाया. सुबह माबूद का फोन आया तो अखबार वालों के बारे में उनकी धारणा बदली थी. हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि बड़ी सफाई से आपने हमारे पूर्वजों को लुटेरा लिखा दिया. पर वे खुश थे. फिर तो फोन का सिलसिला चल पडा. मैं भी खुश हूँ. आप भी पढ़िए इस रपट को.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fVf5n04sI/AAAAAAAAAs0/yS1m5lxhbHU/s1600-h/GKP20gkp-c3-1_1264032446.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" mt="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fVf5n04sI/AAAAAAAAAs0/yS1m5lxhbHU/s200/GKP20gkp-c3-1_1264032446.jpg" width="171" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fVP1AS8iI/AAAAAAAAAss/W1JyZA3sSKg/s1600-h/GKP20gkp-c2-1_1264032446.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" mt="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fVP1AS8iI/AAAAAAAAAss/W1JyZA3sSKg/s200/GKP20gkp-c2-1_1264032446.jpg" width="163" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये हैं “वीर” के असल वीर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर [आनन्द राय]। पिंडारियों की साहसिक गाथा को प्रदर्शित करने वाली सलमान खान की फिल्म ‘वीर’ 22 जनवरी को देश भर में रिलीज हो रही है। इसी वजह से पिंडारियों के प्रति लोगों की जिज्ञासा बढ़ गई है। आज भी यह कौम अपनी पताका फहरा रही है। पिंडारियों के सरदार करीम खां की मजार गोरखपुर जिले के सिकरीगंज में उनकी बहादुरी की प्रतीक बनी हुई है, जबकि उनके वारिस पूरी दिलेरी से दुनिया के साथ कदमताल कर रहे हैं। यानी यहां हैं ‘वीर’ के वीर।&lt;br /&gt;गोरखपुर शहर में मदीना मस्जिद के पास 60-65 साल पुरानी पिंडारी बिल्डिंग है, इसके मालिक पिंडारियों के सरदार करीम खां की पांचवीं पीढ़ी के अब्दुल रहमत खां हैं। वे अपनी बिरादरी के अगुवा भी हैं। उनका कारोबार सिकरीगंज से लेकर गोरखपुर तक फैला है। उनके भाई अशरफ कनाडा में इंजीनियर हैं। दैनिक जागरण से बातचीत में वे अपने पूर्वजों की वीरता की कहानी सुनाकर अपने वजूद का अहसास कराते हैं।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fVrbujp_I/AAAAAAAAAs8/YU4XcKKfnu0/s1600-h/GKP20gkp-c1-1_1264032448_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="194" mt="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fVrbujp_I/AAAAAAAAAs8/YU4XcKKfnu0/s200/GKP20gkp-c1-1_1264032448_m.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;वे बताते हैं कि एक समझौते के तहत अंग्रेजों ने पिंडारियों के सरदार करीम खां को 1820 में सिकरीगंज में जागीर देकर बसाया। सिकरीगंज कस्बे से सटे इमलीडीह खुर्द के ‘हाता नवाब’ से सरदार करीम खां ने अपनी नई जिंदगी शुरू की। इंतकाल के बाद वे यहीं दफनाए गए। शब-ए-बारात को सभी पिंडारी उनकी मजार पर फातेहा पढ़ने आते हैं। पांचवीं पीढ़ी के ही उनके एक वंशज माबूद करीम खां पिंडारी मेडिकल स्टोर चलाते हैं। उनको यह सुनना गंवारा नहीं है कि उनके पूर्वज लुटेरे थे। वे इसे ऐतिहासिक तथ्यों की चूक बताते हैं। उनका कहना है कि हमारे पूर्वजों ने अन्याय और अत्याचार का मुकाबला किया। सरदार करीम की वंश बेल सिकरीगंज से आगे बढ़कर बस्ती और बाराबंकी तक फैल गई है।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fV0PyVQiI/AAAAAAAAAtE/5Z3Jgza3dXE/s1600-h/21veerp1-1_1264005611_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="156" mt="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fV0PyVQiI/AAAAAAAAAtE/5Z3Jgza3dXE/s200/21veerp1-1_1264005611_m.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन इतिहास विभाग के प्रो. सैयद नजमूल रजा रिजवी का कहना है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में लुटेरे पिंडारियों का एक गिरोह था, जिन्हें मराठों ने भाड़े का सैनिक बना लिया। मराठों के पतन के बाद वे टोंक के नवाब अमीर खां के लिए काम करने लगे। नवाब के कमजोर होने पर पिंडारियों ने अपनी जीविका के लिए फिर लूटमार शुरू कर दी। इससे महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में शांति व्यवस्था मुश्किल हो गई। फिर लार्ड वारेन हेस्टिंग ने पिंडारी नियंत्रण अभियान चलाया। उसी कड़ी में सरदार करीम खां को सिकरीगंज में बढ़यापार स्टेट का कुछ हिस्सा और 16 हजार रुपये वार्षिक पेंशन देकर बसाया गया। करीम खां के भतीजे नामदार को अंग्रेजों ने भोपाल में बसाया। पिंडारियों के कारनामों पर इतिहासकार एसएन सेन और जीएस सरदेसाई ने भी काफी कुछ लिखा है। इतिहासकारों ने उन्हें कबीलाई लुटेरा करार दिया है। उनके मुताबिक पिंडारी अलग-अलग जातियों का एक समूह था, जिनके सरदारों में चित्तू, करीम और वसील मुहम्मद प्रमुख थे। यह भी कहा जाता है कि पिंडा नामक नशीली शराब का सेवन करने से इस कौम को पिंडारी कहा जाने लगा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;यह रपट २१ जनवरी को दैनिक जागरण के कई प्रमुख संस्करणों में छपी. गोरखपुर में यह पहले पेज पर छपी है.&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-1994655322900949710?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1994655322900949710/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=1994655322900949710' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1994655322900949710'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1994655322900949710'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_21.html' title='वीर फिल्म के बहाने खुल गए इतिहास के पन्ने'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1fU_owcgWI/AAAAAAAAAsc/k1-gexwVpRs/s72-c/arai16.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1731849877433400262</id><published>2010-01-20T08:08:00.000+05:30</published><updated>2010-01-20T08:08:58.429+05:30</updated><title type='text'>बंदूक से बहलाये जा रहे बच्चे</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1ZsqrImzGI/AAAAAAAAAsU/c4HRcRbIG-Q/s1600-h/01072009(001).jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1ZsqrImzGI/AAAAAAAAAsU/c4HRcRbIG-Q/s200/01072009(001).jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;आनन्द&amp;nbsp;राय&amp;nbsp;&amp;nbsp;, गोरखपुर :&lt;br /&gt;&amp;nbsp;पापा पापा मुझे गन चाहिये। मम्मी मुझे गन खरीद दो। मुझे गन लेनी है। मुझे आटो गन चाहिये। बच्चों की इस तरह की जिद अक्सर खिलौने की दुकानों पर देखने को मिलती है। मां-बाप कुछ मसलहतन कुछ मजबूरन इस फरमाइश को पूरा कर रहे हैं। अब बच्चे बंदूक से बहलाये जा रहे हैं।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;खिलौने की शायद ही कोई ऐसी दुकान हो जहां विभिन्न किस्मों की बंदूक न रखी गयी हो। चूंकि खेलने के लिए बच्चों की पहली पसंद बंदूक हो गयी है इसलिए यह दुकानदार और अभिभावक दोनों की मजबूरी हो गयी है। मां-बाप बच्चों की पसंद को नजरअंदाज नहीं कर पा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि खिलौनों की सूची में बंदूक पहली बार जुड़ी है। कई दशकों से खेलने वाली बंदूकें बन रही हैं। पर अब उसका स्वरूप बदल गया है। मशीन गन से लेकर कार्बाइन की शक्ल में खिलौने बन गये हैं। पन्द्रह रुपये से लेकर पांच सौ तक के इन खिलौनों पर बच्चों की बांछे खिल जाती हैं।&lt;br /&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्र्वविद्यालय मनोविज्ञान विभाग के प्रोफेसर अनुपम नाथ त्रिपाठी कहते हैं कि जो एक्सपोजर है, मनोरंजन की सामग्री उपलब्ध है उसमें गन की बहुतायत है। सिनेमा, टी.वी. में इसी तरह की चीजें परोसी जा रही हैं। यह तो सोशल लर्निग है। बंदूक बच्चे के अंदर की इच्छा नहीं है। यह इच्छा बाहरी दुनिया को देखकर उपज रही है। हुमायूंपुर का आठ साल का आदर्श कहता है कि मेरे पापा के पास भी गन है। जान अब्राहम और सलमान खान भी हमेशा गन लेकर दिखते हैं। इसी उम्र के राज को आटो गन पसंद है तो विशाल और क्षितिज ने भी कई तरह की गन रखी है। 4 साल से लेकर 12 साल तक के बच्चों में इसी बंदूक का क्रेज है। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अलग अलग दुकानों पर खिलौना बेचने वाले मनीष और इदरीस कहते हैं कि अब तो कम्पनियां ऐसी ऐसी गन बना रही हैं जो देखने में बिल्कुल असली लगती हैं। इनके दाम भी खूब हैं लेकिन खरीदने वाले खरीदते ही हैं। कुछ साल पहले तक बच्चों की पहली पसंद कार होती थी लेकिन अब वे बंदूक को ही पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। अभिभावक कौशल शाही, तेज नारायण पाण्डेय और पी.के. राय राजू स्वीकार करते हैं कि जैसा समाज हम बना रहे हैं वैसा असर बच्चों पर पड़ रहा है। हमारे बच्चे हमें रोज असलहा लगाते देखते हैं। सिनेमा में असलहा देखते हैं। पैदा होते ही उन्हें मीडिया के जरिये असलहों की ही आवाज सुनायी दे रही है इसलिए यही उनकी पसंद बन रही है। असली बंदूक बेचने वाले ब्रहमदत्त इससे अलग नजरिया रखते हैं। कहते हैं कि बचपन में भगत सिंह की बंदूक बोने वाली कथा तो प्रेरणा के तौर पर है। और इसे प्रेरणा के तौर पर ही लेना चाहिये।&lt;br /&gt;(मेरी यह&amp;nbsp;रपट&amp;nbsp;&amp;nbsp;२०&amp;nbsp;जनवरी&amp;nbsp;को&amp;nbsp;दैनिक जागरण गोरखपुर&amp;nbsp;में पेज&amp;nbsp;६&amp;nbsp;पर प्रकाशित है.&amp;nbsp;)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-1731849877433400262?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1731849877433400262/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=1731849877433400262' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1731849877433400262'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1731849877433400262'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_20.html' title='बंदूक से बहलाये जा रहे बच्चे'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1ZsqrImzGI/AAAAAAAAAsU/c4HRcRbIG-Q/s72-c/01072009(001).jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1147391209492162543</id><published>2010-01-18T21:42:00.000+05:30</published><updated>2010-01-18T21:42:06.365+05:30</updated><title type='text'>प्रचंड के चेहरे से उतर गया नकाब</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1SIGYv8s0I/AAAAAAAAAsE/apmTejFsQXo/s1600-h/pracham.gif" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1SIGYv8s0I/AAAAAAAAAsE/apmTejFsQXo/s200/pracham.gif" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;भारत और नेपाल मित्र राष्ट्र है. मेरे एक परिचित अवसर मिलने पर भी नेपाल नहीं जाना चाहते. कहते हैं कि उनकी कुंडली में विदेश योग है. नेपाल जाकर अपने योग को सस्ते में गंवाना नहीं चाहते. यह प्रसंग सिर्फ इसलिए कि नेपाल यहाँ के लोगों को विदेश नहीं लगता. ढाई दशक में सरहद के कस्बों से लेकर काठमांडू तक अनगिनत यात्रा की. रहन सहन और परिवेश भले अलग लगा लेकिन कभी यह महसूस नहीं हुआ कि गैर मुल्क में आये हैं. तब भी जब माओवादी आन्दोलन चरम पर था, तब भी जब राज परिवार की ह्त्या हुई और लोग उबल रहे थे, वहां कोई भय जैसी बात नहीं थी. पर अब भय का वातावरण बनाया जा रहा है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1SINqBJSsI/AAAAAAAAAsM/rMuZw9Ey0Ko/s1600-h/Baburam111.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1SINqBJSsI/AAAAAAAAAsM/rMuZw9Ey0Ko/s200/Baburam111.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;शुरुआत प्रचंड ने की है. वही प्रचंड जो राज परिवार से मुकाबला करते हुए अपने फरारी के दिनों में भारत में रहते थे. जिस भारत की जमीन ने उन्हें खडा होने को बल दिया उसके खिलाफ जहर उगल रहे हैं. उन्हें पीलीभीत नेपाल का हिस्सा दिखने लगा है. कुछ दिन के लिए प्रधानमंत्री हुए तो भारत से दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे थे और अब जहर उगल रहे हैं. भारत और नेपाल की सरकार उनके बयान पर क्या सोचती है, यह तो बाद की बात है. नेपाल में माओवाद को खडा करने वाले बाबू राम भट्टराई को भी प्रचंड का बयान पसंद नहीं आया. उन्होंने खुले तौर पर उनकी आलोचना की. उन्होंने प्रचंड को सोच समझ कर बोलने की सलाह दी. उन्होंने प्रचंड को यह समझाने की भी जुर्रत की कि भारत के विरोध में बेवजह बोलने से कुछ नहीं होने वाला है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नेपाल में सत्ता के विरोध में आम आदमी के मन में गैरत पैदा करने का काम बाबूराम ने किया है. उन्होंने माओवादी आन्दोलन को जमीन दी है. प्रचंड उग्र विचारों से भले हमेशा सुर्ख़ियों में रहे हों लेकिन बाबूराम के प्रति वहां के माओवादियों में एक श्रद्धा देखी गयी है. अब तो लोग खुलेआम कहने लगे हैं कि प्रचंड चीन के इशारे पर भारत विरोधी अभियान में सक्रिय हो गए हैं. उन्हें भारत और नेपाल के संबंधों का ख्याल नहीं है. वे वर्षों पुराने रिश्ते को सर्द कर देने पर आमादा हैं. प्रचंड को यह ख्याल नहीं है कि दोनों देशों के बीच अभी भी रोटी बेटी का संबध है. उन्हें इस बात का ज़रा भी ख्याल नहीं है कि तमाम झंझावातों के बीच सरहद पर दोनों मुल्कों के लोग एक दूसरे का सुख दुःख समझते हैं. उन्हें तो बस अपनी सियासत करनी है. नेपाल पर राज करने की अधूरी ख्वाहिश को अंजाम देना है. ये वही प्रचंड हैं जो प्रधानमंत्री बनने के बाद लाखों रूपये की पलंग पर सोने लगे और अपने काफिले में मंहगी से मंहगी गाड़ियां रखने लगे. नेपाल का आम आदमी तो उन्हें उसी दिन से पहचान गया. नेपाल के लड़ाका माओवादियों के dil से तो वे उसी समय उतर गए.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सच मानिए कि उनके चेहरे पर एक नकाब लगा है. वो धीरे धीरे उतर रहा है. अभी बाबूराम ने उन्हें नसीहत दी है. आगे और भी लोग उन्हें सबक देंगे. भारत के खिलाफ जहर उगल कर वे भी नेपाल में पनाह लिए उन तमाम भारत विरोधियों की कतार में खड़े हो गए हैं जो हर पल भारत की अशांति का ख्वाब देखते हैं. प्रचंड अपनी हद में रहे तो उनकी सेहत के लिए ठीक होगा. उनके सियासी अरमान भी तभी फलीभूत हो सकते हैं जब उनकी आत्मा साफ़ सुथरी हो.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-1147391209492162543?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1147391209492162543/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=1147391209492162543' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1147391209492162543'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1147391209492162543'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_18.html' title='प्रचंड के चेहरे से उतर गया नकाब'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1SIGYv8s0I/AAAAAAAAAsE/apmTejFsQXo/s72-c/pracham.gif' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-3132943450660561498</id><published>2010-01-16T13:19:00.000+05:30</published><updated>2010-01-16T13:19:14.644+05:30</updated><title type='text'>पूर्वाचल के मुसलमानों को सहेजने की सियासत</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1FvTn5JqmI/AAAAAAAAAr8/jDPVR5a9qzs/s1600-h/anand16.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1FvTn5JqmI/AAAAAAAAAr8/jDPVR5a9qzs/s200/anand16.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय गोरखपुर : पूर्वाचल के मुसलमानों को सहेजने की नयी कवायद शुरू हो गयी है। विभिन्न राजनीतिक दलों में बंटे मुसलमानों को एक मंच पर लाने की तरकीब लगायी जा रही है। पहल दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने एक गैर राजनीतिक संगठन बनाकर की है। अब उनकी आवाज को गांव-गांव में पहंुचाने की कोशिश शुरू हो गयी है। राजनीति में हाशिये पर पहंुच गये कुछ मुस्लिम नेताओं ने अभियान की कमान संभाल ली है।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;पिछले विधानसभा व लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम नेताओं की रहनुमाई कम हुई है। उनके प्रतिनिधित्व में कमी की समीक्षा नये सिरे से हुई है। रहनुमाओं का मानना है कि उनकी तादाद तो अधिक है लेकिन खेमों में बंटने के कारण ताकत उभर नहीं रही है। इसी कारण अब गैर राजनीतिक संगठनों से फिर से एक जुट होने का आह्वान किया जा रहा है। शाही इमाम के आगाज के बाद गोरखपुर में पूर्व विधायक और सपा के जिलाध्यक्ष रहे डा.मोहसिन खान की सक्रियता बढ़ी है। उनके साथ नगर निगम में पार्षद दल के नेता जियाउल इस्लाम समेत कई मुस्लिम नेता आगे बढे़ हैं। फरवरी माह में बड़े सम्मेलन की तैयारी हो रही है। अभियान कितना कारगर होगा, यह तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन अतीत पर नजर डालें तो शाही इमाम के पिता के फतवे का काफी असर रहा है। उनके फतवे ने सियासी बदलाव भी किये हैं। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; गौरतलब है पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों के कई छोटे राजनीतिक दल वजूद में हैं। बसपा से बगावत करने के बाद पूर्व मंत्री डा. मसूद ने नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी बनायी। कुछ दिनों बाद दल दो टुकड़ों में बंट गया। एक की कमान मसूद के हाथ में थी और दूसरे का नेतृत्व अरशद ने संभाल लिया। आजमगढ़ में लोकसभा चुनाव के दौरान उलेमा कौंसिल का सियासी चेहरा सामने आया। और इसके बैनर पर चुनाव मैदान में उतरे उम्मीदवारों ने प्रभावित किया। बड़हलगंज के चर्चित सर्जन डा. अयूब ने भी राजनीतिक मोर्चेबंदी की और उनकी पीस पार्टी ने बलिया से लेकर बाराबंकी तक खलबली मचा दी। सपा पहले से ही मुसलमानों की हमदर्द थी। इस तरह मुसलमानों के बीच कई खेमे बन गये। इसी खेमेबंदी को दूर करने के लिए शाही इमाम के सहारे कुछ ताकतें गोलबंद हो रही हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-3132943450660561498?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/3132943450660561498/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=3132943450660561498' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3132943450660561498'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3132943450660561498'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_16.html' title='पूर्वाचल के मुसलमानों को सहेजने की सियासत'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S1FvTn5JqmI/AAAAAAAAAr8/jDPVR5a9qzs/s72-c/anand16.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-8810327304376339613</id><published>2010-01-12T11:41:00.000+05:30</published><updated>2010-01-12T11:41:22.818+05:30</updated><title type='text'>जोर-जुल्म के टक्कर में नजीर बनी जानकी</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0wSGjrxMKI/AAAAAAAAArs/jWQstK-hTdM/s1600-h/VNS10kan-g1-1_1263165658_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0wSGjrxMKI/AAAAAAAAArs/jWQstK-hTdM/s320/VNS10kan-g1-1_1263165658_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय, गोरखपुर&lt;br /&gt;&amp;nbsp;जिंदगी के कठोर अनुभवों में पक कर जानकी बज्र हो गयी है। जोर जुल्म के खिलाफ वह प्रतिरोध की एक नजीर है। किसी निर्बल और असहाय के समर्थन में अपनी सेना लेकर खड़ी होती तो दबंग उससे थर्रा उठते हैं। वर्ष 2005 में उसका नाम नोबल पुरस्कार के लिए नामित हुआ। पुरस्कार तो नहीं मिला लेकिन उसकी सेवा और सहयोग की रफ्तार बढ़ गयी। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; भटहट ब्लाक का ताजपिपरा गांव 55 साल की जानकी की वजह से सुर्खियों में है। महज 10 साल की उम्र में अपने से काफी बड़े इसी गांव के रामदुलारे यादव के साथ उसकी डोली उठी। पिया के घर आयी तो छोटी उम्र के सभी बड़े सपने बिखर गये। घर के अंदर उत्पीड़न बढ़ गया। लोक लाज के डर से वह सब कुछ सहती रही। पर एक दिन जब डी.एम. की गाड़ी से उसके पति का एक्सीडेंट हो गया तो चण्डी बन गयी। तबके जिलाधिकारी को इलाज का खर्च उठाना पड़ा और पति को नौकरी भी देनी पड़ी। जिलाधिकारी के तबादले के बाद पति की नौकरी छूट गयी। तब जानकी को लगा कि पढ़ा लिखा न होने की वजह से वह छली गयी। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; उसने पढ़ने का संकल्प लिया। वर्ष 1998 में वह महिला समाख्या से जुड़कर पढ़ना लिखना सीख गयी। उसके ज्ञान,हुनर और तेवर को देखकर पंचायत कोर टीम और महासंघ में शामिल किया गया। यहीं से उसकी आंखों में गांव और समाज के विकास का सपना चमक उठा। कई गांवों की महिलाओं को जुटाकर बुन्देलखण्ड के गुलाबी गैंग की तरह उसने भी अपनी सेना खड़ी कर ली। जब भी किसी असहाय पर मुसीबत आयी तो लाठियों से लैस होकर वह मौके पर पहुंच गयी। उसके जज्बे की लकीर तुलसीदेऊर, जमुनिया, खैराबाद, पिपराइच, भटहट, रामपुर आदि गांवों में खिंची है। तुलसीदेउर में 15 साल से एक दबंग ने रास्ता रोक दिया था। जानकी की सेना पहंुची तो रास्ता खाली हो गया। जो दबंग अपने कमजोर पट्टीदारों का उत्पीड़न कर रहा था उसे जेल भी भिजवा दिया। दूसरे गांवों में भी ऐसा ही हुआ। खैराबाद का बी.ए. पास लड़का शादी का झांसा देकर एक अनपढ़ गरीब लड़की से खेलता रहा। यह बात पता चली तो उसने भरे समाज में लड़के को शादी के लिए मजबूर कर दिया।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0wSctI2X2I/AAAAAAAAAr0/a7dEra25fO0/s1600-h/11janct1410-1_1263142213_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0wSctI2X2I/AAAAAAAAAr0/a7dEra25fO0/s320/11janct1410-1_1263142213_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;गांव गांव में उसने साक्षरता की ज्योति जला दी। विधवा विवाह कराया। सामूहिक खेती की अलख जगायी। नरेगा में नाइंसाफी की मुखालिफत कर रही है। सेना के अवकाशप्राप्त नायक नागर चौरसिया कहते हैं कि इतना तेवर तो हमने जवानों में भी नहीं देखा। जानकी के पति के साथ बड़ा बेटा राजनाथ भी विकलांग है। बेटी मीरा को ब्याह दिया और दूसरा बेटा बृजनाथ अपनी पत्नी और छोटे भाई शेषनाथ के साथ लुधियाना में रहता है। जानकी इस समय नारी अदालत कानून कोर टीम की सदस्य है। किसी के साथ कोई अन्याय न करे, यही उसका संदेश है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-8810327304376339613?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/8810327304376339613/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=8810327304376339613' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8810327304376339613'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8810327304376339613'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_12.html' title='जोर-जुल्म के टक्कर में नजीर बनी जानकी'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0wSGjrxMKI/AAAAAAAAArs/jWQstK-hTdM/s72-c/VNS10kan-g1-1_1263165658_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-6705117912601557316</id><published>2010-01-10T21:04:00.001+05:30</published><updated>2010-01-10T21:04:56.249+05:30</updated><title type='text'>वो तो गली-गली सबको पढ़ाने लगी</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0nzhtfWT7I/AAAAAAAAArk/xQNRT8ul_8E/s1600-h/GKP30ahv5-1_1263081298_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0nzhtfWT7I/AAAAAAAAArk/xQNRT8ul_8E/s320/GKP30ahv5-1_1263081298_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय, गोरखपुर&lt;br /&gt;&amp;nbsp;यह कहानी अशिक्षा के अंधकार में शोषण का शिकार हो रही महिलाओं के लिए प्रेरणा है। यह कहानी अनुसूचित जाति में जन्मी 35 साल की मीना की है जो कभी अनपढ़ थी लेकिन अब अपने गांव जवार में मेम बन गयी है। लिखने-पढ़ने की उसे ऐसी लगन लगी कि अब वो गली गली सबको पढ़ाने लगी है। उसने सौ से अधिक महिलाओं को लिखना-पढ़ना सिखा दिया है। वह महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक कर रही है।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;गहिरा गांव के श्रीकांत की बेटी मीना 22 साल पहले पिपराइच क्षेत्र के मोहनपुर गांव में राजदेव भारती के साथ ब्याही गयी। तब वह निरक्षर थी। ससुराल में बहुत साल तक चौके चूल्हे की तपिश सहती रही। मौके बे मौके पति से पिटती रही। पर एक दिन उसके मन में भी पढ़ने की कसक हुई। वर्ष 2000 में महिला समाख्या ने मोहनपुर में साक्षरता कैम्प लगाया। पति के रोकने के बावजूद प्रतिरोध करके वह इस कैम्प में गयी। उसकी लगन देखकर महिला समाख्या की समन्वयक शगुफ्ता ने जिले पर लगे कैम्प में उसे विशेष प्रशिक्षण दिया। अल्प अवधि में उसका ज्ञान कक्षा आठ के बराबर हो गया। इसके बाद उसे अनुदेशक बना दिया गया। &lt;br /&gt;&amp;nbsp; मीना ने मोहनपुर, मलपुर, गोपालपुर, पिपरा बसंत आदि गांवों में कैम्प लगाकर अनुसूचित जाति की अनपढ़ महिलाओं को साक्षर बनाना शुरू कर दिया। आस पास के गांव की महिलाओं के बीच अब मीना मेम की इज्जत बढ़ गयी है। लोग उसे आदर देते हैं। मीना पंचायतों में भी जाती है। नारी अदालत में औरत के ऊपर हुये अत्याचार पर केन्दि्रत होकर जब वह उनके पतियों को कानून का पाठ पढ़ाती है तो लोग दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं। उसकी पहल और फैसलों ने कई घरों को टूटने और बिखरने से बचा लिया है। उसकी दिलेरी की लोग दाद देते हैं। गांव गांव में शराब के विरोध में उसने अभियान चला दिया है। वह सुशिक्षित समाज के अगुवा के रूप में स्थापित हो रही है। उसे मानव अधिकार और कानून की धाराओं का भी ज्ञान हो गया है। मीना की सक्रियता देखकर और भी कई महिलाओं को पढने पढ़ाने का मन हो रहा है। गोपालपुर की आरती का कहना है कि मीना दीदी ने हमे लिखना पढ़ना सिखाकर हमारी जिंदगी बदल दी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-6705117912601557316?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/6705117912601557316/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=6705117912601557316' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6705117912601557316'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6705117912601557316'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_10.html' title='वो तो गली-गली सबको पढ़ाने लगी'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0nzhtfWT7I/AAAAAAAAArk/xQNRT8ul_8E/s72-c/GKP30ahv5-1_1263081298_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-2570693195780791801</id><published>2010-01-09T09:01:00.000+05:30</published><updated>2010-01-09T09:01:17.463+05:30</updated><title type='text'>श्रम की पूंजी से लिखेंगे खुशहाली की नयी इबारत</title><content type='html'>कभी कभी हम सपने देखते हैं. सभी सपने सच नहीं होते. मेरी यह रपट भी एक सपना है. दुआ करिए कि यह सच हो जाए. दुआ करिए कि खाली हाथों को काम मिले और पूर्वांचल की विशाल जनसेना खेतों से खुशहाली लाये. हमने यही सपना देखा है कि गोरखपुर और बस्ती मंडल में एक&amp;nbsp;सदी&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;में बढ़ गए ३६९ फीसदी लोग अपने श्रम की पूंजी से खुशहाली की नयी इबारत लिखेंगे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0f4dHYzeVI/AAAAAAAAArc/Lbs6_aRksRo/s1600-h/GKP5bgh03-1_1251093628.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0f4dHYzeVI/AAAAAAAAArc/Lbs6_aRksRo/s320/GKP5bgh03-1_1251093628.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;आनन्द राय, &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर, 02 जनवरी। वर्ष 2010 उम्मीदों के पांव पर चलकर आया है। सरकार की नयी योजनाओं से ख्वाबों को पर लगने शुरू हो गये हैं। सब कुछ ठीक रहा तो इस साल पूर्वाचल की अपार जन संपदा का सही नियोजन होगा। यही जनसेना खुशहाली लायेगी। फिर खेत सोना उगलेंगे। श्रम की पूंजी से काज संवरेगा। तकनीक की ताकत से तस्वीर बदलेगी। कम्प्यूटर और संचार प्रौद्योगिकी का प्रभाव दिखेगा। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; गोरखपुर-बस्ती मण्डल की आबादी 1.71 करोड़ है। 1901 में यहां 47.84 लाख लोग थे जिसके सापेक्ष एक सदी में 369 फीसदी लोग बढ़ गये हैं। सरकार की नयी योजनाएं इसी जन संपदा की बदौलत पूर्वाचल की तकदीर और तस्वीर बदल देंगी। रोजगार के लिए गांव-घर छोड़कर परदेस जाने वाले लौटेंगे। इस साल उन्हें अपने गांव में निश्चित रूप से रोजगार मिलेगा। खेत- खलिहान से उनकी ऊर्जा जुड़ेगी। रोजगार गारण्टी शिकायत निवारण तंत्र नियमावली 2009 लागू होने का उन्हें लाभ मिलेगा। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; साल में सौ दिन रोजगार देने वाली योजना मनरेगा के सही संचलन के लिए सोशल आडिट का प्रबंध हुआ है। अगर ठीक से निगरानी हुई तो दोनों मण्डलों के 70 हजार जाब कार्ड धारक परिवारों का सटीक नियोजन होगा। सहकारी ऋण देकर स्वरोजगार, स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना, गन्ने का उचित मूल्य, विधवा, वृद्धा और विकलांग पेंशन, ईट भट्ठों का उद्योगों में पंजीकरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी द्वारा विज्ञान वर्ग के बेरोजगारों का उत्प्रेरण एवं प्रशिक्षण, फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल, बायो टेक्नालाजी, कृषि एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटर एवं संचार प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, आटो मोबाइल आदि क्षेत्रों में भी लोगों का समायोजन होगा। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; परिवार नियोजन को लेकर सरकार तो हमेशा सजग रही है लेकिन अब लोग सजग होने लगे हैं। इसके बावजूद यहां जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार इतनी तेज है कि पिछली जनगणना में 25 फीसदी की वृद्धि हुई थी। एक साल बाद फिर जनगणना होनी है। अनुमान है कि इस अंचल में 20 से 25 फीसदी की वृद्धि फिर होगी। लेकिन अब इस मानव समूह के नियोजन के लिए निजी क्षेत्र के लोग भी सक्रिय हुये हैं। यद्यपि पूर्वाचल में कल कारखाने पहले की अपेक्षा घटे हैं लेकिन स्पेशल कम्पोनेंट प्लान, परम्परागत कारोबार का विकास और छोटे छोटे उद्योगों ने उम्मीद बढ़ा दी है। अभी व्यवसायिक खेती का भी चलन बढ़ा है। जैट्रोफा, मक्के की खेती, फूलों की खेती ने बहुत से लोगों को माडल बना दिया है। गांव से लेकर शहर तक लोग रोजगार की दिशा में सजग होने लगे हैं और सरकारी नौकरियों की आस छोड़कर अपने हाथों को खुद काम देने लगे हैं। यही प्रवृत्ति सदियों से शोषित और उपेक्षित पूर्वाचल के लिए उम्मीद की किरण बन गयी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-2570693195780791801?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/2570693195780791801/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=2570693195780791801' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2570693195780791801'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2570693195780791801'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_09.html' title='श्रम की पूंजी से लिखेंगे खुशहाली की नयी इबारत'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0f4dHYzeVI/AAAAAAAAArc/Lbs6_aRksRo/s72-c/GKP5bgh03-1_1251093628.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-5209450989426299200</id><published>2010-01-08T13:49:00.000+05:30</published><updated>2010-01-08T13:49:45.261+05:30</updated><title type='text'>अफसरों और राजनेताओं से भी हैं यूनुस के रिश्ते</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0bp_NJgKoI/AAAAAAAAArE/i8Pj5pDMvjY/s1600-h/crime_fix-1_1256836215_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0bp_NJgKoI/AAAAAAAAArE/i8Pj5pDMvjY/s320/crime_fix-1_1256836215_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय, &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर, 07 जनवरी। अण्डरव‌र्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के दायें हाथ और आईएसआई एजेण्ट युनूस अंसारी के नेपाल में जाली नोटों के साथ पकड़े जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भारत में उसके रिश्तों को खंगाल रही हैं। नेपाल पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर इन एजेंसियों ने भारत के प्रमुख शहरों में युनूस के नेटवर्क और सम्बंधों की बारीक छानबीन शुरू कर दी है। कुछ राजनेता, पुलिस अफसर और नामचीन अपराधियों से युनूस के बेहतर सम्बंध होने की बात उभर कर सामने आयी है। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में जाली नोटों की खेप के साथ पकड़े गये तस्करों ने जब इस धंधे का सिरा नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के पुत्र युनूस अंसारी से जोड़ा तभी सी.बी.आई. के कान खड़े हो गये। सी.बी.आई. ने नेपाल पुलिस को इसकी सूचना दी। उसी सूचना के जरिये नेपाल पुलिस के हाथ युनूस के गिरेबां तक पहुंचे। युनूस की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही सी.बी.आई.,आई.बी., यू.पी. की एटीएस और एस.आई.ओ. की अलग अलग टीम काठमाण्डू पहुंच गयी। इन सुरक्षा एजेंसियों ने नेपाल में युनूस के नेटवर्क का अध्ययन किया। चूंकि उसे दस दिन की न्यायिक हिरासत में लिया गया है इसलिए युनूस से सीधी मुलाकात नहीं हो पायी। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; सूत्रों का कहना है कि नेपाल पुलिस ने भारतीय अफसरों का पूरा सहयोग किया और यहां से दिये सवालों पर युनूस का इंट्रोगेशन भी किया। युनूस ने भारत में राजनेताओं, अफसरों और अपराधियों से अपने बेहतर रिश्ते की बात कबूल की। बिहार, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, झारखण्ड, पश्रि्वम बंगाल, गुजरात, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में उसका संजाल फैला है। इसके अलावा दूसरे अन्य प्रांतों में भी उसकी टीम काम करती है। बताते हैं कि लगभग डेढ़ सौ नामचीन लोगों के नाम युनूस ने बताये हैं। इस कड़ी में उत्तर प्रदेश के भारत-नेपाल सीमा के जनपदों में एक दशक में तैनात कई पुलिस अफसरों और थानेदारों से भी उसने अपने सम्बंध गिनाये हैं। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0bqJgaQeqI/AAAAAAAAArM/42EsLOReD1U/s1600-h/30del411-1_1256938810_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0bqJgaQeqI/AAAAAAAAArM/42EsLOReD1U/s320/30del411-1_1256938810_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; एक प्रमुख सुरक्षा एजेंसी ने युनूस अंसारी के बाबत नेपाल पुलिस से मिली जानकारी की रिपोर्ट 26 पेज में बनायी है। इस रिपोर्ट में उसके जरिये मिले सभी संदिग्ध नामों को शामिल किया गया है। हालांकि अभी इस बात का पुख्ता प्रमाण नहीं है कि युनूस ने जिनके नाम गिनाये सभी उसके काले कारोबार में शामिल रहे हैं। बताते हैं कि जिन लोगों से युनूस के रिश्तों की बात सामने आयी है उन पर कड़ी निगाह लग गयी है। ऐसे लोगों की गतिविधियों, बैंक खातों और कारोबार पर भी नजर रखी जा रही है। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;नोटिस लेने की बात यह भी है कि 29 नवम्बर 2005 को जब गाजीपुर जिले के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गयी तब दैनिक जागरण ने यह खबर प्रकाशित की थी कि 'नेपाली मंत्री के संरक्षण में घूम रहे कृष्णानन्द के हत्यारे'। कृष्णानंद के हत्यारों को सलीम मियां और उनके बेटे युनूस ने ही पनाह दी। बताते हैं कि बिहार से लेकर इलाहाबाद तक फैले इस प्रमुख राजनीतिक-आपराधिक गठजोड़ के आर्थिक तंत्र की डोर युनूस अंसारी के ही हाथ में रही है। इसी तरह मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में भी युनूस का अच्छा प्रभाव है। उम्मीद जतायी जा रही है कि एक पखवारे के अंदर भारत में जाली नोटों के काम में जुटे कुछ प्रमुख लोगों के चेहरों से नकाब उतरेगा। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-5209450989426299200?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/5209450989426299200/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=5209450989426299200' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5209450989426299200'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5209450989426299200'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_08.html' title='अफसरों और राजनेताओं से भी हैं यूनुस के रिश्ते'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0bp_NJgKoI/AAAAAAAAArE/i8Pj5pDMvjY/s72-c/crime_fix-1_1256836215_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-2545433506498293080</id><published>2010-01-06T07:39:00.000+05:30</published><updated>2010-01-06T07:39:12.939+05:30</updated><title type='text'>बहुत गहरी हैं यूनुस के काले कारोबार की जड़ें</title><content type='html'>आनंद राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0Pv8w-ER1I/AAAAAAAAAqk/5v0MOkiOjyA/s1600-h/Chhota+Shakeel.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0Pv8w-ER1I/AAAAAAAAAqk/5v0MOkiOjyA/s200/Chhota+Shakeel.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;बीस लाख के भारतीय जाली नोटों के साथ नेपाल में पकड़े गए पूर्व मंत्री सलीम मियां अंसारी के बेटे यूनुस अंसारी के काले कारोबार की जड़ें बहुत गहरी हैं। वह न केवल नकली नोटों के कारोबार का मुख्य सूत्रधार है, बल्कि उसने अंडरव‌र्ल्ड के लोगों को अत्याधुनिक असलहे भी उपलब्ध कराए हैं। खूबसूरत लड़कियों के जरिए वह जाली नोटों की डिलीवरी कराता रहा है।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0PwadUUAWI/AAAAAAAAAq0/RKHy2V76McE/s1600-h/babloos.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0PwadUUAWI/AAAAAAAAAq0/RKHy2V76McE/s200/babloos.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाह के शासन में मंत्री रहे सलीम मियां अंसारी का बेटा यूनुस अंसारी यूं तो पहले से ही बदनाम है। लेकिन 6 अक्टूबर, 2009 को जब नेपालगंज में डान माजिद मनिहार मारा गया, तब वह सुर्खियों में आ गया। इसके बाद मध्य प्रदेश में पकड़े गए जाली नोटों के एक कारोबारी ने यूनुस अंसारी का नाम लिया। युनूस ही नहीं बदनामी का धब्बा तो उसके पिता पर भी लग चुका है। अंडरव‌र्ल्ड सरगना और कभी नेपाल में नकली नाम से नागरिकता पा चुके बबलू श्रीवास्तव ने अपनी पुस्तक अधूरे ख्वाब में सलीम अंसारी का जिक्र किया है। यूनुस व उसके पिता पर भारतीय अपराधियों को पनाह देने का आरोप है। सीबीआई का वांछित पांच लाख का इनामी और मुख्तार अंसारी का रिश्तेदार अताउर्रहमान उर्फ सिकंदर नेपाल में इस परिवार के संरक्षण में रहता है। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0PwKMzwy9I/AAAAAAAAAqs/ybzAbzyPJss/s1600-h/parash-shah.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0PwKMzwy9I/AAAAAAAAAqs/ybzAbzyPJss/s200/parash-shah.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; यूनुस अंसारी का संबंध नेपाल के पूर्व युवराज पारस से बहुत ही बेहतर है। इन्हीं संबंधों के चलते जाली नोटों के कारोबार का आरोप पारस पर भी लगा। यहां तक कि ज्ञानेंद्र के शासन में जब शाही सेना ने मुठभेड़ के बाद माओवादियों से अत्याधुनिक असलहे बरामद किए तब इन हथियारों को भारतीय अपराधियों को बेचने में यूनुस ने मुख्य भूमिका निभाई थी। नेपालगंज, कृष्णानगर और वीरगंज को उसने इन हथियारों की बिक्री का केन्द्र बना दिया था। पिछले साल सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज कस्बे में एक बैंक से जाली नोटों के कारोबार का खुलासा हुआ। गाजीपुर जिले का मूल निवासी बैंक कर्मी सुधाकर त्रिपाठी पकड़ा गया। तबसे खुफिया तंत्र मुख्य सूत्र तलाश करने में जुटा है। आईएसआई और दाऊद इब्राहिम ने भारतीय अर्थ व्यवस्था को कमजोर करने के लिए जाली नोटों का कारोबार दो दशक पहले ही शुरू कर दिया था।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0PwkUz5VgI/AAAAAAAAAq8/uuDkxI8tsmY/s1600-h/20051230004301703.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0PwkUz5VgI/AAAAAAAAAq8/uuDkxI8tsmY/s200/20051230004301703.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;खुफिया एजेंसी के मुताबिक इस कारोबार के तार नेपाल स्थित पाक दूतावास से जुड़े हैं। नेपाल सरकार ने इसी शिकायत पर पाक दूतावास के अधिकारी परवेज चीमा को हटाने का अनुरोध किया था। 1993 से 1997 तक कुछ चिन्हित लोगों ने मिलकर सौ रुपये की नोट का कारोबार किया। लेकिन, बाद के दिनों में पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों का कारोबार शुरू हो गया। चूंकि नेपाल की सत्ता में सलीम मियां का दखल बढ़ा इसलिए एफएम चैनल खोलकर और मीडिया में पैर जमाकर यूनुस आईएसआई के भारत विरोधी अभियान में सक्रिय हो गया। खुफिया एजेंसियों ने भारत सरकार को जो रपट भेजी है, उसके मुताबिक नेपाल में जिकरउल्लाह, लाल मुहम्मद, जमील आलम, अल्ताफ हुसैन, इलियास मुन्ना जैसे लोग यूनुस अंसारी के संरक्षण में जाली नोटों के कारोबार में जुटे हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-2545433506498293080?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/2545433506498293080/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=2545433506498293080' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2545433506498293080'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2545433506498293080'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_06.html' title='बहुत गहरी हैं यूनुस के काले कारोबार की जड़ें'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/S0Pv8w-ER1I/AAAAAAAAAqk/5v0MOkiOjyA/s72-c/Chhota+Shakeel.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-6321175196654302609</id><published>2010-01-01T21:22:00.000+05:30</published><updated>2010-01-01T21:22:00.966+05:30</updated><title type='text'>सिर उठा के जीने से खुशहाल हुई जिंदगी</title><content type='html'>आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4ZOI4QjPI/AAAAAAAAAqU/wh2cVuTqD9I/s1600-h/GKPaids-1_1246335980_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4ZOI4QjPI/AAAAAAAAAqU/wh2cVuTqD9I/s320/GKPaids-1_1246335980_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;भंवर में फंसी जिंदगी की कश्ती और समाज की चुभती निगाहों का सामना करते हुये एच आई वी संक्रमित हरेन्द्र उर्फ मिण्टू के चेहरे की चमक बढ़ गयी है। उसे न तो जमाने की निगाहों की परवाह है और न ही टूटे हुये पतवारों का गम। अंधेरी रात के दिल में दिये जलाकर वह अपने सफर पर है। सिर उठा कर जीने से उसकी जिंदगी खुशहाल हो गयी है। &lt;br /&gt;बांसगांव विकास खंड के बघराई गाँव के 28 साल के हरेन्द्र की पूरी जिंदगी झंझावातों से उलझी रही है। उसका बड़ा भाई शेषनाथ लगभग डेढ़ दशक पहले मुम्बई से लापता हो गया। उन दिनों भाई को खोजते हुये हरेन्द्र मुम्बई की गलियों में भटकने लगा। भाई तो नहीं मिला लेकिन किसी कोने में एड्स के कीटाणु उसके साथ लग गये। गांव लौटा तो शेषनाथ की पत्नी की पहाड़ सी जिंदगी चुभने लगी। लोगों के कहने पर उसने अपनी भाभी सरोजा से वर्ष 2003 में शादी कर ली। कुछ साल पहले उसकी पत्नी सरोजा बीमार पड़ी। पता चला कि एड्स है। वह इलाज के दरम्यान चल बसी। हरेन्द्र भी बीमार रहने लगा। उसने वाराणसी में जांच करवायी तो उसे भी एड्स रोग का पता चला। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;हरेन्द्र ने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपना इलाज शुरू किया। वह अपने गांव में एक गुमटी में पान बेचने लगा। क्योंकि उसे अपने एक बेटे, मां-बाप और एक बेरोजगार बड़े भाई और उनकी पत्नी की परवरिश भी करनी थी। सबकी जिम्मेदारी एक बीमार आदमी के कंधे पर, मगर उसने अपना कंधा मजबूत कर लिया। दैनिक जागरण ने 30 जून 2009 को एड्स के क्रूर पंजों से लड़ रहा जिंदगी की जंग शीर्षक से उसकी कथा प्रकाशित की। हरेन्द्र ने न अपना नाम छुपाया और न ही कोई संकोच किया। वह सच के साथ खड़ा हुआ तो महज छह माह के भीतर उसके सहयोग के लिए लोगों की कतार लग गयी। &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4Z_B7h35I/AAAAAAAAAqc/X5NOgXDe6Zo/s1600-h/GKPsadbhavkesatha1-1_1260062192_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4Z_B7h35I/AAAAAAAAAqc/X5NOgXDe6Zo/s200/GKPsadbhavkesatha1-1_1260062192_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; एड्स रोगियों के लिए काम कर रहे एमएसएस सेवा के चेयरमैन जटाशंकर ने हरेन्द्र को ब्राण्ड एम्बेसडर बना दिया। गांव में स्कूल के सामने उसकी किताब की दुकान खुलवायी। लीडरशिप ट्रेनिंग दी। कैपसिटी बिल्डिंग और कौंसिलिंग की। फिर कई लोगों ने उसकी मदद की। हरेन्द्र स्वावलम्बी तो पहले से था पर दूसरों के सहयोग से उसका आत्मबल और बढ़ गया। वह अपने जैसों को प्रेरित करने लगा। हताशा और निराशा के भंवर में डूबे लोगों को जीवन की राह दिखाने लगा। एड्स रोगियों को हरेन्द्र जब अपनी जिंदगी की दुश्र्वारियां बताता है तब असीम पीड़ा और दर्द से सबकी आंखें नम हो जाती हैं। वह अपना उदाहरण देकर सबका हौसला बढ़ाता है। वह सबके जीवन के फलक से निराशा के बादलों को छांटने की मुहिम में जुटा है। नियमित अपना चेकअप करवाता। योग करता और लोगों को जागरूक करने का कोई अवसर चूकता नहीं है। साहिर लुधियानवी की लिखी यह नज्म - डरता है जमाने की निगाहों से भला क्यों, इंसाफ तेरे साथ है इल्जाम उठा ले, गुनगुनाते हुये वह हर पल खुश रहता है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-6321175196654302609?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/6321175196654302609/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=6321175196654302609' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6321175196654302609'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6321175196654302609'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_5576.html' title='सिर उठा के जीने से खुशहाल हुई जिंदगी'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4ZOI4QjPI/AAAAAAAAAqU/wh2cVuTqD9I/s72-c/GKPaids-1_1246335980_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-6803610585623492700</id><published>2010-01-01T21:13:00.000+05:30</published><updated>2010-01-01T21:13:22.874+05:30</updated><title type='text'>रोडवेज : चुनौतियों से भरा रहा साल का सफर</title><content type='html'>आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4Xk9Dm05I/AAAAAAAAAqE/9smdJJD6G5A/s1600-h/bas.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4Xk9Dm05I/AAAAAAAAAqE/9smdJJD6G5A/s320/bas.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;रोडवेज आम आदमी के सफर का साथी है। मंजिल का साधन है। पर नींव इतनी कमजोर हो चुकी है कि उसके भरोसे मंजिल आसान नहीं है। गुजरे एक साल के खास मौके इस बात के गवाह हैं। इस बात की गवाह कई सुनसान सड़के हैं जहां कभी भूले से भी कोई सरकारी बस नहीं गयी। इस बात के गवाह वे यात्री हैं जो सरकारी बसों का इंतजार करते रह गये मगर उनकी जगह पहुंची डग्गामार बसों ने उनकी जेब हल्की कर दी।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम इस साल आम आदमी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। रही सही कसर आखिरी समय में निगम ने खुद पूरी कर दी। किराया इतना अधिक कर दिया कि यात्री अपनी जेब का वजन देखकर सफर तय करने लगे। पर रोजमर्रा की राह पर चलने वालों के लिए मुश्किल बढ़ गयी। बेड़े में बाल्वो और पवन और सर्वजन हिताय बसों के शामिल होने के बाद भी रोडवेज का चेहरा लोगों को लुभा नहीं पाया। खटारा बसों और आये दिन हड़ताल-चक्का जाम की चेतावनियों से यात्रियों की सांस टंगी रही।&lt;br /&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;साल के प्रारंभिक सफर को देखें तो सबसे पहले इलाहाबाद कुंभ मेले की चुनौती सामने थी। रोडवेज प्रबंधन ने मेले के श्रद्धालु यात्रियों के लिए 263 बसें और 18 वैकल्पिक केन्द्र बनवाये लेकिन रोडवेज के प्रबंधन पर आस्था भारी पड़ी। लोग ठूंस ठूंस कर भरे गये, फिर भी बहुत से लोग जा नहीं पाये। यात्रियों की मुश्किल गोरखपुर-नौतनवां रेल लाइन आमान परिवर्तन के चलते भी बढ़ी। सोनौली जाने वाले हजारों यात्रियों के लिए डेढ़ सौ से अधिक बस चलाने का दावा किया गया लेकिन जब तक रेल सफर नहीं शुरू हुआ तब तक दिक्कत बनी रही। छठे वेतनमान को लेकर सभी संगठनों ने बार बार चेतावनी और चुनौती दी। संविदा परिचालकों ने पूरे साल हंगामा खड़ा किया। कभी जाम तो कभी इल्जाम उनके रवैये में शामिल रहा।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4YAo-8CDI/AAAAAAAAAqM/l4X0UC-u0pU/s1600-h/nitto-1320-legends.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4YAo-8CDI/AAAAAAAAAqM/l4X0UC-u0pU/s320/nitto-1320-legends.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;अफसरों को ये कर्मी बंधक बनाने से भी नहीं चूके। हालात के माफिक समझौता होता रहा। नेताओं की चांदी रही लेकिन आखिरी कतार में खड़ा संविदाकर्मी पूरे साल छला गया। कुछ नयी बसें आयी लेकिन उनसे ज्यादा बसें जर्जर हो गयीं। ए.सी. बसों का सपना सपना ही रहा। दूसरे डिपो की बाल्वो बस ने इन सभी कमियों को पूरा किया। आखिरी दिनों में गोरखपुर क्षेत्र के पड़रौना में एक डिपो शुरू हुआ और क्षेत्र में कुल सात डिपो हो गये। पर न ही रीजनल वर्कशाप का नया केन्द्र बन पाया और न ही पहले की प्रस्तावित कई योजनाएं अस्तित्व में आयीं। अलबत्त्ता वर्कशापों से चोरी का सिलसिला तेज हो गया। इसी साल इलेक्ट्रानिक टिकट मशीन का चलन शुरू हुआ। प्रारंभ में दिक्कत बनी रही लेकिन धीरे धीरे स्थिति सामान्य हो गयी। &lt;br /&gt;&amp;nbsp; साल समाप्त होते होते अनिल श्रीवास्तव सेवा प्रबंधक होकर आये। उन्होंने बसों के रख रखाव और साफ सफाई पर ध्यान केन्दि्रत किया। पर जहां गड़बड़ी जड़ तक पहुंची हो वहां इतनी जल्दी सुधार की अपेक्षा कैसे संभव है। सरकार ने डग्गामार बसों पर नियंत्रण के लिए हर दिन घण्टी बजायी लेकिन प्रबंधन के बंद कानों पर कोई असर नहीं हुआ। डग्गामार वाहनों से एक रकम तय हो गयी और वे रोडवेज की दहलीज पर चढ़कर सवारी भरते रहे। निगम ने रक्षा बंधन, होली और दीपावली जैसे त्यौहारों पर ओवरटाइम करने पर आकर्षक पुरस्कार देने की घोषणा की लेकिन लालच पर तीज त्यौहार भारी पड़ गये। चेतावनी के बावजूद रोडवेज कर्मियों ने छुट्टी मनायी। परिवहन मंत्री राम अचल राजभर ने बार बार रोडवेज को सर्वजन का बनाने का दावा किया और पहल भी की लेकिन अफसरों की सुस्ती के चलते कोई गति नहीं आयी।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;परिवहन मंत्री की व्यक्तिगत पहल पर कुछ उपेक्षित इलाकों में बस तो चली लेकिन रकहट जैसे कई क्षेत्र हैं जो सरकारी बस से वंचित रहे। डिपो परिसरों में गंदगी का साम्राच्य बना रहा। क्षेत्रीय प्रबंधक रामवृक्ष पूरे साल संवाद बनाने से कतराये। कुछ सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों से उनकी अनबन भी जग जाहिर हुई। रोडवेज में फर्जी टिकट के धंधे को लेकर हमेशा एक वर्ग मुखर रहा लेकिन कुछ संगठित लोगसब पर भारी पड़े। क्षेत्रीय मुख्यालय के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक रामदेव की मानें तो इस साल गोरखपुर क्षेत्र की पिछले साल से ज्यादा आमदनी रही और यात्रियों को सर्वाधिक सुविधाएं मिली।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-6803610585623492700?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/6803610585623492700/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=6803610585623492700' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6803610585623492700'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6803610585623492700'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post_01.html' title='रोडवेज : चुनौतियों से भरा रहा साल का सफर'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4Xk9Dm05I/AAAAAAAAAqE/9smdJJD6G5A/s72-c/bas.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-312519846394879773</id><published>2010-01-01T20:58:00.000+05:30</published><updated>2010-01-01T20:58:19.168+05:30</updated><title type='text'>काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे</title><content type='html'>आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4T6wJipFI/AAAAAAAAAps/dE-LNI8lqJE/s1600-h/dance1.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4T6wJipFI/AAAAAAAAAps/dE-LNI8lqJE/s320/dance1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;एक शादी समारोह में पुराने ख्याल के एक शख्स अपने घर की लड़कियों पर खफा हो गये। वजह सिर्फ इतनी थी कि लड़कियां भाई की शादी में डांस फ्लोर पर झूम कर नाचने लगीं। उनके साथ रिश्तेदार और बाराती भी नाच रहे थे। उन्होंने इसे खानदान के मान-प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाकर बारात छोड़ दी। तब मिर्जा गालिब प्रासंगिक हो गये जिनके सामने भी परम्परा और आधुनिकता को लेकर भारी दुविधा थी। तभी तो उन्होंने यह लिखा- नफरत का गुमां गुजरें हैं मैं रश्क से गुजरा, क्यों कर कहूं लो नाम न उसका मेरे आगे। ईमां मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ्र, काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;मिर्जा गालिब के लिए एक तरफ इस्लाम की परम्परा थी तो दूसरी तरफ भारत आ रहे अंग्रेजों का रहन-सहन और संस्कृति। इसी बेचैनी में उनकी कई रचनाएं वजूद में आयीं। परदे की अपनी रवायत के समानांतर अंग्रेजों का खुलापन उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। अब वही दुविधा आधुनिकता और परम्परा की जंग लड़ रहे मध्यम वर्ग के सामने है। मैरेज हाउस में जो हंगामा हुआ वह इसी दुविधा का नतीजा है। गांव से आये जिस सज्जन ने मर्यादा के सवाल पर बारात छोड़ दी, वे बार बार यही बात दुहरा रहे थे कि लफंगों के साथ घर की लड़कियां नाच रहीं हैं..। उनका गुस्सा देखने लायक था मगर उनके ही परिवार के लोग उनसे सहमत नहीं थे। उनके एक खास रिश्तेदार ने कहा- दुनियां कहां से कहां जा रही है और ये खानदान की मर्यादा लेकर ढो रहे हैं। पर यह कशमकश अभी खत्म नहीं हुआ है।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4ULMXDtkI/AAAAAAAAAp0/im2WDToAYzQ/s1600-h/6495_117330773583_15335228583_2231198_8192748_n.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4ULMXDtkI/AAAAAAAAAp0/im2WDToAYzQ/s200/6495_117330773583_15335228583_2231198_8192748_n.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;नयी उम्र के लोगों में भी यह बात घर किये है कि जो बाप दादों की परम्परा है, उसका पालन किया जाय। आवासीय काम्प्लेक्स में आधुनिक सुख सुविधा के साथ रह रहे 35 साल के कौशल शाही कहते हैं कि हम अपनी परंपरा नहीं छोड़ सकते। हमारे पूर्वजों ने जो परम्परा डाली है उससे अलग होकर अपनी जड़ों से कट जायेंगे। पर एक निजी कम्पनी में इंजीनियर अनुभव सिन्हा का कहना है कि अगर परम्परा की जड़ों में जकड़े रहे तो जिंदगी से कट जायेंगे। डा. ए.के. गर्ग, एस.बी. पाण्डेय एडवोकेट, अनिल पाण्डेय, कांट्रेक्टर ए.एल. मौर्य समेत कई लोग परम्परा के पक्षधर हैं तो एमबीए अखिलेश तिवारी, विशाल सिंह, विनय सिंह, राममोहन का कहना है कि अब रुढि़यों में बंधकर जाहिलों की तरह जीने से अच्छा है कि खुलकर जियें।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4Ud-EoBdI/AAAAAAAAAp8/GwLN3_S5gZo/s1600-h/GKP25bp-7-1_1261783529_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4Ud-EoBdI/AAAAAAAAAp8/GwLN3_S5gZo/s200/GKP25bp-7-1_1261783529_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; युवा समाज शास्त्री डाक्टर मानवेन्द्र प्रताप सिंह कहते हैं कि यह तो नयी और पुरानी पीढी के बीच का अंतरद्वंद है. इसी कशमकश के बीच से कोई नया रास्ता निकलेगा. यही रास्ता सामंजस्य भी स्थापित करेगा. जो हो लेकिन बहुत से लोग बदलाव के इस मौसम में दोराहे पर आकर खड़े हो गए हैं. बहुत से लोग तो इस बदलाव से हतप्रभ भी हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-312519846394879773?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/312519846394879773/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=312519846394879773' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/312519846394879773'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/312519846394879773'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='काबा मेरे पीछे है कलीसा मेरे आगे'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sz4T6wJipFI/AAAAAAAAAps/dE-LNI8lqJE/s72-c/dance1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-5278857835254850058</id><published>2009-12-29T11:42:00.000+05:30</published><updated>2009-12-29T11:42:21.366+05:30</updated><title type='text'>जो नेपाल में टिके वे मिटे</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SzmdroPxXII/AAAAAAAAApk/oLWBYTAs-Fs/s1600-h/P1030050r.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SzmdroPxXII/AAAAAAAAApk/oLWBYTAs-Fs/s320/P1030050r.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत के कई भगोड़े अपराधियों को नेपाल में पनाह तो मिली लेकिन वे अपनी जिंदगी की पारी खेल नहीं पाये। किसी दोस्त-दुश्मन के असलहों से निकली गोली ने उन सबकी उम्र छोटी कर दी। भारत के वांछित अण्डरव‌र्ल्ड डान मिर्जा दिलशाद बेग, जावेद, माजिद मनिहार, विक्रम वाही जैसों के लिए नेपाल की जमीन जानलेवा साबित हुई। नियति ने इन सभी नामचीन अपराधियों के हाथ की जीवन रेखा मिटा दी।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;पूर्वाचल से लेकर पंजाब के फगवाड़ा तक अपनी आपराधिक गतिविधियों की छाप छोड़ चुके टाण्डा के मूल निवासी कुख्यात शूटर परवेज टाण्डा को शुक्रवार की शाम नेपाल के सुक्खानगर में गोलियों से छलनी कर दिया गया। तब यह बात गूंजने लगी कि नेपाल की भूमि भारत के गुनहगारों को बख्शती नहीं है। भारत का वांछित परवेज पिछले एक दशक से नेपाल में पनाह लिये था। आखिर मौत का शिकार हुआ। कई साल पहले देवरिया जिले के रुद्रपुर क्षेत्र के भैंसही गांव से भागकर मिर्जा दिलशाद बेग नेपाल के कृष्णानगर पहंुचा तो कुछ ही समय में वहां उसकी रंगबाजी चल निकली। राजस्थानी मूल के तस्कर जावेद ने उसे संरक्षण दिया लेकिन एक शाम मिर्जा के गुर्गो ने जावेद का जनाजा उठवा दिया। फिर कृष्णानगर में मिर्जा की तूती बोलने लगी। वह नेपाल का सांसद और मंत्री बना मगर 29 जून 1998 की रात काठमाण्डू में अण्डरव‌र्ल्ड के असलहों से निकली गोली ने उसका भेजा उड़ा दिया। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;मिर्जा को भारत में तबाही फैलाने की सुपारी आईएसआई ने सौंपी थी और नेपाल में वह दाऊद का सबसे बड़े सहयोगी था। बेहद क्रूर मिर्जा खुद कई भारतीय भगोड़ों की मौत के वारण्ट पर हस्ताक्षर कर चुका था। लोगों को कैसेट किंग गुलशन कुमार के हत्यारे लखनऊ मूल के शूटर विक्रम वाही की याद भूली नहीं होगी जिसे मिर्जा के इशारे पर 30 अगस्त 1997 को पैसों के बंटवारे के लिए कृष्णानगर के एक बूचड़खाने में 6 टुकड़ों में काटकर भारत और नेपाल की सीमा में फेंक दिया गया था। 26 जनवरी 1993 को तिरंगा फिल्म के प्रदर्शन पर यहां मेनका टाकीज में बम विस्फोट कराने वाले मिर्जा के दायें हाथ गोरखपुर के कुख्यात शूटर/तस्कर इरफान उर्फ गामा को भी नेपाल में रहस्यमयी मौत मिली।&lt;br /&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;सर्वाधिक सनसनी तो गुजरे 6 अक्टूबर को हुई जब नेपालगंज के एक होटल में भारत की अर्थव्यवस्था बिगाड़ने वाले जाली नोटों के धंधे के सरगना और मिर्जा के उत्तराधिकारी माजिद मनिहार को गोलियों से भून दिया गया। श्रावस्ती जिले के भिनगा क्षेत्र के रहने वाले माजिद ने नेपाल में अपना ठिकाना बना लिया था। मिर्जा की मौत के बाद आई एस आई ने माजिद को भारत में गड़बड़ी फैलाने का मुख्य सूत्रधार बना दिया था। माजिद के बाद यह कमान परवेज के हाथों में आ गयी थी। ये सभी नामचीन लोग ही नहीं कई छुटभैये टपोरी भी भारत में गुनाह करके नेपाल में शरण लिये और वहां कम समय में उनकी पहचान बन गयी। मगर नियति ने लम्बे समय तक उनका बोझ नहीं उठाया। कोई अपने और कोई बेगानों की गोली का शिकार हो गया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-5278857835254850058?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/5278857835254850058/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=5278857835254850058' title='4 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5278857835254850058'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5278857835254850058'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/12/blog-post_29.html' title='जो नेपाल में टिके वे मिटे'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SzmdroPxXII/AAAAAAAAApk/oLWBYTAs-Fs/s72-c/P1030050r.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1342543078558709927</id><published>2009-12-21T20:38:00.000+05:30</published><updated>2009-12-21T20:38:22.480+05:30</updated><title type='text'>पूर्वांचल राज्य के लिए कभी नहीं धधकी सीने में आग</title><content type='html'>आनन्द राय , गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sy-PS3A1KOI/AAAAAAAAApc/OZnVNiBIscA/s1600-h/GKP19lko-g2-1_1261264868_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" ps="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sy-PS3A1KOI/AAAAAAAAApc/OZnVNiBIscA/s320/GKP19lko-g2-1_1261264868_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;पूर्वांचल राज्य के लिए कभी सीने में आग नहीं धधकी। कभी कोई ऐसी क्रांति नहीं हुई जो उत्तराखण्ड और झारखण्ड आंदोलन की याद दिला सके। कभी सड़क पर जनसैलाब देखने को नहीं मिला। चेहरा चमकाने के लिए शब्दों की जुगाली सुनी गयी। बेदम नारों की गूंज जनता के कानों से टकराकर वापस लौट गयी। दर हकीकत यह मुद्दा सियासी दांव पेंच में उलझा रहा। हाशिये पर जाने के बाद जनाधार वाले नेताओं ने इस मुद्दे से रिश्ता जोड़ा लेकिन मुख्य धारा में लौटने के बाद उनके होठों पर ताले लग गये। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; छोटे बड़े स्वयंभू संगठन अरसे से पूर्वांचल राज्य की आवाज उठा रहे हैं। कभी यह मसला नामों के भंवरजाल में उलझ कर रह गया तो कभी इसे उठाने वाले ही चुप्पी साध गये। गौर से देखें तो बंद कमरों से लेकर अखबार के दफ्तरों और कुछ छोटे बड़े सभागारों से आगे यह आंदोलन बढ़ नहीं पाया। वरना इस मुद्दे की जड़ तो पूर्वी उत्त्तर प्रदेश की अस्मिता और आजादी की लड़ाई से जुड़ी है। प्रसंगवश इस बात की चर्चा महत्वपूर्ण है कि 1857 की सशस्त्र क्रांति और मंगल पाण्डेय के विद्रोह ने अंग्रेजों को भोजपुरी इलाके के प्रति नीति निर्धारण की दिशा में नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया। नतीजतन 1901 में ब्रिटिश सरकार ने गोपनीय आदेश पारित कर भोजपुरी इलाके को लेबर एरिया घोषित कर दिया। अंग्रेजों ने इस अंचल की मानव, आर्थिक और प्राकृतिक संपदा का दोहन किया। आजादी के बाद भी यह इलाका उपेक्षित ही रहा। 1953 में जब राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया तो पश्चिमी उत्त्तर प्रदेश के 17 जिलों के जनप्रतिनिधियों ने अलग राज्य की मांग की। जानकार बताते हैं कि सियासी समीकरणों के चलते जनप्रतिनिधियों पर दबाव पड़ा जिससे उन लोगों ने अपना ज्ञापन वापस ले लिया। तबसे लेकर अब तक राज्यों के बंटवारे को लेकर अलग अलग आवाज गूंज रही है। चाहे गाजीपुर के तत्कालीन सांसद विश्वनाथ सिंह गहमरी के संसद में उद्बोधन के बाद पटेल आयोग का गठन हो या बाद के दिनों में सेन कमेटी की संस्तुति, हमेशा पूर्वाचल के लोगों को लालीपाप देने की कोशिश की गयी। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; सबसे नोटिस लेने की बात यह कि समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों ने आंदोलन को खूब हवा दी। पूर्व राज्यपाल मधुकर दिघे, पूर्व मंत्री शतरूद्र प्रकाश, पूर्व मंत्री शारदा नन्द अंचल , अंजना प्रकाश, पूर्व विधायक सुरेश यादव, पूर्व सांसद रामधारी शास्त्री, पूर्व सांसद हरिकेवल प्रसाद जैसे कई नाम हैं जो कभी इस आंदोलन के फाइटर फ्रंट कहे जाते थे। मधुकर दिघे की मानें तो मुलायम सिंह से उनका मतभेद भी इसी मुद्दे पर हुआ। बाकी समाजवादियों ने मुलायम सिंह से घटती-बढ़ती नजदीकियों के हिसाब से इस आंदोलन से अपना रिश्ता बनाया। अंचल और सुरेश यादव जैसे बेहद मुखर लोग तो बाद में इस मसले पर खामोशी अख्तियार कर लिये। पूर्व केन्द्रीय मंत्री कल्पनाथ राय ने तो सियासत में कांग्रेस से किनारे होने पर पूर्वाचल राज्य का अलख भी जगाया और जनाधार भी दिखाया लेकिन कांग्रेस में वापसी के साथ ही उन्होंने भी इस मुद्दे से खुद को किनारे कर लिया। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; प्रारंभ से ही इस मुद्दे पर आवाज उठाने वाली भोजपुरी क्रांति परिषद की बात हो या फिर पूर्वांचल राज्य बनाओ दल की। बीच में पूर्वाचल क्रांति परिषद जैसे संगठन भी अस्तित्व में आये। पूर्वाचल को लेकर कई और संगठन बने लेकिन जिस तरह दूसरे अंचलों में राज्यों के बंटवारे को लेकर आंदोलन हुआ और उसका जुड़ाव जनता से रहा, उस तरह यहां कोई पहल नहीं हो पायी। कई ऐसे भी संगठन बने जिनके नेताओं की इच्छा सिर्फ चेहरा चमकाने की&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-1342543078558709927?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1342543078558709927/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=1342543078558709927' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1342543078558709927'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1342543078558709927'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/12/blog-post_21.html' title='पूर्वांचल राज्य के लिए कभी नहीं धधकी सीने में आग'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sy-PS3A1KOI/AAAAAAAAApc/OZnVNiBIscA/s72-c/GKP19lko-g2-1_1261264868_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-6432841137093558330</id><published>2009-12-06T07:39:00.000+05:30</published><updated>2009-12-06T07:39:51.039+05:30</updated><title type='text'>ममता के जादू से दिखा रहीं मंजिल की राह</title><content type='html'>आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SxsSLION2BI/AAAAAAAAApI/2Pkw4dA3nDs/s1600-h/GKPsadbhavkesatha1-1_1260062192_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" er="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SxsSLION2BI/AAAAAAAAApI/2Pkw4dA3nDs/s200/GKPsadbhavkesatha1-1_1260062192_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; बाल रोग विशेषज्ञ डा. नंदिनी घोष अपनी ममता के जादू से मलिन बस्ती के बच्चों को मंजिल की राह दिखा रही हैं। इन बच्चों को अक्षरों और शब्दों की पूंजी सौंपकर उन्होंने ठिठुरती हथेलियों की रंगत बदल दी है। बुनकर परिवारों की पोलियोग्रस्त बेटियों को सिलाई-कढ़ाई का मौका देकर उनके अंदर जीने का जज्बा पैदा किया है। सहेली बनकर बेबस महिलाओं को दुख से लड़ने की ताकत दी है। हिन्दू-मुसलमान, अमीर-गरीब सबके बीच काम करते हुये वे सद्भाव की सारथी बन गयी हैं। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; देहरादून की बेटी और गोरखपुर की बहू डा. नंदिनी जबलपुर मेडिकल कालेज से 1979 की एम.डी. हैं। गोरखनाथ मंदिर से दस कदम पर उनका क्लीनिक है। सात साल पहले उन्होंने मलिन बस्ती के घुमंतू बच्चों को पढ़ाने का संकल्प लिया। क्लीनिक पर बुलाकर अपने प्यार-दुलार से उन्हें ककहरा सिखाने लगीं। पास में स्कूल खुला तो उन सबका दाखिला करा दिया। अब जो स्कूल नहीं जाते, पता चलते ही उनकी माताओं को जागरूक कर स्कूल भिजवाती हैं। स्कूल जाकर बच्चों से मिलती भी हैं। उन्होंने बुनकर घरों की पोलियोग्रस्त बेटियों की पहाड़ जैसी जिंदगी में जोश भर दिया है। पुराने कपड़े जुटाकर उनसे थैला सिलवाती हैं। हर थैले की कीमत अदा कर उन्हें प्रोत्साहित करती हैं। बेहतर काम करने पर पुरस्कृत भी करती हैं। इस प्रयोग से उन्होंने इनकी हताशा दूर की तो दूसरी तरफ पालीथिन का प्रयोग बंद कर पर्यावरण की रक्षा का भी अभियान शुरू किया।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SxsSVdxfjuI/AAAAAAAAApQ/t1v74-pnefs/s1600-h/GKP4ktn2-1_1260062191_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" er="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SxsSVdxfjuI/AAAAAAAAApQ/t1v74-pnefs/s320/GKP4ktn2-1_1260062191_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;वे अपने कार्य से अब मिसाल बन गयी हैं। इस कार्य के लिए उन्होंने किसी से मदद नहीं ली। न ही कोई एन.जी.ओ. चलाया। कहती हैं कि मैं तो अपने आप में एनजीओ हूं और मेरे स्वर्गीय पिता ने यही सिखाया है। डा. घोष मलिन बस्ती से लेकर ईट भट्ठों पर रहने वाले बच्चों का नि:शुल्क इलाज करती हैं। कई बार किसी मां के पास इतने कम पैसे होते जिसमें फीस और दवा नहीं हो सकती लिहाजा मैं अपने पर्स से उसे पैसे दे देती हूं। उस क्षण मां की आंखों में आयी चमक से मुझे फीस मिल जाती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-6432841137093558330?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/6432841137093558330/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=6432841137093558330' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6432841137093558330'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6432841137093558330'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/12/blog-post.html' title='ममता के जादू से दिखा रहीं मंजिल की राह'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SxsSLION2BI/AAAAAAAAApI/2Pkw4dA3nDs/s72-c/GKPsadbhavkesatha1-1_1260062192_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-8187050254103399134</id><published>2009-11-26T13:29:00.001+05:30</published><updated>2009-11-26T13:31:27.365+05:30</updated><title type='text'>बार बार सजग होने का पैगाम</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sw4zuuAChFI/AAAAAAAAAoo/VlXjPNHzv58/s1600/IMG_1133.JPG" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sw4zuuAChFI/AAAAAAAAAoo/VlXjPNHzv58/s200/IMG_1133.JPG" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;आनन्द राय, गोरखपुर&lt;br /&gt;आज २६ तारीख है. देश की छाती पर आतंकियों ने इसी तारीख को पिछले साल ऐसा जख्म दिया जिसके घाव अभी तक हरे हैं. यह एक ऐसी विडंबना है जिस पर न तो आंसू बहा सकते और न ही अपने गम को छुपा सकते. यह भारत की बुलंद तस्वीर को बचाए रखने की गाथा भर नहीं है, यह तारीख तो हमें बार बार सजग होने का पैगाम भी है. यह तारीख इस बात का सबूत भी है कि अगर हम चुके तो हमारी हस्ती को मिटाने वाले आगे बढ़ जायेंगे. यह अलग बात है कि भारत की धरती वीरों से खाली नहीं है. यहाँ हमेशा अर्जुन का गांडीव अपनी प्रत्यंचा चढ़ाए है. यहाँ वीर परशुराम के फर्शे की धार पैनी बनी हुई है. यहाँ राम की धनुष और कृष्ण का चक्र दुश्मन का सर काटने के लिए तैयार बैठा है. बस सियासत में पहुंचकर सो जाने वालों को जगाने की जरूरत है. बाकी तो पूरे मुल्क की आँखे निगहबान है. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;जहांगीर को नहीं भूलता होटल ताज का मंजर&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;जगनैन सिंह नीटू, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जहांगीर के जेहन में मुम्बई की आंतकी घटना पैबस्त है। इस घटना में उसके तीन अपने भी शिकार हुए थे। जो ताज होटल में तत्कालीन सांसद लालमणि से मिलने गये थे। रोजी रोटी के लिए परदेश में आकर अपनों को गंवाना ताजिंदगी का घाव बन जाता है और नासूर बन कर जीवन भर रिसता है। जहांगीर के लिए वह घटना एक घाव ही है जिसका दर्द वह भुला नहीं पाये। जिसे याद कर हर पल उनकी रूह कांपती रहती है। संत कबीरनगर जनपद के निमावा गांव का 32 वर्षीय जहांगीर शेख बचपन में ही रोजी रोटी की तलाश में मुंबई गये थे। जहांगीर आजकल मुंबई के माहिम इलाके में रहते हैं। जहांगीर के 42 वर्षीय चाचा मकसूद अहमद शेख ,उनके दोस्त 45 वर्षीय एखलाक अहमद व 30 वर्षीय फिरोज अहमद किसी जमाने में मुंबई रोजगार के लिए पहुंचे थे। इनकी जिंदगी सुकून से गुजर रही थी लेकिन तकदीर के पन्नों पर कुछ और ही लिखा था। 26 नवम्बर 2008 को मुंबई के ताज होटल के वाकये की जहांगीर ने तफसील से दूरभाष पर जानकारी दी। उनका बयान रूह को कंपा देने जैसा था। जहांगीर ने बताया कि ताज होटल में अपने बस्ती जनपद के सांसद लालमणि प्रसाद आए हुये थे। इस बात की सूचना जब चाचा मकसूद अहमद शेख को मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नही था। सांसद से चाचा की जान पहचान थी सो मारे खुशी के वे अपने दोस्त एखलाक व फिरोज के साथ ताज होटल में मिलने चले गए। वहां पहुंचे तो काफी देर तक मेल मिलाप व चायपान हुआ। सांसद के कमरे में बातचीत के दौरान टीवी के एक चैनल पर समाचार आया कि वीटी स्टेशन पर गोली बारी हुई है। थोड़ी देर बात दूसरी ब्रेकिंग न्यूज थी कि कोई साम्प्रदायिक वारदात हो गयी है। इस खबर के बाद चाचा ने सांसद से फिर मिलने की बात कहकर होटल से निकलने की इजाजत ली। तीनों लोग सांसद से विदा लेकर जैसे ही पहले माले की सीढि़यों से उतरने लगे तो सामने हथियारों से लैस कुछ लोगों को बेतहाशा फायरिंग करते देखा। कुछ सोचते इससे पहले ही आतंकियों की गोली ने चाचा और फिरोज को मौत की नींद सुला दी। एखलाक पीछे थे और फायरिंग देखकर दीवार की ओर छलांग लगा दी मगर बच नही सके क्योंकि तभी आतंकियों ने एक ग्रेनेड उनकी ओर फेंक दिया और उनकी भी कहानी खत्म हो गयी। जहांगीर ने रूंधे गले से बताया कि हमलोग मुतमईन थे सांसद से मिलकर देर सवेर आ ही जाएंगे लेकिन क्या पता था कि वह आखिरी मुलाकात है। जहांगीर बताते हैं कि 26 की रात में जब हम लोगों को पता चला कि ताज होटल में लगातार गोलीबारी हो रही है ,हमारे घरों में चूल्हा नही जला। सब यही दुआ कर रहे थे सब ठीक ठाक से हों । मगर 28 नवंबर को जब आपरेशन खत्म हुआ और लाशें जे.जे. हास्पीटल में भेजे जाने लगी तो उनमें तीन लाशें चाचा, एखलाक व फिरोज की भी थीं। बकौल जहांगीर घटना के बाद सरकार ने तीनों मृतकों के परिजनों को 11-11 लाख रुपये करी आर्थिक सहायता दी है लेकिन उस रात की घटना का एक पल भी आज तक हम नही भूले। रूह कांप जाती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;उमर के जन्नतनशीं होने के बाद उजड़ गया परिवार&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;नजीर मलिक, सिद्धार्थनगर&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sw40BoIIpxI/AAAAAAAAAow/rnfeSIUaxwA/s1600/GKP24sdr-1-1_1259198252_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sw40BoIIpxI/AAAAAAAAAow/rnfeSIUaxwA/s320/GKP24sdr-1-1_1259198252_m.jpg" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;जिले के बांसी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम जनियाजोत निवासी 28 वर्षीय उमर का कसूर यह था कि वह बेकसूर था। उसने न तो किसी आतंकी का विरोध किया न ही उसे इस बारे में अधिक मालूमात ही थी, मगर दुर्दात आतंकियों ने उसकी टैक्सी भाड़े पर ली और मौके पर उतरने के बाद उन्होंने गाड़ी में विस्फोटक छोड़ दिया। नतीजतन आतंकियों के जाने के कुछ ही देर बाद टैक्सी में विस्फोट हुआ और उमर जन्नतनशीं हो गया। इसके साथ उजड़ गया उसका भरा पूरा परिवार। 26/11 के हादसे को बुधवार को ठीक एक साल हो गये। एक साल पूर्व जब उसकी मौत की खबर उसके गांव जनियाजोत आयी थी, तो गांव ही नहीं पूरा जिला मर्माहत हो गया था। तकरीबन सभी दलों के बड़े नेता उसके मां- बाप से मिले और उनके लिए बहुत कुछ करने का दावा किया, मगर वक्त के थपेड़ों में उनके दावे हवा हो गये। आज उमर के मां-बाप, उसकी पत्‍‌नी दो मासूम बच्चे व तीन शादी योग्य बहनों का कोई पुरसा हाल नहीं है। उमर के पिता अखलाक की मानें तो उनका इकलौता बेटा ही परिवार का एक मात्र सहारा था। आज उमर की पत्‍‌नी मोमिना उसके तीन छोटे बच्चे कमर, फैसल व अफजल यतीम हो चुके हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि आखिर उनके परिवार की जिंदगी अचानक कठिन क्यों हो गई। सबसे बड़ी दिक्कत उमर की तीन जवान बहनों अफसाना, राफिया व सालेहा के साथ है। भाई की मौत के बाद उनकी शादी कैसे हो? यह एक बड़ा सवाल बन गया है। बकौल मोमिना, जिस घर में खाने के लाले हों, वहां शादी की बात कैसे सोची जाए। उमर की मां इस मुद्दे पर फफक पड़ती हैं। कहती हैं कि कातिलों (आतंकी) ने उनके जवान बेटे की जान क्यों ली। खुद को मुर्स्लिम कह कर कत्ल करने वाले ऐसे कातिलों के खिलाफ कलमा पढ़ने वाले हर मुसलमान को खड़ा होना पड़ेगा। उमर के परिवार को सबसे बड़ा शिकवा सियासतदानों और सरकार से है। पिता एखलाक के मुताबिक उमर की मौत की खबर पर तमाम नेताओं ने उनकी मदद का वादा किया, मगर मामला ठंडा होने के बाद कोई लौट कर उनके घर नहीं आया। जहां तक रही प्रशासन की बात तो आज तक कोई अफसर उनके घर झांकने तक नहीं आया। इस बारे में बांसी क्षेत्र के विधायक लालजी यादव का कहना है कि पीडि़त परिवार के मुआवजे के लिए उन्होंने केन्द्र व प्रदेश सरकार को कई पत्र लिखा, मगर कहीं से भी आशाजनक जवाब नहीं आया। गौर तलब है कि मुम्बई में टैक्सी चलाने वाले उमर की टैक्सी 26/11 के दिन कुछ आतंकियों ने भाड़े पर लिया था। घटना के पूर्व गंतव्य पर उतरने के बाद आतंकियों ने टैक्सी में विस्फोटक छोड़ दिया था। बाद में मुम्बई के बिले पार्ले में उक्त टैक्सी में विस्फोट हो गया था, जिसमें उमर के साथ एक सवारी की जान भी चली गई थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;क्रूर टेलीफोन संदेश की याद से कांप उठती है रूह&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;महेन्द्र कुमार त्रिपाठी, देवरिया:&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sw40UI6teXI/AAAAAAAAAo4/kN2bwS39D3U/s1600/GKP25deo-28-1_1259198252_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sw40UI6teXI/AAAAAAAAAo4/kN2bwS39D3U/s320/GKP25deo-28-1_1259198252_m.jpg" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sw40fRmEhpI/AAAAAAAAApA/N7C1YU4FLn0/s1600/GKP25deo-29-1_1259198251.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sw40fRmEhpI/AAAAAAAAApA/N7C1YU4FLn0/s200/GKP25deo-29-1_1259198251.jpg" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&amp;nbsp;पिछले साल यानी 26/11 (नवम्बर 2009) को मुम्बई में आतंकवादियों के खतरनाक खूनी खेल के एक वर्ष बीत गया। लेकिन बरियारपुर गांव के पोटरिहवां टोला निवासी गरीब कुशवाहा की झोपड़ी में पिछले साल आए टेलीफोन के कू्रर संदेश को याद कर परिजनों की रूह कांप उठती है। लोग कहते हैं कि भगवान किसी को यह क्रूर टेलीफोन संदेश पहुंचाने का दिन न दिखाए। देवरिया शहर से करीब दस किमी. दूर स्थित बरियारपुर गांव के पोटरिहवां टोला निवासी गरीब कुशवाहा के आंसू बुधवार को थमने का नाम नहीं ले रहा था। जागरण टीम को देखते ही गरीब के घर में चीत्कार उठने लगी। सभी को साल भर पहले मुम्बई में आतंकी हमले में गोली के शिकार हुए नौजवान मिश्रीलाल के मौत की खबर 26 नवम्बर 08 शाम की याद आ गयी। दरवाजे पर बैठे वृद्ध गरीब कुशवाहा और उनकी पत्‍‌नी चन्द्रावती के आंखों से आंसू भरभरा रहे थे। सभी को अपने बेटे मिश्रीलाल के मौत का गम था। 26 नवम्बर 2008 से पहले यानी एक दिन पूर्व 25 नवम्बर 08 को मिश्रीलाल ने अपने माता-पिता से टेलीफोन पर खूब बतियाया था। उसकी हर बातें अब बूढ़े मां-बाप को टीस रही हैं। घर का एक मात्र कमाऊ पूत और मिलनसार व्यक्तित्व के नहीं रहने से मां-बाप को पुरानी यादें साल रही हैं। बातचीत में आंसू के धार के बीच चन्द्रावती कहती हैं मिश्री बाबू हमारे कलेजा के टुकड़ा थे। अब वो कहां होंगे। यह हम सभी को अन्दर ही अन्दर साल रहा है। मुम्बई आतंकी हमला के एक साल बीतने के बाद भी पोटरिहवां टोला में अभी तक न तो प्रदेश सरकार के कोई अफसर ही उसके दरवाजे पर कुशलक्षेम पूछने गए और न ही यहां के जनप्रतिनिधि। इस वक्त तंगी की जिन्दगी मिश्रीलाल की विधवा गुड्डी व उसके तीन नौनिहाल रीतिक (2), रंजीता (7) व अमृता (डेढ़ वर्ष) गांव में गुजर बसर कर रहे हैं। मिश्रीलाल की विधवा गुड्डी को रेलवे ने नौकरी देने का भरोसा दिया है। उसके लिए वह साल भर से रेलवे का चक्कर लगा रही है। अभी तक कोई उम्मीद नहीं जगी है। उसे अभी भी सरकारी इनायत का इंतजार है। बताते है कि मुम्बई में मिश्रीलाल का छोटा भाई जयश्री व रामविलास भी साथ रहता था। लेकिन हादसा के बाद जयश्री घर पर ही रह गया। उसका हिम्मत नहीं जुट रहा है। गौरतलब है कि बरियारपुर के पोटरिहवां टोला निवासी गरीब कुशवाहा का बड़ा बेटा मिश्रीलाल जो मुम्बई में आटो रिक्शा चालक था। जो बीते 26 नवम्बर 08 को मुम्बई सी.एस.टी. रेलवे स्टेशन पर अपनी बहन विजया देवी को ट्रेन में बैठाने के लिए गया था। उसी बीच आतंकवादियों की तरफ से चली गोली का शिकार हो गया और मौके पर ही मौत हो गयी। जबकि उसकी बहन विजया के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गयी जो मुम्बई में अभी भी इलाज करा रही है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;dainik jagran se sabhar&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-8187050254103399134?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/8187050254103399134/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=8187050254103399134' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8187050254103399134'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8187050254103399134'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post_26.html' title='बार बार सजग होने का पैगाम'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Sw4zuuAChFI/AAAAAAAAAoo/VlXjPNHzv58/s72-c/IMG_1133.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-6286695624444877784</id><published>2009-11-20T08:25:00.002+05:30</published><updated>2009-11-21T06:43:42.919+05:30</updated><title type='text'>मन रे गा नहीं कहिये मन रे रो</title><content type='html'>आनन्द राय, गोरखपुर&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwYEXhugC2I/AAAAAAAAAoY/lyE59cI0XZQ/s1600/GKP5bgh03-1_1251093628.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwYEXhugC2I/AAAAAAAAAoY/lyE59cI0XZQ/s400/GKP5bgh03-1_1251093628.jpg" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;मुम्बई में दिहाड़ी पर हर दिन दो सौ रुपये कमाने वाला खोराबार का रामसुभग नरेगा की लालच में डेढ़ साल पहले काम छोड़कर लौटा तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि गांव लौटकर जिंदगी त्रिशंकु बन जायेगी। गांव के दबंगों की चिरौरी करके उसका कार्ड तो बन गया लेकिन रोजी छिन गयी। एक दिन भी काम नहीं मिल सका। रामसुभग की तरह बहुत से बेरोजगार हैं जो नरेगा के जाल में उलझ गये हैं। अभावों से जूझ रहे ऐसे लोग कहीं दया के पात्र हैं तो कहीं प्रधानों के बंधुआ मजदूर।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;पंचायती राज संस्थाओं के पचास साल पूरे होने पर जब राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम को महात्मा गांधी के नाम किया गया तब यह उम्मीद जगी कि यह नया नाम मनरेगा खुशियों की बहार लायेगा। पर हालत जस की तस है, और बिगड़ती जा रही है। फिर तो कहना ही होगा- मन रे गा नहीं अब मन रे रो। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2005 में नरेगा की नींव डाली। गरीबों की जिंदगी से जुड़े इस कार्यक्रम को 2 फरवरी 2006 से लागू किया गया। शुरू में 200 जिलों में लागू यह योजना 1 अप्रैल 2008 से देश के सभी ग्रामीण जिलों में चल रही है। यह योजना कुप्रबंधन की काली छाया के अंधेरों से घिरी है। हालात को देखकर यह कहना सही लगता है- कैसी मशालें लेके चले तीरगी में आप, जो रोशनी थी वो भी सलामत नहीं रही। मनरेगा के लिए नारे गढ़े गये थे- मिला गांव में ही रोजगार, शहरों में जाना है बेकार। एक साथ में सौ दिन काम, दस हजार का है इंतजाम। पर ये नारे ब्लाक मुख्यालयों की दीवारों की शोभा बनकर रह गये हैं। हकीकत बयां करने के लिए राम सुभग जैसे लोग काफी हैं।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;जिले के उरुवा विकास खण्ड का भिटहा पाण्डेय गांव प्रदेश के उन्हीं गांवों की तरह है जहां कुप्रबंधन ने मनरेगा के उद्देश्य को भ्रष्टाचार से जकड़ दिया है। धुरियापार प्रतिनिधि से मिली जानकारी के मुताबिक भिटहां पाण्डेय गांव में वर्ष 2007 से ही जाब कार्ड धारक झिनकाई, पारसनाथ, मुरली, रामप्रताप, रामवृक्ष, पन्ने, गुनई, सुनैना, मोतीलाल, लालमती, रंजना देवी, प्रभावती, घुरई को न कोई काम मिला और न ही उनकी कोई सुनवाई हुई। भूख से जूझ रहे इन लोगों की बेबसी को शायद ही कोई समझ पाये। ग्राम पंचायत अरांव जगदीश के रामपलट, सोनबरसा, मालती, चन्द्रभान और हरिलाल का कहना है कि उनसे 8 दिन काम करवाया गया लेकिन भुगतान नहीं मिला। इनके जाब कार्ड भी प्रधान के पास हैं। मरवटिया गांव के सिंगारे, शंभू, चन्द्रकला, लाची, रामभजन का कहना है कि उनका कार्ड भी प्रधान के ही पास है। यह व्यथा सिर्फ इन लोगों की ही नहीं है। &lt;br /&gt;गोरखपुर- बस्ती मण्डल के 14777 ग्राम सभाओं का यही हाल है। कहीं थोड़ी बहुत बेहतर स्थिति जरूर है लेकि न सच्चाई यही है कि अधिकांश लोगों के जाब कार्ड प्रधानों की आलमारी में बंद है। कुछ लोगों से समझौता है। उनके नाम की मजदूरी प्रधान और ब्लाक के अधिकारी अपने हवाले कर रहे हैं। उन्हें औना पौना दे दिया जाता है। जो प्रधान के विरोधी खेमे के लोग हैं वे अपना कार्ड लेकर काम को तरस रहे हैं। अफसरों की दलील है कि जाब कार्ड धारक काम मागेंगे तब तो काम मिलेगा।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwYE5syeGaI/AAAAAAAAAog/xdu4qUs29wQ/s1600/untitled+sd.bmp" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwYE5syeGaI/AAAAAAAAAog/xdu4qUs29wQ/s200/untitled+sd.bmp" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;उत्तर प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में महात्मा गांधी के नाम की 3606.79 करोड़ के बजट की इस महत्वाकांक्षी योजना की तस्वीर यह है कि अभी तक 2371.65 करोड़ रुपये खर्च हो गये हैं लेकिन 294620 कामों में से सिर्फ 162862 काम पूरे हो पाये हैं। ऊपर से लेकर नीचे तक लूट खसोट करने वालों का संजाल फैला है और तिकड़म से गरीबों की रोजी मारी जा रही है। गोरखपुर-बस्ती मण्डल के सातों जिलों में 55 हजार से अधिक परिवारों के जाब कार्ड पर लगभग 68 हजार लोग काम के अधिकारी हैं लेकिन किसी दिन चार फीसदी से अधिक लोग काम नहीं पाते हैं। कमिश्नर पी.के. महान्ति ने बार बार मातहतों को चेतावनी दी है लेकिन यह सही है कि योजना की पारदर्शिता कायम नहीं हो पायी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-6286695624444877784?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/6286695624444877784/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=6286695624444877784' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6286695624444877784'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6286695624444877784'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post_20.html' title='मन रे गा नहीं कहिये मन रे रो'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwYEXhugC2I/AAAAAAAAAoY/lyE59cI0XZQ/s72-c/GKP5bgh03-1_1251093628.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-4659360567597579094</id><published>2009-11-17T12:00:00.000+05:30</published><updated>2009-11-17T12:00:06.338+05:30</updated><title type='text'>लालटेन की रोशनी में चमक रहे अक्षर</title><content type='html'>आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwJC1YxksRI/AAAAAAAAAoQ/o-4MGtJo1YY/s1600/GKP11ahv19-1_1258429790_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwJC1YxksRI/AAAAAAAAAoQ/o-4MGtJo1YY/s640/GKP11ahv19-1_1258429790_m.jpg" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; यह कथा उन बच्चों की है जो गरीबी की कोख में पल रहे हैं। पढ़ने में होनहार हैं लेकिन उनके पास संसाधनों का अभाव है। लालटेन की रोशनी में आंख टिकाये लगातार पढ़ रहे हैं। न तो उन्हें इनवर्टर की दरकार है और न ही उनका कोई नखरा है। उनका रिश्ता तो सिर्फ अक्षरों से जुड़ा है। वे सिर्फ अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; वर्ष 2007 में यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा टाप करने वाली हरिप्रिया को अभी कौन भूल पाया है। जब उसने 88 फीसदी अंक हासिल कर प्रदेश के लाखों छात्र छात्राओं को पीछे छोड़ दिया तो वह गोरखपुर की लाडली बन गयी। इस साल वह इण्टरमीडिएट परीक्षा की तैयारी कर रही है। महानगर के दुग्धेश्र्वरपुरम के दो कमरे के मकान में रहने वाली कार्मल ग‌र्ल्स इण्टर कालेज की यह छात्रा स्कूल के अलावा घर पर सात से आठ घण्टे पढ़ रही है। बिजली की आंख मिचौली कभी उसके हौसलों पर भारी नहीं पड़ी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;प्राथमिक विद्यालय बनकटीचक में कक्षा पांच में पढ़ने वाला विशाल थापा और शैलेश इतने मेधावी हैं कि कभी कभी विद्यालय के हेडमास्टर ब्रजनन्दन यादव विस्मित रह जाते हैं। उन्हें इस बात की चिंता रहती है कि इन गरीब बच्चों को कैसे बेहतर मुकाम मिले लेकिन विशाल और शैलेश के हौसलों को दाद देनी होगी। कंदराई के प्रधान देवेन्द्र यादव अपने गांव के बलवंत का उदाहरण देते हैं। सामान्य घर में पैदा हुआ बलवंत पढ़ने के प्रति समर्पित है। बिजली तो वैसे भी गांव में नहीं आती है। वह लालटेन की रोशनी में पढ़ने बैठता है तो कई बार लोगों को मना करना पड़ता है। महुआडाबर जूनियर हाईस्कूल में कक्षा आठ में पढ़ने वाले इस बच्चे का सपना बड़ा होकर उन लोगों की तरह बनना है जिनके पीछे दुनिया भागती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; कुछ शिक्षक राजकीय जुबली कालेज गोरखपुर में कक्षा दस बी में पढ़ने वाले अमरनाथ मिश्रा की नसीहत देते हैं। इस बच्चे में पढ़ने के प्रति जो ललक है उसे कोई अड़चन प्रभावित नहीं कर पाती। यह तो कुछ गिने चुने बच्चों की बानगी भर है। ऐसे अनगिनत बच्चे हैं जो अभाव में पल रहे हैं। उनके पिता मेहनत मजदूरी करके किसी तरह दो जून की रोटी लाते हैं मगर अपने बच्चे को कुछ बनाना चाहते हैं। ये बच्चे अपने पिता की दिक्कतों को समझते हुये अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हैं। इनकी तकदीर इन्हें कहां ले जायेगी कहा नहीं जा सकता लेकिन इनके जज्बों को देखकर यही लगता है कि एक न एक दिन सफलता इनका कदम चूम लेगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-4659360567597579094?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4659360567597579094/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=4659360567597579094' title='14 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4659360567597579094'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4659360567597579094'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post_17.html' title='लालटेन की रोशनी में चमक रहे अक्षर'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwJC1YxksRI/AAAAAAAAAoQ/o-4MGtJo1YY/s72-c/GKP11ahv19-1_1258429790_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>14</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-3208824793519478402</id><published>2009-11-16T08:49:00.000+05:30</published><updated>2009-11-16T08:49:44.522+05:30</updated><title type='text'>मुलायम, कल्याण और संघ नया गुल खिलाने की तैयारी में</title><content type='html'>आनन्द राय , गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwDEKjdINJI/AAAAAAAAAoA/aEKdejrVTdU/s1600/samajwadi-party1.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwDEKjdINJI/AAAAAAAAAoA/aEKdejrVTdU/s400/samajwadi-party1.jpg" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;यह मेरा अपना विचार है. हो सकता है यह सिर्फ मेरी आशंका हो, यह भी हो सकता है कि यह बिल्कुल सच हो. मैं कल्याण सिंह और मुलायम सिंह यादव की नूरा कुश्ती की बात कर रहा हूँ. यद्यपि भारत की जनता जिस तरह ताजा चीजों को ही याद रखती है उस हिसाब से कब कल्याण सिंह को लाभ मिल जाय और कब मुलायम सिंह यादव बाजी मार लें, कहा नहीं जा सकता. मुझे अबकी बार पता नहीं क्यूँ लग रहा है कि मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह और संघ के कुछ ख़ास लोगों की योजना कुछ नया गुल खिलाने की है. फिर से कुछ&amp;nbsp;&amp;nbsp;खिचडी&amp;nbsp;पक&amp;nbsp;रही है.&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; कल्याण सिंह ने दो बार भाजपा छोडी और दोनों बार उनके जो बयान सामने आये यह याद दिलाने की जरूरत नहीं है. मुलायम सिंह यादव की सरकार भाजपा ने बनवाई. इधर जब मुसलमान सपा की सारी असलियत जान गए तबसे इन सभी नेताओं का पेट खराब है. कल्याण सिंह ने बाबरी मस्जिद काण्ड में हिन्दुओं और मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों का दिल जीता था. इस बुनियाद पर दोनों नेतओं ने लम्बी पारी खेली. दोनों एक दूसरे का हित साधते रहे. दोनों ने जब यह जाना कि मुसलमानों का मिजाज बदल रहा है तो फिर से एक नया प्लान तैयार किया गया. लोक सभा चुनाव के दौरान&amp;nbsp;जब &amp;nbsp;बिहार के शूरमा लालू यादव और राम बिलास पासवान के साथ कल्याण सिंह को लेकर मुलायम घूम&amp;nbsp;रहे थे&amp;nbsp;तब &amp;nbsp;आज़म खान का भूत उनका पीछा कर रहा था. सबने मुस्लिम मतदाताओं पर जोर न देकर पिछडा कार्ड खेला. एक तरफ कांग्रेस को टिकट बंटवारे में उसकी औकात बताने का दंभ और दूसरी तरफ डेढ़ दशक तक एक दूसरे को गरियाने वालों की गलबहियां, यह मंच जनता के दिलों में नहीं उतर सका. यह पिछडा&lt;br /&gt;&amp;nbsp;कार्ड सिर्फ यू पी&amp;nbsp;में&amp;nbsp;ही नहीं, बिहार में भी नहीं चल पाया.&lt;br /&gt;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; लालू यादव की जमीन दरक गयी. पासवान साफ़ हो गए. मुलायम सिंह यादव की ताकत सिमट गयी और कल्याण सिंह बेचारे हो गए. लोहिया के वंशवाद विरोधी झंडे के ध्वजवाहक मुलायम सिंह यादव ने जब भाई, भतीजा और बेटे के बाद बहू के लिए भी सीट सुरक्षित करने की सोची तो उन्हें कल्याण सिंह से भी उम्मीदें थी. राजबब्बर की आंधी और समर्पित कार्यकर्ताओं की वेदना ने मुलायम के परिवारवाद की राह रोक ली. न तो उनकी&amp;nbsp;खूबसूरत&amp;nbsp;बहू का जादू&amp;nbsp;चला और कल्याण सिंह ही कोई करिश्मा कर&amp;nbsp;पाए.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;मुलायम को लगा कि अब उनके तरकश में कोई तीर नहीं बचा है. उन्हें अपने उत्थान के दिन याद आये. उन्हें परिंदा पर नहीं मार सकता वाला अपना डायलाग याद आया, उन्हें तब अपने उत्थान के सबसे ख़ास सूत्रधार कल्याण का पुराना&amp;nbsp;रूप&amp;nbsp;&amp;nbsp;याद आया &amp;nbsp;और कल्याण का वह नारा- राम लला हम आयेंगे, मंदिर वहीं बनायेंगे, याद आया. मुलायम और उनके कुनबे को लगा कि हमारी राजनीति तो नफरत की आंधी में परवान चढ़ती है. ऐसी&amp;nbsp;&amp;nbsp;आंधी बहाने वाला तो हमारे घर में घिरा हुआ है. बस&lt;br /&gt;&amp;nbsp;यहीं से&amp;nbsp;एक नए खेल&amp;nbsp;की शुरूआत हो&amp;nbsp;गयी.&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwDEYEoI_uI/AAAAAAAAAoI/8G4aDF775ao/s1600/kalyan-singh22_26.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwDEYEoI_uI/AAAAAAAAAoI/8G4aDF775ao/s400/kalyan-singh22_26.jpg" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp; सियासत की धुरी बने रहने की आकांक्षा ने मुलायम सिंह यादव की सोच और राजनीति की दिशा बदल दी. उन्हें लगा कि उत्तर प्रदेश की राजनीतिक विचारधारा इतने टुकडों में बनती है कि यहाँ पिछडा कार्ड नहीं खेला जा सकता है. वह भी हाल के पांच सात वर्षों में तो सभी जातियों के शूरमाओं ने अपने अपने नाम की पार्टी बना ली है. सिर्फ हिन्दू मुसलमान की राजनीति ही इनके मंसूबों को आगे ले जा सकती है. इस सोच के तहत कल्याण &amp;nbsp;और मुलायम सिंह यादव की नूरा कुश्ती फिर से शुरू हुई है. अब केशरी नाथ त्रिपाठी जैसे बुनियादी भाजपाई चिल्लाते रहें कि मेरा वश चले तो मैं कल्याण सिंह को पार्टी में नहीं लूंगा लेकिन परदे&amp;nbsp;के पीछे से&amp;nbsp;राजनाथ सिंह और बाहर से&amp;nbsp;&amp;nbsp;कलराज मिश्रा और रमापति राम त्रिपाठी जैसों ने तो फिर से गोटियाँ बिछानी शुरू कर दी है. संघ &amp;nbsp;के भी कुछ &amp;nbsp;ख़ास लोग&amp;nbsp;ताना&amp;nbsp;बाना&amp;nbsp;तैयार करने लगे हैं. वह दिन दिखने को&amp;nbsp;आ सकता है जब कल्याण की भाजपा में ससम्मान&amp;nbsp;वापसी हो और नये सिरे से&amp;nbsp;राम&amp;nbsp;मंदिर आन्दोलन की गूँज&amp;nbsp;सुनाई पड़े.&amp;nbsp;भाजपा और सपा की सफलता का&amp;nbsp;सबसे गहरा&amp;nbsp;राज तो यही है......&amp;nbsp;यह&amp;nbsp;याद &amp;nbsp;रहे अभी&amp;nbsp;कल्याण सिंह अमर सिंह पर कुछ बोलने परहेज कर रहे हैं.&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; यह सजग होने का वक्त है. यह इन नेताओं का कच्चा चिट्ठा खोलने का वक्त है. यह भारत की जनता को साम्प्रदायिकता की आंच से बचाने का वक्त है. यह समय रहते जाग जाने का वक्त है. यह संघ के उन नेताओं को और आगे करने का वक्त है जो मतभेद भुला कर उलेमाओं के गले मिल रहे हैं. वरना सत्ता में बने रहने की यह &amp;nbsp;आकांक्षा देश और दुनिया के सबसे ऐतिहासिक प्रदेश को फिर से दंगों की आंच में धकेल देगी. हालांकि मुझे इस बात की भी उम्मीद है कि गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले कल्याण सिंह के किसी बयान से अब कोई हलचल नहीं उठेगी. उनके किसी बयान से कोई रोमांच नहीं होगा.. राम मंदिर को अपने जीवन का &amp;nbsp;लक्ष्य बताने का उनका नारा शब्दों&amp;nbsp;&amp;nbsp;की जुगाली भर लगता है. अब उनके इस नारे से किसी हिन्दू की कोई भुजा नही फड़कती. अब तो किसान अपने खेत खलिहान, खाद पानी और रोजमर्रा की जरूरतों में ही परेशान है. राम करें लम्बे समय से शांत चल रहे उत्तर प्रदेश को इन लोगों की नजर न लगे.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-3208824793519478402?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/3208824793519478402/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=3208824793519478402' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3208824793519478402'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/3208824793519478402'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post_16.html' title='मुलायम, कल्याण और संघ नया गुल खिलाने की तैयारी में'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwDEKjdINJI/AAAAAAAAAoA/aEKdejrVTdU/s72-c/samajwadi-party1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-2626261748498070361</id><published>2009-11-15T05:30:00.002+05:30</published><updated>2009-11-16T07:57:59.754+05:30</updated><title type='text'>भूख ने चाहतों से जुदा कर दिया</title><content type='html'>आनन्द राय, गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwC4n3LW5HI/AAAAAAAAAn4/vb_N_2AeFNM/s1600/sketch.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwC4n3LW5HI/AAAAAAAAAn4/vb_N_2AeFNM/s320/sketch.jpg" yr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;छोटी उम्र में बड़ा बोझ उठाने वाले बचपन को गौर से देखिये तो वे आपके अपने बच्चों से अलग नजर नहीं आयेंगे। वे सब भी पढ़ लिख कर बड़ा आदमी बनना चाहते हैं मगर भूख ने इन्हें चाहतों से जुदा कर दिया है। इनके दिल के अरमानों पर पहरा लगा दिया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;कठउर गांव के 9 साल के शिव की कहानी सुनिये। बात सोमवार की है। कक्षा चार में पढ़ने वाले शिव ने स्कूल जाने की तैयारी शुरू की मगर पिता सिद्धू ने कह दिया आज स्कूल नहीं जाना है। सिद्धू ने अपने बेटे के हाथ में ठेला पकड़ा दिया और कठउर से छह किलोमीटर पैदल चलकर पिता के साथ अमरूद बेचते वह सिविल लाइंस पहंुचा। शिव के साथ अक्सर ऐसा होता है। इस बारे में उससे पूछा गया तो होठों पर चुप्पी थी। हर बार कुरेदने पर बाप की ओर सहमी हुई नजरें उठ गयीं। कई बार जोर देने पर बस इतना ही कह पाया कि स्कूले जाइल चाहत रहलीं, बाकी इ मना कर दिहलें..। अब सिद्धू की दलील सुने तो यही कि पढ़ लिखकर पेट थोड़े भरेगा। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; यही हाल पप्पू का है। पादरीबाजार में रहने वाला पप्पू पहले एक होटल में काम करता था। अब उसने अपने 12 साल के बेटे फिरोज को भी उसी होटल में लगवा दिया है और खुद भाड़े का रिक्शा चला रहा है। फिरोज ने तो दो चार बार स्कूल का मंुह देखा लेकिन तीन भाई बहनों का पेट भरने के लिए उसने यही रास्ता अपना लिया। कचरे के ढेर में अपने पूरे परिवार की रोटी तलाश रही 8 साल की लक्षमिनिया और मारे डर के अपना नाम न बताने वाली उसकी एक सहयोगी, इन दोनों को देखकर नियति के विधान पर दुख हुआ। उनकी आंखों में सांझ भी थी और जब भी कचरे में कुछ मिल जाता तो भोर की चमक भी। उन सबके लिए दया, पुचकार और प्यार के बोल बेगानी बातें हैं। शहर में रहते हुये भी पूरा दिन कचरे के ढेर में कुछ ढूंढ़ते हुये गुजर जाता है। बस इतना ही कह पाती हैं कि यह तो हमारा रोज का काम है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; मन्नू, जितेन्द्र, पिण्टू,सुंदर, राजा, गोमा, गुडडू, छोटे, अर्जुन, अकलू, हरमेश, नाटे और सेवक जैसे न जाने कितने बच्चे हैं जो किसी होटल, किसी गैराज, किसी चाय की दुकान और किसी के घर की नौकरी करके अपना बचपन बिता रहे हैं। बदले में इन सबको किसी तरह दो जून की रोटी मिल जाती है। पेट भर कर ये अपना सबसे अनमोल समय कौडि़यों के भाव बेच रहे हैं। अनदेखे सपनों के बीच इनके कुम्हलाये चेहरों को देखें तो साफ साफ शाम की उदासी दिखती है। और कुछ भले न हो लेकिन यह तो सही है कि असमय इन बच्चों के बड़े हो जाने से बुनियाद कांप रही है। इसका अहसास निजाम को भले न हो। इनमें कुछ ऐसे भी बच्चे हैं जिन्हें अपने सपनों, ख्वाबों के व्यर्थ हो जाने और अस्तित्व की निरर्थकता का अहसास है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; गोरखपुर मण्डल में शैक्षणिक सत्र के शुरूआती दिनों में जब 6 से 14 साल के बच्चों का सर्वेक्षण हो रहा था तब 29 लाख बच्चे चिन्हित किये गये। बेसिक शिक्षा विभाग ने अपने आंकड़ों में 22 हजार बच्चों को आउट आफ स्कूल दिखाया। इनमें से अधिकांश किसी न किसी स्कूल में एडमिशन भी पा चुके हैं। पर यह सिर्फ आंकड़ों का खेल है। उनकी पढ़ाई भी शिव की तरह हो रही है। शहर से लेकर गांव तक शायद ही कोई जगह हो जहां जिंदगी से जूझते हुये शिव जैसे बच्चे न मिलें। इन बच्चों की तरक्की के लिए हर साल रस्मी उपाय ढ़ूंढे जाते हैं और सब कुछ कागजों में निपटा कर इतिश्री कर ली जाती है। राजेश सिंह बसर ने ऐसे ही हालात पर लिखा है-&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&amp;nbsp;दिल में अरमान यूं तो कई थे मगर, &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भूख ने चाहतों से जुदा कर दिया।&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-2626261748498070361?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/2626261748498070361/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=2626261748498070361' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2626261748498070361'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/2626261748498070361'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post_15.html' title='भूख ने चाहतों से जुदा कर दिया'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SwC4n3LW5HI/AAAAAAAAAn4/vb_N_2AeFNM/s72-c/sketch.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-1083953846561492363</id><published>2009-11-10T21:06:00.001+05:30</published><updated>2009-11-10T21:13:09.908+05:30</updated><title type='text'>प्रभाष जोशी की याद में</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvmJUwpG5SI/AAAAAAAAAno/h4hbFjK5r5U/s1600-h/08ahv4.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvmJUwpG5SI/AAAAAAAAAno/h4hbFjK5r5U/s400/08ahv4.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;मुंबई विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष आचार्य रामजी तिवारी ने प्रभाष जोशी को रुंधे गले से याद करते हुए जब कहा- चाहे जितना कह जाएँ, अनकहा बहुत रह जाएगा. तब सबकी आँखे नम थीं. प्रभाष जी के साथ के कई प्रेरक प्रसंगों को सुनाते हुए वे बेहद भावुक थे. उन्होंने उनके समग्र व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आचार्य तिवारी गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब द्वारा : आजादी के बाद की पत्रकारिता और प्रभाष जोशी.: विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि प्रभाष जी ने अपनी भाषा के जरिये पाठक से आत्मीय रिश्ता बनाया. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvmJ2EJbYuI/AAAAAAAAAnw/Q2x2IxeMOOI/s1600-h/08ahv5.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvmJ2EJbYuI/AAAAAAAAAnw/Q2x2IxeMOOI/s400/08ahv5.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विश्व भोजपुरी संघ के महासचिव अरुणेश नीरन ने कहा कि प्रभाष जी ने पत्रकारिता के संगीत में एक नया राग शुरू किया. उन्होंने पत्रकारिता में नयी हिन्दी की सथापना&amp;nbsp;&amp;nbsp;की जो मनुष्य&amp;nbsp;&amp;nbsp;से जुडी&amp;nbsp;&amp;nbsp;थी. आकाशवाणी&amp;nbsp;&amp;nbsp;के कार्यकारी निदेशक&amp;nbsp;आलोचक अरविन्द&amp;nbsp;&amp;nbsp;त्रिपाठी&amp;nbsp;&amp;nbsp;ने कहा कि वे व्यवस्था की आँखों में आँखे डालकर कड़ी से कड़ी बात कहने की&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; हिम्मत रखते थे. संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष आनन्द राय ने कहा कि प्रभाष जोशी ने हिन्दी पत्रकारिता को गौरवमयी मुकाम दिया है और इसकी रक्षा करना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि है. श्री राय ने प्रभाष जोशी की गोरखपुर की पहली यात्रा का संस्मरण सुनाया और कहा कि गोरखपुर के पत्रकार हर साल उनकी याद में समारोह आयोजित करेंगे. स्वतंत्र चेतना समूह के प्रधान सम्पादक रामचंद्र गुप्त ने उनसे जुड़े संस्मरण सुनाये. प्रेस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष एस. पी. त्रिपाठी ने पत्रकारिता में प्रभाष जोशी के व्यक्तित्त्व पर प्रकाश डाला. &lt;br /&gt;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvmHENazecI/AAAAAAAAAng/N9bnqdjnNis/s1600-h/08ahv7.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&amp;nbsp;संगोष्ठी&amp;nbsp;को संबोधित करते&amp;nbsp;डाक्टर एस पी&amp;nbsp;त्रिपाठी&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;img border="0" sr="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvmHENazecI/AAAAAAAAAng/N9bnqdjnNis/s400/08ahv7.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; पूर्व अध्यक्ष पीयूष बका ने कहा कि वे ग्रामीण पत्रकारों को भी सशक्त करना चाहते थे. राष्ट्रीय सहारा के संपादक मनोज तिवारी ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि देते हुए पटना और देल्ली के कई संस्मरण सुनाये. सञ्चालन कर रहे प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष सर्वेश दुबे ने आजादी के बाद की पत्रकारिता में प्रभाष जोशी के योगदान पर प्रकाश डाला. प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ल ने प्रभाष जी के गोरखपुर से जुडाव की चर्चा की. जनसत्ता के ब्यूरो चीफ एस. के. सिंह ने प्रभाष जोशी से मिली दीक्षा को याद करते हुए&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;भावांजलि दी. मंत्री धीरज श्रीवास्तव ने आभार ज्ञापित किया. इस अवसर पर&amp;nbsp; राष्ट्रीय सहारा के प्रमुख संवाददाता धर्मेन्द्र सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अजय श्रीवास्तव, &amp;nbsp;दैनिक जागरण के छायाकार अभिनव चतुर्वेदी, मोहन राव , श्रीकृष्ण त्रिपाठी, नवीन लाल, समेत कई प्रमुख पत्रकारों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की. अतिथियों ने प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ल और मंत्री धीरज श्रीवासतव को इस बड़े आयोजन के लिए आभार जताया.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-1083953846561492363?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/1083953846561492363/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=1083953846561492363' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1083953846561492363'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/1083953846561492363'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post_10.html' title='प्रभाष जोशी की याद में'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvmJUwpG5SI/AAAAAAAAAno/h4hbFjK5r5U/s72-c/08ahv4.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-9107600486687371253</id><published>2009-11-09T06:55:00.001+05:30</published><updated>2009-11-09T06:58:25.178+05:30</updated><title type='text'>गाँव की गंगा का जहर पीने निकले नीलकंठ</title><content type='html'>आनन्द राय , गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;आमी नदी के लिए तीन दिन तक कमिश्नर कार्यालय गरम रहा. जन जन ने आमी की मुक्ति की पुकार लगाई. इसमें याचना का भाव नहीं बल्कि रण का अंदाज दिखा. आर या पार लड़ने की कूवत के साथ तटवर्ती गाँव के लोंगों ने हुंकार भरी तो सांसदों, विधायकों, पूर्व विधाय्व्कों, पूर्व मंत्रियों और तमाम संगठनों के लोगों ने गाँव की गंगा को बचाने के अनुष्ठान में अपनी आहुति दी. सभी नीलकंठ बनकर गाँव की गंगा&amp;nbsp;का जहर पीने निकल पड़े.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvdtkqQw2GI/AAAAAAAAAmo/ji8GnKWbx7U/s1600-h/GKP06ahv4-1_1257567866_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvdtkqQw2GI/AAAAAAAAAmo/ji8GnKWbx7U/s400/GKP06ahv4-1_1257567866_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;गांव की गंगा को बचाकर ही लेंगे दम&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;कार्यालय संवाददाता, गोरखपुर : उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और डुमरियागंज के सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा है कि ऐतिहासिक आमी नदी से हमारी आस्था जुड़ी है। यह हमारे पूर्वजों की गौरवमयी विरासत है। यह पूर्वाचल की धरोहर है और हर हाल में हम इस धरोहर को बचायेंगे। श्री पाल शुक्रवार को कमिश्नरी कम्पाउण्ड में आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह की अगुवाई में चल रहे तीन दिवसीय डेरा डालो- घेरा डालो आंदोलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आमी को सुनियोजित रूप से प्रदूषित किया जा रहा है और प्रशासन मौन बना है। इसके लिए उद्यमी और सरकार जिम्मेदार है। श्री पाल ने कहा कि इस मुद्दे को उन्होंने विधानसभा में उठाया था और केन्द्र सरकार के समक्ष भी मजबूती से उठायेंगे। उन्होंने आमी बचाओ मंच को हर तरह के सहयोग का भरोसा दिया। सभा को सम्बोधित करते हुये उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता द्विजेन्द्र राम त्रिपाठी ने आमी के साथ अपना संस्मरण सुनाया। उन्होंने कहा कि इस नदी का गौरवशाली अतीत मुझे पल पल याद है लेकिन इसका वर्तमान देखकर आंखें भर जाती हैं। उन्होंने कहा कि आमी नदी से हमारी आत्मा जुड़ी है और इसकी लड़ाई में मैं आखिरी दम तक साथ निभाऊंगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का अपार समर्थन देखकर पूरी उम्मीद है कि गांव की गंगा अपजल से मुक्त होगी। गोरखपुर विश्र्वविद्यालय शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष डा. मानवेन्द्र प्रताप सिंह ने आमी के सामाजिक ताने बाने को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस नदी से समाज के सभी वर्गो की कड़ी जुड़ी है और यदि यह नदी बिसुरती है तो सभी कडि़यां टूट जायेंगी। डा. मानवेन्द्र ने कहा कि एक पुरानी परम्परा को जिंदा रखने के लिए इन कडि़यों का आपस में जुड़ना जरूरी है। सभा की अध्यक्षता करते हुये पूर्व एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि नदियां हमारी जीवन रेखा हैं और औद्योगिक घरानों तथा नौकरशाहों के गठजोड़ से इन पर संकट मड़रा रहा है। उन्होंने कहा कि मरती हुई आमी को बचाने के लिए जनता लगाम कसेगी। विधान परिषद सदस्य डा. वाई.डी. सिंह ने कहा कि आमी को बचाने के लिए मैंने सदन में सवाल उठाया और आगे भी इस लड़ाई में शामिल रहूंगा। मानीराम के विधायक विजय बहादुर यादव ने कहा कि प्रदूषण से सर्वाधिक नुकसान किसानों और पशुपालकों का हुआ है। इस मुद्दे पर सदन में आवाज उठेगी। मंच के अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह ने तीन दिनों तक चले आंदोलन में जनता के प्रति आभार जताया और कहा कि अब गीडा मार्च इस आंदोलन का अगला पड़ाव होगा। पूर्व विधायक अवधेश श्रीवास्तव ने कहा कि कहा कि मेरी अंतिम इच्छा है कि आंदोलन पूरे भारत में पर्यावरण बचाने का प्रतीक बन जाये। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव डा. सैयद जमाल अहमद ने कहा कि आमी नदी के प्रदूषण से लाखों लोग प्रभावित हैं। उनके जीवन के लिए मानवीय संवेदना का परिचय देना होगा। सभा को पूर्व प्रमुख चतुर्भुज सिंह, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष संजीव कुमार सिंह, वरिष्ठ नेता कृष्ण बिहारी दुबे, डा. चन्द्रप्रकाश त्रिपाठी, सरोज रंजन शुक्ल, नवल किशोर सिंह, रामपाल सिंह, भाजपा के पूर्व प्रत्याशी शरद त्रिपाठी, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष शीतल पाण्डेय, विभ्राट कौशिक, प्रेमशंकर मिश्र, बच्चन त्रिपाठी, विनय कुमार सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष महेन्द्र राय, धर्मेन्द्र सिंह, बंधु उपेन्द्र नाथ सिंह, जन सम्पर्क प्रमुख संजय सिंह, सुनील सिंह, बलवीर सिंह, अरुण सिंह, जेपी नायक, कृष्णभान सिंह उर्फ किसान सिंह, नरेन्द्र जीत छोटे, मदन त्रिपाठी ने सम्बोधित किया। आंदोलन में तीन दिनों तक भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उपेन्द्र दत्त शुक्ल ने सक्रिय भूमिका निभायी और सफल संचालन किया। आंदोलन को कमिश्नर कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण श्रीवास्तव, मंत्री प्रमोद पाठक, पूर्वाचल जन शक्ति पार्टी और निषाद विकास मंच के अध्यक्ष देवेन्द्र निषाद, सुरेश शुक्ल एडवोकेट, प्रियानन्द सिंह एडवोकेट समेत कई प्रमुख संगठनों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;गीडा मार्च की चेतावनी के साथ उठा डेरा&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvdtzWQtvVI/AAAAAAAAAmw/u3EszqvbGPM/s1600-h/GKP06ahv8-1_1257567637_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvdtzWQtvVI/AAAAAAAAAmw/u3EszqvbGPM/s400/GKP06ahv8-1_1257567637_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;कार्यालय संवाददाता, गोरखपुर : औद्योगिक इकाइयों के अपजल से प्रदूषित हो चुकी ऐतिहासिक आमी नदी की मुक्ति के लिए कमिश्नरी में बुधवार से चलाये जा रहे डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन का डेरा गीडा मार्च की चेतावनी के साथ शुक्रवार की शाम को उठा। आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा कि आमी नदी से पूर्वाचल का जन जीवन जुड़ा है और अपनी सांस को बचाने के लिए आर-पार की लड़ाई होगी। कमिश्नरी कार्यालय पर बुधवार से ही चल रहे आमी बचाओ मंच के डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन को जनता के साथ ही जनप्रतिनिधियों का अपार समर्थन मिला। जहां गोरखपुर सदर के सांसद और गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ, बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान और डुमरियागंज के सांसद जगदम्बिका पाल ने अपना समय और समर्थन दिया वहीं भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, एमएलसी विनोद पाण्डेय, विधायक डा. राधा मोहन दास अग्रवाल, विजय बहादुर यादव और एमएलसी डा. वाई डी सिंह ने भी इस आंदोलन से खुद को जोड़ा। आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह की अगुवाई में चले इस आंदोलन ने एक नया माहौल पैदा किया। शांतिपूर्ण आंदोलन में ग्रामीणों का आक्रोश और संयमित गुस्सा देखने को मिला। आंदोलनकारियों ने यह चेतावनी भी दे दी है कि अब उनके आंदोलन का स्वरूप बदला हुआ नजर आयेगा। तीन दिन तक चले आंदोलन में लोक कलाकारों ने ग्रामीणों के दर्द को उकेरा। आमी के तट पर दो दशक से अधिक समय से सिसक सिसक कर जी रहे लोगों की व्यथा को शब्द मिले। घुना, सुरसती, राधिका, सहदेई, रंभा, सोनमती, गुडडी, गुलजारी जैसी औरतों की आंखों से गंगा यमुना बह निकली। पहलवानों ने मल्ल युद्ध कर अपनी ताकत भी दिखा दी। किसानों ने अपने हथियार हंसिया और फावड़ा का संकेत भी दिया। तीन दिनों तक जल रहे चूल्हे ने सामाजिक समरसता भी बनायी। गौतम बुद्ध, कबीर, गुरू नानक और गुरू गोरक्षनाथ के संकल्पों की साक्षी इस नदी की कातर पुकार इस आंदोलन में सुनी गयी। कभी अमृत की तरह बहती हुई इस धारा को अविरल और निर्मल करने का मंसूबा और जज्बा देखने को मिला। निष्कर्ष यही निकला कि अब अगला पड़ाव गीडा होगा। उसकी तिथि तय होगी और जो उद्योग नदी में अपना कचरा गिराते हैं, उन पर लगाम लगायी जायेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;लोग साथ आते गये और कारवां बनता गया&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Svdt_-IPmqI/AAAAAAAAAm4/wbfYxOkUXEM/s1600-h/GKP05ahv6-1_1257482630_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Svdt_-IPmqI/AAAAAAAAAm4/wbfYxOkUXEM/s400/GKP05ahv6-1_1257482630_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;कार्यालय संवाददाता, गोरखपुर : औद्योगिक इकाइयों के अपजल से प्रदूषित हो गयी ऐतिहासिक आमी नदी की मुक्ति के लिए चलाये जा रहे डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन को राजनीतिज्ञ, शिक्षक, व्यवसायी, संस्कृतिकर्मी, छात्रों, किसानों और साहित्यकारों के साथ ही पत्रकारों ने भी अपना समर्थन दिया। डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन के दूसरे दिन लोग आते गये और कारवां बढ़ता गया। सरकार की खामोशी के खिलाफ आमी बचाओ मंच के नारे की गूंज दूर दूर तक सुनायी पड़ी। गुरुवार को कमिश्नरी में आमी बचाओ मंच के केन्द्रीय अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह की अगुवाई में दूसरे दिन भी तटवर्ती इलाकों के ग्रामीण डटे रहे। कस्बा संग्रामपुर, कूड़ाभरत, कोठा, रुद्रपुर, सरया आदि गांवों के लोग आमी के प्रति श्रद्धा और आस्था से वशीभूत होकर अपने अपने संसाधनों से यहां आये। आंदोलन में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष लालसिंह के नेतृत्व में शामिल हुये और दो टूक कहा कि इस लड़ाई से हमारा संगठन आत्मा से जुड़ा है। सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के मंत्री जयप्रकाश सिंह, जितेन्द्र दुबे समेत कई अधिवक्ताओं ने भी अपना समर्थन दिया। इसके अलावा दवा विक्रेता समिति गोरखपुर के अध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह, माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश पाण्डेय, नाई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष धु्रवनारायण, जीपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. गोयल समेत कई प्रमुख लोगों ने इस आंदोलन को अपनी ताकत दी। गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह और मंत्री मुमताज खान ने भी इस आंदोलन में शामिल होकर अपने समर्थन का एलान किया। आंदोलन स्थल पर मंच के अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह की अध्यक्षता में एक सभा हुई जिसे सम्बोधित करते हुये उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री शिवप्रताप शुक्ल ने कहा कि जल ही जीवन है लेकिन आमी का प्रदूषण इस भावना के विपरीत है। हम सबको दल, क्षेत्र और हर तरह की दीवार को गिराकर इस नदी की मुक्ति के लिए संघर्ष करना होगा। नगर विधायक डा. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि आमी बचाओ मंच के आंदोलन ने जन मुद्दों पर संघर्ष की विलुप्त होती परम्परा को पुनर्जीवित किया है। डा. अग्रवाल ने कहा कि गीडा के विकास के साथ साथ सरकार की जिम्मेदारी है कि लोगों के जीवन की सुरक्षा की जाय। उन्होंने कहा कि वे हर मोड़ पर इस लड़ाई में सहभागी हैं। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष संजीव कुमार सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस आंदोलन को गति देगी और केन्द्र सरकार से वार्ता करके हर संभव सहयोग करेगी। कामरेड पुरुषोत्तम त्रिपाठी और मजदूर नेता प्रमोद कुमार ने कहा कि हम सब किसानों के साथ उनका जीवन बचाने के संघर्ष में खड़े हैं। जगदीश पाण्डेय ने कहा कि इस आंदोलन में शिक्षक पूरी ताकत के साथ लगेंगे। निषाद विकास मंच के दयाशंकर निषाद और निषाद उत्थान परिषद के ठाकुर निषाद ने कहा कि प्रदूषण के कारण मछुआरे बर्बाद हो रहे हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्र्वविजय सिंह ने मिल रहे अपार जनसमथर्न के प्रति आभार जताया। संचालन कर रहे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उपेन्द्र दत्त शुक्ल ने कहा कि आमी की लड़ाई की निर्णायक अंजाम तक चलेगी। जनसम्पर्क प्रमुख संजय सिंह ने आंदोलन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम को छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कृष्णभान सिंह उर्फ किसान सिंह, सुनील सिंह, सुधा त्रिपाठी, जयप्रकाश नायक, भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. रतनपाल सिंह, बलवीर सिंह, अविनाश शुक्ल, रमेश सिंह, वीरेश, नवलकिशोर सिंह, छोटेलाल पासवान, सावित्री मौर्य, जीवन प्रकाश, मदन त्रिपाठी, हरिशंकर सिंह, विजय कुमार सिंह, प्रेमशंकर मिश्र, शिवशंकर यादव, धीरज समेत कई प्रमुख लोगों ने सम्बोधित किया। &lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvdwBonJzpI/AAAAAAAAAnI/pLXzVVuj2oo/s1600-h/GKP05ahv24-1_1257482626_m.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvdwBonJzpI/AAAAAAAAAnI/pLXzVVuj2oo/s400/GKP05ahv24-1_1257482626_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-9107600486687371253?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/9107600486687371253/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=9107600486687371253' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/9107600486687371253'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/9107600486687371253'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post_09.html' title='गाँव की गंगा का जहर पीने निकले नीलकंठ'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvdtkqQw2GI/AAAAAAAAAmo/ji8GnKWbx7U/s72-c/GKP06ahv4-1_1257567866_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-5951260325366133897</id><published>2009-11-07T06:44:00.001+05:30</published><updated>2009-11-07T06:47:48.470+05:30</updated><title type='text'>आने वाली नस्लें तुम पर रश्क करेंगी, तुमने प्रभाष को देखा था.</title><content type='html'>आनन्द राय , गोरखपुर &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvTJ450KkkI/AAAAAAAAAmg/joX1U75dxnc/s1600-h/Picture+006.JPG" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvTJ450KkkI/AAAAAAAAAmg/joX1U75dxnc/s400/Picture+006.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;अलसुबह अशोक चौधरी का फोन आया. देर तक सोने वाले चौधरी के फोन से ही मन में शंका हो गयी. धड़कते दिल से फोन रिसीव किया. अशोक ने कहा एक दुखद खबर है- प्रभाष जी नहीं रहे. कलेजा धक् से रह गया. उनका मैं बेहद सम्मान करता हूं. इस सम्मान का सिरा तो मेरे लिखने पढ़ने के साथ ही जुड़ा है लेकिन सीधा जुडाव दस साल पहले हुआ. मुझे तारीख याद है. 22 अगस्त 1999, उस दिन गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब की पहली निर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह था. प्रभाष जी मुख्य अतिथि के रूप में बुलाए गए थे. उनके साथ राष्ट्रीय सहारा के तत्कालीन सम्पादक विभ्यांशु दिव्याल भी आये थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; प्रेस क्लब की कार्यकारिणी में मंत्री पद पर दीप्त भानु डे, संयुक्त&amp;nbsp;मंत्री गिरीश&amp;nbsp;पाण्डेय&amp;nbsp;समेत&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;कई लोग निर्विरोध चुन लिए गए थे. सिर्फ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए चुनाव हुआ था. अध्यक्ष के लिए पीयूष बंका और उपाध्यक्ष के लिए मैं चुना गया था. गोरखपुर&amp;nbsp;के लिए&amp;nbsp;यह&amp;nbsp;बहुत&amp;nbsp;ही नए तरह का माहौल&amp;nbsp;था&amp;nbsp;और&amp;nbsp;इस&amp;nbsp;माहौल तथा&amp;nbsp;उत्साह को&amp;nbsp;प्रभाष जी ने&amp;nbsp;आकर&amp;nbsp;नया&amp;nbsp;रंग दे&amp;nbsp;दिया&amp;nbsp;था. समारोह में&amp;nbsp;&amp;nbsp;प्रभाष जी बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने प्रेस क्लब के गठन पर प्रसन्नता जाहिर की. दिल्ली के प्रेस क्लब की हालत पर दुःख प्रकट किया और पत्रकारों से आह्वान किया कि प्रेस क्लब को मयखाना मत बनाना. उनके पहले सभी वक्ता बोल चुके थे. मुझे आभार ज्ञापन करना था. मैंने मुखातिब होते ही प्रभाष जी को वचन दिया कि प्रेस क्लब में कभी दारू नहीं आयेगी. मेरी बात पर उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई. खाना खाते समय मैंने उनसे एक और बात कही जो उसी समारोह में मैंने उनको करते देखा. यह उनका बड़प्पन था और मैं कई जगह इसका उदाहरण देता हूँ. दरअसल उस कार्यक्रम में वयोवृद्ध पत्रकार ज्ञान प्रकाश राय को सम्मानित करना था. हिन्दी पत्रकारिता के शलाका पुरुष प्रभाष जी ने जब आंचलिक पत्रकार को सम्मान दिया तब उन्हें बाबू ज्ञान प्रकाश राय के संघर्ष और उम्र का अहसास हुआ. शाल डालने के बाद वे ज्ञान प्रकाश राय के पैरों में झुक गए. तब दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का संवाद भवन तालियों से गूँज उठा. इस बात की नोटिस सभी आचार्यों ने ली और उनके बड़प्पन को सराहा.जब प्रभाष&amp;nbsp;जी&amp;nbsp;से&amp;nbsp;मैं&amp;nbsp;यह कहने लगा&amp;nbsp;तो बोले कि&amp;nbsp;किसी&amp;nbsp;का&amp;nbsp;सम्मान&amp;nbsp;करो तो उसे पता&amp;nbsp;चलना&amp;nbsp;चाहिए.&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; कार्यक्रम ख़त्म होने के बाद प्रभाष जी को हम लोग एक होटल के कमरे में ले गए. उसी शाम उन्हें जाना भी था. उन्होंने कहा आराम नहीं करेंगे. गोरखनाथ मंदिर देखने की इच्छा जतायी. वे मंदिर में गए तो गुरू गोरक्ष से जुड़ी बहुत सी बातें बताने लगे. महंत अवेद्यनाथ से मुलाक़ात की और फिर कई किताबें भी खरीदे. प्रभाष जी वापस लौटने लगे तो इस बात से बेहद खुश थे कि गोरखपुर के पत्रकार रचनात्मक हैं. उन्हें इस बात की भी खुशी थी कि पत्रकारों के कार्यक्रम में शहर का बौद्धिक वर्ग पूरी शिद्दत से जुडा रहा. यह महज संयोग था कि अगली बार की कार्यकारिणी में मुझे प्रेस क्लब का निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया गया. मेरे लिए यह रोमांच की बात थी. उन दिनों कई पत्रकार साथियों का आकस्मिक निधन हो गया. शुरू के एक दो महीने मेरे लिए बहुत मुश्किल के थे. मैं कोई कार्यक्रम भी नहीं कर पा रहा था. प्रेस क्लब में सिर्फ शोक सभा हो रही थी. उन्ही दिनों राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री बने और गोरखपुर आये. मुलाक़ात में मैंने प्रेस क्लब का जिक्र किया तो उन्होंने अपने कोष से पांच लाख रूपये देने की बात कही. मैंने अपनी नोटबुक से एक पन्ना फाड़ा और उन्हें प्रेस क्लब का पता दे दिया. दस दिनों बाद मुझे पता चला कि पैसा आ गया है. खैर पैसा लाने में मुझे पापड़ भी बेलना पड़ा. पैसा मिलते ही हम लोगों ने जय प्रकाश शाही की स्मृति में एक सूचना कक्ष और डाक्टर सदाशिव दिवेदी के नाम पर एक पुस्तकालय बनवाया. तभी कुछ लोगों ने यह सलाह दी कि यहाँ बार खुल जाता तो आमदनी होती. मैंने कड़ा विरोध किया और साफ़ तौर पर कह दिया कि प्रभाष जी को दिया वचन निभाउंगा. वाकई उस दिन से आज तक कभी प्रेस क्लब में दारू नहीं आयी. किसी समारोह के दौरान भाई लोग अगल बगल से गरम हो लेते हैं पर प्रेस क्लब में कोई बोतल नहीं खुलती है. मैंने साफ़ तौर पर कह दिया कि प्रभाष जी को दिया वचन निभाना है. इसे हम सबने निभाया.&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; हमने दुबारा प्रभाष जी को बुलाया तो उन्होंने कहा जिस डेट में चाह रहे हो उस डेट में नहीं आ पाउँगा. असल में मेरी कार्यकारिणी का समय बीत चुका था इसलिए और लम्बे समय तक इन्तजार नहीं किया जा सकता था. फिर हमारी कार्यकारिणी के समापन समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह और साहित्कार अब्दुल बिस्मिलाह आये. प्रभाष जी ने हर कार्यक्रम में अपनी शुभकामना दी और कई जगह उन्होंने गोरखपुर के प्रेस क्लब का उदाहरण दिया. गोरखपुर में बाद में दूसरे आयोजन में भी वे आये. उनके निधन की खबर मिलते ही मैंने प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ल और मंत्री धीरज श्रीवास्तव को फोन किया और शोक सभा का प्रस्ताव रखा. अध्यक्ष और मंत्री ने शनिवार को उनके व्यक्तित्व के अनुरूप एक संगोष्ठी आयोजित की है. मुझे दिल्ली में अपने रोग से जूझ रहे पत्रकार साथी रोहित पाण्डेय ने एक एसएमएस किया है - प्रभाष जी के जाने के बाद लग रहा है कि अब किसकी छाया में सुरक्षित रहेंगे पत्रकार. वह अकेले सबके रक्षक थे. &lt;br /&gt;वाकई उनका जाना एक निर्मम सच है लेकिन बहुतों के दिल को बेचैन कर देने वाली इस सच्चाई को कैसे स्वीकार किया जाय. बस मन में इस बात की तसल्ली है और फिराक के शेर के माफिक कि- आने वाली नस्लें तुम पर रश्क करेंगी, तुमने प्रभाष को देखा था. यकीनन कुछ गिनी चुनी मुलाकातों में ही उनके बेहद करीब होने का अहसास होता है. कभी उन्होंने अपनी ऊँचाई का अहसास नहीं होने दिया. शायद यही वजह है कि दिल और दिमाग दोनों जगह उनकी ऊँचाई जैसी कोई शख्सियत नहीं दिखती है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-5951260325366133897?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/5951260325366133897/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=5951260325366133897' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5951260325366133897'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/5951260325366133897'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post_07.html' title='आने वाली नस्लें तुम पर रश्क करेंगी, तुमने प्रभाष को देखा था.'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvTJ450KkkI/AAAAAAAAAmg/joX1U75dxnc/s72-c/Picture+006.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-6185945253534344903</id><published>2009-11-05T19:59:00.001+05:30</published><updated>2009-11-05T20:03:43.021+05:30</updated><title type='text'>आमी के लिए जागा पूर्वांचल</title><content type='html'>&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आनन्द &amp;nbsp;राय , गोरखपुर&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvLfTMUL9OI/AAAAAAAAAmI/Iyi8eshe7zY/s1600-h/IMG_1132.JPG" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvLfTMUL9OI/AAAAAAAAAmI/Iyi8eshe7zY/s200/IMG_1132.JPG" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; आमी नदी से कितने जीवन जुड़े हैं इसका कोई आंकडा नहीं है. यह नदी मुझे बार बार अपनी ओर खींचती है. सिसक रही इस नदी को जीवन देने के लिए जनता जाग उठी है. गाँव जाग उठे हैं. नगर डगर सब ओर जाग्रति है. बस कोई सो रहा है तो वह है सरकार. सिर्फ माया बहन जी की ही सरकार नहीं. ढाई दशक में जितनी भी सरकारें आयी सब सो रही हैं. आमी ऐतिहासिक नदी है. इससे बुद्ध , कबीर , नानक और गोरक्षनाथ का नाता है. मैं जहां रहता हूँ वहां से सिर्फ ५२ किलोमीटर की दूरी पर कुशीनगर में बुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ. ८० किलोमीटर दूर कपिलवस्तु है जहां उनका आविर्भाव हुआ. इस दूरी के बीच यह &amp;nbsp;नदी बहती है. पहले उसे अनोमा के नाम से जानते थे. अब वह आमी कहलाती है. वैराग्य के लिए यही नदी राजकुमार सिद्धार्थ की प्रेरक बनी. सिद्धार्थनगर जिले के सोह्नारा में राप्ती नदी की छाडन से निकल कर यह गोरखपुर जिले के सोहगौरा में राप्ती नदी में ही मिल जाती है. जब जीवन के प्रश्नों ने राजकुमार सिद्धार्थ को व्याकुल कर दिया और जवाब की तलाश में अपनी पत्नी और बच्चे को छोड़ घर से निकले तो पहली बार इसी नदी के तट पर उनके कदम ठिठके. उन्होंने अपने राजसी वस्त्र उतारे, केश को काट दिया और सब कुछ सारथी को सौंप कर ज्ञान की खोज में चल पड़े. यह नदी उनके संकल्पों की साक्षी बनी. इसी नदी के तट पर मगहर में अपने आख़िरी दिनों में कबीर दास आये. यहाँ उनकी मजार और समाधि दोनों है. अभी इसी २ अक्टूबर को मगहर में गुरूद्वारा भगत कबीर की बुनियाद रखी गयी. नदी और स्त्री एक तरह होती है. आमी नदी गाँव की गंगा की तरह थी. &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;इधर दो दशक में इस नदी को औद्योगिक इकाइयों के अपजल से प्रदूषित कर दिया गया. विकास की रफ़्तार में सदियों की गौरव गाथा समेटने वाली आमी को बदरंग कर दिया गया. तीन जनवरी से इस नदी की मुक्ति के लिए मैंने एक अभियान शुरू किया. इस बीच मैं नदी तट पर बसे गाँवों में गया. वहां लोगों की पीडा देखी. जिल्लत भरी जिन्दगी और लोगों को दुखों का पहाड़ उठाते देखा. आमी नदी जिसका रिश्ता लोगों के चौके और चूल्हे से था उसे टूटते और दरकते देखा. मैंने देखा कि प्यास और सांस दोनों पर पहरा लगा दिया गया है. गाँवों के अन्दर घुसने पर दुनियादारी की किचकिच साफ़ साफ़ सुनी. दुबले, मर्झल्ले और नंगे बच्चों की चीख सुनी. कच्ची दारू के सुरूर में निठल्ले हो चुके उनके बापों के खौफ की आंच में अदहन सी खौलती उनकी माँओं की कातर पुकार भी सुनी. आमी की तरह उन औरतों को भी तड़पते देखा जो सेवार, जलकुम्भी और मरे हुए जानवरों के दुर्गन्ध के बीच सिसक सिसक कर जी रही हैं. रोग की जकड में फंसे हुए लोगों की कराह भी सुनी. ३ जनवरी २००९ से लगातार इस नदी की पीडा को शब्दों की शक्ल दे रहा हूँ. पर मेरी आवाज इस आंचलिक परिधि से बाहर नहीं निकल रही है. अगर आमी तट के गाँवों में जहां सरकारी तंत्र कभी नजर नहीं डालता, जहां जनप्रतिनिधि उद्यमियों के प्रभाव में अपने होठ पर ताला डाले पड़े हैं, वहां एक नजर ऐसी चाहिए जो बुद्ध को समझ सके. जो चेतना की यात्रा को समझ सके. जो इस ठहराव को समझ सके और यह भी समझ सके कि अब सडन बर्दाश्त के बाहर हो गयी है. यकीन जानिए- अगर कभी फुरसत लेकर आप सबने&amp;nbsp; पल-दो-पल इस मैले हो चुके आमी के आँचल को छूने की कोशिश की तो एक नये बुद्ध का साक्षात्कार होगा. वह आपके लिए नयी अनुभूति होगी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;संघर्ष का शंखनाद&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvLf4AaZTOI/AAAAAAAAAmQ/EuuwMqDxH40/s1600-h/GKP4pkj11-1_1257392736_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvLf4AaZTOI/AAAAAAAAAmQ/EuuwMqDxH40/s400/GKP4pkj11-1_1257392736_m.jpg" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;कार्यालय संवाददाता, गोरखपुर : औद्योगिक इकाइयों के अपजल से प्रदूषित हो गयी ऐतिहासिक आमी नदी की मुक्ति के लिए बुधवार को जनता और जनप्रतिनिधि एक साथ सड़क पर उतर पडे़। तटवर्ती गांवों से भारी तादात में निकली जनता ने मण्डलायुक्त कार्यालय परिसर में पहुंचकर आमी की मुक्ति के लिए निर्णायक संघर्ष का शंखनाद किया। साथ में सतुआ-पिसान लेकर पहुंचे लोगों ने अपने इरादे को साकार करने के लिए डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन शुरू कर दिया है जो लगातार तीन दिन तक चलेगा। आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह के नेतृत्व में शुरू हुए डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन को ताकत देने में जनप्रतिनिधियों और नेताओं की दलीय प्रतिबद्धता आड़े नहीं आयी। आंदोलन में शामिल होकर सदर सांसद और गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्य नाथ, बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान, भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं एमएलसी विनोद पाण्डेय, वामपंथी नेता यशवंत सिंह और परिवर्तन कामी छात्र संगठन के चक्रपाणि ओझा ने जनता की आवाज को बल देते हुये सरकार के रवैये के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। आमी बचाओ मंच के आह्वान पर डेरा डालो घेरा डालो आंदोलन को निर्णायक बनाने के संकल्प के साथ भुसवल, जरलही, डोमाघाट सोहगौरा, बांसगांव, कंदराई, बरवल, महुआडाबर समेत कई तटवर्ती गांवों की जनता बस, ट्रैक्टर-टाली, जीप, टैम्पो, मोटरसाइकिल से मण्डलायुक्त कार्यालय में उमड़ पड़ी। गांव की गंगा को बचाने के लिए महिलाएं मन की ताकत लेकर आयी थीं। सतुआ पिसान के साथ तीन दिन तक टिके रहने और अपनी आवाज को सरकार तक पहंुचाने की उनकी मंशा ने इस अनोखे आंदोलन को बल दिया। 11 बजे डोमा घाट कुटी के पुजारी संत रामलखन दास ने संकल्प दीप प्रज्ज्वलित कर आंदोलन की विधिवत शुरूआत की तो अविरल आमी-निर्मल आमी का नारा गूंज उठा। आंदोलन में वे महिलाएं भी आयीं जिन्होंने आमी के लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों को चूडि़यां पहनायी थी। जरलही की कुंता देवी, भुसवल की रामसिंगारी, जरलही की सहदेई, सुभावती, रंभा, गुडडी देवी और कंुता जैसी कई महिलाएं थीं जो चीख चीख कर कह रही थीं- अब हमनी के साहब लोग के घरे में गंदा पानी डालब तब उनका के बुझाई.। अपनी आस्था को एक मुकाम देने और गांव की गंगा को बचाने की उनकी जिद में निसंदेह एक गूंज थी। खुफिया एजेंसियों के लोग आंदोलनकारियों का तेवर पता कर रहे थे। ठीक उसी वक्त गगनभेदी नारों के बीच फरुवाही कलाकार छेदी यादव के गीत के बोल सुनायी पड़े- काटल जाई चलिके जेलखनवा, अपने आमी के करनवा...। यकीनन सभी लोग इस मंसूबे के साथ आंदोलन में उतरे हैं कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे, चाहे जो कुर्बानी देनी पड़े। रात को जब कमिश्नर कार्यालय में चूल्हा सुलगा और एक साथ सभी लोग भोजन पर जमे तो यह साफ लगा कि गांवों की जनता सचमुच जाग उठी है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvLgjHMzJKI/AAAAAAAAAmY/uuaU17kJWjE/s1600-h/GKP04ahv14-1_1257392721_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvLgjHMzJKI/AAAAAAAAAmY/uuaU17kJWjE/s320/GKP04ahv14-1_1257392721_m.jpg" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #351c75; font-size: large;"&gt;आमी के लिए सड़क से संसद तक होगी लड़ाई : योगी&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;कार्यालय संवाददाता, गोरखपुर : गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी और सदर सांसद योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आमी नदी की समस्या का समाधान न होना सरकार की विफलता का प्रतीक है। सरकार संवेदनहीन है और आर्थिक गठजोड़ के कारण उसके हाथ पांव बंधे हैं। योगी आदित्यनाथ बुधवार को मण्डलायुक्त कार्यालय परिसर में आमी बचाओ मंच के तीन दिवसीय डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आमी बचाओ मंच के आंदोलन से नदी की मुक्ति की उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के लिए हम सड़क से लेकर संसद तक कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। सभा की अध्यक्षता करते हुये आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्र्वविजय सिंह ने कहा कि जनता ने हमारे संघर्ष को एक नयी धार दी है। इसी ताकत के बल पर हम अपने मुकाम तक पहंुचेंगे। बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान ने कहा कि गरीब किसान और मजदूरों का जन जीवन नदी के प्रदूषण से बदहाल हो गया है। उनके जीवन को लय देने के लिए हम आर पार की लड़ाई लड़ेंगे। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व एमएलसी विनोद पाण्डेय ने कहा कि मैंने परिषद में पहला सवाल आमी के प्रदूषण पर लगाया था। सरकार महापुरुषों के सम्मान का ढोंग करती है जबकि आमी तट से महापुरुषों का रिश्ता जुड़ा हुआ है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष उपेन्द्र दत्त शुक्ल ने कहा कि आमी हमारे लिए राजनीति का नहीं बल्कि आस्था का सवाल है। सभा को राधेश्याम सिंह, जनसम्पर्क प्रमुख संजय सिंह, सुनील सिंह, बलवीर सिंह,विश्र्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष समीर कुमार सिंह, बधु उपेन्द्र नाथ सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह, अरुण सिंह, विकास सिंह, फौजदार यादव, सूर्यप्रकाश कौशिक, विनय सिंह, श्याम सिंह, रामलौट निषाद, मंजू देवी, लक्ष्मी नारायण दुबे, विनय राम त्रिपाठी, चंदा देवी, राम जगत निषाद, रामचन्द्र निषाद, ब्रजमोहन निषाद समेत कई प्रमुख लोगों ने सम्बोधित किया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-6185945253534344903?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/6185945253534344903/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=6185945253534344903' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6185945253534344903'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/6185945253534344903'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post_05.html' title='आमी के लिए जागा पूर्वांचल'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' 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src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvEcWVNUb0I/AAAAAAAAAl4/mxP89eug3uU/s200/GKP03ahv14-1_1257307244_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;कवि देवेन्द्र आर्य की कवितायें जनमानस के भीतर बहुत ही गहराई तक असर डालती हैं. उनकी रचनाओं पर चर्चा के लिए इस मंगलवार दैनिक&amp;nbsp;जागरण&amp;nbsp;ने&amp;nbsp;एक&amp;nbsp;विमर्श&amp;nbsp;आयोजित किया.&amp;nbsp;दैनिक जागरण के&amp;nbsp;यूनिट&amp;nbsp;हेड&amp;nbsp;शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी&amp;nbsp;और&amp;nbsp;स्थानीय&amp;nbsp;डेस्क&amp;nbsp;प्रभारी&amp;nbsp;&amp;nbsp;संजय मिश्र की अगुआई में आयोजित इस विमर्श में उनके प्रति समाज के सभी वर्ग के लोगों की प्रतिक्रया आयी. मेरे मन&amp;nbsp;में&amp;nbsp;&amp;nbsp;देवेन्द्र आर्य के प्रति हमेशा&amp;nbsp;सम्मान&amp;nbsp;का&amp;nbsp;भाव&amp;nbsp;रहा है.&amp;nbsp;अपनी जिन्दगी&amp;nbsp;में उन्होंने&amp;nbsp;बहुत ही दुःख पीडा&amp;nbsp;और संत्रास&amp;nbsp;भोगा&amp;nbsp;है. लेकिन&amp;nbsp;चेहरे पर उनकी मुस्कान उन्हें औरों से अलग&amp;nbsp;करती है. &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: #444444; font-size: large;"&gt;जन चेतना के कवि हैं देवेन्द्र आर्य : प्रो. रामदेव शुक्ल&lt;/span&gt; &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मिथिलेश द्विवेदी , गोरखपुर :&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;आज के दौर में जब कविता फैशन बन गयी है, मैगी की तरह लोग दो मिनट में इसका स्वाद चख लेना चाहते हैं ऐसे में भी देवेन्द्र आर्य की कविताएं आस्वाद छोड़ती हैं। देवेन्द्र जनचेतना के ऐसे कवि हैं जो समाज पर गहरा असर छोड़ते हैं। यह कहना है प्रख्यात साहित्यकार प्रो. रामदेव शुक्ल का।&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvEdIDYZAaI/AAAAAAAAAmA/XOC_G5OcjDU/s1600-h/GKP03ahv41-1_1257307245_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvEdIDYZAaI/AAAAAAAAAmA/XOC_G5OcjDU/s400/GKP03ahv41-1_1257307245_m.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;प्रो. शुक्ल मंगलवार को दैनिक जागरण एवं सेन्ट्रल एकेडमी के संयुक्त तत्वावधान में होटल शिवाय के सभागार में आयोजित देवेन्द्र आर्य की कविताओं पर विमर्श को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे। प्रो. शुक्ल ने कविता, गजल और गीत को अलग अलग देखने का प्रतिवाद करते हुए कहा कि कविता में गीत, गजल, काव्य सब समाहित है। अच्छे कवि सभी प्रकार के फन आजमाते हैं। उन्होंने कहा कि जनता में विश्र्वास का अलख जगाने वाली कविताएं नारा भी बन जाती हैं और सामाजिक बदलाव का मंत्र भी फूंकती हैं। आर्य की कविताओं में यह धारणा मौजूद है। देवेन्द्र आर्य की कविता के शब्द विचार माफिया को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस शब्द युग्म ने आप पर असर छोड़ दिया और उसके जरिए आपके भीतर रासायनिक क्रिया हुई तो कवि का उद्देश्य सफल हुआ। उन्होंने साहित्यकारों पर विमर्श आयोजित करने के लिए दैनिक जागरण की सराहना की। इससे पूर्व गोरखपुर विश्र्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. केसी लाल ने कहा कि आर्य की कविताएं उनकी यथार्थ को आलोचनात्मक दृष्टि से देखने वाले स्वभाव की उपज हैं। वे नए प्रतीकों में बात करते हैं और नए प्रतिमान गढ़ते रहते हैं। उनकी कविताएं प्रेरणा बन सकती हैं बशर्ते वे तुकों के चमत्कार में न उलझें। प्रो. अनंत मिश्र ने कहा कि आज के दौर में जब शब्द निरर्थक लगने लगे तब कविता करना कठिन काम है। खुशी की बात है कि इस दौर में भी देवेन्द्र यह काम ईमानदारी से कर रहे हैं। &lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; साहित्यकार एवं उत्तर प्रदेश विश्र्वविद्यालय आवासीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. चित्त रंजन मिश्र ने कहा कि देवेन्द्र आर्य की कविता में मैं आत्मा की गुप्तचरी देखना चाहता हूं। नि:संकोच वे जनपक्षधरता के अच्छे कवि हैं मगर कहीं न कहीं उनका बाहरी और भीतरी संघर्ष अलग-अलग दिखता है। इसके पूर्व अपने लिखित आधार वक्तव्य में युवा आलोचक डा. अनिल राय ने कहा कि आर्य बड़े अनुभव व बड़ी रचनाओं वाले कवि हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि उनकी शुरुआती रचानाओं में जो विद्रोह और सामाजिक क्रांति लाने का उत्साह दिखता था अब उसका लोप क्यों हो रहा है। पूछा कि आज की उनकी कविता में हड़ताली मजदूर खुद को कहां पाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दीदउ गोरखपुर विश्र्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुरेन्द्र दूबे ने कहा कि साहित्यिक रूप से सजग यह शहर जैसे प्रेमचंद व फिराक का है, वैसे ही आज के कवि देवेन्द्र आर्य का है। वे जनता की संवेदनाओं के शानदार शिल्पी हैं। आलोचक कपिलदेव ने कहा कि आर्य की गतिशीलता गजब की है। यही वजह है कि आज तक मेरे दिमाग में कभी नहीं आया कि उनकी कविताओं का मूल्यांकन हो। साहित्यकार मदन मोहन ने कहा कि आज के जटिल दौर में शब्दों को पकड़ने व सामज की नब्ज पकड़ने की गंभीर चुनौती है। साहसी कवि देवेन्द्र ने यह चुनौती स्वीकार की है। चिकित्सक डा. अजीज अहमद ने अशआर की खूबसूरती पर बल दिया और कहा कि ज्यों-ज्यों कवि परिपक्व होता है रचनाएं गूढ़ अर्थो वाली होती जाती हैं। इसलिए देवेन्द्र की सराहना की जानी चाहिए। जगदीश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि शब्दों के शिल्पी देवेन्द्र आर्य आम जन रुचि को संवेदना में पकाकर परोसते हैं जिससे उसका आस्वाद बढ़ जाता है।&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;डा. रंजना जायसवाल ने भी अपनी राय व्यक्त की। विमर्श के आरम्भ में देवेन्द्र आर्य ने अपनी चुनिंदा कविताएं सुनायीं। इससे पूर्व डा. शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया जबकि वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्र ने संचालन किया। सेंट्रल एकेडमी के निदेशक सृंजय मिश्र ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को दिशा देते हैं और आगे भी वे ऐसे आयोजनों में हर संभव सहयोग देते रहेंगे। इस अवसर पर देवेन्द्र आर्य और उनकी पत्‍‌नी श्रीमती आशा श्रीवास्तव को स्मृति चिह्न एवं सम्मान पत्र देकर तथा शाल ओढ़ा कर सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार एवं शायर राजेश सिंह बसर ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। शुरू में अतिथियों को ओमप्रकाश जोशी, डा. संजयन त्रिपाठी, प्रधानाचार्य गोरखलाल श्रीवास्तव, उपेन्द्र पाण्डेय, डा. विवेकानन्द मिश्र ने माल्यार्पण किया। इस मौके पर डा. रजनीकान्त पाण्डेय, पं. दयाशंकर दूबे, डा. के.सी. पाण्डेय, फतेह बहादुर सिंह, डा. सत्येन्द्र सिन्हा, टी.एन. श्रीवास्तव, महेन्द्र मिश्र, रमेश चंद गुप्त, राजकुमार राय, द्विजेन्द्र पाठक सहित भारी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;देवेन्द्र की रचनाओं में जादू&lt;/span&gt;&amp;nbsp; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मौत भी जिंदगी सी हो जाए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;झूठ और सच का फ़र्क़ खो जाए। &lt;br /&gt;तिश्ना लब के सिवाय कौन है जो .&lt;br /&gt;सुर्ख अहसास को भिगो जाए। &lt;br /&gt;पिण्ड तो छूटे वर्जनाओं से ,&lt;br /&gt;जो भी होना है आज हो जाए। &lt;br /&gt;ऐसे मत मांग हाथ फैला के ,&lt;br /&gt;हाथ में जो है वो भी खो जाए। &lt;br /&gt;मैं तवायफ़ हूँ, बेहया तो नहीं ,&lt;br /&gt;थोड़ी मोहलत दे, बच्चा सो जाए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color: black;"&gt;देखना&amp;nbsp;न&amp;nbsp;भूलियेगा बस एक छोटे से ब्रेक के बाद&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ठेकेदारों के लिए शिलन्यास.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और कवियों के लिए सबसे ख़ुशी का दिन.&lt;br /&gt;उनके संग्रह के लोकार्पण का होता है।&lt;br /&gt;हिन्दुस्तान की आधारशिला शताब्दियों पहले,&lt;br /&gt;महारानी एलिजाबेथ ने रखी थी,&lt;br /&gt;शीघ्र ही उसका लोकार्पण.&lt;br /&gt;अंकल सैम के हाथों सम्पन्न होगा।&lt;br /&gt;देखना न भूलिएगा,&lt;br /&gt;देश की लोकार्पण की तैयारियों पर,&lt;br /&gt;हमारा विशेष बुलेटिन.&lt;br /&gt;बस छोटे से ब्रेक के बाद।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-4199261781728821247?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4199261781728821247/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=4199261781728821247' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4199261781728821247'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4199261781728821247'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='मन को छू जाती  देवेन्द्र आर्य की कवितायें'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SvEcWVNUb0I/AAAAAAAAAl4/mxP89eug3uU/s72-c/GKP03ahv14-1_1257307244_m.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-4334177765637288459</id><published>2009-10-31T07:45:00.001+05:30</published><updated>2009-10-31T07:48:07.189+05:30</updated><title type='text'>बजरंगी की गिरफ्तारी का सूत्रधार बबलू तो नहीं !</title><content type='html'>आनन्द राय , गोरखपुर। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SuucCDDsDXI/AAAAAAAAAlQ/C9lR1A5-I-w/s1600-h/GKP29vnsc4-1_1256873703.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SuucCDDsDXI/AAAAAAAAAlQ/C9lR1A5-I-w/s200/GKP29vnsc4-1_1256873703.jpg" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की गिरफ्तारी सुनियोजित है या दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की विशेष रणनीति का हिस्सा? यह बहस जरायम की गलियों में गरम है। अंदेशा है कि ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू ही मुन्ना बजरंगी की गिरफ्तारी का सूत्रधार है। पहले भी उसने पुलिस और अपने हक में ऐसे कई कारनामे अंजाम दिये हैं। फजलुर्रहमान की गिरफ्तारी इसका उदाहरण है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SuueK_LFlfI/AAAAAAAAAlw/47wy7JfkbhI/s1600-h/babloo1_fix-1_1236187817_m.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SuueK_LFlfI/AAAAAAAAAlw/47wy7JfkbhI/s200/babloo1_fix-1_1236187817_m.jpg" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुम्बई में बहुत ही आराम से मुन्ना बजरंगी को गिरफ्तार किया तो लोग विस्मित रह गये। इतने बड़े अपराधी की गिरफ्तारी में न कहीं धुआं उठा और न कहीं बारूदी गंध आयी। पहले भी ऐसा हुआ जब भुवनेश्वर में माफिया ब्रजेश सिंह की गिरफ्तारी हुई तो सिर्फ हाथापाई हुई। फजलुर्रहमान की गिरफ्तारी में भी इसी तरह की नौटंकी निकली। फजलुर्रहमान की गिरफ्तारी में तो साफ-साफ बात उठी कि वह ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू के ताने बाने में उलझ गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SuudfyOsn1I/AAAAAAAAAlg/FtbzC1csnTw/s1600-h/30bp-1.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SuudfyOsn1I/AAAAAAAAAlg/FtbzC1csnTw/s400/30bp-1.jpg" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;बरेली जेल में बंद डॉन बबलू ने अपने करीबी फजलुर्रहमान को इसलिए गिरफ्तार कराया क्योंकि वह दाऊद के कहने पर बबलू की हत्या के लिए प्रयासरत था। बबलू को यह खबर तब मिली जब लखनऊ पुलिस ने 24 नवंबर 2005 को बैंकाक में छोटा राजन पर हमला करने वाले नूरबख्श को पकड़ा। नूरबख्श लखनऊ जेल पहुंचा तो बबलू से डरा हुआ था। बबलू ने उसे अभयदान का ड्रामा किया। बदले में नूरबख्श ने बबलू के सामने कुछ राज उगल दिये। उसी ने बबलू को फजलू के प्रति आगाह किया था। सूत्र बताते हैं कि बबलू ने बरेली जेल में रहते हुए दिल्ली पुलिस के एक अफसर तक सूचना भेजी और फजलुर्रहमान की गिरफ्तारी का ताना बाना बुना। बबलू ने एक बड़े कारोबारी के अपहरण के लिए फजलू को सूचना भेजी और उसे काठमाण्डू से सोनौली बुलवाया जहां से उसे पुलिस ने उठा लिया। &lt;br /&gt;ध्यान रहे, दिल्ली पुलिस के एसीपी संजीव यादव ने ही फजलुर्रहमान को गिरफ्तार किया था। उन्होंने ही मुन्ना बजरंगी को भी गिरफ्तार किया। मुन्ना बजरंगी के तार पहले से ही बबलू से जुड़े हैं। संजीव की ही टीम ने ब्रजेश सिंह को भी गिरफ्तार किया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;मुन्ना की गिरफ्तारी से माननीयों की नींद उड़ी &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SuudromLXnI/AAAAAAAAAlo/6ppfzVBD96o/s1600-h/20051230004301703.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SuudromLXnI/AAAAAAAAAlo/6ppfzVBD96o/s200/20051230004301703.jpg" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुन्ना बजरंगी की गिरफ्तारी से उसके दुश्मनों और सताये गये बड़े कारोबारियों ने भले ही राहत की सांस ली है लेकिन कुछ माननीयों की नींद उड़ गयी है। यूपी पुलिस उसे रिमाण्ड पर लेगी, यह सोच कर वे परेशान हैं। 11 सितंबर 1998 को जब दिल्ली में मुठभेड़ के बाद मुन्ना बच निकला, तब गोलियां लगने की वजह से उससे बहुत पूछताछ नहीं हो पाई। 28 मई 2001 को वह जमानत पर रिहा हुआ और फिर पुलिस की पकड़ में नहीं आया। इस दौरान नेपाल के एक पूर्व मंत्री से लेकर पूर्वाचल के कई प्रमुख लोगों से उसके अच्छे रिश्ते बने। जाहिर है कि पुलिस उससे इस सच को उगलवाने की कोशिश करेगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-4334177765637288459?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/4334177765637288459/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=4334177765637288459' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4334177765637288459'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/4334177765637288459'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/10/blog-post_31.html' title='बजरंगी की गिरफ्तारी का सूत्रधार बबलू तो नहीं !'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/Ss2THhc1EMI/AAAAAAAAAiY/3BNfIqD1lSc/S220/DSC06896.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SuucCDDsDXI/AAAAAAAAAlQ/C9lR1A5-I-w/s72-c/GKP29vnsc4-1_1256873703.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-8040736284594536912.post-8686173357416209223</id><published>2009-10-30T07:12:00.001+05:30</published><updated>2009-10-30T07:24:07.180+05:30</updated><title type='text'>मुन्ना बजरंगी ने दे दी थी यमराज को भी मात</title><content type='html'>आनन्द राय , गोरखपुर&amp;nbsp;&amp;nbsp;29 अक्टूबर।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SupDVTc7F6I/AAAAAAAAAk4/xnfjlHCQk68/s1600-h/up_gangsters_2_20051219.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SupDVTc7F6I/AAAAAAAAAk4/xnfjlHCQk68/s320/up_gangsters_2_20051219.jpg" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;देश भर की पुलिस के लिए सिरदर्द बने मुन्ना बजरंगी की गिरफ्तारी ने अण्डरव‌र्ल्ड की हलचल तेज कर दी है। सवालों का सिलसिला चल पड़ा है। अण्डरव‌र्ल्ड में अपनी मजबूत पकड़ बना चुके इस अपराधी के बारे में बहुत कम लोगों को पता है कि महज 15 साल की उम्र में उसने अपराध की राह पकड़ ली थी। यही नहीं मुठभेड़ में गोली खाने के बाद भी वह जिंदा बच गया।&amp;nbsp; उसने यमराज को भी मात दे दी .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;जौनपुर जिले के सुरेरी थाना क्षेत्र के पूरे दयाल कसेरू गांव के पारसनाथ सिंह के बेटे मुन्ना बजरंगी और उसके साथियों ने 29 नवम्बर 2005 को गाजीपुर जिले में मोहम्मदाबाद क्षेत्र के विधायक कृष्णानन्द राय की हत्या की तो उसका नाम सुर्खियों में आ गया। इसके बाद उसने नेपाल में एक पूर्व मंत्री के घर शरण ली। इस दौरान कई बार उसके गोरखपुर में होने की खबर मिली। एक बार सहजनवा में वह पुलिस के हाथ से बच निकला। आपराधिक सफर में मुन्ना के इतने किस्से हैं जिनके लिए पन्ने कम पड़ जायेंगे। एक बार तो यमराज को भी धता बताकर वह वापस लौट आया। इण्टरस्टेट गैंग नम्बर 233 के सरगना और पांच लाख रुपये के इस इनामी अपराधी को दिल्ली पुलिस ने समय बादली थाना क्षेत्र में 11 सितम्बर 1998 को एक मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था। मुन्ना की मौत की खबर भी प्रसारित हो गयी। पर अस्पताल पहुंचा तो उसकी सांसें चलती मिली। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जौनपुर जिले के सुरेरी थाने में पहली बार 1 जनवरी 1982 को उस पर मुकदमा दर्ज हुआ। यह मारपीट का मुकदमा था और तब वह महज 15 साल का था। बेहद गरीबी में अपनी जिंदगी की शुरूआत करने वाले मुन्ना ने भदोही के कालीन व्यापारियों के यहां मजदूरी की। जब अपराध में उसका दबदबा बढ़ा तो वही व्यापारी के उसके फाइनेंसर और संरक्षण दाता हो गये। मुन्ना ने क्षेत्र के टपोरियों के साथ मिलकर गैंग बनाया और बाद में माफिया विधायक मुख्तार अंसारी तक पहुंच गया। 1984 में जौनपुर जिले के रामपुर थाना क्षेत्र में मुन्ना ने एक व्यक्ति की हत्या कर लूटपाट की। फिर वह लापता रहा। मिर्जापुर से लेकर बनारस तक घूमता रहा। 1993 में उसने ब्लाक प्रमुख रामचन्द्र सिंह की हत्या कर दी और उनके असलहे लेकर भाग गया। 1995 में मुन्ना ने वाराणसी के कैण्ट थाना क्षेत्र में दो लोगों की हत्या कर सनसनी फैला दी। 24 जनवरी 1995 को उसने अपने जिले के जमलापुर गांव में ब्लाक प्रमुख कैलाश दुबे की हत्या कर दी। इसके बाद उसका सिक्का जम गया। वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र में काशी विद्यापीठ छात्रसंघ के अध्यक्ष रामप्रकाश पाण्डेय और पूर्व अध्यक्ष सुनील राय समेत चार लोगों की हत्या के बाद तो उसके दहशत की तूती बोलने लगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गौर करें तो पूर्वाचल की जड़े मुम्बई में बहुत गहरी हैं। मुन्ना ने भी इन जड़ों से जुड़कर मुम्बई की राह पकड़ ली। वह मुम्बई में गुजरात के ड्रग माफिया अनिरूद्ध जडेजा के सम्पर्क में आया। इसके बाद तो मामूली पढ़ा लिखा मुन्ना हाईटेक हो गया। विदेशी असलहों के साथ दिल्ली, मुम्बई, गुजरात, कर्नाटक, मंगलौर, इंदौर, भोपाल जैसे इलाकों को उसने अपनी आपराधिक गतिविधियों का केन्द्र बना लिया। ठेके पर हत्या करना उसका सबसे बड़ा कारोबार बन गया। 1998 में जब पुलिस मुठभेड़ में उसके मारे जाने की खबर आयी तो लोगों ने राहत की सांस ली लेकिन राममनोहर लोहिया अस्पताल पहुंच कर जब उसने आंखें खोल दी तब उसके शातिर होने का लोगों को अहसास हुआ। फिर वह कई साल जेल में रहा। 28 मई 2001 को मुन्ना जमानत पर रिहा हुआ। तबसे फिर कभी पुलिस की पकड़ में नहीं आया। वर्ष 2002 के जनवरी माह में उसने रंगदारी वसूलने के लिए वाराणसी जिले के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के केसरी रेस्टोरेंट के मालिक सुरेश शाहू समेत दो लोगों को भून दिया। फिर 29 नवम्बर 2005 को उसने विधायक कृष्णानन्द राय को मारा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;बजरंगी को मिली थी सलेम की सुपारी &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर। अबू सलेम की जब पुर्तगाल में गिरफ्तारी हुई और उसे भारत लाया गया तब डी कम्पनी ने उसे रास्ते से हटाने की ठान ली। पूर्वाचल के शूटरों के बल पर अपना सब काम कराने वाले दाऊद इब्राहीम ने मुन्ना बजरंगी को आपरेशन सलेम का ठेका सौंपा। बजरंगी ने सलेम को रास्ते से हटाने की योजना बनायी तब तक उसे दूसरी चुनौती मिल गयी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;span style="color: blue;"&gt;कृष्णानन्द का कत्ल आपरेशन सलेम का पूर्वाभ्यास था&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर। विधायक कृष्णानन्द राय का कत्ल आपरेशन सलेम का पूर्वाभ्यास था। कड़ी सुरक्षा के बीच बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए मुन्ना ने अपने साथियों संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा, कृपा , नौशाद, फिरदौस जैसे कई अपराधियों का गठजोड़ किया और एक कार्यक्रम से लौट रहे कृष्णानन्द राय पर गोलियों की बौंछार कर दी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: red; font-size: large;"&gt;पुलिस की आंखों में झोंकता रहा धूल&lt;/span&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर। मुन्ना बजरंगी ने कई बार पुलिस की आंखों में धूल झोंका। अपनी पहली पत्नी को छोड़ चुके मुन्ना ने सुल्तानपुर जिले में एक बड़े अपराधी की बहन से शादी की। उसकी स्मार्ट पत्‍‌नी भी उसके धंधे को चमकाने में सक्रिय रहती है। उसने अपने एक साले की शादी लखनऊ में धूमधाम से की। पहले उसने पुलिस को खुद गलत सूचना दिलवायी और जिस होटल का पता दिया वहां पुलिस झक मारती रही। मुन्ना ने शादी का इंतजाम दूसरी जगह करा दिया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: blue; font-size: large;"&gt;ब्रजेश गैंग के समानांतर खड़ा हो गया मुन्ना&lt;/span&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में जरायम के सबसे बड़े बादशाह ब्रजेश सिंह को मुन्ना ने हमेशा चुनौती दी। मुन्ना ने जिन पर निशाना साधा उनमें ज्यादातर लोग ब्रजेश के मददगार थे। ब्रजेश के जेल में जाकर सुरक्षित होने के बाद से ही इस बात के कयास लग रहे थे कि अब मुन्ना भी खुद को सुरक्षित करेगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SupHJEfGAHI/AAAAAAAAAlI/YKa-kpRCoRY/s1600-h/255331.jpg_280x210" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_4stDFItf6Ck/SupHJEfGAHI/AAAAAAAAAlI/YKa-kpRCoRY/s400/255331.jpg_280x210" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: large;"&gt;&lt;span style="color: red;"&gt;बबलू ने भी मुन्ना की जान बचाने में की मदद&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गोरखपुर। माफिया डान ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू ने भी मुन्ना की जान बचाने में मदद की। तब जब 11 सितम्बर 1998 को मुन्ना को मारा गया था तब ब्रजेश दाऊद गैंग से जुड़ा था और मुन्ना ने छोटा राजन का काम संभाल लिया था। छोटा राजन के कहने पर नैनी जेल में बंद बबलू ने दिल्ली में अपने लोगों को मुन्ना की मदद के लिए लगाया था। यह बात बहुत लोग जानते हैं कि नैनी जेल में बबलू फोन का खूब दुरुपयोग करता था। इसी आरोप में एक जेल अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी हुई।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/8040736284594536912-8686173357416209223?l=dikhsa.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://dikhsa.blogspot.com/feeds/8686173357416209223/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=8040736284594536912&amp;postID=8686173357416209223' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8686173357416209223'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/8040736284594536912/posts/default/8686173357416209223'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://dikhsa.blogspot.com/2009/10/blog-post_30.html' title='मुन्ना बजरंगी ने दे दी थी यमराज को भी मात'/><author><name>आनन्द राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07065981802189787445</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://sch
